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Maharashtra पालघर गैस लीक: बोइसर MIDC में ओलेयम गैस का रिसाव, 2000 से अधिक लोग सुरक्षित निकाले गए

पालघर, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के पालघर जिले में सोमवार दोपहर एक केमिकल कंपनी से खतरनाक गैस लीक होने के बाद हड़कंप मच गया। बोइसर MIDC स्थित भगेरिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड (पुराना नाम जेनिथ केमिकल्स) में ओलेयम गैस (Oleum Gas) के रिसाव के कारण एहतियातन 2,000 से अधिक स्थानीय निवासियों और स्कूली छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

कैसे हुई घटना?

जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 2:00 बजे कंपनी के 2,500 लीटर क्षमता वाले टैंक से धुएं का रिसाव शुरू हुआ। देखते ही देखते सफेद धुएं का घना बादल साल्वाड़ और पासथल गांवों सहित लगभग 5 किलोमीटर के दायरे में फैल गया।

बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया:

  • स्कूलों से निकासी: पास के तारापुर विद्यामंदिर स्कूल के लगभग 1,600 छात्रों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाला गया।
  • गांव खाली कराए गए: साल्वाड़ और पासथल के करीब 1,000 ग्रामीणों को प्रभावित क्षेत्र से दूर भेजा गया।
  • राहत टीमें: NDRF, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की टीम और दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला।

क्या है वर्तमान स्थिति?

पालघर के पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख ने बताया कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। बचाव दल ने रेत की बोरियों (Sandbags) का उपयोग करके रिसाव को 95% तक दबा दिया है। हालांकि कुछ लोगों ने आंखों में जलन की शिकायत की, लेकिन किसी भी गंभीर हताहत या जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है।

जांच के आदेश

जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य निदेशालय (DISH) इस बात की जांच कर रहा है कि क्या कंपनी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी।

मिडिल ईस्ट ऑयल शॉक का खतरा: चीन, भारत और जापान की तेल-गैस निर्भरता कितनी? जानिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद होने पर क्या होगा असर

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। तेल और गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा जिस समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, वह है Strait of Hormuz (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़)। यह संकीर्ण जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के ऊर्जा व्यापार की धुरी माना जाता है। यदि यहां किसी कारण से बाधा आती है, तो उसका सीधा असर एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं — चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया — पर पड़ सकता है।

यह रिपोर्ट बताती है कि चीन, भारत और जापान कितनी मात्रा में मध्य पूर्व से कच्चा तेल (Crude Oil) और एलएनजी (LNG) आयात करते हैं, और संभावित ‘ऑयल शॉक’ से उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

  • दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल परिवहन का लगभग 20% इसी मार्ग से गुजरता है।
  • कतर, सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे बड़े निर्यातक देश इसी रास्ते से एशियाई बाजारों तक आपूर्ति करते हैं।
  • एलएनजी (Liquefied Natural Gas) का भी बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से एशिया भेजा जाता है।

यदि इस मार्ग में सैन्य टकराव, नाकेबंदी या जहाजरानी जोखिम बढ़ता है, तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

चीन: दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक

चीन वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है।

चीन की निर्भरता

  • चीन अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 50% मध्य पूर्व से प्राप्त करता है।
  • सऊदी अरब, इराक और ईरान उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।
  • एलएनजी आयात का लगभग 30–35% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, खासकर कतर से।

रणनीतिक भंडार

चीन ने बड़े पैमाने पर रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) तैयार किए हैं, जो अनुमानतः 2–3 महीने के आयात को कवर कर सकते हैं। इससे अल्पकालिक संकट से निपटने में मदद मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि का व्यवधान चीन की औद्योगिक गतिविधियों और विनिर्माण क्षेत्र पर दबाव डाल सकता है।

भारत: तेज़ी से बढ़ती ऊर्जा मांग और बढ़ती निर्भरता

भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी तेल खपत वाली अर्थव्यवस्था है।

भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता

  • भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है।
  • हालिया आंकड़ों के अनुसार, कुल आयात का करीब 55% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है।
  • यह लगभग 2.5–2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन के बराबर है।

