दास ने पिछले शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस ब्रीफ़िंग में स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि EPIC के साथ बायो‑मेट्रिक डेटा को जोड़कर भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा, जिससे मौजूदा आधार‑आधारित प्रणाली में मौजूद कई चुनौतियों का समाधान संभव होगा। इस घोषणा ने कई सामाजिक संगठनों और
राजनैतिक दलों के बीच तीव्र चर्चा को जन्म दिया है।
पिछले पाँच वर्षों में आधार‑आधारित भुगतान प्रणाली को व्यापक रूप से लागू किया गया था, जिससे गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और किसान कल्याण जैसी कई योजनाओं में लाभार्थियों को समय पर सहायता मिल सकी। हालांकि, विभिन्न रिपोर्टों में आधार‑डेटा की सुरक्षा, डुप्लिकेशन
और पहचान त्रुटियों की समस्याओं को उजागर किया गया था। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बायो‑मेट्रिक स्कैनर की अपर्याप्त उपलब्धता और नेटवर्क कनेक्टिविटी की कमी के कारण कई लाभार्थियों को भुगतान में देरी या कटौती का सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों को देखते हुए केंद्र ने वैकल्पिक पहचान प्रणाली की खोज शुरू की, जिसके
तहत मतदाता सूची को आधार के साथ समकालिक किया गया।
मतदाता सूची, जिसे EPIC (Electoral Photo Identity Card) कहा जाता है, पहले से ही लगभग 90 % भारतीय नागरिकों के पास उपलब्ध है और प्रत्येक चार वर्ष में चुनाव आयोग द्वारा अद्यतन की जाती है। यह दस्तावेज़ फोटो, नाम, पिता/पति का नाम, पता
और जन्म तिथि जैसे मूलभूत जानकारी के साथ बायो‑मेट्रिक डेटा (उँगली के निशान) को भी संग्रहीत करता है। इस प्रणाली को सामाजिक सुरक्षा भुगतान के लिये अपनाने का प्रस्ताव मूलतः यह मानता है कि चुनाव आयोग की सूची अधिक विश्वसनीय और अद्यतित है, तथा इसके साथ बायो‑मेट्रिक डेटा को एकीकृत करने से दोहरी
पहचान समस्याएँ कम होंगी।
नई नीति के कार्यान्वयन चरण को तीन प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है। प्रथम चरण में सभी केंद्र‑स्थापित सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिये लाभार्थियों को EPIC‑बायो‑मेट्रिक लिंक अपलोड करने का निर्देश दिया जाएगा। द्वितीय चरण में मौजूदा आधार‑आधारित खातों को EPIC‑कनेक्ट के माध्यम से स्वचालित रूप से
माइग्रेट किया जाएगा, जिससे दोहराव वाले रिकॉर्ड हटाए जा सकेंगे। तृतीय चरण में भुगतान प्रणाली को पूर्णतः EPIC‑बायो‑मेट्रिक पर निर्भर किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भी नई योजना में सीधे इस प्रणाली का प्रयोग संभव हो सकेगा।
इन चरणों को लागू करने के लिये केंद्र ने एक विशेष कार्यसमिति का गठन
किया है, जिसमें आयुष मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और चुनाव आयोग के प्रतिनिधि शामिल हैं। कार्यसमिति ने बताया कि तकनीकी एकीकरण के लिये ब्लॉक‑लेवल में नई सॉफ़्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म स्थापित की जाएगी, जिसमें सुरक्षित एन्क्रिप्शन और दो‑स्तरीय प्रमाणीकरण प्रणाली होगी। इस प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक भुगतान ट्रांज़ैक्शन का रिकॉर्ड
वास्तविक‑समय में निगरानी किया जा सकेगा, जिससे धोखाधड़ी को रोकना आसान हो जाएगा।
नए नियम के तहत, पहले से ही आधार‑आधारित लाभ प्राप्त कर रहे 12 क्रोड़ से अधिक नागरिकों को EPIC‑बायो‑मेट्रिक लिंक में परिवर्तन करने के लिये एक महीने का संक्रमणकाल दिया गया है। इसके अलावा, इस अवधि में लाभार्थियों को आधार
के बिना भी भुगतान प्राप्त करने की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिससे कोई भी अंतरिम व्यवधान नहीं होगा। केंद्र सरकार ने इस प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु ग्रामीण स्तर पर मोबाइल वैन और डिजिटल हेल्पडेस्क स्थापित करने का भी वचन दिया है, जिससे दूरस्थ इलाकों के लोगों को मदद मिल सके।
प्रेस
ब्रीफ़िंग के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस पहल पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। मुख्य विरोधी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि इस कदम से मतदाता सूची का दुरुपयोग हो सकता है और चुनाव आयोग की स्वायत्तता को खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस बदलाव से
अपनी राजनीतिक गणना को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, कई राजनैतिक गठबंधन ने इस निर्णय को समानता और पारदर्शिता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना।
सामाजिक संगठनों ने भी अपनी-अपनी राय व्यक्त की। ग्रामीण विकास को लेकर काम करने वाले एनजीओ ने कहा कि EPEP‑बायो‑मेट्रिक लिंक से
लाभार्थियों को वास्तविक‑समय में सूचना मिल सकेगी और भ्रष्टाचार में कमी आएगी। वहीं, डेटा सुरक्षा संगठनों ने इस बात पर चिंता जताई कि बायो‑मेट्रिक डेटा के दोहरे उपयोग से व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार से डेटा संरक्षण के स्पष्ट
Updated: November 3, 2026
Insight: Switching from Aadhaar to EPIC‑biometric IDs could turn India’s voter roll into a de‑facto social‑welfare database, blurring the line between civic participation and entitlement distribution.
If the rollout succeeds, it may boost transparency, but it also creates a powerful new nexus of
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