जमाबंदी, जो बीते कई दशकों से भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के स्वामित्व और उपयोग को निर्धारित करने का प्रमुख माध्यम रहा है, अक्सर रिकॉर्ड में त्रुटियों, डुप्लिकेशन और अधूरी प्रविष्टियों की वजह से विवादों का कारण बनती रही है। बिहार में पिछले कुछ वर्षों में जमाबंदी सुधार के कई चरण चलाए गए, परन्तु कई मामलों में जमीन मालिकों को स्वयं आवेदन करके सुधार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी, जिससे समय और संसाधनों की भारी बर्बादी होती थी।
ऐसी ही समस्याओं से जूझते हुए बिहार सरकार ने 2023 में “जमाबंदी सुधार अभियान” की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य पिछले 30 वर्षों की जमाबंदी रिकॉर्ड को डिजिटल मंच पर लाना और त्रुटियों को दूर करना था। इस अभियान के तहत विभिन्न चरणों में कई जिलों में डेटा सत्यापन, भूमि मालिकों से जानकारी संग्रह और रिकॉर्ड अपडेट किए गए, परन्तु कई बार स्थानीय स्तर पर आवेदन जमा करने की प्रक्रिया में देरी और तकनीकी अड़चनें सामने आईं।
अब सरकार ने इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नई नीति लागू की है, जिसमें अंचल स्तर के राजस्व अधिकारियों को अधिकार दिया गया है कि वे स्वयं अधूरी और गलत जमाबंदियों की पहचान कर उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के साथ मिलान करके सुधार कर सकें। इस दिशा-निर्देश के तहत, अंचल कार्यालयों को प्रत्येक जिले में मौजूदा जमाबंदी डेटा का विस्तृत सर्वेक्षण करना होगा, और किसी भी विसंगति को तुरंत ठीक करना होगा।
सचिव जय सिंह ने कहा कि इस नई प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य रिकॉर्ड की सटीकता बढ़ाना और भूमि मालिकों के लिए समय बचाना है। उन्होंने उल्लेख किया कि अंचल अधिकारी अब अपने क्षेत्र में सभी जमाबंदी फाइलों को एकत्रित कर, उन्हें डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपडेट करेंगे और आवश्यक सुधारों को लागू करेंगे। इस प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड, नक्शे और स्थानीय सर्वेक्षण डेटा का उपयोग किया जाएगा, जिससे सुधार की विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।
अंचल स्तर पर कार्यवाही को तेज़ी से लागू करने के लिए विभाग ने विशेष कार्यदली स्थापित की है, जिसमें अनुभवी राजस्व अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और डेटा विश्लेषकों को शामिल किया गया है। इन टीमों को प्रत्येक अंचल में एक निश्चित समय सीमा के भीतर सभी त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड की पहचान कर सुधार करने का कार्य सौंपा गया है। इस कार्य को पूर्ण करने के बाद, अंतिम रिकॉर्ड को ऑनलाइन पोर्टल पर प्रकाशित किया जाएगा, जिससे जनता को सीधे अपनी जमीन की स्थिति देखना संभव होगा।
बिहार के अंचल अधिकारी इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि यह उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाने का अवसर देता है। अंचल अधिकारी राजेश कुमार, जो पटना अंचल के प्रमुख हैं, ने कहा कि अब उन्हें जमीन मालिकों के व्यक्तिगत आवेदन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि वे स्वयंसिद्धी के आधार पर सुधार प्रक्रिया शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस नई व्यवस्था से न केवल प्रशासनिक बोझ घटेगा, बल्कि भूमि संबंधी विवादों में भी कमी आएगी।
जमाबंदी सुधार के लाभार्थी किसानों और जमीन मालिकों ने भी इस कदम का सकारात्मक रूप में स्वागत किया है। दरभंगा के एक किसान, रामेश्वर सिंह, ने कहा कि पहले उन्हें अपने जमीन के रिकॉर्ड को ठीक कराने के लिए कई बार अंचल कार्यालय जाना पड़ता था, जिससे उनका समय और मेहनत दोबारा व्यर्थ होता था। अब वे आशा करते हैं कि विभाग द्वारा सीधे सुधार किए जाने से उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे और भविष्य में भूमि के लेन‑देन में स्पष्टता रहेगी।
विपक्षी दलों ने भी इस कदम को सराहा, परन्तु कुछ नेताओं ने कहा कि सुधार प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और डेटा सुरक्षा को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रमुख, श्यामा प्रसाद ने कहा कि सरकार को इस पहल को सफल बनाने के लिए एक स्वतंत्र निगरानी आयोग की स्थापना करनी चाहिए, जिससे किसी भी प्रकार की हेराफेरी या भ्रष्टाचार को रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सुधार के बाद रिकॉर्ड का सार्वजनिक उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि जनसंख्या को अपने अधिकारों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस अभियान का सफल कार्यान्वयन बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था पर
Updated: September 22, 2026