भारत के लिए सऊदी अरब, इराक और यूएई प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।

एलएनजी निर्भरता

  • भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है।
  • भारत के कुल एलएनजी आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, खासकर कतर से।

संभावित आर्थिक असर

यदि तेल कीमतें तेजी से बढ़ती हैं:

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी
  • महंगाई (Inflation) में उछाल
  • चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने का खतरा
  • रुपये पर दबाव

भारत के पास रणनीतिक भंडार हैं, जो लगभग 70–75 दिनों की मांग को पूरा कर सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि के संकट में यह पर्याप्त नहीं होगा।

जापान: सबसे ज्यादा जोखिम में

जापान ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर है।

कच्चा तेल

  • जापान के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 90–95% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है।
  • सऊदी अरब और यूएई उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।

एलएनजी

  • जापान दुनिया के बड़े एलएनजी आयातकों में शामिल है।
  • उसका लगभग 10–15% एलएनजी मध्य पूर्व से आता है।

हालांकि जापान के पास अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार 200 दिनों से अधिक का रणनीतिक भंडार है, फिर भी लंबी अवधि का व्यवधान उसकी विनिर्माण और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को प्रभावित कर सकता है।

दक्षिण कोरिया और अन्य एशियाई देश

दक्षिण कोरिया भी:

  • लगभग 70% कच्चा तेल मध्य पूर्व से आयात करता है।
  • 20% के आसपास एलएनजी आयात भी इसी क्षेत्र से होता है।

इसलिए एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मध्य पूर्व की स्थिरता पर काफी हद तक निर्भर हैं।

अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद हो जाए तो क्या होगा?

1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80–100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं।

2. शिपिंग और बीमा लागत बढ़ेगी

टैंकरों के लिए बीमा प्रीमियम बढ़ने से आयात लागत में इजाफा होगा।

3. महंगाई और आर्थिक मंदी का खतरा

ऊर्जा लागत बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और विकास दर पर असर पड़ेगा।

4. वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश

देश अमेरिका, अफ्रीका और रूस से वैकल्पिक आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश करेंगे, लेकिन यह तुरंत संभव नहीं होगा।

बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर नकेल: नितिन नबीन ने किया असम मॉडल लागू करने का एलान

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है, तो बांग्लादेशी घुसपैठियों को राज्य से बाहर निकालने के लिए असम का मॉडल लागू किया जाएगा। असम में ‘पहचानो (डिटेक्ट), नाम हटाओ (डिलीट) और वापस भेजो (डिपोर्ट)’ की नीति पर काम किया गया है, जिसका उद्देश्य अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें राज्य से बाहर निकालना है।

नितिन नबीन ने मालदा में परिवर्तन यात्रा की शुरुआत करते हुए कहा कि भाजपा अगर राज्य की सत्ता में आती है, तो इस्लामपुर का नाम बदलकर ‘ईश्वरपुर’ कर देगी। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने बंगाल में 50 लाख से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों को मताधिकार से वंचित कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर निर्वाचन आयोग 50 लाख से अधिक बांग्लादेशियों के नाम नहीं हटाता, तो बंगाल के लोगों के लिए केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ घुसपैठियों को मिलता।

नितिन नबीन ने कहा कि भाजपा ने हाल में बिहार में सरकार बनाई है और असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकालने के लिए ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ का मॉडल अपना रही है। उन्होंने कहा कि जहां भी ये विदेशी लोग हमारे अपने नागरिकों के अधिकारों को छीन रहे हैं, हम वहां इसे लागू करेंगे। उन्होंने पूरे भाषण में इस्लामपुर के लोगों को ‘ईश्वरपुर के लोग’ कहकर संबोधित किया और कहा कि भाजपा इस जगह का नाम बदलकर ईश्वरपुर करने के सपने को पूरा करेगी।

उत्तर प्रदेश के संभल में होली के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद, मस्जिदों को तिरपाल से ढका गया

उत्तर प्रदेश के संभल में होली के त्योहार के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद बनाया गया है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि जिले की 10 से अधिक मस्जिदों को तिरपाल से ढक दिया गया है, ताकि होली के रंग उन पर न पड़ें और किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों। यह कदम सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

