गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र के मीरपुर गांव में डंपिंग ग्राउंड को लेकर चल रहा विवाद रविवार को हिंसक झड़प में बदल गया। करीब दो महीने से नगर निगम द्वारा यमुना खादर क्षेत्र के किनारे बनाए गए कचरा निस्तारण स्थल के विरोध में धरना दे रहे किसानों और पुलिस के बीच उस समय टकराव हो गया, जब प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। किसानों का आरोप है कि पुलिस ने जबरन धरना स्थल खाली कराया, लाठीचार्ज किया और महिलाओं तक को नहीं बख्शा। वहीं पुलिस का कहना है कि लाठीचार्ज नहीं किया गया, बल्कि केवल “हल्का बल प्रयोग” कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।
यह पूरा मामला मीरपुर, पचायरा और बदरपुर गांवों के किसानों से जुड़ा है, जो पिछले दो महीनों से डंपिंग ग्राउंड को हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस कचरा स्थल से पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है, लोग बीमार हो रहे हैं और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि इस जमीन पर स्कूल या अस्पताल बनाया जाना चाहिए, न कि कूड़ाघर।
दो महीने से जारी है विरोध
मीरपुर गांव के बाहरी इलाके में नगर निगम द्वारा यमुना नदी के खादर क्षेत्र के पास डंपिंग ग्राउंड विकसित किया गया है। यहां शहर का ठोस कचरा लाकर डाला जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से यहां कूड़ा डाला जाने लगा है, तब से आसपास के खेतों, घरों और जल स्रोतों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
गांववालों के अनुसार, दुर्गंध के कारण सांस लेने में परेशानी होती है, बच्चों और बुजुर्गों में त्वचा रोग और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं। किसानों का दावा है कि कचरे से निकलने वाला दूषित पानी जमीन में रिसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे पिछले दो महीने से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
रविवार को अचानक बढ़ा तनाव
रविवार दोपहर करीब 2 बजे स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारी किसान बड़ी संख्या में डंपिंग ग्राउंड स्थल पर पहुंच गए। इसी दौरान यह सूचना फैली कि पुलिस गिरफ्तारी के लिए ट्रक और वैन लेकर पहुंच रही है। देखते ही देखते वहां भीड़ बढ़ने लगी और नारेबाजी शुरू हो गई।
किसानों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें समझाने के बजाय बलपूर्वक हटाने की कोशिश की। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वाहनों में बैठाकर ले जाना शुरू किया, तो भीड़ उग्र हो गई। कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
महिलाओं का आरोप– खेतों में दौड़ाकर पीटा
घटना के दौरान मौजूद महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वे विरोध कर रही थीं, तब पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की। विरोध करने पर उन्हें खेतों की ओर दौड़ा लिया गया। कई महिलाएं भागते-भागते गिर गईं, जिसके बाद उन्हें घसीटकर पीटा गया।
एक बुजुर्ग महिला बेहोश हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि महिलाएं हाथ जोड़कर रहम की गुहार लगाती रहीं, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। इस दौरान कई महिलाएं घायल हो गईं। कुछ को सिर और कमर में गंभीर चोटें आई हैं।
25 से अधिक घायल होने का दावा
किसानों का दावा है कि लाठीचार्ज में करीब 25 लोग घायल हुए हैं। एक महिला के सिर में गंभीर चोट आई है, जबकि एक ग्रामीण का कूल्हा टूट गया। 70 वर्षीय किसान धन सिंह ने कहा कि उन्हें कई जगह चोट लगी है और हाथ की एक उंगली टूट गई है।
मीरपुर निवासी विनीत शर्मा का कहना है कि किसानों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि पुलिस का कोई भी कर्मचारी घायल नहीं हुआ। हालांकि पुलिस का दावा इससे अलग है।
एक अन्य किसान भूरा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने गाली-गलौज की और मारपीट की। उन्होंने अपने शरीर पर चोट के निशान भी दिखाए। सोनू नामक किसान ने कहा कि उन्होंने तो हाथ बांध रखे थे, फिर भी पुलिस ने बेरहमी से लाठियां बरसाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मां तक को नहीं छोड़ा गया।
पुलिस का पक्ष– लाठीचार्ज नहीं, हल्का बल प्रयोग
घटना को लेकर पुलिस प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने कहा कि किसानों को अधिकारियों को ज्ञापन देना था, लेकिन वे डंपिंग ग्राउंड का ताला तोड़कर अंदर घुस गए। उन्हें हटाने के दौरान दो पुलिसकर्मी घायल हुए, जिन्हें अस्पताल भेजा गया है।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किया गया, जिसकी वीडियो फुटेज भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, लाठीचार्ज नहीं किया गया, बल्कि हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया गया।
घटना के दौरान डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात था। चार थानों से 100 से अधिक पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे। स्थिति बिगड़ने पर नगर निगम के अधिकारी और मजिस्ट्रेट मौके से चले गए।
धरना स्थल बदला, आंदोलन जारी
पुलिस द्वारा डंपिंग ग्राउंड स्थल खाली कराने के बाद ग्रामीण करीब 100 मीटर दूर स्थित मंदिर परिसर में धरने पर बैठ गए। सोमवार को भी किसान मीरपुर गांव के बाहर धरना दे रहे थे। हालांकि प्रदर्शनकारियों की संख्या घटकर 10-15 रह गई है, क्योंकि कई लोग घर लौट चुके हैं।
किसानों का कहना है कि जब तक डंपिंग ग्राउंड हटाया नहीं जाएगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा। वे प्रशासन से लिखित आश्वासन चाहते हैं।

विधायक का बयान– सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
लोनी विधानसभा से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि वे इस समय लखनऊ में हैं, जहां विधानसभा सत्र चल रहा है। उन्होंने कहा कि डंपिंग ग्राउंड सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया है, इसलिए वे इस पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था किसी भी हाल में नहीं बिगड़नी चाहिए और पुलिस व किसानों दोनों से बातचीत की जाएगी।
पर्यावरण बनाम विकास की बहस
यह विवाद केवल एक स्थानीय धरना नहीं, बल्कि पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की बहस को भी सामने लाता है। शहरों के बढ़ते कचरे के निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड आवश्यक माने जाते हैं, लेकिन उनके स्थान चयन और प्रबंधन को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते हैं।
मीरपुर के किसान सवाल उठा रहे हैं कि क्या आबादी और कृषि भूमि के पास कचरा स्थल बनाना उचित है? उनका कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह स्थल बनाया गया है, तो भी स्थानीय लोगों की सहमति और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रशासन के सामने चुनौती
प्रशासन के लिए यह मामला कानून-व्यवस्था और जनभावनाओं के बीच संतुलन साधने की चुनौती बन गया है। एक ओर नगर निगम के लिए कचरा निस्तारण जरूरी है, तो दूसरी ओर ग्रामीणों की सेहत और आजीविका का सवाल भी महत्वपूर्ण है।
यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो यह विवाद आगे और गहरा सकता है। फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है।