गणेश चतुर्थी का उत्सव भारत में हर साल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, और महाराष्ट्र में यह विशेष महत्व रखता है। पिछले कुछ वर्षों में इस महोत्सव में रचनात्मक अभिव्यक्तियों का प्रयोग बढ़ा है, जहाँ पंडाल, झांकियों और सार्वजनिक कला के माध्यम से जनता को आकर्षित किया जाता है। ठाणे का समुद्र तट, जो पहले भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का स्थल रहा है, इस वर्ष विशेष रूप से सैंड आर्ट के प्रयोग से अलग पहचान बना रहा है।
सुदर्शन पटनायक ने पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर रेत की मूर्तियों से प्रशंसा पाई है। उनकी रचनाएँ अक्सर पर्यावरणीय संदेश देती हैं, लेकिन इस बार उन्होंने धार्मिक तत्व को कला के साथ जोड़कर पंचमुखी गणेश की कल्पना को साकार किया। उन्होंने बताया कि पाँच मुख विभिन्न भावों—शांति, शक्ति, प्रेम, करुणा और आनंद—को दर्शाते हैं, जिससे दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति मिलती है।
प्रतिमा का निर्माण लगभग दो दिनों में पूर्ण हुआ। कलाकार ने समुद्र तट की सूखी रेत को चुनिंदा रूप से छांटा, फिर विशेष तकनीकों से उसे मोड़कर आकार दिया। निर्माण के दौरान मौसम की स्थिति, रेत की नमी और लहरों की गति को लगातार निगरानी में रखा गया। यह प्रक्रिया स्थानीय मीडिया और सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर लाइव प्रसारित हुई, जिससे बड़ी संख्या में दर्शकों ने इसे रियल‑टाइम में देखा।
स्थानीय प्रशासन ने इस आयोजन को सुदूरन की अनुमति के तहत सुविधाजनक बनाया। ठाणे नगर परिषद ने सुरक्षा, सफाई और भीड़ नियंत्रण के उपायों को प्राथमिकता दी। इसके अलावा, उन्होंने इस कला को शहर के पर्यटन आकर्षण के रूप में प्रमोट करने की योजना बनाई। इस पहल से शहर की आर्थिक सक्रियता में संभावित वृद्धि की उम्मीद है।
स्थानीय व्यापारियों ने इस अवसर को लाभ उठाते हुए भोजन, स्मृति चिन्ह और वस्त्रों की बिक्री में वृद्धि दर्ज की। कई छोटे उद्यमियों ने विशेष रूप से गणेश चतुर्थी के थीम पर आधारित उत्पाद तैयार किए। इस आर्थिक गतिविधि से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए, जिससे सामाजिक स्थिरता को बल मिला। साथ ही, पर्यटकों की भीड़ ने स्थानीय सेवाओं की मांग को बढ़ाया।
स्थानीय निवासियों ने इस कलाकृति को सांस्कृतिक धरोहर की तरह सराहा। कई लोगों ने बताया कि पंचमुखी गणेश का दृश्य उनके धार्मिक भावनाओं को नई दिशा देता है। कुछ बुज़ुर्ग नागरिकों ने कहा कि यह रेत की मूर्तिकला पारंपरिक पंडाल से अलग नई पहचान स्थापित करती है। युवा वर्ग ने इसे सामाजिक मीडिया पर साझा करने में उत्साह दिखाया, जिससे डिजिटल जुड़ाव बढ़ा।
राजनीतिक प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम को सांस्कृतिक एकता के प्रतीक के रूप में उल्लेख किया। ठाणे के विधायक ने कहा कि ऐसी रचनात्मक पहलों से शहर की छवि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उन्नत होती है। राज्य सरकार के संस्कृति विभाग के अधिकारी ने इस प्रयास को विरासत संरक्षण और नवाचार का संगम कहा। उन्होंने भविष्य में समान कार्यक्रमों के लिए समर्थन का आश्वासन दिया।
आर्थिक विश्लेषकों ने इस आयोजन के संभावित प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक पर्यटन की बढ़ती मांग के साथ, स्थानीय व्यवसायों को लाभ पहुंचाने वाले कार्यक्रमों की आवश्यकता है। रेत की कला जैसी अस्थायी संरचनाएँ शहर के ब्रांड मूल्य को बढ़ा सकती हैं, जिससे निवेशकों का ध्यान आकर्षित होता है। इस तरह के इवेंट्स से सार्वजनिक-निजी साझेदारी की संभावनाएँ भी उभरती हैं।
समाजिक दृष्टिकोण से, इस प्रकार की सार्वजनिक कला स्थानीय समुदाय को एकजुट करती है। विभिन्न सामाजिक समूह इस कलाकृति के चारों ओर मिलकर फोटो खींचते, चर्चा करते और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेते हैं। इससे सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं और सांस्कृतिक विविधता को सम्मान मिलता है। साथ ही, रेत के माध्यम से बनायी गई इस प्रतिमा ने पर्यावरणीय जागरूकता को भी प्रोत्साहित किया, क्योंकि रेत एक पुनर्नवीनीकरण सामग्री है।
विशेषज्ञों ने कहा कि पंचमुखी गणेश की इस रचना में परम्परा और आधुनिकता का संत
Updated: September 14, 2026