जिले के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि संभल में कुल 1215 होलिका दहन स्थल हैं, जहां पर मेले और जुलूस आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि शांति समिति की 38 बैठकें पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं और पूरे इलाके को तीन जोन में बांटा गया है। सभी कर्मचारी अपने-अपने इलाकों में फ्लैग मार्च कर रहे हैं।

सुरक्षा के लिए तीन कंपनी पीएसी और 200 आरक्षक तैनात किए गए हैं। सभी जुलूस ड्रोन की निगरानी में निकाले जाएंगे। संभल में फ्लैग मार्च किया गया है और होलिका दहन स्थल का निरीक्षण किया गया है। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।

पटना में अतिक्रमण विरोधी अभियान: नौ टीमें तैनात, जानें कहां-कहां चलेगा अभियान

पटना में आज से एक विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शहर से अतिक्रमण को हटाना है। इस अभियान के तहत, पटना के जिलाधिकारी के निर्देश पर नौ टीमें तैनात की गई हैं, जो शहर के विभिन्न इलाकों में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगी। यह अभियान शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, और इसके परिणामस्वरूप अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है।

पटना के जिलाधिकारी ने इस अभियान के लिए विशेष तैयारी की है, जिसमें शहर के विभिन्न इलाकों में बुलडोजर और अन्य उपकरण तैनात किए जाएंगे। इस अभियान के दौरान, अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, और शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इस अभियान के बारे में जानने के लिए, आइए जानते हैं कि पटना के किन इलाकों में यह अभियान चलाया जाएगा, और जिलाधिकारी ने इसके लिए क्या तैयारी की है। यह अभियान पटना के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, और इसके परिणामस्वरूप शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

अभियान का पूरा स्वरूप

1) अभियान कब शुरू होगा?

जिलाधिकारी और प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह विशेष “अतिक्रमण हटाओ अभियान” 2 मार्च, 2026 से प्रभावी रूप से शुरू किया जाएगा, जिससे शहर में वर्षों से चली आ रही अतिक्रमण समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सके।

2) अभियान की मुख्य रूपरेखा

यह अभियान मल्टी-एजेंसी स्पेशल ड्राइव के रूप में संचालित होगा, जिसका मतलब यह है कि अभियान केवल नगर निगम के कर्मचारियों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसके संचालन में अनेक सरकारी विभाग भागीदारी करेंगे।

मुख्य रूप से शामिल विभाग:

  • जिला प्रशासन
  • पटना नगर निगम
  • ट्रैफिक पुलिस
  • परिवहन विभाग
  • राजस्व विभाग
  • पथ निर्माण विभाग
  • स्वास्थ्य विभाग
  • पुलिस विभाग
  • अग्निशमन सेवा
  • पुल निर्माण निगम
  • दूरसंचार विभाग
  • वन प्रमंडल
  • बिजली विभाग
    और अन्य संबद्ध विभाग भी इस अभियान को नगर के हर कोने तक पहुँचाएंगे।

इस समन्वय का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इसे व्यवस्थित रूप से लागू किया जाए, ताकि नागरिकों और स्थानीय व्यापारियों को न्यूनतम असुविधा हो।

3) टीमें और उनकी गतिविधियाँ

कुल 9 टीमें गठित की गई हैं, जिनका लक्ष्य अलग-अलग ज़िम्मेदारी वाले क्षेत्रों में शहर को मुक्त करना है। ये टीमें शहर को अव्यवस्था, जाम और अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए सक्रिय रूप से सभी बाधाओं को हटाएंगी।

