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केरल में बार लाइसेंस विवाद के बाद राजस्व आयुक्त सीरम राव को पदस्थापित किया गया; एक्साइज़ मंत्री लीजु ने असहमति जताई।

केरल के राजस्व आयुक्त सीरम संबासिव राव को बार लाइसेंस विवाद में मंत्री के साथ असहमति के कारण पदस्थापित किया गया, यह सूचना आज राज्य के मुख्य वित्तीय प्राधिकरण ने दी। यह बदलाव केवल दो हफ्ते पहले हुए, जब राज्य के एक्साइज़ मंत्री एम. लीजु ने कोच्चि हवाई अड्डे पर एक लाउंज को बार लाइसेंस देने पर स्पष्ट असंतोष व्यक्त किया था, जबकि समान आवेदन पर सरकार ने पहले ही आपत्ति जताई थी। इस निर्णय ने केरल के शराब नीतियों के प्रबंधन में आंतरिक असहमति को उजागर किया है और वित्तीय प्रबंधन में संभावित बदलावों की ओर इशारा किया है।

केरल के एक्साइज़ विभाग की स्थापना 1964 में हुई थी, जिसका मुख्य कार्य राज्य में शराब की बिक्री, वितरण और कर संग्रहण को नियंत्रित करना है। आयुक्त सीरम संबासिव राव, जिन्होंने पिछले पाँच वर्षों में कई प्रमुख नीतियों को लागू किया, उनके कार्यकाल को अब समाप्त कर एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी को पद पर स्थापित किया गया। यह परिवर्तन पहले से ही राजनीतिक और प्रशासनिक परिप्रेक्ष्य में चर्चा का विषय बन चुका था, क्योंकि लिचन लाइसेंस के जारी करने में कई बार विरोध और समर्थन दोनों की आवाज़ें सुनाई देती रही हैं।

केरल सरकार ने पिछले दो वर्षों में शराब के सेवन को नियंत्रित करने के लिए कई कठोर कदम उठाए हैं, जिनमें शराबी दुकानों की संख्या घटाना और उच्च कर दरें लागू करना शामिल है। इन नीतियों का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुधरना और राज्य की राजस्व वृद्धि को स्थिर करना है। हालांकि, कोच्चि हवाई अड्डे के लाउंज पर बार लाइसेंस की मंजूरी ने इन लक्ष्यों के साथ टकराव पैदा किया, क्योंकि यह एक विशेष वर्ग के ग्राहकों को उच्चस्तरीय शराब सेवाएं प्रदान करने की संभावना रखता था। इस पर सरकार ने प्रारम्भिक आपत्ति जताई थी, लेकिन अंततः लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में अड़चनें आईं।

लाइसेंस विवाद का प्रमुख चरण तब आया जब एक्साइज़ मंत्री एम. लीजु ने सार्वजनिक मंच पर यह स्पष्ट किया कि वह इस लाउंज को बार लाइसेंस नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा कि ऐसे विशेष सुविधाओं को राज्य की सामान्य शराब नीति से अलग नहीं किया जा सकता। इसके बाद, आयुक्त राव ने इस निर्णय पर अपने विचार व्यक्त किए, जिसमें उन्होंने कहा कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में सभी कानूनी और नियामक मानकों का पालन किया जाना चाहिए।

इन बयानों के बाद, कोच्चि हवाई अड्डे की प्रशासनिक समिति ने लाउंज के प्रबंधन को एक औपचारिक नोटिस भेजा, जिसमें लाइसेंस जारी करने की शर्तों और संभावित प्रतिबंधों को स्पष्ट किया गया। इस बीच, लाउंज के मालिकों ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई, यह दावा करते हुए कि उन्हें समान परिस्थितियों में अन्य प्रतिस्पर्धियों को लाइसेंस मिल चुका है। इस मुद्दे ने राज्य के विभिन्न व्यापार संघों को भी असंतोष में डाल दिया, जिन्होंने कहा कि नीतियों में असमानता व्यापारिक माहौल को नुकसान पहुंचा सकती है।

आयोग के भीतर इस विवाद ने कई स्तरों पर तनाव उत्पन्न किया। आयुक्त राव की पदस्थापना को एक संकेत के रूप में देखा गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। इस निर्णय के बाद, कई उच्च पदस्थ अधिकारीयों ने अपने विचार व्यक्त किए, जिनमें कहा गया कि शराब नीति में सख़्ती और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।

पिछले कुछ हफ्तों में, एक्साइज़ विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई मीटिंगों का आयोजन किया, जिसमें लाउंज के लाइसेंस के आर्थिक प्रभाव और सामाजिक परिणामों पर चर्चा हुई। इन मीटिंगों में वित्तीय विशेषज्ञों ने बताया कि यदि लाइसेंस जारी किया गया तो राज्य को अनुमानित 12 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है, जबकि सामाजिक समूहों ने कहा कि इससे शराब की उपलब्धता में वृद्धि और सामाजिक समस्याओं में बढ़ोतरी हो सकती है।

एक्साइज़ मंत्री एम. लीजु ने अपने सार्वजनिक बयानों में दोहराया कि उनका मुख्य लक्ष्य सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिरता है, और इस दिशा में कोई भी विशेष लाभ नहीं दिया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों में निरंतरता और पारदर्शिता आवश्यक है, जिससे सभी हितधारकों को समान अवसर मिल सके। इसके जवाब में, आयुक्त राव ने कहा कि उनका प्राथमिक कार्य राज्य के राजस्व को बढ़ाना है, और यह सुनिश्चित करना है कि सभी लाइसेंस प्रक्रिया में नियमों का पालन हो।

राजनीतिक दृष्टिकोण से इस विवाद ने केरल सरकार के भीतर तनाव को बढ़ा दिया है। मुख्य विरोधी पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह आर्थिक हितों को सार्वजनिक स्वास्थ्य से ऊपर रख रही है। वहीं, सरकार ने कहा कि यह निर्णय केवल कानूनी प्रक्रियाओं और आर्थिक लाभ को ध्यान में रखकर लिया गया है। इस बीच, सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किया, यह मांग करते हुए कि शराब नीतियों को कड़ा किया जाए और विशेष लाउंज को विशेषाधिकार नहीं दिया जाए।

आर्थिक प्रभाव की बात करें तो, बार लाइसेंस से उत्पन्न संभावित राजस्व को राज्य के बजट में महत्वपूर्ण योगदान माना गया है। विशेषज्ञों का कहना

Kerala’s sudden reshuffle signals a power tug‑war where fiscal pragmatism is beginning to outweigh the state’s hard‑line temperance narrative, hinting that future liquor policies may be calibrated more by revenue forecasts than by public‑health rhetoric.
If the government leans into the 12

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