पिछले कुछ महीनों में अरुणाचल के लिदोई और चोला क्षेत्रों में चीनी सेना ने कई बार अवैध प्रवेश किया, जिससे भारतीय सुरक्षा बलों को सतर्क किया गया। भारत ने सीमा पर अतिरिक्त तैनाती और उच्चस्तरीय निगरानी उपकरण स्थापित किए, जबकि चीन ने अपने सैन्य बुनियादी ढाँचे को विस्तारित किया। दोनों पक्षों के बीच वार्तालापों में इस बात पर सहमति नहीं बन पाई कि किस सीमा रेखा को मान्य माना जाए।
इस पृष्ठभूमि में 2023 के अंत में भारत ने चीन को 200 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को घटाने की मांग की थी, जबकि चीन ने भारतीय वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने की योजना का उल्लेख किया। आर्थिक तनाव के साथ-साथ सुरक्षा चिंताओं ने दोनों देशों के राजनयिक संवाद को जटिल बना दिया।
नई दिल्ली के विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस वर्ष के जुलाई‑अगस्त में आयोजित होने वाली उच्च‑स्तरीय बैठक में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ रक्षा और व्यापार के प्रमुख विभागों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। भारत‑चीन आर्थिक वार्ता में व्यापार संतुलन, निवेश सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग को मुख्य बिंदु माना गया है।
बीजिंग ने अपनी ओर से कहा है कि वह भारत के साथ समग्र सहयोग को बढ़ावा देने के लिए तैयार है, परन्तु सीमा पर सुरक्षा मुद्दों को राजनीतिक समाधान के बिना नहीं सुलझाया जा सकता। इस दौरान चीनी दूतावास ने कहा कि सीमा पर किसी भी अनियमित कार्रवाई को संतुलित रूप से संभाला जाएगा।
भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि आर्थिक संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए दोनों देशों को परस्पर लाभकारी ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि व्यापार में असंतुलन को दूर करने के लिए नई नीतियों की जरूरत है, साथ ही सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए संवाद जारी रखना अनिवार्य है।
चीन के विदेश मंत्री ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों को समानता के सिद्धांत पर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना चाहता है।
दूसरी ओर, भारतीय रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सीमा पर किसी भी अनधिकृत प्रवेश को शून्य सहनशीलता नीति के तहत निपटा जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने हाल ही में उच्च गति वाले ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक जासूसी उपकरणों को तैनात किया है, जिससे सीमा निगरानी में सुधार होगा।
उद्योग संघों ने भी इस मुलाक़ात को आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना। भारतीय उद्योग समूहों ने कहा कि चीन के साथ व्यापार घाटे को घटाने के लिए निर्यात को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों की जरूरत है, जबकि चीन के व्यापार मंडल ने कहा कि भारतीय बाजार में प्रवेश को आसान बनाने के लिए नियामक सुधार आवश्यक हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाक़ात में सुरक्षा और आर्थिक दोनों पहलुओं को समान महत्व दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखी, तो आर्थिक सहयोग के लिए एक सकारात्मक माहौल बन सकता है। वहीं, यदि सीमा तनाव बढ़ता रहा तो व्यापारिक समझौते पर भी असर पड़ेगा।
आर्थिक विशेषज्ञों ने बताया कि भारत‑चीन द्विपक्षीय व्यापार में 2023 में लगभग 90 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज हुई है, और दोनों देशों को इस गिरावट को उलटने के लिए नयी रणनी
Updated: September 11, 2026
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