टीम कार्य की विस्तृत रूपरेखा

  1. सड़कें, फुटपाथ और सार्वजनिक स्थल साफ़ करना:
    टीमें मुख्य रूप से सड़कों, फुटपाथों और शहर के व्यस्त क्षेत्रों (जैसे टी-प्वाइंट, गोलंबर, बस स्टॉप, बाजार आदि) पर अवैध कब्जे हटाने का कार्य करेंगी।
  2. पब्लिक ट्रैफिक व्यवस्था का सुधार:
    अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ यातायात सुधार में भी योगदान दिया जाएगा ताकि नागरिकों को सुचारु और आसान आवागमन मिल सके।
  3. सुरक्षा और जनता के हित का ध्यान:
    कार्रवाई के दौरान जनता की सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा, ताकि किसी को अनावश्यक परेशानी न हो।
  4. फॉलो-अप टीम और मॉनीटरिंग सेल:
    अभियान के खत्म होने के तुरंत बाद भी मॉनीटरिंग सेल सक्रिय रहेगा। यह टीम यह सुनिश्चित करेगी कि एक बार हटाए गए अतिक्रमणों के स्थान पर कब्जा पुनः न हो पाए।

4) अभियान के दौरान नियम और सख्ती

अधिकारी स्पष्ट कर चुके हैं कि:

  • जहाँ भी अतिक्रमण हटाया जाता है, उसके पुनः कब्जा करने पर अनिवार्यत: FIR दर्ज कर ली जाएगी।
  • पहले भी कई बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में लोग फिर से समान कब्जा कर लेते थे।
  • इस बार फॉलो-अप और मॉनीटरिंग टीम को इसलिए सक्रिय रखा गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति दोबारा अतिक्रमण न कर सके।

कहाँ कहाँ कार्रवाई होगी?

अभियान के दौरान नीचे लिखे मुख्य इलाकों में कार्रवाई विशेष रूप से केंद्रित रहेगी:

अ) नगर निगम के छह प्रमुख अंचल:

  1. नूतन राजधानी
  2. पाटलिपुत्र
  3. कंकड़बाग
  4. बाँकीपुर
  5. अजीमाबाद
  6. पटना सिटी
    इन सभी इलाकों में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे हटाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य होगा।

ब) अतिरिक्त नगर परिषद क्षेत्र

  1. खगौल
  2. फुलवारीशरीफ
  3. दानापुर निजामत
    इन क्षेत्रो में भी पटना नगर निगम और जिला प्रशासन मिलकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेंगे।

बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग: चिराग पासवान ने 10 साल बाद उठाए सवाल

बिहार की राजनीति में शराबबंदी एक ऐसा मुद्दा है जिस पर चर्चा कभी नहीं थमती। अब इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपनी बात रखी है। होली के त्योहार से पहले पटना पहुंचे चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में 10 साल पुराने शराबबंदी कानून की समीक्षा करने का समय आ गया है।

चिराग पासवान का तर्क है कि जिस सामाजिक उद्देश्य के साथ इस कानून को लागू किया गया था, उसका धरातल पर आकलन करना अनिवार्य है ताकि कमियों को दूर कर इसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून के मकसद पूरे हुए या नहीं, इसका मूल्यांकन करना जरूरी है।

चिराग पासवान ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके बयान को गलत अर्थों में न लिया जाए। उन्होंने कहा कि समीक्षा का अर्थ यह कतई नहीं है कि वे शराबबंदी खत्म करना चाहते हैं। किसी भी सरकारी योजना या कानून को समय के साथ बेहतर बनाने के लिए उसकी कमियों को पहचानना जरूरी है।

चिराग पासवान ने जहरीली शराब और ‘होम डिलीवरी’ पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश में शराब की ‘होम डिलीवरी’ के आरोप लग रहे हैं और आए दिन लोग नकली शराब पीकर अपनी जान गंवा रहे हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि कानून का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में भी शराबबंदी नीति की समीक्षा की आवाज उठ चुकी है। हालांकि सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड के नेताओं ने कानून पर दोबारा विचार से इनकार किया है, जबकि अन्य दलों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। अब देखना यह है कि होली के बाद बिहार की राजनीति में शराबबंदी की इस ‘समीक्षा’ की मांग क्या रंग लाती है।

बोधगया में जल्द ही इंटरनेशनल फूड विलेज की स्थापना, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया आयाम

