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केरल के लंका गांव में “रेसिलिएंट लंका” परियोजना से बाढ़ रोकने के सामुदायिक समाधान शुरू।

केरल के एज़़िक्कारा पंचायत के लंका गांव में बढ़ती ज्वारीय बाढ़ से निपटने के लिए एक नई सामुदायिक पहल शुरू हुई है। इस परियोजना को रेसिलिएंट लंका नाम दिया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य जल स्तर के अचानक बढ़ने पर स्थानीय लोगों को स्वायत्त समाधान प्रदान करना

है। परियोजना को कोच्चि स्थित इकोनॉक्ट, जो सामुदायिक-आधारित पर्यावरणीय एवं जलवायु मॉडलिंग तकनीक प्रदान करता है, और नवस्थापित “हैप्पीनेस प्रोजेक्ट” फाउंडेशन के सहयोग से लागू किया जा रहा है, जबकि एज़़िक्कारा पंचायत इसका समन्वय कर रही है।

लंका गांव के निवासियों ने पिछले दो दशकों में समुद्र

के स्तर में निरंतर वृद्धि और भारी वर्षा के कारण कई बार बाढ़ का सामना किया है। विशेषकर मानसून के दौरान जल निकासी की कमी से गाँव के प्रमुख सड़कों और घरों में जलजमाव की समस्या गंभीर रूप से बढ़ी। इस कारण कृषि भूमि क्षतिग्रस्त हुई, आर्थिक नुकसान

बढ़ा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम उत्पन्न हुए। स्थानीय प्रशासन ने कई बार तात्कालिक राहत प्रदान की, परंतु स्थायी समाधान की कमी बनी रही।

इकोनॉक्ट ने पहले भी केरल के विभिन्न कस्बों में जलवायु जोखिम मॉडलिंग का कार्य किया है। कंपनी का मानना है कि तकनीकी डेटा को

स्थानीय समुदाय के साथ जोड़ने से अधिक प्रभावी और टिकाऊ समाधान तैयार किए जा सकते हैं। इस परियोजना में उन्होंने उच्च-रिज़ॉल्यूशन टॉपोग्राफ़िक मैपिंग, बाढ़ पूर्वानुमान मॉडल और जल निकासी सुधार के लिए सिमुलेशन टूल्स प्रदान किए हैं। इन तकनीकों को स्थानीय स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण के साथ एकीकृत किया

गया है, जिससे वे स्वयं डेटा एकत्रित कर विश्लेषण कर सकें।

हैप्पीनेस प्रोजेक्ट, जो सामाजिक विकास के लिए स्थापित एक नई फाउंडेशन है, ने इस पहल में सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को प्रमुख बनाकर काम किया है। उन्होंने गांव में कार्यशालाओं का आयोजन किया, जिससे लोग

बाढ़ के कारणों, संभावित जोखिमों और स्वयं सहायता के उपायों को समझ सकें। साथ ही, फाउंडेशन ने स्थानीय महिलाओं के समूह को जल निकासी ग्रिड के निर्माण में भाग लेने के लिए प्रशिक्षण दिया, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में भी सुधार की उम्मीद है।

एज़़िक्कारा पंचायत

ने इस परियोजना को अपने विकास योजना में प्राथमिकता दी है और बजट के एक हिस्से को सीधे इस कार्य में आवंटित किया है। पंचायत अधिकारी ने बताया कि इस सहयोग से न केवल जल संकट को नियंत्रित किया जाएगा, बल्कि गांव के युवा वर्ग को तकनीकी कौशल

भी प्रदान किया जा सकेगा। पंचायत ने स्थानीय जल निकासी नहरों की सफाई और नये छोटे जलाशयों के निर्माण के लिए भी योजना बनायी है, जिससे जल संचयन और निकासी दोनों में सुधार होगा।

पहले दो महीनों में रेसिलिएंट लंका ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इकोनॉक्ट

ने लंका के पूरे क्षेत्र का भू-आकृतिक सर्वे किया और 3डी मॉडल तैयार किया, जिससे जल प्रवाह के मुख्य बिंदु स्पष्ट हुए। इस डेटा के आधार पर स्थानीय इंजीनियरों ने तीन प्रमुख जल निकासी बिंदुओं की पहचान की और उनके आसपास छोटे जलरोधक बांध स्थापित करने की योजना

बनाई। साथ ही, हैप्पीनेस प्रोजेक्ट ने गांव में 200 से अधिक लोगों को बाढ़ प्रतिरोधी घर बनाने की मूलभूत तकनीक सिखाई।

स्थानीय निवासियों ने इस पहल को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है। कई किसानों ने कहा कि अब वे जल के बढ़ते स्तर के कारण फसल

नुकसान से डरते नहीं हैं। एक वृद्ध महिला ने कहा, “पहले हम बाढ़ के समय घर से बाहर नहीं निकल पाते थे, अब हम खुद ही पानी के स्तर को मॉनिटर कर सकते हैं।” इस बीच, पंछी और जलजीवों की विविधता में भी सुधार दिख रहा है, क्योंकि

जल निकासी प्रणाली के सुधरने से स्थायी जलाशय बन रहे हैं।

पंचायत के प्रमुख अधिकारी ने बताया कि परियोजना के प्रारंभिक चरण में प्राप्त डेटा ने कई अप्रत्याशित बिंदुओं को उजागर किया, जैसे कि कुछ क्षेत्रों में मिट्टी की सघनता अधिक होने के कारण जल धारण क्षमता

कम है। इस जानकारी के आधार पर उन्होंने स्थानीय स्तर पर रेत और जिप्सम के मिश्रण से मिट्टी की संरचना को सुधारने की योजना बनाई। इसके अलावा, उन्होंने स्कूलों में जल सुरक्षा के बारे में विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा है।

राज्य सरकार ने

Updated: November 6, 2026


A new community-driven scheme called “Resilient Lankaa” is helping Kerala’s Lankaa village combat rising tidal floods by equipping locals with high‑resolution mapping, flood‑forecast tools and drainage‑construction training. Partnering with tech firm Econoct, the Happiness Project foundation and the Ezikkara panchayat, the initiative aims to boost flood preparedness, protect agriculture and empower residents—especially women and youth—with practical skills.

By turning flood data into a community‑run early‑warning system, Lanak’s residents are reshaping climate resilience from a top‑down aid model to a grassroots skill set—making the village itself the first line of defense.

This hands‑on approach also weaves economic uplift,

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