कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सरकार द्वारा घोषित ‘युवा साथी योजना’ ने बेरोजगार युवाओं के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। योजना के तहत 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये की नकद सहायता दी जाएगी। रविवार को जैसे ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हुई, राज्य के कई जिलों में सुबह सूरज उगने से पहले ही लंबी कतारें देखने को मिलीं।
योजना को लेकर युवाओं का उत्साह इस बात का संकेत है कि बेरोजगारी का मुद्दा आगामी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। राज्य सरकार ने आलोचनाओं और भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों को देखते हुए अब ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
जिलों में दिखा अभूतपूर्व उत्साह
रविवार सुबह से ही उत्तर 24 परगना, हुगली, मालदा, मुर्शिदाबाद, बर्धमान और दक्षिण 24 परगना सहित कई जिलों में युवा आवेदन शिविरों के बाहर कतारबद्ध नजर आए। कई स्थानों पर प्रशासन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। युवाओं का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में 1,500 रुपये की मासिक सहायता भी उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी।
सरकार का अनुमान है कि करीब 27.8 लाख युवा इस योजना से लाभान्वित होंगे। यही कारण है कि आवेदन की शुरुआत के साथ ही बड़ी संख्या में लोग पंजीकरण केंद्रों पर पहुंचे।
ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू
भीड़ और राजनीतिक आलोचना के बाद राज्य सरकार ने ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू कर दी है। अब आवेदक घर बैठे भी फॉर्म भर सकते हैं। इसके लिए ‘आमादेर पाड़ा आमादेर समाधान’ पोर्टल https://apas.wb.gov.in/ पर आवेदन किया जा सकता है।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा गया है:
- बेसिक डिटेल्स भरना
- दस्तावेज अपलोड करना
- फाइनल सबमिट
फॉर्म सबमिट करने के बाद आवेदकों को उसकी प्रति डाउनलोड कर सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन के लिए निम्नलिखित दस्तावेज आवश्यक हैं:
- माध्यमिक (मैट्रिक) या समकक्ष परीक्षा का एडमिट कार्ड
- माध्यमिक या समकक्ष परीक्षा की मार्कशीट/सर्टिफिकेट
- आधार कार्ड की प्रति
- वोटर कार्ड की प्रति
- बैंक पासबुक का पहला पन्ना
- एससी/एसटी/ओबीसी प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
- पासपोर्ट साइज फोटो (पीडीएफ/जेपीजी/पीएनजी फॉर्मेट में)
- हस्ताक्षर (जेपीजी या पीएनजी फॉर्मेट में)
इसके अलावा, युवा व क्रीड़ा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://sportsandyouth.wb.gov.in/wbyouthservices/news-events से भी फॉर्म डाउनलोड किया जा सकता है। वर्ष 2026 लिंक पर क्लिक कर फॉर्म डाउनलोड करने के बाद संबंधित शिविर में दस्तावेजों के साथ जमा किया जा सकता है।
5,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान
‘युवा साथी योजना’ की घोषणा वर्ष 2026-27 के वोट-ऑन-अकाउंट बजट में की गई थी। इसके लिए 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पहले योजना का लाभ 15 अगस्त से शुरू होना प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसे 1 अप्रैल से लागू करने की घोषणा कर दी गई।
राज्य सरकार का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद युवाओं को आर्थिक सहारा देना उसकी प्राथमिकता है।
क्या बोलीं वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य?
राज्य की वित्त मंत्री Chandrima Bhattacharya ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बकाया राशि रोके जाने के बावजूद राज्य सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि युवाओं को आर्थिक सहायता देना सरकार की सामाजिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रारंभिक सहारा देना है, न कि उन्हें स्थायी रूप से सरकारी सहायता पर निर्भर बनाना।
चुनावी परिदृश्य में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बेरोजगारी अब एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है। मुख्य विपक्षी दल Bharatiya Janata Party ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री Narendra Modi मार्च में कोलकाता में एक बड़ी रैली कर सकते हैं। 2021 के बाद पहली बार प्रधानमंत्री की कोलकाता में रैली प्रस्तावित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष बेरोजगारी और रोजगार सृजन को प्रमुख मुद्दा बनाएगा, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ‘युवा साथी’ जैसी योजनाओं के जरिए युवाओं को साधने की कोशिश करेगी।
‘लक्ष्मी भंडार’ के बाद नया दांव
राज्य सरकार पहले ही ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के जरिए महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता दे रही है, जिसे व्यापक समर्थन मिला था। अब ‘युवा साथी योजना’ को उसी तर्ज पर युवाओं के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया, तो इसका राजनीतिक लाभ भी सत्तारूढ़ दल को मिल सकता है।
युवाओं की उम्मीदें और चुनौतियां
हालांकि 1,500 रुपये की राशि बड़ी नहीं मानी जा सकती, लेकिन बेरोजगार युवाओं के लिए यह सहायता प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कई युवाओं का कहना है कि इससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, आवेदन शुल्क या दैनिक खर्चों में मदद ले सकेंगे।
दूसरी ओर, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नकद सहायता के साथ-साथ स्थायी रोजगार सृजन पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सके।