बिहार की पवित्र नगरी बोधगया में एक नए पर्यटन स्थल की स्थापना होने जा रही है, जो यहां के पर्यटन और रोजगार को नए आयाम देने वाला है। यह परियोजना इंटरनेशनल फूड विलेज की है, जिसकी लागत लगभग 127 करोड़ रुपये है। यह फूड विलेज लगभग 4.2 एकड़ भूमि में फैला होगा और यहां विभिन्न देशों के प्रसिद्ध व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकेगा।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बोधगया को एक सांस्कृतिक और पाक कला के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करना है। यहां वियतनाम, श्रीलंका, थाईलैंड समेत अन्य देशों के प्रसिद्ध व्यंजनों के साथ-साथ बिहार और आस-पास के राज्यों के जीआई टैग वाले उत्पादों की भी प्रदर्शनी होगी। इसके अलावा, यह फूड विलेज अंतर्राष्ट्रीय संस्कृति को बढ़ावा देने और महाबोधि मंदिर में भीड़भाड़ को कम करने में भी मदद करेगा।

बोधगया में यह इंटरनेशनल फूड विलेज बनने से विदेशी पर्यटकों को अपने देश के व्यंजनों का स्वाद लेने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें यहां की संस्कृति और स्वाद के अनुसार खाना मिलने में सहूलियत होगी। इसके अलावा, यह फूड विलेज बोधगया में पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और यहां की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

इस परियोजना से बोधगया में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे यहां के व्यापार और उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, यह फूड विलेज बोधगया को एक नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने में मदद करेगा, जो यहां की सांस्कृतिक और पाक कला को दुनिया भर में प्रदर्शित करेगा।

पटना में जलजमाव की समस्या का समाधान: सीएम नीतीश ने अंडरग्राउंड नाला-सड़क प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को पटना में चल रहे अंडरग्राउंड नाला-सड़क प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। इस परियोजना का उद्देश्य राजधानी के जलजमाव की समस्या को कम करना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि काम की गुणवत्ता से समझौता किए बिना निर्माण में तेजी लाई जाए ताकि समय सीमा के भीतर जनता को इसका लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने मोइनुल हक स्टेडियम के पास सैदपुर नाला से पहाड़ी तक बन रहे भूमिगत नाला और सड़क परियोजना का जायजा लेने पहुंचे। यह परियोजना 260 करोड़ की लागत से बन रही है और नगर विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत बुडको द्वारा संचालित की जा रही है।

इस परियोजना की खासियत यह है कि इसमें सैदपुर नाले को पूरी तरह अंडरग्राउंड किया जा रहा है और उसके ऊपर एक आधुनिक सड़क का निर्माण हो रहा है। इससे न केवल इलाके की गंदगी और बदबू खत्म होगी, बल्कि पहाड़ी इलाके तक जाने के लिए शहर को एक नया और चौड़ा रास्ता भी मिलेगा।

मुख्यमंत्री के साथ जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मौके पर प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और आगे की कार्ययोजना से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना पटना के बुनियादी ढांचे के लिए गेमचेंजर साबित होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गुणवत्ता से समझौता किए बिना कार्य को समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।

पटना NEET छात्रा मौत मामले में मनीष रंजन को जमानत से इनकार, CBI ने कहा- जांच में हमें हॉस्टल मालिक की जरूरत नहीं

पटना NEET छात्रा मौत मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को जमानत देने से इनकार कर दिया गया है। सोमवार को कोर्ट में करीब पौने दो घंटे तक सुनवाई चली, लेकिन कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली तारीख दे दी। अब इस मामले में 11 मार्च को सीबीआई के मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई होगी।

जमानत पर बहस के दौरान तीखी नोकझोंक हुई। पीड़ित परिवार के वकील और सीबीआई के वकील के बीच तीखी बहस हुई। परिवार के वकील ने जांच में लापरवाही का आरोप दोहराया और कहा कि शुरुआत से ही जांच ठीक से नहीं की गई। इस पर सीबीआई के वकील ने आपत्ति जताई और कहा कि यह जमानत की सुनवाई है, एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का मंच नहीं है।

सीबीआई ने कोर्ट में लिखित तौर पर कहा कि फिलहाल उन्हें जांच में मनीष रंजन की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने सीबीआई से कई सख्त सवाल किए, जिनमें पूछा गया कि मनीष रंजन पर आखिर ठोस आरोप क्या हैं? उनके खिलाफ सबूत क्या हैं? क्या एजेंसी को अब भी उनकी जरूरत है? कोर्ट ने यह भी पूछा कि केस में पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया?

