चक्रवात के कारण उत्पन्न आपातकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए निधियों की त्वरित रिलीज़ की अपील की गई। इस पत्र के बाद केंद्रीय टीम ने यानाम में स्थित प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया, जिससे राहत कार्यों की दिशा निर्धारित करने में मदद मिलेगी।
चक्रवात के प्रकोप से पहले यानाम, जो कि भारत के
संघीय केंद्रशासित प्रदेशों में से एक है, मौसमी बाढ़ और तटीय तूफानों के प्रति संवेदनशील क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। पिछले दशकों में इस क्षेत्र में कई बार चक्रवातों का प्रकोप रहा है, परन्तु इस बार की तीव्रता और गति ने पूर्वानुमान को चुनौती दी। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर राष्ट्रीय और
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए कई चेतावनियों के बावजूद, इस प्रकार की आपदाओं के लिए तैयारियों में अंतरराष्ट्रीय मानकों से पीछे रहना स्पष्ट हो रहा है।
वर्षों से भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन में सुधार के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की हैं, जिनमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की भूमिका प्रमुख है। हालांकि, यानाम जैसी दूरस्थ
और सीमावर्ती क्षेत्रों में योजना कार्यान्वयन में अक्सर कठिनाइयाँ आती हैं। इस चक्रवात ने इस बात को फिर से उजागर किया कि मौजूदा त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप ढालना आवश्यक है, ताकि जीवन और संपत्ति की रक्षा की जा सके।
केंद्रीय टीम ने यानाम के कई प्रमुख बिंदुओं का निरीक्षण किया, जिसमें प्रभावित
बस्तियों, जलस्तर में वृद्धि, और बुनियादी ढांचे की क्षति शामिल थी। टीम ने स्थानीय अधिकारियों से मिलकर राहत वितरण, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्निर्माण की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त की। उन्होंने यह भी बताया कि कई घरों के छत टूट चुके हैं और बुनियादी सुविधाओं जैसे कि बिजली और जल आपूर्ति में व्यवधान आया
है, जिससे नागरिकों को तत्काल सहायता की आवश्यकता है। टीम की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि राहत कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधनों और त्वरित निर्णयों की आवश्यकता है।
वर्तमान में, केंद्रीय सरकार ने तत्काल 50 करोड़ रुपये की सहायता राशि को मंजूरी दे दी है, जो मुख्यतः आश्रय निर्माण, खाद्य सामग्री, चिकित्सा सुविधाएं और
जल शुद्धिकरण के लिए उपयोग की जाएगी। इस राशि के अतिरिक्त, भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन मंत्रालय के माध्यम से विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों को आपातकालीन सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, भारतीय सैन्य बलों को भी तैनात किया गया है, जो कि आपातकालीन सामग्री परिवहन, राहत शिविर स्थापित करने और प्रभावित
क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता करेंगे।
मुख्यमंत्री एन. रंगलसमय ने इस केंद्रीय सहायता की सराहना व्यक्त की और कहा कि यह निधि यानाम के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार स्थानीय स्तर पर आपदा राहत कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है और केंद्र के साथ मिलकर
पुनर्निर्माण के लिए विस्तृत योजना तैयार कर रही है। रंगलसमय ने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार की आपदाओं से सीख लेकर भविष्य में अधिक मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे पुनरावृत्ति की संभावना कम हो सके।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस सहायता के जारी करने के बाद एक सार्वजनिक बयान में
कहा कि सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों के साथ हमेशा खड़ी है और तत्परता से सहायता प्रदान करती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस चक्रवात ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन रणनीति में सुधार की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है और भविष्य में अधिक प्रभावी उपायों को अपनाने का इरादा जताया। शाह ने यह
बात दोहराई कि केंद्र-राज्य सहयोग आपदा राहत में महत्वपूर्ण है और इस सहयोग को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों और NGOs ने भी राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी की है। उन्होंने प्रभावित लोगों को अस्थायी आश्रय, भोजन और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दानदाताओं ने
भी आर्थिक और भौतिक मदद की पेशकश की है, जिससे राहत कार्यों का दायरा विस्तारित हो रहा है। इन सभी प्रयासों के बीच, स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए कड़े आदेश जारी किए हैं, जिससे अनावश्यक भीड़भाड़ और असंतोष को रोका जा सके।
राज्य की प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी इस आपदा
पर अपने-अपने बयान जारी किए। विपक्षी दलों ने केंद्र की त्वरित मदद की सराहना की, परन्तु साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे आपदाओं से बचाव के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। सरकार के पक्ष ने कहा कि इस प्रकार की आपदाओं का सामना करने
Updated: November 2, 2026
A devastating cyclone in Yanam displaced thousands and crippled infrastructure, prompting Chief Minister N. Rangal Samay to request a ₹50‑crore emergency grant from the Centre, which was promptly approved and mobilised for shelters, food, medical aid and water purification. A central survey team, along with military and NGOs, is now coordinating relief and reconstruction, underscoring the need for stronger disaster‑response mechanisms in vulnerable border regions.
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