किलोग्राम विस्फोटक सामग्री और 40 विभिन्न प्रकार के आग्नेयास्त्र पाए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर संभावित आतंकवादी गतिविधियों के लिए तैयार था। STF ने इस जाँच के दौरान 12 संदिग्धों को हिरासत में ले लिया और सभी बरामद सामान को सुरक्षित रूप से
सशस्त्र बलों के नियंत्रण में सौंप दिया गया।
बंगाल में इस प्रकार की बड़ी साजिश का पता चलना असामान्य नहीं है, क्योंकि पिछले पाँच वर्षों में राज्य ने कई बार छोटे‑मोटे विस्फोटक बरामद कराए हैं, परंतु इस बार की मात्रा और उपकरणों की तकनीकी विशिष्टता ने इसे अलग मुकाम पर रखा। 2019 में कोलकाता के
पास एक समान केस में केवल कुछ सौ ग्राम एक्सप्लोसिव्स बरामद हुए थे, जबकि 2022 में दुर्गापुर के एक औद्योगिक इलाके में 30 किलोग्राम पाउडर पाए गए थे। इन मामलों में भी STF ने सक्रिय भूमिका निभाई थी, परन्तु इस बार की जाँच में कई राज्यों के सीमा पार नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जिससे यह
संकेत मिलता है कि यह एक राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गठित साजिश हो सकती है।
पृष्ठभूमि में देखे जाने पर, इस प्रकार के विस्फोटक सामग्री की असुरक्षित उपलब्धता का मुख्य कारण अंधाधुंध कोयला खनन और निर्माण क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की कमी है। असानसोल‑दुर्गापुर क्षेत्र, जहाँ इस बार के दूसरे चरण में हथियारों का
जखीरा मिला, वह कोयले की खानें और छोटे स्तर के लोहे‑धातु उद्योगों से घिरा हुआ है। इन क्षेत्रों में अक्सर अनधिकृत स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट के लिए उपयोग किए जाने वाले गोदामों में सुरक्षा पर कम ध्यान दिया जाता है, जिससे अवैध व्यापारियों को इन वस्तुओं को आसानी से उपलब्ध कराना संभव हो जाता है।
छापेमारी
के दौरान STF टीम ने पाया कि इस नेटवर्क ने विभिन्न छोटे‑मोटे व्यवसायियों और स्थानीय राजनैतिक प्रभावशाली व्यक्तियों को अपने संचालन में शामिल किया था। बरामद दस्तावेज़ों में कुछ स्थानीय व्यापारियों के नाम और उनके बैंक खातों की जानकारी थी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि आर्थिक लेन‑देन के माध्यम से इस साजिश को वित्तीय सहायता प्रदान
की जा रही थी। इसके अलावा, कई संदेहियों ने बताया कि उन्हें इस कार्य में भाग लेने के लिए स्थानीय अपराध संगठनों की मदद मिली, जो इस क्षेत्र में पहले से ही अस्तित्व में हैं।
उसी छापेमारी के दौरान, STF ने यह भी स्थापित किया कि इस नेटवर्क का मुख्यालय एक बड़े औद्योगिक परिसर के
भीतर स्थित था, जहाँ कई कच्चे माल की आपूर्ति और प्रॉसेसिंग हो रही थी। इस परिसर में कई अज्ञात पहचान वाले कर्मचारियों को देखा गया, जो अक्सर रात में काम करते और दिन में सामान्य रूप से नहीं दिखते थे। यह संकेत मिला कि यह स्थल एक गुप्त निर्माण स्थल के रूप में उपयोग किया जा
रहा था, जहाँ विस्फोटक पदार्थों की रचना और पैकेजिंग की जा रही थी।
STF ने इस परिसर में कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए, जिनमें सिग्नल जॅमर, GPS ट्रैकर और संचार उपकरण शामिल थे, जो यह दर्शाते हैं कि नेटवर्क ने अपनी गतिविधियों को गुप्त रखने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया था। इस
तथ्य से यह संकेत मिलता है कि साजिश केवल स्थानीय अपराध तक सीमित नहीं, बल्कि यह उच्चस्तरीय तकनीकी कौशल वाले व्यक्तियों द्वारा संचालित थी।
छापेमारी के बाद, पुलिस ने तुरंत ही केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को सूचित किया और सहयोग का अनुरोध किया। CBI ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NSA) के साथ साझा
किया, जिससे आगे की जाँच में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की संभावना खुली। पश्चिम बंगाल के गृह मंत्री ने इस घटना को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती कहा और कहा कि राज्य सरकार इस प्रकार के अवैध नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
दुर्गापुर के स्थानीय राजनीतिक दलों ने
भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की। मुख्य विपक्षी दल के प्रदेश प्रमुख ने कहा कि यह साजिश राज्य सरकार की सुरक्षा व्यवस्था में खामियों को उजागर करती है और उन्होंने तुरंत एक स्वतंत्र जांच की मांग की। दूसरी ओर, ruling पार्टी के राज्य प्रमुख ने कहा कि यह कार्रवाई राज्य की सुरक्षा एजेंसियों की दक्षता का
प्रमाण है और भविष्य में इस प्रकार के नेटवर्क को रोकने के लिए अधिक कड़े नियम लागू किए जाएंगे।
विरोधी दलों ने यह भी आरोप लगाया कि इस साजिश के पीछे कुछ राजनीतिक एजेंडा हो सकता है, क्योंकि कई संदिग्धों के नाम स्थानीय
Updated: November 5, 2026
The haul suggests a sophisticated, state‑backed plot that exploited lax industrial safety to smuggle explosives, pointing to a deliberate effort to weaponise local labour and politics. Its rapid hand‑off to national and international agencies signals a growing recognition that such threats transcend borders and require coordinated, high
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