सुनवाई के दौरान एसआईटी और सीबीआई का अलग रुख दिखा। एसआईटी ने कहा कि मनीष रंजन एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, सीबीआई ने कहा कि अब जांच उनके पास है और उन्हें मनीष रंजन की जरूरत नहीं है।

कोर्ट ने तत्कालीन आईओ रौशनी कुमारी से भी पूछताछ की और पूछा कि छात्रा का मोबाइल और हॉस्टल का डीवीआर जब्त करने के बाद एफएसएल जांच क्यों नहीं कराई गई? सबूत 24 घंटे में कोर्ट में क्यों पेश नहीं किए गए? रौशनी ने कहा कि उन्होंने 17 जनवरी को सभी सामान एसआईटी को सौंप दिए थे, लेकिन एसआईटी ने कहा कि उन्हें यह सामग्री 24 जनवरी को मिली। दोनों के बयानों में अंतर दिखा, जिस पर पीड़ित परिवार ने सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया।

सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली तारीख 11 मार्च तय की और मनीष रंजन को जमानत देने से इनकार कर दिया।

अमेरिका-इरान संघर्ष में पहला भारतीय नुकसान, ओमान के अनुसार तेल टैंकर पर हमले में मरीनर की मौत

ओमान ने घोषणा की है कि अमेरिका-इरान संघर्ष में भारत का पहला नुकसान हुआ है, जब एक तेल टैंकर पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय मरीनर की मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब ईरान ने होरमुज़ जलसंधि के पास आने वाले जहाजों को धमकी दी थी, और यह माना जा रहा है कि उन्होंने अमेरिका-इज़राइल के आक्रमण का जवाब देने के लिए कई हमले किए हैं। इस घटना से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, और दुनिया भर के देशों ने शांति और स्थिरता की अपील की है। ईरान ने पहले भी कई जहाजों पर हमले किए हैं और होरमुज़ जलसंधि में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है, जो विश्व के तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह घटना भारत के लिए एक बड़ा नुकसान है, और सरकार ने इस मामले में ओमान और अन्य देशों के साथ संपर्क में होने की घोषणा की है।

Holi 2026 Amidst a Rare Lunar Eclipse : 2 मार्च को होगी होलिका दहन, 4 मार्च को रंगोत्सव – जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और ग्रहण का असर

होली 2026 इस बार बेहद खास और चर्चा का विषय बनी हुई है। कारण है फाल्गुन पूर्णिमा के आसपास लगने वाला चंद्र ग्रहण, जिसने होलिका दहन और रंगोत्सव की तिथि व मुहूर्त को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। धार्मिक पंचांग, ज्योतिषीय गणना और शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर विद्वानों ने इस वर्ष होलिका दहन की सही तिथि 2 मार्च और रंग खेलने का दिन 4 मार्च बताया है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर 2026 में होली की सही तारीख क्या है, चंद्र ग्रहण का क्या प्रभाव रहेगा, सूतक काल कब लगेगा, भद्रा का समय क्या है और किन नियमों का पालन करना जरूरी होगा।


📅 होली 2026: कब है होलिका दहन और रंग वाली होली?

हिंदू पंचांग के अनुसार होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। परंपरागत रूप से पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है और अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है।

🔹 2026 में तिथियां इस प्रकार हैं:

  • 2 मार्च 2026 (सोमवार) – होलिका दहन
  • 3 मार्च 2026 (मंगलवार) – चंद्र ग्रहण
  • 4 मार्च 2026 (बुधवार) – रंगोत्सव / धुलंडी

इस वर्ष 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने के कारण 3 मार्च को रंग खेलने की परंपरा को कई जगहों पर स्थगित किया गया है और 4 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा।


🔥 होलिका दहन 2 मार्च को क्यों?

