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मुजफ्फरपुर में दो कॉलेज छात्राओं पर चाकू से हमला, दो आरोपियों को हिरासत में, पुलिस ने “हत्या के प्रयास” की FIR दर्ज की

मुजफ्फरपुर में दो कॉलेज‑स्तर की छात्राओं पर 17 अप्रैल को सड़कों पर चाकू से हमला किया गया, जहाँ एक ने पहले उन्हें यौन बलात्कार की धमकी दी थी, पुलिस ने आज सुबह इस मामले की शुरुआती जांच के बाद दो आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
स्थानीय मीडिया ने इस घटना को “हिंसक आक्रमण” कहकर उजागर किया, जबकि पुलिस ने कहा कि मामला पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाएगा।घटना के समय दो युवा महिलाएँ, जो एक निजी कॉलेज में प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही थीं, एक प्रमुख सड़के के किनारे एक सामान्य बातचीत के बाद अचानक विवाद में पड़ गईं। स्रोतों के अनुसार, दोनों में से एक ने दूसरी को “यदि सहमति नहीं देती तो मैं तुम्हें मार डालूँगी” जैसी स्पष्ट यौन उत्पीड़न की धमकी दी। यह संवाद तब तक जारी रहा जब तक कि विवाद का स्तर बढ़ता नहीं गया।

पुलिस के अनुसार, इस दौरान शारीरिक झड़प के साथ ही दोनों महिलाओं के हाथों में चाकू और अन्य तेज़ वस्तुएँ आ गईं। एक रिपोर्टर के साथ बातचीत करने वाले गवाह ने बताया कि हमला लगभग पाँच मिनट तक चलने के बाद ही स्थानीय निवासियों के हस्तक्षेप से रुक गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत ही पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया।

पुलिस की प्रारम्भिक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हमले में दो अलग‑अलग चाकू के ब्लेड का प्रयोग किया गया, जिससे दोनों पीड़िताओं को सिर, कंधे और हाथ में हल्की‑से‑मध्यम चोटें आईं। चोटों की गंभीरता के मद्देनज़र, उन्हें नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

तत्काल बाद में, पुलिस ने घटना स्थल का विस्तृत फोरेंसिक सर्वेक्षण किया और दोनों पीड़िताओं से विस्तृत बयान लिये। इस दौरान, आरोपियों के खिलाफ “हत्या के प्रयास” तथा “धमकी देना” के तहत FIR दर्ज की गई, जबकि स्थानीय महिला अधिकार समूह ने कहा कि यह मामला महिला सुरक्षा के संदर्भ में एक चेतावनी स्वरूप है।

संबंधित कॉलेज ने इस घटना पर तुरंत टिप्पणी की, कहा कि संस्थान इस प्रकार की हिंसा को सहन नहीं करेगा और पीड़िताओं को पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि वह इस मामले में सभी आवश्यक क़ानूनी उपाय करेगा और छात्रों को सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय लागू करेगा।

इसी बीच, मुजफ्फरपुर पुलिस प्रमुख ने बताया कि दो गिरफ्तार किए गए संदिग्धों ने प्रारम्भ में सभी आरोपों से इनकार किया था, परन्तु आगे के पूछताछ में उन्होंने भागीदारी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में “कठोर सजा” का प्रावधान मौजूद है और अदालत में साक्ष्य को पूरी तरह प्रस्तुत किया जाएगा।

राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी ने कहा कि इस प्रकार के मामलों को रोकने के लिए “सुरक्षा प्रोटोकॉल” को सख्ती से लागू किया जाएगा और स्कूल‑कॉलेजों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण को अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

मुजफ्फरपुर के स्थानीय राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। एक सांसद ने कहा कि “सड़क पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार को कड़ा रुख अपनाना चाहिए” और इस दिशा में “कड़े क़ानूनी कदम” उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि “समाज में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना आवश्यक है, अन्यथा ऐसे हिंसक कृत्य बढ़ते रहेंगे।”

आर्थिक दृष्टिकोण से, इस प्रकार के हिंसक घटनाक्रम से स्थानीय व्यवसायों और शिक्षा संस्थानों की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी घटनाएँ नियमित रूप से घटती रहती हैं तो निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है और छात्रों की सुरक्षा के प्रति चिंताएँ बढ़ सकती हैं, जिससे शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश दर में गिरावट आ सकती है।

सामाजिक स्तर पर, इस घटना ने महिलाओं के सार्वजनिक स्थानों में सुरक्षा को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।


Two first‑year college students in Muzaffarpur were slashed with knives after a verbal spat that escalated into sexual threats, leaving them with head, shoulder and arm injuries; police have arrested the two assailants and filed charges of attempted murder and intimidation. The incident has sparked calls from officials, activists and the college for stricter safety protocols and faster legal action to protect women in public spaces.

The knife attack on college girls in Muzaffarpur shows how quickly a casual street chat can explode into gender‑based violence, exposing the fragile trust women have in public spaces. If authorities don’t move beyond perfunctory arrests to enforce stricter safety protocols and self‑defence training, the

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