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तमिलनाडु में सरकारी अस्पतालों में जन्मे नवजातों को मिलेगी सोने की अंगूठी, ‘थाई मामन थंगा मोथिरम’ योजना की शुरुआत

तमिलनाडु सरकार ने 28 सितंबर को ‘थाई मामन थंगा मोथिरम’ योजना की आधिकारिक शुरुआत की, जिसमें राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को एक ग्राम शुद्ध सोने की अंगूठी प्रदान की जाएगी।
इस घोषणा को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित समारोह में किया, जहाँ योजना के प्रथम चरण में 1.28 लाख अंगूठियों की खरीदारी की पुष्टि हुई। योजना का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपयोगिता बढ़ाना और नवजात शिशु मृत्यु दर को घटाना है, साथ ही सामाजिक सुरक्षा के एक नए आयाम को स्थापित करना भी शामिल है।‘थाई मामन थंगा मोथिरम’ योजना का मूलभूत ढांचा 2024‑25 वित्तीय वर्ष से लागू किया जाएगा, और यह तमिलनाडु के स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत कार्यान्वित होगी। योजना के अनुसार, प्रत्येक पात्र नवजात शिशु को जन्म के 14 दिन के भीतर उसकी माँ के पास सोने की अंगूठी पहुँचाई जाएगी। इस पहल को पहले चरण में 1.28 लाख अंगूठियों की आपूर्ति के साथ शुरू किया गया है, जिससे अनुमानित 12 लाख बच्चों को लाभ पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के लिए आवश्यक निधि राज्य बजट के स्वास्थ्य प्रावधान में अलग से आवंटित की गई है।

योजना का पात्रता मानदंड स्पष्ट किया गया है: केवल वही नवजात शिशु इस योजना के तहत लाभान्वित होंगे, जिनका जन्म तमिलनाडु के किसी भी सरकारी अस्पताल में हुआ हो और उनकी माँ को राज्य की स्थायी निवासी प्रमाणपत्र या मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध हो। इस प्रक्रिया में बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र, मातृ पहचान प्रमाणपत्र और अस्पताल से जारी किए गए जन्म पंजीकरण दस्तावेज़ को मूलभूत दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार किया जाएगा। इस प्रकार, योजना का लाभ केवल उन परिवारों तक सीमित रहेगा, जिनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कमजोर मानी जाती है।

योजना की घोषणा के साथ ही तमिलनाडु सरकार ने इस कार्यक्रम को ‘गर्भावस्था से नवजात सुरक्षा’ के व्यापक पहल के हिस्से के रूप में पेश किया। इस संदर्भ में, पिछले वर्ष राज्य ने सार्वजनिक स्वास्थ्य में कई सुधारात्मक कदम उठाए थे, जिनमें मातृ स्वास्थ्य के लिए विशेष बीमा योजना और निवारक स्वास्थ्य देखभाल का विस्तार शामिल है।

‘थाई मामन थंगा मोथिरम’ योजना को इन मौजूदा नीतियों के साथ समन्वयित किया जाएगा, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए एक सुदृढ़ ढांचा तैयार हो सके। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इस नई पहल की शुरुआत से अस्पताल में प्रवेश की दर में संभावित वृद्धि की भी उम्मीद की जा रही है।

इस योजना के कार्यान्वयन में तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग ने प्रमुख अस्पतालों में विशेष काउंटर स्थापित करने का निर्देश दिया है, जहाँ जन्म पंजीकरण के साथ ही अंगूठी का वितरण किया जाएगा। इसके अलावा, योजना के तहत वितरण प्रक्रिया को डिजिटल रूप से ट्रैक करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया गया है, जहाँ प्रत्येक लाभार्थी की जानकारी को अद्यतन किया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से परिवार अपनी अंगूठी के वितरण की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि होगी। विभाग ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार या देरी को रोकने हेतु कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

मुख्य विरोधी दल और सामाजिक संगठनों ने योजना की शुरुआत पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। कुछ सामाजिक कार्यकर्ता इसे ‘सुरक्षा जाल’ के रूप में देखते हुए, लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के बजाय केवल प्रतीकात्मक लाभ देने की आलोचना कर रहे हैं। वहीं, कई विपक्षी दलों के प्रमुख ने इस योजना को ‘राजनीतिक प्रदर्शन’ के रूप में खारिज किया, यह दावा करते हुए कि यह वास्तविक

स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में मदद नहीं करेगा। इन आलोचनाओं के बावजूद, तमिलनाडु सरकार ने कहा कि योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रोत्साहन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जनविश्वास बढ़ाना है।

राज्य सरकार की ओर से योजना के समर्थन में कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी टिप्पणी की। एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने बताया कि नवजात शिशु के जन्म के समय सोने की अंगूठी जैसी वस्तु प्रदान करने से परिवार में स्वास्थ्य देखभाल की महत्ता को पुनः स्थापित करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस पहल को सही ढंग से लागू किया जाए तो यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सकारात्मक परिवर्तन लाने की संभावना रखती है। इस संदर्भ में, राज्य ने स्वास्थ्य देखभाल के साथ-साथ पोषण एवं टीकाकरण कार्यक्रमों को भी सुदृढ़ करने का आश्वासन दिया है।

आर्थिक विशेषज्ञों ने योजना के वित्तीय प्रभाव का मूल्यांकन किया है। उन्होंने बताया कि सोने की अंगूठी की लागत वर्तमान बाजार मूल्य पर अनुमानित 3,500 रुपये प्रति ग्राम है, जिससे कुल बजट का अनुमान 4.5 अरब रुपए तक पहुँच सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश से दीर्घकालिक सामाजिक लाभ अधिक हो सकते हैं, क्योंकि इससे स्वास्थ्य सेवाओं में जन भागीदारी बढ़ेगी और सरकारी अस्पतालों में रोगी संख्या में स्थिर वृद्धि होगी।


Tamil Nadu launched the “Thai Maman Thanga Mothiram” scheme, giving a pure‑gold ring to newborns in government hospitals to boost facility usage and cut infant mortality. The program, earmarked for 12 million infants and backed by a dedicated budget, aims to strengthen maternal‑child health while sparking debate over its symbolic versus substantive impact.

The gold‑ring scheme signals a shift from symbolic charity to a tactical trust‑building tool: by tying a tangible asset to a state‑run hospital, Tamil Nadu hopes to lure more births into public facilities and normalize institutional care. If the rollout stays transparent, the initiative could quietly boost demand for maternal services—

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