Press "Enter" to skip to content

दिल्ली में वोटर आईडी सुनवाईयों में दस्तावेज़ जमा में कमी, ऑनलाइन तकनीकी गड़बड़ी से भागीदारी में असंगति।

दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक वोटर आईडी (SIR) के तहत आयोजित सुनवाईयों में असंगति उभरी है। पिछले सप्ताह से शुरू हुई सुनवाईयों के रिकॉर्ड के अनुसार, निर्धारित सुनवाईयों की संख्या के मुकाबले दस्तावेज़ प्रस्तुत करने वाले नागरिकों की संख्या काफी कम रह गई है, जबकि केंद्रों पर आए मतदाताओं की उपस्थिति अपेक्षाकृत अधिक रही। यह अंतर 29 अक्टूबर को निर्धारित अंतिम तिथि के करीब आने पर विशेष रूप से चिंताजनक दिख रहा है, क्योंकि इस तिथि से पहले सभी दस्तावेज़ी कार्य पूरे करना आवश्यक है।

सुनवाईयों की प्रक्रिया दो साल पहले दिल्ली सरकार ने वोटर एन्क्लोज़र प्रोजेक्ट के भाग के रूप में शुरू की थी, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और अटपटे नामों को हटाना था। इस योजना के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने दस्तावेज़ जमा करने के लिए निर्धारित तारीख और समय दिया गया था। प्रारम्भिक रिपोर्टें बताती हैं कि कई क्षेत्रों में सुनवाईयों का समय तय हो चुका था, परन्तु वास्तविक में केवल कुछ ही लोग निर्धारित समय पर पहुंचे।

पिछले महीने में दिल्ली के विभिन्न जिलों में आयोजित सुनवाईयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। विशेषकर उत्तर दिल्ली, वशिष्ठ पथ और लोधी क्षेत्रों में सुनवाईयों की संख्या दो गुना से अधिक हो गई थी। साथ ही, इन जिलों में मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ देखी गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि नागरिक मतदान प्रक्रिया में भागीदारी के लिए अधिक उत्सुक हैं, परन्तु दस्तावेज़ जमा करने की प्रक्रिया में बाधाएँ बनी हुई हैं।

इस असंगति के प्रमुख कारणों में से एक तकनीकी गड़बड़ी का संकेत मिला है। कई मतदाता समूहों ने बताया कि वे अपने दस्तावेज़ ऑनलाइन अपलोड करने के दौरान सर्वर क्रैश और लॉगिन त्रुटियों का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या ने भी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को बाधित किया, जिससे कई नागरिकों को व्यक्तिगत रूप से केंद्रों पर जाना पड़ा।

दूसरी ओर, सुनवाईयों के केंद्रों पर उपस्थित कर्मचारियों ने बताया कि कुछ मामलों में दस्तावेज़ों की कमी के कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है। कई बार नागरिकों द्वारा लाए गए दस्तावेज़ अपर्याप्त या पुरानी जानकारी वाले होते हैं, जिससे पुनः जांच की आवश्यकता पड़ती है। यह स्थिति सुनवाईयों के समय-सारणी को बिगाड़ती है और केंद्रों पर भीड़ बढ़ाती है।

समय-समय पर दिल्ली के चुनाव अधिकारी ने इस मुद्दे को हल करने के लिए कई उपाय प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त मोबाइल विंडो स्थापित की जाएँगी, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग आसानी से दस्तावेज़ जमा कर सकें। साथ ही, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी टीम को समस्या निवारण के लिए अतिरिक्त संसाधन प्रदान किए गए हैं, ताकि सर्वर की स्थिरता बनी रहे।

इन कदमों पर विभिन्न नागरिक समूहों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कई सामाजिक कार्यकर्ता और NGOs ने कहा कि मोबाइल विंडो स्थापित होने से ग्रामीण मतदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी। वे यह भी आशा व्यक्त कर रहे हैं कि ऑनलाइन प्रक्रिया में सुधार से दस्तावेज़ जमा करने की बाधा कम होगी और अधिक लोग समय पर अपना वोट दर्ज करा पाएँगे।

परंतु कुछ राजनीतिक दलों ने इस असंगति को सरकारी अनदेखी का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि सुनवाईयों के समय-सारणी में गड़बड़ी और दस्तावेज़ जमा करने की कठिनाई से कई कमजोर वर्गों के मतदाता निराश हो सकते हैं। इन दलों ने सरकार से अनुरोध किया है कि वे इस मुद्दे को तुरंत प्राथमिकता दें और सभी केंद्रों पर एकरूपता स्थापित करें।

सुनवाईयों में भाग लेने वाले मतदाता स्वयं भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने निर्धारित समय पर दस्तावेज़ लाने की पूरी कोशिश की, परन्तु लंबी कतार और अप्रत्याशित देरी के कारण प्रक्रिया अधूरी रह गई। कुछ ने यह भी कहा कि उन्हें ऑनलाइन आवेदन के लिए आवश्यक तकनीकी ज्ञान नहीं था, जिससे वे स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं।

आर्थिक दृष्टिकोण से इस देरी का असर स्पष्ट है। दस्तावेज़ जमा करने में अतिरिक्त समय और यात्रा खर्च नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। साथ ही, सुनवाईयों की पुनः व्यवस्था और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती से प्रशासनिक खर्च में भी वृद्धि हो रही है। यह सभी पहलू आगामी चुनाव की लागत को प्रभावित कर सकते हैं।

सामाजिक स्तर पर, इस असंगति से मतदाता भरोसे में कमी आ सकती है। जब नागरिक अपने अधिकारों को प्रयोग करने में कठिनाई का सामना करते हैं, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी घट सकती है। यह विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और कम आय वाले वर्गों

Updated: September 17, 2026


Delhi’s voter‑ID verification hearings have seen a sharp drop in document submissions despite swelling crowds at centres, as technical glitches and inadequate connectivity hinder online uploads and force many to appear in person. Officials plan mobile windows and bolster portal support, while opposition parties warn the lag could disenfranchise vulnerable voters ahead of the Oct 29 deadline.

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from सियासी संग्रामMore posts in सियासी संग्राम »