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भारत ने 11 सितंबर के आतंकवादी हमलों की स्मृति में वैश्विक प्रतिबद्धता पर पुनरुज्जीवित घोषणा की, सुरक्षा‑सहयोग एवं साइबर

पिछले दिन भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 सितंबर को हुए आतंकवादी हमलों की वार्षिक स्मृति में एक बयान जारी किया, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक संघर्ष में भारत की निरंतर एकजुटता को रेखांकित किया गया। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट (X) पर कहा कि आतंकवाद का खतरा निरन्तर विकसित हो रहा है, परन्तु

भारत की इस खतरे के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता और सभी रूपों में आतंकवाद के प्रति प्रतिरोध अडिग रहेगा। इस बयान का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना तथा सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाना बताया गया।

यह घोषणा 11 सितंबर 2001 को हुए विश्वव्यापी आतंकवादी हमले की दो दशकों पूर्णता के उपरांत आई है, जब विश्व

ने आतंकवाद को एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय चुनौती के रूप में पहचान लिया था। तब से लेकर अब तक, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका और कई एशियाई राष्ट्रों ने आतंकवाद निरोधक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न संधियों और मंचों का निर्माण किया है। भारत ने भी 2002 में ‘राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी योजना’ अपनाई और

2008 में ‘राष्ट्रव्यापी आतंकवाद विरोधी मंच’ की स्थापना की, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग में उसकी भागीदारी स्पष्ट हुई।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आतंकवाद विरोधी रणनीति को कई आयामों में विस्तारित किया है। 2022 में भारत ने ‘अंतर्क्रिया आतंकवाद विरोधी गठबंधन (ICAT)’ के तहत दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई देशों के साथ सूचना साझाकरण समझौते

को साकार किया। साथ ही, भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेशियों के खिलाफ आतंकवादी कार्यों को रोकने हेतु कड़ी नीतियों को लागू किया, जिसमें विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी प्रमुख रही। इन पहलों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच पर एक प्रमुख खिलाड़ी बना दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा

कि भारत न केवल आतंकवाद के खिलाफ कूटनीतिक स्तर पर बल्कि सुरक्षा बलों की तत्परता, बौद्धिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के माध्यम से भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। भारत के रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में ‘साइबर टेररिज़्म’ से निपटने के लिए विशेष इकाइयों का गठन किया है, जो अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा मंचों में

सहयोग को मजबूत करेगा। इसके अतिरिक्त, भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में आतंकवाद के आर्थिक स्रोतों को कटौती करने के लिए वित्तीय नियमन को सख्त करने की मांग भी उठाई है।

इसी संदर्भ में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हाल ही में एक नई प्रस्तावना पारित की है, जिसमें सदस्य देशों को आतंकवादी वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने के

लिए कड़ी निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। भारत ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह समर्थन किया है और कहा कि यह वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के मूल कारणों को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल के तहत, भारत ने अपने वित्तीय संस्थानों को नई AML (Anti-Money Laundering) नीतियों को लागू

करने का आदेश दिया है, जिससे संभावित आतंकवादी फंडिंग को रोकने में सहायता मिलेगी।

भारत के पड़ोसी देशों ने भी इस बयान पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पाकिस्तान की विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह भी आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करता है, जबकि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय ने भारत की इस पहल को ‘शांति

और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम’ बताया। इस बीच, यूरोपीय संघ के विदेश और सुरक्षा नीतियों के प्रमुख ने कहा कि भारत की प्रतिबद्धता अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और सहयोग के नए आयामों को खोल सकती है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश विभाग ने भारत के इस समर्थन को ‘मित्रता और साझेदारी

की नई परिभाषा’ के रूप में सराहा। उन्होंने बताया कि अमेरिका और भारत ने पहले ही कई आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों में सफल सहयोग किया है, और भविष्य में अधिक सामरिक जानकारी और तकनीकी समर्थन की संभावना है। इसके अतिरिक्त, ब्रिटेन के विदेश तथा कोमनवेल्थ मामलों के सचिव ने कहा कि भारत की इस पहल से यूरोपीय देशों

के साथ सुरक्षा संवाद में नई ऊर्जा आएगी।

भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस बयान को भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को उजागर करने के रूप में देखा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक समर्थन से भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सुरक्षा नीतियों को स्वतंत्र रूप से निर्धारित करने की क्षमता मिलती है, जबकि

साथ ही वह अन्य देशों के साथ सहयोग को भी सुदृढ़ करता है। आर्थिक रूप से, आतंकवाद के कारण हुए निवेश जोखिम को कम करने के लिए इस तरह की प्रतिबद्धता विदेशी पूँजी को आकर्षित कर सकती है।

सामाजिक दृष्टिकोण से, यह बयान भारतीय जनता में आतंकवाद के खिलाफ जागरूकता और एकजुटता को बढ़ावा देगा। कई सामाजिक संगठनों

ने कहा कि इस प्रकार की उच्च स्तर की सार्वजनिक घोषणा से नागरिकों में सुरक्षा भावना को सुदृढ़ किया जा सकता है और ग्रासरूट स्तर पर आतंकवाद विरोधी अभियानों को समर्थन मिलेगा। साथ ही, यह युवा वर्ग को राष्ट्रीय सुरक्षा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित कर सकता


Prime Minister Narendra Modi used the 11 September anniversary to reaffirm India’s unwavering, multilateral fight against evolving terrorist threats, highlighting new cyber‑terrorism units, financial‑tracking measures and expanding intelligence ties across Asia, the Middle East and Africa. The statement drew praise from global partners, underscoring India’s growing role as a key security collaborator and its push to attract investment by curbing terrorism‑related risks.

Modi’s anniversary pledge isn’t just a tribute to 9/11—it’s a strategic signal that India wants to be seen as an autonomous security hub, capable of shaping global counter‑terrorism norms while attracting foreign capital.

By weaving diplomatic rhetoric with cyber‑units and AML reforms, New Delhi is turning

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