थी, परन्तु 2024 में फिर से बढ़ती प्रवृत्ति देखी गई। इस संदर्भ में सम्राट चौधरी ने पिछले सप्ताह अपने सार्वजनिक भाषण में कहा कि अपराध की बढ़ोतरी मुख्यतः सामाजिक विफलताओं की वजह से है, जिससे कई वर्गों में असंतोष उत्पन्न हुआ।
सम्राट चौधरी का बयान एक बड़े राजनीतिक अभियान का हिस्सा माना गया, जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों को अपराध नियंत्रण में विफलता का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि उनके सरकार ने नई पुलिस तकनीक, डिजिटल निगरानी और विशेष फौजें स्थापित करके अपराधियों को सजा दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कुछ स्थानीय राजनीतिक गठजोड़ों को
भी इस मुद्दे पर जवाबदेह ठहराया। यह बयान बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक बड़े जनसमूह के सामने दिया गया, जहाँ कई नागरिकों ने सुरक्षा के प्रति अपनी चिंताओं को व्यक्त किया।
तेजस्वी यादव ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चौधरी के शब्द केवल चुनावी राजनीति का हथियार हैं और वास्तविक अपराधी वर्ग को दंडित करने की कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने अपराधियों को सजा दिलाने की बजाय राजनीति में अपराध को बढ़ावा दिया है। यादव ने अपने भाषण में कई केसों का हवाला दिया, जहाँ उनके अनुसार सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया में देरी की और पीड़ितों को उचित राहत नहीं दी।
बाद में, यादव ने अपनी पार्टी के नेता राजनैतिक गठजोड़ों को भी इस मुद्दे पर एकजुट करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार सच्चे इरादे से अपराध को कम करना चाहती है तो उसे पुलिस बजट
बढ़ाना, साक्ष्य‑आधारित जांच को सुदृढ़ बनाना और न्यायिक प्रणाली की सुगमता सुनिश्चित करनी होगी। यादव ने यह भी कहा कि राज्य में अपराध नियंत्रण के लिए सामाजिक पुनर्वास कार्यक्रमों की कमी को दूर करना आवश्यक है।
इस बयान के बाद बिहार विधानसभा में कई दलों ने आपसी बहस शुरू कर दी। कांग्रेस, राजद और अन्य विपक्षी दलों ने भी अपराध नियंत्रण में सरकार की नाकामी को उजागर किया। वहीं, सरकार के समर्थकों ने कहा कि अपराध नियंत्रण के लिये कई नई नीतियों को लागू किया जा रहा है, जैसे कि महिला सुरक्षा के लिये विशेष पुलिस इकाइयाँ और नाइट‑पैट्रोल।
सम्राट चौधरी ने उत्तर में कहा कि उनका बयान केवल तथ्यात्मक है और यह सरकार की अपराध नियंत्रण नीति की सच्ची तस्वीर पेश करता है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल अक्सर अपराध को राजनीतिक लाभ के लिये इस्तेमाल करते हैं और असली मुद्दे को टालते हैं। चौधरी ने कहा कि
उनके शासक दल ने पिछले दो वर्षों में 1,500 से अधिक अपराधियों को सजा दिलवाई है और कई उच्च‑स्तरीय केसों को सफलतापूर्वक सुलझाया है।
विपक्षी दलों के नेता, विशेषकर तेजस्वी यादव, ने फिर से इस बात को दोहराया कि सरकार ने अपराधियों के लिये सख्त सजा की बजाय राजनीतिक सहानुभूति
को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि राज्य में अपराध नियंत्रण के लिये सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक पहलुओं को एक साथ देखना जरूरी है। यादव ने यह भी कहा कि सरकार को अपराधियों को सामाजिक पुनर्स्थापना के लिये अवसर प्रदान करना चाहिए, न कि केवल कारावास।
इन विकासों के बीच सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। कई एनजीओ ने कहा कि अपराध नियंत्रण के लिये केवल पुलिस बल की वृद्धि पर्याप्त नहीं है; उन्हें न्याय प्रणाली में पारदर्शिता, पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा और पुनर्वास कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
Updated: November 3, 2026
The clash highlights divergent approaches by the state government and opposition on crime‑prevention strategies in Bihar. It underscores the political stakes surrounding public safety policies and the demand for accountability in law‑enforcement initiatives.
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