1️⃣ चंद्र ग्रहण का प्रभाव

3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि के दौरान ही पड़ेगा। ग्रहण के दौरान और उसके पहले लगने वाला सूतक काल धार्मिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। सूतक काल में पूजा-पाठ, हवन, विवाह या अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

2️⃣ सूतक काल क्या होता है?

चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। इस दौरान:

  • मंदिरों के पट बंद हो जाते हैं
  • नई पूजा या शुभ कार्य नहीं किए जाते
  • भोजन पकाने और खाने में सावधानी रखी जाती है

ऐसे में यदि होलिका दहन 3 मार्च को किया जाए तो वह सूतक और ग्रहण के प्रभाव में आ जाएगा, जो शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं है।

3️⃣ भद्रा काल का विचार

होलिका दहन के समय भद्रा का होना भी अशुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार 2 मार्च की शाम को भद्रा का प्रभाव समाप्त होने के बाद होलिका दहन करना शुभ रहेगा।

इसीलिए ज्योतिषाचार्यों और धर्माचार्यों ने 2 मार्च की संध्या को होलिका दहन करने की सलाह दी है।


होलिका दहन का शुभ मुहूर्त (संभावित समय)

पंचांगों के अनुसार 2 मार्च 2026 को शाम के समय भद्रा समाप्त होने के बाद का समय शुभ रहेगा।

संभावित शुभ समय:

  • शाम लगभग 6:20 बजे से 8:50 बजे तक

(स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है, इसलिए अपने शहर के अनुसार पंडित या पंचांग से पुष्टि करना बेहतर रहेगा।)


🌕 3 मार्च 2026: चंद्र ग्रहण का विवरण

3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा। यह वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण होगा।

ग्रहण के दौरान क्या करें?

✔ मंत्र जाप और ध्यान कर सकते हैं
✔ भगवान का स्मरण करें
✔ गर्भवती महिलाएं विशेष सावधानी रखें

क्या न करें?

❌ भोजन न पकाएं
❌ शुभ कार्य शुरू न करें
❌ सोना या शारीरिक संबंध से बचें

ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर शुद्धि की जाती है और घर में गंगाजल का छिड़काव किया जाता है।


🌈 रंगोत्सव 4 मार्च को क्यों मनाया जाएगा?

परंपरा के अनुसार होलिका दहन के अगले दिन रंग खेला जाता है। लेकिन 2026 में चंद्र ग्रहण के कारण 3 मार्च को रंग खेलने से बचने की सलाह दी गई है।

इसलिए:

  • 3 मार्च को ग्रहण होने से रंग खेलने का उत्साह कम रहेगा
  • धार्मिक दृष्टि से ग्रहण वाले दिन रंग खेलना शुभ नहीं माना गया
  • कई राज्यों में प्रशासनिक और धार्मिक संस्थाओं ने 4 मार्च को रंगोत्सव मनाने का निर्णय लिया है

इस प्रकार 4 मार्च 2026 को पूरे देश में धुलंडी और रंगों की होली धूमधाम से मनाई जाएगी।


🔥 होलिका दहन का धार्मिक महत्व

होलिका दहन की कथा भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद और उनकी बुआ होलिका से जुड़ी है।

राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को विष्णु भक्ति छोड़ने के लिए कहा, लेकिन प्रह्लाद नहीं माने। तब होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था, प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई। भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई।

यह घटना प्रतीक है:

  • सत्य की विजय
  • भक्ति की शक्ति
  • अहंकार के अंत की

🌸 रंगों की होली का सांस्कृतिक महत्व

रंगोत्सव केवल रंग खेलने का त्योहार नहीं है, बल्कि:

  • आपसी मनमुटाव दूर करने का अवसर
  • प्रेम और भाईचारे का प्रतीक
  • वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव

ब्रज, मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव में होली विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां लट्ठमार होली, फूलों की होली और फाल्गुन उत्सव कई दिनों तक चलते हैं।


🛑 ग्रहण और होली: ज्योतिषीय दृष्टिकोण

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार:

  • चंद्रमा मन का कारक है
  • चंद्र ग्रहण मानसिक अस्थिरता और भावनात्मक उतार-चढ़ाव ला सकता है
  • ग्रहण काल में आध्यात्मिक साधना अधिक फलदायी मानी जाती है

इसलिए 2026 की होली आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


📌 क्या रखें विशेष ध्यान?

