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Posts tagged as “वित्तीय अपराध”

कोलकाता पुलिस ने यूट्यूब‑व्हाट्सएप आधारित ऑनलाइन जुआ‑धोखाधड़ी के 87 शिकारों को गिरफ्तार किया

कोलकाता के उत्तरवार्ता क्षेत्र के एक व्यस्त बाजार में सुबह के समय सैकड़ों लोग एकत्रित हुए थे, जहाँ पुलिस ने अचानक एक बड़े साइबर‑फ़्रॉड की गिरफ़्तारी का एलान किया। स्थानीय स्रोतों के अनुसार, यूट्यूब और व्हाट्सएप के माध्यम से संचालित एक ऑनलाइन सट्टे का नेटवर्क कई महीनों से शहर के विभिन्न इलाकों

में सक्रिय था, जिससे हजारों लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई का उल्लेखनीय हिस्सा खो दिया। पुलिस ने बताया कि इस गिरफ़्तारी में दो सौ से अधिक फ़ोन नंबर और पाँच सैकड़ा तक के वित्तीय लेन‑देनों का रिकॉर्ड बरामद किया गया है। इस घटना ने ऑनलाइन जुए के जोखिमों को लेकर नागरिकों

में गहरी चिंता उत्पन्न कर दी है।

ऑनलाइन सट्टे का यह नेटवर्क 2022 के मध्य में कोलकाता के उपनगरों में शुरू हुआ, जब कुछ स्थानीय युवा समूहों ने यूट्यूब पर “सुरक्षित जुआ” के झूठे विज्ञापन चलाना शुरू किए। ये विज्ञापन तेज़ी से व्हाट्सएप ग्रुप्स में फैलते गए, जहाँ प्रतिभागियों को उच्च रिटर्न का

वादा किया जाता था। इस प्रकार का प्रचलन धीरे‑धीरे शहर के विभिन्न वर्गों तक पहुँच गया, विशेषकर मध्यम वर्ग के उन लोगों तक, जो आर्थिक दबावों से जूझ रहे थे। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक अस्थिरता और डिजिटल जुड़ाव के बढ़ते पैमाने ने इस तरह के घोटालों को पनपने का

अवसर प्रदान किया।

पिछले वर्ष में कोलकाता पुलिस ने कई बार ऑनलाइन जुए की रिपोर्टों को दर्ज किया था, परन्तु साक्ष्य की कमी के कारण कार्रवाई सीमित रही। इस बार, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से डिजिटल फ़ोरेंसिक टीम ने व्हाट्सएप में छिपे ट्रांसफ़र रिकॉर्ड और यूट्यूब चैनल के बैक‑एंड डेटा को विश्लेषण

करके ठेकेदारों की पहचान की। उन्होंने बताया कि इस नेटवर्क के मुख्य संचालक ने विभिन्न डिजिटल टूल्स का उपयोग करके लेन‑देनों को एन्क्रिप्ट किया, जिससे जांचकर्ताओं के लिये ट्रेस करना कठिन हो गया। अंततः, एक जालसाज़ी संदेश के माध्यम से कई पीड़ितों के फ़ोन नंबरों की सूची प्राप्त कर गिरफ़्तारी संभव हुई।

जांच

के दौरान पता चला कि इस नेटवर्क ने अपने ग्राहकों को “ट्रैक रिटर्न” नामक एक फर्जी योजना के तहत आकर्षित किया। इस योजना में उपयोगकर्ता को एक छोटा शुरुआती निवेश करने को कहा जाता था, जिसके बाद उन्हें झूठी जीत की सूचना दी जाती थी, जिससे वे बड़ी राशि निवेश करने के

लिए प्रेरित होते। इसके बाद, नेटवर्क ने कई स्तरों पर “सुपर बॉट” तकनीक का प्रयोग करके वर्चुअल रूप से जीत की घोषणा की, जिससे कई लोग वास्तविक लाभ की आशा में फँस गए। इस प्रकार के धोखेबाज मॉडल ने ऑनलाइन सट्टे के प्रति जनता की समझ को और गहरा कर दिया।

फिर भी,

इस जाल का सबसे बड़ा आकर्षण था सोशल मीडिया पर निर्मित भरोसेमंद छवि। कई समूहों ने वास्तविक जीत के स्क्रीनशॉट और ग्राहकों की प्रशंसापत्रों को साझा किया, जिससे संभावित नए निवेशकों को विश्वास हो गया। व्हाट्सएप ग्रुप में सक्रिय रूप से प्रश्न‑उत्तर सत्र आयोजित किए जाते थे, जहाँ “सहायक” और “सलाहकार” के

रूप में कार्य करने वाले सदस्य संभावित पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करते थे। इस तरह के संवाद ने कई लोगों को अपनी बचत को इस अवैध मंच पर डालने के लिए प्रेरित किया, जिससे नुकसान का दायरा निरंतर बढ़ता गया।

गिरफ़्तारी के बाद, पुलिस ने 87 प्रतिवादियों को हिरासत में ले

लिया, जिनमें से कई को आर्थिक अपराध अधिनियम के तहत हिरासत में रखा गया। साथ ही, उन्होंने 152 से अधिक मोबाइल उपकरणों को ज़ब्त कर लिया, जिसमें कई एन्क्रिप्टेड फाइलें और भुगतान की गई एपीआई की कॉपी मिल गई। अधिकारियों ने कहा कि इन सबूतों के आधार पर आगे के कानूनी कदम

उठाए जाएंगे और पीड़ितों को उनकी हानि की प्रतिपूर्ति दिलाने के लिये विशेष प्रावधान किया जाएगा। इस प्रक्रिया में वित्तीय संस्थानों की सहयोगिता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

पीड़ितों में से एक 38 वर्षीय बैंकर, जो अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिये इस सट्टे में फँस गया था, ने कहा कि

वह “भ्रांति” के जाल में फँसकर अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा खो चुका है। कई अन्य व्यक्तियों ने भी समान कहानियाँ सुनाई, जहाँ उन्होंने अपने बचत, बच्चों की शिक्षा के लिए रखी रकम और यहाँ तक कि स्वास्थ्य बीमा की प्रीमियम भी इस धोखाधड़ी में खो दी। इन शिकायतों के जवाब

में, कोलकाता महानगर पुलिस ने कहा कि वे पीड़ितों के साथ मिलकर हर्जाने की प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाएंगे और भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिये डिजिटल साक्षरता अभियानों को बढ़ावा देंगे।

स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की। एक

Updated: September 23, 2026

The operation seized over 200 phone numbers and records of 500 financial transactions, highlighting the scale of online betting fraud in Kolkata. It demonstrates law‑enforcement’s capacity to trace encrypted digital networks through coordinated forensic analysis.