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बिहार सरकार ने हड़ताल में शामिल राजस्व‑भूमि अमीनों को तत्काल बर्खास्त कर ई‑मापी आईडी निष्क्रिय की; पुनः नियुक्ति के लिए विशेष सर्वे

बिहार सरकार ने हड़ताल में भाग लेने वाले राजस्व और भूमि सुधार विभाग के अमीनों पर कड़ी कार्रवाई की, जिसमें उन्हें सभी पदों से तत्काल बर्खास्त कर दिया गया और ई‑मापी पोर्टल पर उनकी आईडी निष्क्रिय कर दी गई। यह निर्णय विभागीय आदेश के अनुसार लिया गया, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक

कार्यवाही में अनुशासन स्थापित करना और सेवा विघटन को रोकना है। विभाग ने साथ ही प्रभावित कार्यस्थलों पर विशेष सर्वेक्षण शिविरों में कार्यरत विशेष सर्वेक्षण अमीनों को आनुपातिक आधार पर पुनः नियुक्त करने का प्रावधान भी किया। यह कदम सरकारी नीतियों के कठोर अनुपालन को दर्शाता है।

हड़ताल की पृष्ठभूमि में

कई अमीनों ने वेतन, कार्यभार और पदोन्नति प्रक्रिया में असमानता को लेकर विरोध व्यक्त किया था। वे यह दावा कर रहे थे कि कुछ विभागीय आदेश अस्पष्ट हैं और उनका पालन करने में उन्हें असुविधा होती है। इस संघर्ष का आरम्भ कई महीनों पूर्व हुआ, जब विभिन्न सर्वेक्षण अभिकर्ताओं ने

सामूहिक रूप से अपने अधिकारों की मांग की। इस दौरान कई बार स्थानीय स्तर पर बातचीत हुई, परन्तु समाधान नहीं निकला, जिससे कार्यकर्ता वर्ग ने हड़ताल का सहारा लिया। सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेकर तत्काल कारवाई का मार्ग चुना।

विभागीय आदेश के अनुसार, हड़ताल में शामिल सभी अमीनों

को उनके सभी दायित्वों एवं कार्यों से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया। इस कदम का मुख्य उद्देश्य विभागीय कार्यप्रवाह को बिना किसी बाधा के जारी रखना था। साथ ही, ई‑मापी पोर्टल पर उनकी आईडी को निष्क्रिय करने का भी आदेश जारी किया गया, जिससे वे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर

कोई भी कार्य नहीं कर सकें। इन आदेशों का पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रावधान भी मौजूद है, जिससे भविष्य में समान घटनाओं को रोकने की आशा है। यह निर्णय प्रशासनिक अनुशासन को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

हड़ताल के दौरान विभाग ने कई चरणों में सूचना

प्रसार किया, जिससे सभी संबंधित पक्षों को स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके। विभागीय मुख्यालय ने हड़ताल के संभावित प्रभाव को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की और सरकार को प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में बताया गया कि हड़ताल के कारण भूमि अभिलेखों की अद्यतन प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती

थी, जिससे किसानों और भूमि मालिकों को आर्थिक नुकसान हो सकता था। इसलिए, सरकार ने शीघ्र ही इस समस्या को सुलझाने के लिए कठोर उपाय अपनाए। यह कदम प्रशासनिक कार्यवाही में निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक माना गया।

हड़ताल के बाद, विशेष सर्वेक्षण शिविरों में कार्यरत विशेष सर्वेक्षण अमीनों को

आनुपातिक आधार पर पुनः नियुक्त करने का आदेश जारी किया गया। इस प्रक्रिया में प्रत्येक अंचल के सर्वेक्षण कार्य की आवश्यकता और वर्तमान कार्यबल की स्थिति को ध्यान में रखा गया। पुनः नियुक्ति के दौरान, विभाग ने यह सुनिश्चित किया कि नई नियुक्तियों में योग्यता और अनुभव का उचित मूल्यांकन

हो। यह कदम न केवल कार्यभार को संतुलित करने के लिए है, बल्कि कर्मचारियों के मनोबल को भी बढ़ाने के उद्देश्य से है। विभाग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हुए सभी संबंधित पक्षों को सूचना प्रदान की।

सभी समाहर्ताओं को विभाग द्वारा एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया, जिसमें हड़ताल

में भाग लेने वाले अमीनों के विरुद्ध उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण दिया गया। पत्र में यह भी कहा गया कि भविष्य में ऐसी स्थितियों को टालने के लिए कर्मचारियों को उचित मंच प्रदान किया जाएगा, जहाँ वे अपने मुद्दों को संवादात्मक रूप में रख सकेंगे। साथ ही, विभाग

ने कर्मचारियों को सलाह दी कि वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखें। इस पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि विभागीय नीतियों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिससे प्रशासनिक अनुशासन बनी रहे।

विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ व्यक्त कीं।

कुछ ने इसे कड़ा और अनुचित बताया, जबकि अन्य ने प्रशासन की दृढ़ता की सराहना की। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठाई, जिसमें उन्होंने कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की मांग की। वहीं, कुछ व्यापारी वर्ग ने यह चिंता जताई कि इस तरह की सख्त

कार्रवाई से व्यावसायिक माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विभिन्न वर्गों की इन प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट हुआ कि सरकार की इस कार्रवाई का प्रभाव केवल प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी पड़ रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों ने इस कदम को

Updated: November 3, 2026


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