गाइडलाइन प्रदान की है। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में सर्पदंश के कारण 12 लोगों की मृत्यु तथा 35 से अधिक घायल हुए हैं, जिनमें अधिकांश युवा किसान हैं। यह स्थिति न केवल मानव जीवन को खतरे में डाल रही है, बल्कि कृषि
उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर डाल रही है।
घाटाल सब-डिवीजन सोशल फॉरेस्ट्री के रेंजर रतन सरकार ने बताया कि अधिकांश सर्पों का प्रकोप खेतों के किनारे स्थित बंजर भूमि और जलजमाव वाले क्षेत्रों से शुरू होता है। पिछले साल के मौसम रिकॉर्ड के अनुसार, इस वर्ष बरसात के मौसम
में अत्यधिक जलसंकट रहा, जिससे सर्पों का आवास नयी जगहों पर स्थानांतरित हुआ। किसानों ने बताया कि वे अक्सर सुबह जल्दी बीज बोने और हल चलाने के लिए निकलते हैं, जब सर्प अधिक सक्रिय होते हैं। इस कारण सर्पदंश के मामले में तीव्र वृद्धि देखी गई।
विभाग
ने कहा कि इस समस्या का मूल कारण वन्यजीव आवास के नष्ट होने और मानव-वन्यजीव संपर्क में वृद्धि है। पिछले कुछ वर्षों में जल निकासी की कमी और अनियंत्रित कृषि विस्तार ने सर्पों को कृषि क्षेत्रों के करीब ला दिया है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर सर्पों की
पहचान और उनके विष के प्रकार के बारे में जागरूकता की कमी ने उपचार में देरी की। रतन सरकार ने यह भी कहा कि ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ने कई मामलों में मृत्यु दर को बढ़ा दिया है।
विज्ञान विभाग के विशेषज्ञों ने
बताया कि इस क्षेत्र में प्रमुख सर्प प्रजातियों में कफी, बँधव और हंसनिया शामिल हैं, जिनका विष न्यूरोटॉक्सिक और हेमोटॉक्सिक दोनों प्रकार का है। इन विषों के कारण श्वास संकट, रक्तस्राव और मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन जैसी लक्षण उत्पन्न होते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि
साप के काटने के तुरंत बाद एंटीवेनम का उपयोग उपचार में सबसे प्रभावी है, परंतु इसका अभाव अक्सर घातक परिणाम देता है।
वन विभाग ने तड़के काम न करने के अलावा किसानों को निम्नलिखित सुरक्षा उपाय अपनाने का निर्देश दिया है: खेत में काम करते समय हाई-टॉप्स
और मोटे जूते पहनें, हाथ में लाइट रखकर काम करें, और किसी भी सर्प को देखे तो तुरंत दूरी बनाकर वन्यजीव बचाव कर्मियों को सूचित करें। साथ ही, किसानों को एंटीवेनम के नजदीकी उपलब्धता की जानकारी रखें और साप काटने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाने का आदेश दिया गया
है। विभाग ने इस दिशा में 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित 3 स्वास्थ्य केंद्रों को एंटीवेनम की आपूर्ति सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दिया।
स्थानीय किसान संघों ने इस नई गाइडलाइन को स्वागत किया, परंतु उन्होंने यह भी जताया कि कार्यान्वयन में कई चुनौतियाँ मौजूद हैं।
कई छोटे किसान अपने दैनिक आय के लिए सुबह जल्दी खेत में जाते हैं, और देर तक काम न करने से उनका उत्पादन घट सकता है। इसके अलावा, कुछ किसानों ने कहा कि सर्पों के प्रति डर के कारण उन्होंने पहले ही कई हेक्टेयर जमीन बंजर कर दी
है, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है। संघ ने वन विभाग से अनुरोध किया कि वे सर्पों को हटाने के लिए मानवता-हितैषी उपाय अपनाएँ।
वन्यजीव बचावकर्मियों ने बताया कि विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो रात में सर्पों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित
करती हैं। इस प्रक्रिया में उन्होंने ह्यूमन-इकोलॉजिकल संतुलन को ध्यान में रखकर सर्पों को वन्य क्षेत्र में वापस छोड़ने की नीति अपनाई है। टीम के प्रमुख ने कहा कि इस महीने के भीतर 150 से अधिक सर्पों को हटाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे खेतों में सर्पों
की संख्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अनीता दास ने बताया कि अब तक उपचार के लिए एंटीवेनम की कमी के कारण कई मामलों में देर से इलाज हुआ है। उन्होंने कहा
Updated: November 3, 2026
A surge in snake‑bite incidents in Ghatal over the past two weeks has left 12 dead and over 35 injured, prompting forest officials to ban early‑morning field work and issue safety guidelines. Authorities are boosting antivenom supplies, relocating snakes from farmlands and urging farmers to adopt protective gear to curb further fatalities and protect crop yields.
The surge in snakebite incidents threatens lives and agricultural productivity, prompting urgent health and safety measures.
Targeted guidelines and antivenom supply aim to reduce mortality and maintain farming activity in the region.
Be First to Comment