बैंकिंग क्षेत्र में कस्टमर केयर सेवाओं की महत्ता को देखते हुए, कई बैंक अपने ग्राहकों को फोन या ई‑मेल के माध्यम से आधिकारिक नंबर प्रदान करते हैं। इस संदर्भ में, कस्टमर केयर नंबरों की नकल करना पहले भी रिपोर्ट किया गया था, परन्तु इस बार अपराधियों ने वास्तविक नंबर को नकल कर मोबाइल सिम खरीद ली, जिससे वह आधिकारिक नंबर के समान दिखता था। यह रणनीति ग्राहकों को भ्रमित कर उन्हें स्वयं कॉल करवाने की स्थिति उत्पन्न करती है, जिससे उनका व्यक्तिगत डेटा और खाते की जानकारी आसानी से लीक हो जाती है।
पटना साइबर थाने और साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSI) ने इस मामले की जांच शुरू की, जब कई बैंक ग्राहकों ने अपने खातों में अनधिकृत लेन‑देनों की रिपोर्ट की। प्रारम्भिक जाँच में यह स्पष्ट हुआ कि ठगों ने 1.5 करोड़ रुपये की रकम को कई छोटे‑छोटे ट्रांसफ़र में विभाजित कर निकाल दिया, जिससे लेन‑देन का पता लगाना कठिन हो गया। इसके अलावा, पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने आधिकारिक बैंक वेबसाइट या मोबाइल एप्लीकेशन से प्राप्त कस्टमर केयर नंबर को फोन किया, परंतु वह नंबर केवल दो अंकों तक ही अलग था।
जांच के दौरान पता चला कि इस प्रकार की नकल सिमें मुख्यतः थोक मोबाइल विक्रेताओं से खरीदी जाती हैं, जहाँ एक नंबर के कई प्रतियों की उपलब्धता होती है। ठगों ने इन सिमों को 5 लाख रुपये के लगभग मूल्य पर खरीद कर, एक विशेष सॉफ़्टवेयर के माध्यम से कॉल फ़ॉरवर्डिंग सेट किया, जिससे ग्राहक का कॉल तुरंत उनके नियंत्रण में आ जाता है। इस प्रक्रिया में ग्राहक को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह बैंक के कस्टमर केयर से बात कर रहा है, जबकि असल में वह धोखेबाज़ की आवाज़ सुन रहा होता है।
पुलिस ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राहक को बैंक के आधिकारिक प्रक्रियाओं के अनुसार वैध दस्तावेज़ और पासवर्ड प्रदान करने के लिए मजबूर करना था। एक बार जानकारी प्राप्त हो जाने पर, ठग तुरंत खाते से बड़ी रकम निकाल लेते थे और फिर सिम को बंद कर देते थे। इस तरह की ठगी के मामलों में अक्सर ग्राहक को बाद में ही पता चलता है, जब वह अपने खाते में असामान्य लेन‑देनों को देखता है।
इसी बीच, कई बैंक ने अपनी कस्टमर केयर नीति में संशोधन करने का इशारा दिया है। कुछ प्रमुख बैंकों ने आधिकारिक नंबर की पुष्टि के लिए दो‑स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया अपनाने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें ग्राहक को केवल आधिकारिक वेबसाइट या बैंक शाखा से प्राप्त QR कोड स्कैन करके नंबर की पुष्टि करनी होगी। इस कदम से न केवल धोखेबाज़ों को भ्रमित किया जा सकेगा, बल्कि ग्राहकों को भी सतर्क किया जा सकेगा।
बैंकिंग संस्थानों की ओर से जारी बयानों में कहा गया है कि वह इस तरह की नई तकनीकी धोखाधड़ी से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा टीमों को सुदृढ़ कर रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ग्राहक को हमेशा आधिकारिक स्रोतों से ही संपर्क करना चाहिए और किसी भी अनजान नंबर पर व्यक्तिगत जानकारी नहीं देनी चाहिए। इस संदर्भ में, बैंकों ने ग्राहकों को ई‑मेल, एसएमएस या व्हाट्सएप पर आए हुए लिंक पर क्लिक करने से भी सावधान रहने की चेतावनी जारी की है।
पुलिस ने इस मामले में शामिल पाँच प्रमुख ठगों को हिरासत में ले लिया है और उनके खिलाफ धोखाधड़ी, चोरी और साइबर अपराध के तहत मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इन ठगों ने इस योजना को एक विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से लागू किया था, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ, मोबाइल विक्रेता और फॉर्मेटिंग विशेषज्ञ शामिल थे। यह नेटवर्क एक सटीक रूप से तैयार किया गया मॉडल था, जो ग्राहकों को आत्मविश्वास से भरा हुआ बना देता था।
कई पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने बैंक के आधिकारिक कॉल सेंटर से संपर्क करने के बाद, ठगों ने उन्हें विस्तृत प्रक्रिया समझाते हुए कई दस्तावेज़ भेजे, जिनमें पहचान पत्र, पासवर्ड रीसेट फॉर्म आदि शामिल थे। यह दस्तावेज़ अक्सर आधिकारिक लेआउट के साथ तैयार होते थे, जिससे ग्राहक को यह भ्रमित नहीं हुआ कि वह असली बैंक से बात कर रहा है। इस प्रकार की धोखाधड़ी ने ग्राहकों के विश्वास को गंभीर रूप से चोट पहुँचाई है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से, इस घटना ने वित्तीय सुरक्षा के
Updated: September 22, 2026
Patna police uncovered a fresh banking fraud where thieves bought SIM cards mimicking official customer‑care numbers, tricked victims into calling them, and emptied accounts, causing losses of around ₹3 crore. The scheme, involving call‑forwarding software and a coordinated network, has prompted banks to tighten verification and boost cyber‑security measures.
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