सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपने करियर की शुरुआती सफलता के बाद से विभिन्न सामाजिक कारणों में सक्रिय भागीदारी दिखाई है। उनका मानना है कि फ़िल्म उद्योग को स्थानीय संस्कृति और इतिहास को उजागर करने का माध्यम बनना चाहिए। तमन्ना भाटिया, जो अपने अभिनय कौशल के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं, ने कहा कि बिहार का विविध सांस्कृतिक परिदृश्य फ़िल्म निर्माताओं के लिए नई कहानियों का भंडार है। एक्ता कपूर ने अपने प्रोडक्शन हाउस के माध्यम से विभिन्न भाषाई क्षेत्रों में सामग्री निर्मित करने की नीति अपनाई है, जिससे वे इस मुलाकात को एक रणनीतिक कदम मानती हैं।
मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात को “बिहार को फ़िल्म हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम” कहा और बताया कि सरकार ने पहले ही बिहार फिल्म नीति 2023 तैयार कर ली है। इस नीति के तहत निवेशकों को कर छूट, भूमि उपलब्धता और आसान अनुमोदन प्रक्रिया जैसी सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी। साथ ही, सरकार ने स्थानीय कलाकारों के लिए स्कॉलरशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का वादा किया। यह नीति राष्ट्रीय फिल्म विकास परिषद (NFDC) के साथ समन्वय में तैयार की गई है, जिससे बजट और तकनीकी समर्थन दोनों सुनिश्चित हो सकें।
बैठक के दौरान तीन प्रमुख फ़िल्म निर्माताओं ने बताया कि वे बिहार में लो‑कोस्ट प्रोडक्शन मॉडल अपनाना चाहते हैं, जिससे छोटे बजट की फ़िल्में भी उच्च गुणवत्ता के साथ बन सकें। उन्होंने बताया कि बिहार में उपलब्ध प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक स्थल और स्थानीय कला समुदाय इस प्रकार के प्रोजेक्ट्स के लिए उपयुक्त हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि फिल्म सेट के लिए बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, जल आपूर्ति और आवासीय सुविधाओं की तुरंत व्यवस्था आवश्यक है।
समीक्षकों ने इस मुलाकात को “फ़िल्म उद्योग के पुनर्जागरण की ओर एक सकारात्मक संकेत” कहा। इस मुलाकात में चर्चा किए गए प्रस्तावों में प्रमुख शहरों में मल्टी‑पर्पज स्टूडियो बनाना, स्थानीय स्क्रिप्ट लेखकों को राष्ट्रीय मंच पर लाने के लिए कार्यशालाएँ आयोजित करना और फिल्म फ़ेस्टिवल आयोजित करना शामिल है। इन पहलुओं के लिए सरकार ने प्रारम्भिक निधि आवंटित करने की घोषणा की, जिससे प्रोजेक्ट की शुरुआत शीघ्र हो सके।
फ़िल्म उद्योग के प्रतिनिधियों ने सरकार को यह आश्वासन दिया कि वे राज्य में कम से कम पाँच बड़े प्रोजेक्ट्स की योजना बना रहे हैं, जो अगले दो वर्षों में शुरू हो सकते हैं। इन प्रोजेक्ट्स में इतिहास, सामाजिक मुद्दे और स्थानीय folklore पर आधारित फ़िल्में शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय कलाकारों के साथ सहयोग कर, वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी सामग्री प्रदान करेंगे।
मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं के कार्यान्वयन में स्थानीय प्रशासन के सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म शूटिंग के लिए एक समन्वय इकाई स्थापित की जाएगी, जो सभी परमिट, सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के साथ संपर्क को संभालेगी। इस इकाई के माध्यम से फिल्म निर्माताओं को त्वरित समाधान मिलेगा और स्थानीय जनसंख्या के साथ समझौते के माध्यम से सामाजिक प्रभाव को न्यूनतम किया जाएगा।
बिहार में फ़िल्म निर्माण की संभावना को लेकर कई स्थानीय व्यवसायियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस पहल से होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय हस्तशिल्प उद्योगों को नई आय के स्रोत मिलेंगे। इसके अलावा, युवा कलाकारों को घर के बाहर जाकर बड़े मंच पर काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों ने इस मुलाकात को राज्य की छवि सुधारने की दिशा में एक रणनीतिक कदम माना। उन्होंने बताया कि फ़िल्म उद्योग के माध्यम से बिहार को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुनः पहचान दिलाने की संभावना है।
Updated: September 19, 2026
Bihar’s chief minister met with film stars and producers in Delhi to launch a state‑backed film hub, pledging tax breaks, land and streamlined approvals under a 2023 policy. The meeting outlined low‑cost production models, studio build‑outs and talent‑scouting workshops, aiming to boost local economy and elevate the state’s cultural profile.