में अधिक उत्पादन सम्भव बनाने के लिए यांत्रिक उपकरणों की जानकारी और प्रयोगशिल्प प्रदान करना था, जिससे खेती की उत्पादकता में सुधार हो सके।
विष्णु शुगर मिल्स ने पिछले दो दशकों में गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए कई पहलें चलायी हैं, परंतु पारम्परिक तरीकों से खेती करने वाले
छोटे किसानों को नई तकनीक अपनाने में कठिनाइयाँ आती थीं। इसलिए राज्य सरकार ने 2026‑27 में यांत्रिकीकरण योजना का विस्तार किया, जिसमें यंत्रों का सस्ती कीमत पर वितरण, फाइनेंसिंग सुविधा और तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है। इस योजना का मूल सिद्धांत किसानों को उच्च लागत वाले मैनुअल कार्यों से मुक्त
कराना और उत्पादन‑खर्च घटाकर लाभ मार्जिन बढ़ाना है।
पिछले वर्ष के आँकड़े दर्शाते हैं कि गोपालगंज जिले में गन्ना उत्पादन में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि प्रति एकड़ उपज में 8 प्रतिशत सुधार दिखा। हालांकि, यांत्रिक उपकरणों की उपलब्धता और उपयोग में असमानता बनी हुई थी, विशेषकर
सीमांत किसानों के बीच। इस संदर्भ में, कृषि विभाग ने पिछले महीने यंत्र निर्माताओं के साथ मिलकर 15 मोबाइल प्रदर्शन इकाइयाँ स्थापित करने का निर्णय लिया, जिससे दूरस्थ गांवों तक भी जानकारी पहुँच सके।
मेले में कई प्रमुख कृषि यंत्र निर्माताओं ने स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन
किया। उन्होंने ट्रैक्टर‑अटैच्ड रोटावेटर, ड्यूप्लेक्स रोटावेटर, गन्ना कट्टर, और स्वचालित बोवाई मशीनें दिखायीं, साथ ही इन उपकरणों की लागत‑लाभ विश्लेषण भी प्रस्तुत किया। किसानों को प्रत्यक्ष रूप से मशीनों का कार्य देख कर समझ आया कि किस प्रकार कम श्रम से अधिक भूमि का उपयोग किया जा सकता है।
कई प्रदर्शकों ने फाइनेंसिंग विकल्पों के साथ 6‑12 महीने की आसान किस्त योजना भी पेश की, जिससे निवेश का बोझ कम हो सके।
साथ ही, तकनीकी विशेषज्ञों ने यंत्रों के रख‑रखाव, मरम्मत और संचालन पर कार्यशालाएँ आयोजित कीं। उन्होंने बताया कि उचित रख‑रखाव से मशीनों की आयु बढ़ती
है और उत्पादन में निरंतरता बनी रहती है। किसानों ने बताया कि पहले के अनुभवों में मशीनों के खराबी से उत्पादन में हानि हुई थी, लेकिन अब नियमित निरीक्षण और प्रशिक्षित तकनीशियन की उपलब्धता से ऐसी समस्याएँ घट रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान गोपालगंज के गन्ना विभाग के
मुख्य अधिकारी ने कहा कि यांत्रिकीकरण से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि जल संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग भी संभव होगा। उन्होंने उल्लेख किया कि रोटावेटर और ड्रिप इरिगेशन संयोजन से पानी की खपत में 20‑25 प्रतिशत की कमी आती है, जिससे जलसंकट वाले क्षेत्रों में खेती टिकाऊ बनती
है। इस पहल से किसानों को बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतें प्राप्त करने की संभावना भी बढ़ेगी।
विष्णु शुगर मिल्स के प्रबंधन ने इस कार्यक्रम को अपने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत प्रमुख मानते हुए कहा कि यांत्रिकीकरण से मिल को उच्च गुणवत्ता वाले गन्ने की आपूर्ति सुदृढ़
होगी। उन्होंने बताया कि मिल को अब प्रति टन गन्ने में 15 प्रतिशत तक की लागत बचत की उम्मीद है, जिससे शुगर उत्पादन में लाभ मार्जिन बढ़ेगा। यह आर्थिक लाभ मिल की निर्यात क्षमता को भी सुदृढ़ करेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
कृषि यंत्र निर्माताओं
की संघ ने बताया कि इस मेले में उन्होंने 250 से अधिक मशीनें प्रदर्शित कीं और लगभग 180 किसानों ने तत्काल खरीद या फाइनेंसिंग के लिए आवेदन किया। उन्होंने यह भी कहा कि अगले दो वर्षों में इस योजना के तहत 1,200 नई मशीनों की डिलीवरी की जाएगी, जिससे
कुल 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में यांत्रिकीकरण का लक्ष्य हासिल होगा। यह आंकड़ा राज्य के कुल गन्ना क्षेत्र के लगभग 8 प्रतिशत के बराबर है।
स्थानीय किसान संघ के अध्यक्ष ने कहा कि यांत्रिकीकरण योजना ने छोटे किसानों को बड़े निवेश के बिना आधुनिक तकनीक अपनाने का अवसर दिया
है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई किसान अब पारिवारिक श्रम पर निर्भर नहीं रहेंगे, जिससे ग्रामीण रोजगार की संरचना में बदलाव आएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मशीनों की देखभाल और उचित उपयोग के लिए निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता रहेगी।
Updated: September 11, 2026