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पूर्णिया में शराब छापेमारी के दौरान पुलिस टीम पर हमला, वाहन तोड़ा गया; 33 नामजद आरोपियों पर केस दर्ज

पूर्णिया (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद अवैध शराब कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में शनिवार को सतकोदरिया गांव में छापेमारी करने पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। हमले में पुलिस वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जबकि टीम को किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा। इस मामले में पुलिस ने 33 लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सतकोदरिया गांव में अवैध रूप से शराब की बिक्री और भंडारण किया जा रहा है। सूचना के आधार पर स्थानीय थाना पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और छापेमारी शुरू की। जैसे ही पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ी, कुछ लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ ने पुलिस वाहन को भी निशाना बनाया और उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। हालात बिगड़ते देख पुलिसकर्मियों को पीछे हटना पड़ा। हालांकि, पुलिस ने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और बाद में अतिरिक्त बल की मदद से गांव में सर्च अभियान चलाया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस घटना को गंभीरता से लिया गया है। सरकारी कार्य में बाधा डालने, हमला करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 33 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। अन्य अज्ञात लोगों की पहचान भी की जा रही है। पुलिस ने साफ किया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

उल्लेखनीय है कि बिहार में शराबबंदी कानून के तहत अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और सेवन पर सख्त प्रतिबंध है। इसके बावजूद कई इलाकों में अवैध कारोबार की शिकायतें मिलती रहती हैं। प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

📌 बिहार में शराबबंदी की पृष्ठभूमि

बिहार सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर रखी है। इसका उद्देश्य सामाजिक सुधार, अपराध में कमी, घरेलू हिंसा पर काबू पाना और स्वास्थ्य जोखिम घटाना है। हालांकि, अवैध शराब का कारोबार बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में जारी है। ऐसे इलाकों में शराब माफियाओं और पुलिस के बीच अक्सर संघर्ष और टकराव की घटनाएँ सामने आती हैं।

📌 अवैध शराब पर राज्यस्तरीय छापेमारी का चलन

देश के कई राज्यों में जैसे-जैसे अवैध शराब तस्करी बढ़ी है, वैसे-वैसे पुलिस की छापेमारी तेज हो गई है। उदाहरण के तौर पर:

  • झारखंड के सिराइकेला-खरसावाँ क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब की छापेमारी कर 80 लीटर शराब और 1200 किलो महुआ नष्ट किया।
  • पंजाब के जलालाबाद क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब की 6000 लीटर लाहन जब्त की थी, जिसमें तस्कर ने पुलिस पर लोहे की रॉड से हमला किया

ये उदाहरण दर्शाते हैं कि शराबबंदी लागू राज्यों में अवैध शराब के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच टकराव की घटना सामान्य होती जा रही है।

⚖️ यह घटना क्यों गंभीर है?

इस घटना की गंभीरता इसलिए भी अधिक है क्योंकि:

  1. सरकारी काम में बाधा — पुलिस की वैध कार्रवाई में बाधा उत्पन्न हुई।
  2. पुलिसकर्मी घायल — कानून प्रवर्तक को चोट लगी, जो देश के किसी भी नागरिक, कानूनी या वैधानिक काम का हिस्सा था।
  3. सरकारी संपत्ति को नुकसान — सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुआ।
  4. संभावित असामाजिक तत्वों की भूमिका — लगता है कि स्थानीय लोग भी अवैध शराब की बिक्री से जुड़े हैं।
  5. स्थानीय प्रशासन पर दबाव — ऐसे मामलों से स्थानीय प्रशासन पर जनता और आपराधिक तत्त्वों से दबाव बनता है।

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