मनोरम मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख ने बताया कि मानसून की विदाई का मुख्य कारण एटलांटिक‑इंडियन महासागर के बीच तापीय असंतुलन है, जिसके कारण वर्षा के बादल उत्तर‑पूर्व की ओर मुड़ रहे हैं। पिछले दो हफ्तों में राजस्थान ने औसत 10 % कम वर्षा प्राप्त की, जो 1991‑2020 के औसत से लगभग 25 % कम है। इस परिदृश्य में, जलसंधि और जलभाषा योजनाओं की त्वरित कार्यवाही अनिवार्य हो गई है, क्योंकि कई जिलों में जलाशयों की जलस्तर पहले से ही न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है।
इतिहास में देखी गई इस तरह की अचानक मानसून की कमी ने अक्सर कृषि उत्पादन में गिरावट, जल संकट और सामाजिक असंतोष को जन्म दिया है। पिछले वर्ष जब इसी अवधि में बारिश में कमी आई थी, तब गेहूँ की पैदावार में 12 % की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे राज्य के कुल कृषि उत्पादन पर लगभग 1.5 % का असर पड़ा। इस बार भी, किसानों को बीज बोने और सिंचाई की योजना पुनः विचार करनी पड़ेगी, क्योंकि जलसंधियों की भरपूर पूर्ति नहीं होने से फसल पर असर पड़ने की संभावना बढ़ी है।
राज्य के प्रमुख जल संसाधन अधिकारी ने बताया कि जलभण्डारों की वर्तमान स्थिति गंभीर है। अजमेर जलाशय का स्तर 35 % तक गिर चुका है, जबकि जालंधर की नहरें भी सूखी हुई हैं। जल विभाग ने आपातकालीन जल आपूर्ति योजना तैयार कर ली है, जिसमें टैंकर ट्रक द्वारा जल वितरण, नहरों की सफाई और जल पुनर्चक्रण परियोजनाओं को तेज़ी से लागू करने का प्रस्ताव है। यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में जल की कमी को कम करने के लिए उठाया गया है।
बिजली विभाग ने भी इस सूखे के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए तापीय बिजली उत्पादन में कमी का पूर्वानुमान दिया है। राजस्थानी तापीय संयंत्रों में कोयला आपूर्ति में बाधा आने से उत्पादन क्षमता में 8 % तक गिरावट आ सकती है। इस कारण से राज्य ने नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, विशेषकर सौर ऊर्जा, को बढ़ावा देने का कदम उठाया है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पर्यटन उद्योग पर भी इस मौसम परिवर्तन का असर स्पष्ट है। जैसलमेर में तापमान 40.5 °C तक पहुंच गया, जिससे पर्यटन स्थलों पर आगंतुकों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। होटल और रेस्तरां व्यवसायियों ने बताया कि गर्मी के कारण विदेशी यात्रियों के साथ-साथ घरेलू पर्यटकों की रुचि कम हुई है, जिससे राजस्व में लगभग 5 % की कमी हुई है।
राज्य के कृषि विभाग ने किसानों को सूखे के खिलाफ प्रतिरोधी फसलें, जैसे बाजरा और ज्वार, अपनाने की सलाह दी है। साथ ही, जल संरक्षण के लिए ड्रिप इरिगेशन और माइक्रो‑इरेजिंग तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उपायों से जल बचत और फसल उत्पादन में स्थिरता लाने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य के प्रमुख राजनीतिक नेता, मुख्यमंत्री ने इस सूखे को पर्यावरणीय चुनौती कहा और कहा कि सरकार जल संरक्षण, जल पुनर्प्राप्ति और जलवायु अनुकूलन के लिए विशेष योजना तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता जल सुरक्षा है और हम इसे सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव कदम उठाएंगे।
विपक्षी दल के प्रमुख भी इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने वर्षा के पूर्वानुमान को सही ढंग से नहीं बताया और जल संसाधनों के प्रबंधन में लापरवाही बरती। उन्होंने मांग की कि जल मंत्रालय और राज्य सरकार मिलकर एक स्वतंत्र जांच आयोग स्थापित करें, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।
अर्थशास्त्री डॉ. श्यामलाल बंसल ने बताया कि सूखा
Updated: September 23, 2026
The abrupt retreat of the monsoon exposes Rajasthan’s chronic reliance on a single rainfall corridor, turning every delayed cloud into a fiscal shock that ripples from farms to power plants. If the state can’t fast‑track water‑banking and diversify crop portfolios now, the drought will cement
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