पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने फिल्म उद्योग में अपनी सहभागिता को धीरे-धीरे बढ़ाया है, परन्तु इस क्षेत्र में निवेश अभी भी सीमित रहा है। राज्य की कुल फिल्म‑शूटिंग लागत लगभग 200 करोड़ रुपये रही है, जिसमें अधिकांश खर्च निजी निर्माताओं द्वारा उठाया गया। हालांकि, बुनियादी ढाँचे की कमी, लॉजिस्टिक समस्याएँ और प्रमोशन की कमी ने उद्योग के विकास में बाधा उत्पन्न की थी। नई नीति का उद्देश्य इन बाधाओं को दूर करके फिल्म निर्माण को एक सतत आर्थिक स्तम्भ बनाना है।
नई नीति के मुख्य प्रावधानों में लोकेशन की पहचान, सुविधाओं का आधुनिकीकरण, अनुमति प्रक्रिया को सरलीकृत करना और वित्तीय प्रोत्साहन देना शामिल है। सरकार ने विशेषीकृत टीमों का गठन किया है, जो प्रत्येक संभावित स्थान की संभावनाओं का मूल्यांकन करेगी और आवश्यक सुधारों का प्रस्ताव देगी। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह फिल्म निर्माताओं को समय पर परमिट प्रदान करे, जिससे देरी से बचा जा सके।
दिसंबर 2024 से शुरू होने वाले इस पहल के तहत, राज्यभर में 15 से अधिक फिल्मों की शूटिंग का प्रोजेक्ट तैयार है। इन फिल्मों में विभिन्न शैलियों के प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिनमें ऐतिहासिक ड्रामा, सामाजिक मुद्दों पर आधारित कहानियाँ और उच्च तकनीक वाले एक्शन फ़िल्में भी सम्मिलित हैं। इस पहल ने न केवल फिल्म निर्माताओं को बल्कि स्थानीय व्यवसायों, होटल, परिवहन सेवाओं और खाद्य उद्योग को भी लाभ पहुँचाने की संभावनाएँ पैदा की हैं।
स्थानीय फिल्म उद्योग के प्रतिनिधियों ने इस नीति को एक महत्वपूर्ण अवसर बताया है। पटना फिल्म फेस्टिवल के संयोजक ने कहा कि अब बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने की संभावना है, क्योंकि सरकार ने लोकेशन की सुगम पहुँच और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता दी है। इसी प्रकार, कैमूर के डैम क्षेत्र के प्रबंधन ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा, जिससे प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
राजनीतिक दृष्टि से, इस कदम को बिहार के विकास एजेंडे में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन देना न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ाएगा, बल्कि रोजगार सृजन और विदेशी निवेश को भी आकर्षित करेगा। इस दिशा में, केंद्र सरकार के संस्कृति विभाग ने भी सहयोग की आशा व्यक्त की है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर फिल्म‑शूटिंग को सुविधाजनक बनाने के लिए नीतिगत समर्थन मिल सके।
आर्थिक प्रभाव की बात करें तो इस नीति से अनुमानित 2,000 सीधी और 8,000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा। स्थानीय सेवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे होटल, रेस्तरां, परिवहन और सहायक उद्योगों को नई आय प्राप्त होगी। साथ ही, फिल्म शूटिंग के दौरान उत्पन्न होने वाले कर राजस्व से राज्य के वित्तीय संसाधनों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
सामाजिक स्तर पर, इस पहल से स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और कार्य अनुभव मिलेगा। कई विश्वविद्यालय और प्रशिक्षण संस्थानों ने इस दिशा में विशेष कोर्स और कार्यशालाएँ शुरू करने की योजना बनाई है, जिससे युवा प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।
वित्तीय सब्सिडी के तहत, राज्य 50 प्रतिशत तक की लागत वहन करेगा, जिससे छोटे और मध्यस्तर के निर्माताओं को भी बड़े बजट वाले प्रोजेक्ट में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस व्यवस्था से उत्पादन लागत में कमी आएगी, जबकि गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। साथ ही, यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बन सकता है, जहाँ फिल्म उद्योग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
राजनीतिक दलों ने इस नीति पर विविध प्रतिक्रियाएँ दीं। प्रमुख विपक्षी दल ने कहा कि सब्सिडी का उचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी निगरानी प्रणाली आवश्यक है, जबकि कुछ गठबंधन
Updated: September 22, 2026
Bihar’s new film‑shooting policy could turn its scenic spots into cash‑generating studios, nudging the state from a peripheral back‑lot to a genuine production hub. If the promised subsidies and fast‑track permits hold up, the ripple effect may reshape local economies, turning
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