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केरल उच्च शिक्षा विभाग ने कोझिकोड विश्वविद्यालय से प्रो‑वीसी नियुक्ति पर स्पष्टीकरण मांगा।

केरल के उच्च शिक्षा विभाग ने कल कोझिकोड विश्वविद्यालय से प्रो‑वीसी के पद पर नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा, जहाँ पी. रशीद अहमद को उनके मूल संस्थान से अवकाश देकर बिना सरकारी पूर्वस्वीकृति के डिप्टीशन पर नियुक्त किया गया था। इस कदम को शिक्षा विभाग ने अनुशासनात्मक मानक और सरकारी नियमों की संभावित

उल्लंघन के रूप में देखा, जिससे इस नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठे। विभाग ने विश्वविद्यालय को लिखित में अनुरोध किया कि वह स्पष्ट करे कि रशीद अहमद को किस आधार पर अवकाश दिया गया और डिप्टीशन की स्वीकृति कैसे प्राप्त हुई। यह अनुरोध आधिकारिक रूप से 28 अगस्त को भेजा गया और दो कार्य दिवसों

के भीतर उत्तर की मांग की गई।

कोझिकोड विश्वविद्यालय, जो केरल में सात विश्वविद्यालयों में से एक है, ने 15 जुलाई को पी. रशीद अहमद को प्रो‑वाइस चांसलर (पीवीसी) के पद पर नियुक्त करने की घोषणा की थी। विश्वविद्यालय के अनुसार, रशीद अहमद ने अपने मूल कार्यकाल के दौरान कई शैक्षणिक परियोजनाओं का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया और

प्रशासनिक क्षमता का प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय ने बताया कि डिप्टीशन प्रक्रिया में सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार किए गए और आंतरिक अनुमोदन प्राप्त किया गया। तथापि, इस प्रक्रिया में राज्य सरकार की पूर्वस्वीकृति का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे शिक्षा विभाग की जांच का कारण बना।

केरल की उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले कुछ महीनों में कई विश्वविद्यालयों

में प्रशासनिक पदों की नियुक्तियों को लेकर जांच शुरू की थी। विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों को दी जाने वाली स्वायत्तता के साथ-साथ सरकारी नियमों का पालन भी आवश्यक है। इस संदर्भ में, विभाग ने यह स्पष्ट किया कि कोई भी उच्च प्रशासनिक पद बिना सरकारी अनुमति के नहीं दिया

जा सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही या अनियमितता पाई गई तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह कदम केरल में शैक्षणिक संस्थानों की पारदर्शिता बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

रिपोर्टों के अनुसार, पी. रशीड अहमद को पिछले साल के अंत में उनके मूल संस्थान में

सेवानिवृत्त किया गया था, परंतु उनका करियर निरंतर जारी रहने के संकेत दिखे। विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रशीड अहमद को डिप्टीशन पर नियुक्त करने का निर्णय तत्काल प्रशासनिक आवश्यकता के कारण लिया गया था। उन्होंने कहा कि डिप्टीशन की प्रक्रिया में सामान्यतः सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है, परंतु इस बार प्रक्रिया

में कुछ त्रुटियां हो सकती हैं। इस दौरान, विश्वविद्यालय की कार्यवाही को लेकर कुछ संदेह उत्पन्न हुए, जिससे विभाग को स्पष्टीकरण की मांग करनी पड़ी।

विभाग ने विश्वविद्यालय को दो संभावित विकल्प प्रस्तुत किए: या तो रशीड अहमद को डिप्टीशन के तहत जारी रखना, या फिर इस नियुक्ति को रद्द कर पुनः सरकारी स्वीकृति प्राप्त करना। विश्वविद्यालय

के प्रमुख ने कहा कि वे इस निर्देश का पालन करेंगे और आवश्यक दस्तावेज़ीकरण तैयार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने किसी भी अनियमितता को सुधारने के लिए तत्परता दिखाई है। इस बीच, विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों ने इस नियुक्ति को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दीं, कुछ इसे शैक्षणिक प्रगति के रूप में देखते हैं,

जबकि अन्य इसे नियम उल्लंघन मानते हैं।

प्रकाशन के बाद, केरल सरकार के शिक्षा मंत्री ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को सरकारी नियमों के अनुसार ही कार्य करना चाहिए। मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि डिप्टीशन पर किसी भी नियुक्ति के लिए पूर्वस्वीकृति अनिवार्य है और इसे नज़रअंदाज़ करना अनुचित

होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में यदि कोई उल्लंघन पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आश्वस्त किया कि विभाग इस मुद्दे को निष्पक्षता से सुलझाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

डिप्टीशन पर नियुक्ति का मुद्दा केरल के शैक्षणिक क्षेत्र में व्यापक चर्चा का कारण बन गया है।

कई छात्र संघों ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है और विश्वविद्यालय से स्पष्ट उत्तर की अपेक्षा की है। छात्र समूहों के प्रवक्ताओं ने कहा कि यदि नियुक्ति में नियमों की अनदेखी हुई है तो यह शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्थागत प्रतिष्ठा दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं

से छात्रों के विश्वास में कमी आ सकती है, जिससे भविष्य में विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक निर्णयों पर प्रश्न उठ सकते हैं। इस बीच, कुछ निजी शैक्षणिक संस्थानों ने इस मुद्दे को लेकर टिप्पणी नहीं की, जिससे स्पष्टता की कमी बनी हुई है।

वित्तीय दृष्टिकोण से, यदि इस नियुक्ति को रद्द किया गया तो विश्वविद्यालय को अतिरिक्त खर्चों

का सामना करना पड़ेगा। डिप्टीशन की प्रक्रिया में अक्सर आवर्ती भत्ते और विशेष भत्ते शामिल होते हैं, जो बजट पर प्रभाव डालते हैं। विश्वविद्यालय के वित्त विभाग ने बताया कि रशीड अहमद को डिप्टीशन पर रखने से संबंधित खर्चें पहले से ही बजट में शामिल किए जा चुके थे। यदि नियुक्ति रद्द हुई तो इन खर्चों


Kerala’s Higher Education Department has asked Cochin University to justify the appointment of P. Rashid Ahmed as pro‑vice‑chancellor, citing the lack of prior government approval for his deputation and possible breach of rules. The university must respond within two working days, with officials warning that the posting may be revoked or disciplinary action taken if procedural irregularities are confirmed.

The Higher Education Department’s request for clarification probes compliance with state rules governing deputy appointments.
The outcome will affect procedural transparency and financial accountability in Kerala’s university administration.

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