अग्निवीर योजना 2022 में लागू हुई थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को तीन साल की सेवा के बाद नागरिक जीवन में पुनर्संक्रमण की सुविधा देना था। इस योजना के अंतर्गत, 18 से 25 वर्ष के युवाओं को सेना में भर्ती किया जाता है, और उनकी सेवा समाप्ति के बाद उन्हें पुनर्वास, शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाते हैं। प्रारंभिक तीन साल की अवधि को पूर्ण करने के बाद, कई सैनिकों ने अपनी सेवा को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की, जिससे इस विस्तार की मांग उभरी।
सरकार के इस कदम को समझाने के लिए, रक्षा विभाग ने पिछले कुछ महीनों में कई रिपोर्टें जारी कीं, जिनमें बताया गया कि भारतीय सेना को तकनीकी उन्नति, साइबर सुरक्षा और विशेष बलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुभवी कर्मियों की आवश्यकता है। इस संदर्भ में, “सेकेंड टूर ऑफ ड्यूटी” योजना को एक रणनीतिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जिससे अनुभवी अग्निवीरों को दो अतिरिक्त वर्ष सेवा में शामिल किया जा सके।
प्रस्तावित दो साल की अवधि के तहत, अग्निवीरों को मौजूदा वेतन, भत्ते और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही अतिरिक्त प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के अवसर प्रदान किए जाएंगे। इस योजना के अंतर्गत, सैनिकों को उनके प्रदर्शन और विशेषज्ञता के आधार पर विभिन्न इकाइयों में पुनः नियोजित किया जा सकेगा, जिससे सेना की कार्यक्षमता में सुधार की उम्मीद है। साथ ही, इस अवधि के बाद उन्हें पुनर्वास योजना के तहत आगे के सामाजिक एवं आर्थिक लाभ मिलेंगे।
वित्त मंत्रालय ने इस विस्तार के लिए अनुमानित खर्च को लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपए बताया है, जो अगले दो वित्तीय वर्षों में वितरित किया जाएगा। इस राशि में वेतनभत्ता, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य देखभाल और पुनर्वास सुविधाओं का खर्च शामिल होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश दीर्घकालिक सुरक्षा लाभ के साथ-साथ युवा वर्ग के रोजगार सृजन में भी सहायक हो सकता है।
इस योजना की घोषणा पर भारत के कई प्रमुख राजनीतिक दलों ने प्रतिक्रिया दी। विरोधी पार्टियों ने कहा कि यह कदम युवा बेरोजगारी को कम नहीं करेगा, बल्कि उन्हें अनावश्यक सैन्य सेवा में बांध कर सामाजिक विकास के अवसरों से वंचित करेगा। वहीं, समर्थकों ने तर्क दिया कि इस योजना से अनुभवी सैनिकों का उपयोग करके राष्ट्रीय रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ किया जाएगा और युवा वर्ग को एक स्थिर आय स्रोत मिलेगा।
सेना के उच्चस्तरीय कमांडरों ने इस प्रस्ताव को “सैन्य तैयारी में नवीनीकरण” के रूप में सराहा। उन्होंने कहा कि अनुभवी अग्निवीरों को दो अतिरिक्त वर्ष तक सेवा में रखकर विशेष मिशनों और तकनीकी उपकरणों के संचालन में दक्षता बढ़ेगी। इस दिशा में, उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अद्यतन करने और नई तकनीकों के अनुकूल बनाने का संकेत भी दिया।
सिविल सोसाइटी संगठनों ने इस योजना पर मिश्रित राय व्यक्त की। कुछ समूहों ने कहा कि यह युवा वर्ग को सैन्य करियर की ओर आकर्षित करने का सकारात्मक कदम है, जबकि अन्य ने संभावित मानवीय चुनौतियों और पुनर्वास की गुणवत्ता पर प्रश्न उठाए। इसके अलावा, वे यह भी चाहते हैं कि सरकार इस योजना को लागू करते समय सामाजिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करे।
आर्थिक विश्लेषकों ने कहा कि इस विस्तार से सेना के बजट में अतिरिक्त दबाव तो पड़ेगा, पर यदि सही ढंग से कार्यान्वित किया गया तो यह दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी दे सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि सेवा अवधि बढ़ने से सैनिकों के कुल आय में वृद्धि होगी, जिससे उपभोग और निवेश में इजाफा हो सकता है। साथ ही, यह योजना रक्षा उद्योग के विकास को भी प्रोत्साहित कर सकती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा और युवा रोजगार के दोहरे लक्ष्यों को संतुलित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यदि योजना को पारदर्शी ढंग से लागू किया जाए, तो यह सरकार की लोकप्रियता को बढ़ा सकता है, विशेषकर ग्रामीण और उत्तर भारत के क्षेत्रों में जहाँ अग्निवीर भर्ती का स्तर अधिक है।
सैन्य
Updated: November 4, 2026
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