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तेलंगाना सरकार को ‘रायथु भरोसा’ योजना की अगली किस्त में वित्तीय दबाव, एल निनो के कारण भुगतान में देरी की सम्भावना।

तेलंगाना सरकार को किसानों के लिये ‘रायथु भरोसा’ योजना के अगले किस्त को लेकर वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। मौसमी एल निनो के कारण रबी फसलों की बुवाई से बचने के निर्देशों के बाद, राज्य ने इस सहायता को पुनर्संरचना करने की घोषणा की है। सरकार ने इस बार किस्त के जारी होने की तिथि को दिसंबर के अंत की बजाय, किसानों को मिलने वाले प्रतिपूर्ति के आकार के अनुसार तय करने का संकेत दिया है।

‘रायथु भरोसा’ योजना, जिसे 2018 में शुरू किया गया था, का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत हर किसान को सालाना दो किस्तों में कुल 12,000 रुपये की सहायता मिलती है। पहले के वर्षों में, प्रत्येक किस्त का भुगतान दिसंबर के पहले या मध्य में किया जाता था, जिससे किसानों को ऋण चुकाने और बुवाई खर्चों में मदद मिलती थी।

परंतु इस साल, जलवायु विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एल निनो की तीव्रता के कारण कई क्षेत्रों में वर्षा कम हो सकती है, जिससे रबी फसलों की उपज पर असर पड़ेगा। इस कारण सरकार ने किसानों को रबी की बुवाई न करने का निर्देश जारी किया, जिससे फसल के नुकसान की आशंका बढ़ गई है। इस दिशा-निर्देश के साथ ही, किसानों को वैकल्पिक फसलों या जल संरक्षण उपायों के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2023‑24 में राज्य की कुल कृषि सहायता में ‘रायथु भरोसा’ की हिस्सेदारी लगभग 15,000 करोड़ रुपये है। इस वर्ष, कृषि विभाग ने बताया कि एल निनो के कारण अनुमानित फसल नुकसान 5,000 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। इस अनुमान के आधार पर, सरकार को अतिरिक्त प्रतिपूर्ति निधि की आवश्यकता होगी, जिससे कुल खर्च 20,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

मुख्य वित्त मंत्री, कर्नल (रिटायर्ड) वी. के. शर्मा ने कहा कि सरकार इस वित्तीय भार को कम करने के लिये विशेष केंद्र सहायता की मांग कर रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पहले भी ऐसी आपदाओं में फसल बीमा योजना के तहत सहायता प्रदान की है, लेकिन इस बार की स्थितियों के लिये अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होगी।

वित्त विभाग ने भी कहा कि राज्य की मौजूदा राजस्व स्रोतों में से बहुत कम ही इस अतिरिक्त खर्च को कवर कर सकते हैं। इसलिए, उन्होंने अनिवार्य अधिसूचना जारी की है कि यदि केंद्र से पर्याप्त सहायता नहीं मिलती, तो ‘रायथु भरोसा’ की किस्तों में कटौती या विलंबित भुगतान का विकल्प अपनाया जा सकता है।

किसानों के प्रतिनिधि संघ, तेलंगाना किसान संघ (TKF) ने इस निर्णय को ‘कृषि नीति में अस्थिरता’ कहा। उन्होंने कहा कि सरकार को न केवल मौसमी जोखिम का सामना करने के लिये तैयार रहना चाहिए, बल्कि किसानों को स्थिर आय भी प्रदान करनी चाहिए। संघ ने सरकार से तुरंत केंद्र के साथ समन्वय कर अतिरिक्त फसल प्रतिपूर्ति निधि की व्यवस्था करने की मांग की।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनीता राव, जो राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) की प्रमुख हैं, ने बताया कि एल निनो के प्रभाव से न केवल रबी बल्कि मंडी मूल्यों में भी गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि किसानों को वैकल्पिक फसल चयन, जलभंडारण और जलसंरक्षण तकनीकों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

राज्य सरकार ने बताया कि वह इस वर्ष ‘डिजिटल फसल बीमा’ योजना को विस्तारित कर रही है, जिससे छोटे किसानों को प्रतिकूल मौसम के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई में मदद मिल सके। इस योजना के तहत, किसानों को बीमा प्रीमियम राज्य द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि प्रतिपूर्ति सीधे उनके बैंक खातों में जाएगी।

आर्थिक विशेषज्ञ प्रो. राजेश चंद्र, दिल्ली विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर, ने कहा कि ‘रायथु भरोसा’ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में वित्तीय स्थिरता बनाए रखना सरकार के लिये चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र से पर्याप्त सहायता नहीं मिलती, तो राज्य के अन्य विकास योजनाओं में कटौती की संभावना बनती है, जिससे समग्र आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है।

सामाजिक रूप से, इस योजना में देरी या कमी से किसानों के जीवन स्तर पर सीधा असर पड़ेगा। कई छोटे किसान जो अपने कृषि ऋणों का भुगतान इस सहायता पर निर्भर करते हैं, उन्हें अतिरिक्त ऋण लेने के लिये मजबूर होना पड़ेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उधारी की समस्या बढ़ सकती है और सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता है।

राजनीतिक दृष्ट

Updated: November 6, 2026

The El Niño shock is turning Telangana’s “Rythu Bhoosa” from a safety net into a fiscal time‑bomb, forcing the state to gamble on central cash or risk cutting other development projects. If the payout stalls, small farmers will be pushed back into debt cycles,

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