ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि वायु प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। इस संदेश को उन्होंने कई सरकारी निकायों और उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए दिया, जिसमें भारत की स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
भारत में ई‑मोबिलिटी का विकास पिछले पाँच वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है, लेकिन अभी भी
चार्जिंग बुनियादी ढांचे और लागत घटाने की चुनौती बाकी है। 2022 में लॉन्च हुए राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन नीति (NEVP) ने उत्पादन लक्ष्य और सब्सिडी संरचना निर्धारित की, परन्तु विभिन्न राज्यों में कार्यान्वयन की गति में अंतर दिखाई देता है। इस पृष्ठभूमि में दिल्ली को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि यहाँ की जनसंख्या,
प्रदूषण स्तर और सार्वजनिक परिवहन प्रणाली इसे एक परीक्षण स्थल बनाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी ई‑मोबिलिटी को ऊर्जा आयात निर्भरता घटाने और जलवायु लक्ष्य हासिल करने का साधन माना जाता है।
पिछले वर्ष दिल्ली ने इलेक्ट्रिक बसों की संख्या को 1500 से बढ़ाकर 3000 कर दिया, और सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट्स की संख्या 2000
के करीब पहुंच गई। लंदन के समान शहरों के साथ साझेदारी करके दिल्ली ने स्मार्ट ग्रिड तकनीक को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। इसके अलावा, राज्यपाल ने बताया कि नई नीति के तहत निजी ई‑कार निर्माताओं को उत्पादन लाइसेंस तेज़ करने और आयात शुल्क घटाने की सुविधा मिलेगी, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा
बढ़ेगी। ये उपाय न केवल स्थानीय निर्माताओं को प्रोत्साहित करेंगे, बल्कि विदेशी निवेश को भी आकर्षित करेंगे।
इन पहलों के साथ, दिल्ली के लैंडरन‑गवर्नर ने ई‑मोबिलिटी को समर्थन देने वाले विभिन्न सरकारी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2024‑25 वित्तीय वर्ष में इलेक्ट्रिक टैक्सी और दोपहिया वाहन के लिए विशेष सब्सिडी प्रदान की
जाएगी, जिससे कम आय वाले वर्ग को भी इस तकनीक तक पहुंच मिल सके। साथ ही, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत नई चार्जिंग हब्स की स्थापना की योजना है, जिसका लक्ष्य 2026 तक पूरे शहर में 10,000 चार्जिंग पॉइंट्स उपलब्ध कराना है। इस योजना में स्थानीय नगर निगमों, ऊर्जा कंपनियों और स्टार्ट‑अप्स
को सहयोगी बनाया जाएगा।
विरोधी दल और पर्यावरण समूहों ने भी इस पहल की सराहना की, परन्तु कुछ प्रश्न उठाए। कुछ उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान में बैटरी की कीमत अभी भी उच्च है, जिससे उपभोक्ता की स्वीकृति सीमित रह सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि बैटरी रीसाइक्लिंग और दोबारा उपयोग की प्रक्रिया
को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, ताकि दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके। वहीं, कुछ पर्यावरणीय NGOs ने कहा कि केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही नहीं, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन को बढ़ाना भी आवश्यक है, नहीं तो ई‑मोबिलिटी का पर्यावरणीय लाभ सीमित रहेगा।
राजनीतिक टिप्पणीकारों ने इस कदम को दिल्ली के प्रशासन के
लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सरकार की हरित संक्रमण की प्रतिबद्धता को दिखाने के लिए यह एक संकेत है, जिससे अगले चुनावों में पर्यावरणीय मुद्दे अधिक प्रमुख हो सकते हैं। आर्थिक विश्लेषकों ने अनुमान लगाया कि यदि दिल्ली सफलतापूर्वक ई‑मोबिलिटी को अपनाता
है, तो वह अन्य मेट्रो शहरों के लिए मॉडल बन सकता है, जिससे भारत की कुल ई‑वाहन बिक्री में 2028 तक 30 % की वृद्धि हो सकती है। इस दिशा में निवेश आकर्षित करने के लिए विदेशी फंड और वेंचर कैपिटल भी उत्सुक दिख रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि इस योजना के कार्यान्वयन
में तकनीकी मानकों का एकरूप होना आवश्यक है, जिससे विभिन्न निर्माताओं के बीच अंतराल कम हो। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ और चीन के साथ तकनीकी सहयोग से बैटरी उत्पादन की लागत घटेगी और चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार तेज़ होगा। इसके अलावा, सरकार द्वारा नियोजित कर राहत और सब्सिडी स्कीम्स को सही समय
पर लागू करने से उपभोक्ता विश्वास में वृद्धि होगी, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन की बिक्री में तेज़ी आ सकती है। इस प्रकार, नीतिगत स्थिरता और नियामक समर्थन की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो ई‑मोबिलिटी के कारण शहरी प्रदूषण में कमी और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार की संभावना है।
कई स्वास्थ्य संस्थानों ने बताया कि वायु प्रदूषण के कारण श्वसन रोगों में कमी आएगी, जिससे स्वास्थ्य खर्च में भी कमी आएगी। साथ ही, नई नौकरियों का सृजन भी संभावित है, विशेषकर चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर, बैटरी निर्माण और रीसाइक्लिंग क्षेत्रों में
Delhi Governor Taranjeet Singh Sandoo urged the capital to lead India’s e‑mobility push, citing its potential to boost energy security, cut pollution and spur investment through subsidies, faster licensing and expansive charging networks. The plan targets 10,000 charging points by 2026, while critics warn battery costs and renewable‑energy sourcing must improve to deliver lasting environmental gains.
The governor’s endorsement positions Delhi as a pilot for scaling electric‑vehicle adoption, linking it to national energy security and pollution reduction.
Successful implementation could inform infrastructure standards and policy incentives for other Indian metros.
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