किया और नेतन्याहू को आपातकालीन सरकार की स्थापना के लिए वैकल्पिक राजनैतिक रणनीतियों की तलाश में डाल दिया। इस संदर्भ में, इरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ती चिंता और मध्य पूर्व में सुरक्षा माहौल की अस्थिरता को देखते हुए, नेतन्याहू का यह प्रस्ताव दोनों देशों के रणनीतिक साझेदारी को नया
मोड़ दे सकता है।
निवेशी परिणामों से पहले, इज़राइल में 2024 के राष्ट्रीय चुनावों में सेंटर-डायरेक्ट पार्टी और उसके दायां गठबंधन ने संसद में बहुमत नहीं हासिल किया। इस असफलता के बाद, नेतन्याहू ने आपातकालीन सरकार का गठन करने की संभावनाएँ उठाईं, जिससे वह रक्षा और विदेश मामलों में अपनी
प्रमुख भूमिका बरकरार रख सकें। इस प्रक्रिया में, इरान के साथ तनाव को तीव्र कर किसी भी संभावित सैन्य संघर्ष को उत्प्रेरक के रूप में प्रयोग करने की आशा की जा रही है। इस प्रकार, इज़राइल के भीतर राजनीतिक अस्थिरता ने उसके विदेश नीति के कठोर रुख को पुनः सक्रिय किया।
इरान-इज़राइल संबंधों की जटिल पृष्ठभूमि दशकों से ही क्षेत्रीय असुरक्षा का मुख्य कारण रही है। 2015 में इरान परमाणु समझौते (JCPOA) के तहत प्रतिबद्धताओं को स्वीकार करने के बाद, कई देशों ने इज़राइल को संभावित परमाणु खतरे के रूप में देखना जारी रखा। 2023 में इरान ने अपने समृद्ध यूरेनियम
समृद्धिकरण को तेज किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में असंतोष बढ़ा। इस दौरान, इज़राइल ने इरान के सशस्त्र बलों के खिलाफ कई प्रतिआक्रमणात्मक उपायों का संकेत दिया, जिससे दो देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता की ज्वाला फिर से प्रज्वलित हुई।
नवीनतम विकास के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने बताया कि ट्रम्प
प्रशासन ने इरान के परमाणु सुविधाओं को लक्ष्य बनाकर एक संभावित सैन्य ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की है। इस योजना में इरानी बुनियादी ढांचे पर सीमित लेकिन प्रभावी हवाई हमले शामिल हो सकते हैं, जिससे इरान की परमाणु क्षमताओं में व्यवधान उत्पन्न हो सके। इस बीच, इज़राइल की सुरक्षा एजेंसियों ने
भी इरानी हवाई रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करने के लिए गुप्त ऑपरेशनों की तैयारी का उल्लेख किया।
इज़राइल की रक्षा मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से नहीं स्वीकार किया, लेकिन अजनबियों के साथ गुप्त वार्ता जारी है। कुछ राजनयिक सूत्रों ने बताया कि इज़राइल के उच्चस्तरीय अधिकारियों ने
अमेरिकी सैन्य दल के साथ एक समन्वित कार्रवाई की संभावनाओं पर चर्चा की, जिसमें इरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों पर हवाई हमलों की तालिका बनायी जा रही है। यह सहयोग दोनों देशों को एक सामरिक लाभ प्रदान करेगा, जबकि इरान के जवाबी कदमों की अनिश्चितता भी बनी रहेगी।
अमेरिकी कांग्रेस
के कई सदस्यों ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समर्थन के इरान के खिलाफ एकाकी कार्रवाई विश्व स्थिरता को खतरे में डाल सकती है। विशेष रूप से, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने पहले भी इरान के परमाणु कार्यक्रम को कूटनीतिक माध्यम से नियंत्रित करने
की वकालत की है। इन अंतर्राष्ट्रीय आवाज़ों के बीच, ट्रम्प प्रशासन ने अपने रणनीतिक उद्देश्यों को स्पष्ट किया, यह संकेत देते हुए कि इरान के खिलाफ सशस्त्र कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोच्च हित में है।
इज़राइल में विपक्षी पार्टियों ने इस संभावित सैन्य कार्रवाई को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन के
रूप में आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू का इस दिशा में दबाव बनाना घरेलू राजनीति में अपने पद को सुरक्षित करने की कोशिश है, न कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा। इसके अलावा, इज़राइल के सामाजिक संगठनों ने संभावित नागरिक हताहतों के प्रति चिंता व्यक्त की, क्योंकि इरान के जवाबी हमलों
से व्यापक विनाश की संभावना बनी है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस प्रस्ताव के संबंध में आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, परन्तु कई राजनयिक स्रोतों ने संकेत दिया कि इरान के साथ तनाव को घटाने के लिए कूटनीतिक चैनल अभी भी खुला है। इरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि कोई भी
विदेशी हस्तक्षेप उसके राष्ट्रीय संप्रभुता को ठेस पहुंचाएगा, और वह प्रतिप्रतिक्रिया के लिए तैयार है। इस बीच, मध्य पूर्व के प्रमुख देशों ने इस संभावित संघर्ष से आर्थिक और सुरक्षा दोनों पहलुओं पर असर की चेतावनी दी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू का यह कदम
Updated: November 2, 2026
– Netanyahu’s request for U.S. military action against Iran highlights a potential shift in Israeli‑American security cooperation amid regional nuclear tensions.
– The proposal could affect diplomatic efforts and stability in the Middle East, influencing future policy and alliance dynamics.
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