✔ होलिका दहन केवल शुभ मुहूर्त में करें
✔ ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें (यदि आवश्यक न हो)
✔ ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और पूजा अवश्य करें
✔ रंग खेलने से पहले त्वचा और आंखों की सुरक्षा करें
✔ प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें


🌍 देशभर में तैयारियां

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में होली की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बाजारों में गुलाल, पिचकारी, रंग और मिठाइयों की खरीदारी तेज हो गई है।

हालांकि इस बार ग्रहण के कारण धार्मिक कार्यक्रमों की समय-सारिणी में बदलाव देखने को मिलेगा।

Bihar Bridge Collapse : घोघरी नदी पर बन रहा 2.89 करोड़ का आरसीसी पुल ढलाई के दौरान ढहा, बाल-बाल बचे मजदूर — गोपालगंज में निर्माण गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल

बिहार में एक बार फिर अधूरे पुल के गिरने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। गोपालगंज जिले के सिधवलिया प्रखंड के गंगवा गांव के पास घोघरी नदी पर बन रहा आरसीसी (Reinforced Cement Concrete) पुल का एक हिस्सा ढलाई के दौरान अचानक भरभराकर गिर गया। यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूर स्लैब की कंक्रीट ढलाई कर रहे थे। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और सभी मजदूर सुरक्षित बच निकले।

करीब 2.89 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल का निर्माण अंतिम चरण में बताया जा रहा था। लेकिन स्लैब ढलाई के दौरान अचानक संरचना का एक हिस्सा गिर जाने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग इसे “बड़ा हादसा टल गया” कह रहे हैं, जबकि प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

हादसा कैसे हुआ: मिनटों में ढह गया पुल का हिस्सा

घटना 2 मार्च 2026 की दोपहर की है। सिधवलिया प्रखंड के अंतर्गत गंगवा गांव के समीप बहने वाली घोघरी नदी पर आरसीसी पुल का निर्माण कार्य जारी था। मजदूर स्लैब की ढलाई कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक तेज आवाज के साथ स्लैब का एक हिस्सा नीचे की ओर धंस गया और कुछ ही क्षणों में पूरी संरचना का एक भाग गिर पड़ा।

ढलाई के दौरान कंक्रीट का भार, लोहे की सरियों का दबाव और अस्थायी सपोर्ट स्ट्रक्चर (शटरिंग) पर लोड अधिक होने के कारण यह हादसा हुआ या फिर निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी थी — यह अभी जांच का विषय है। लेकिन घटना ने निर्माण एजेंसी और निगरानी तंत्र दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

बाल-बाल बचे मजदूर, टल गया बड़ा हादसा

हादसे के समय कई मजदूर मौके पर मौजूद थे। जैसे ही ढांचा गिरा, अफरातफरी मच गई। मजदूरों ने भागकर अपनी जान बचाई। स्थानीय लोगों के अनुसार यदि स्लैब का गिरना कुछ सेकंड पहले या बाद में होता तो कई मजदूर उसकी चपेट में आ सकते थे।

इस घटना ने यह साफ कर दिया कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन कितना आवश्यक है। अगर सेफ्टी नेट, चेतावनी तंत्र और संरचनात्मक परीक्षण सही समय पर किए गए होते तो संभव है कि इस तरह की दुर्घटना से बचा जा सकता था।

2.89 करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल

बताया जा रहा है कि यह पुल लगभग 29 मीटर लंबा है और इसकी कुल लागत 2.89 करोड़ रुपये है। यह पुल आसपास के गांवों को जोड़ने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। ग्रामीणों के लिए यह आवागमन का मुख्य साधन बनने वाला था।

अब जब निर्माण अंतिम चरण में था, तभी उसका एक हिस्सा ढह जाना कई सवाल खड़े करता है—

  • क्या निर्माण सामग्री मानक के अनुरूप थी?
  • क्या तकनीकी निरीक्षण समय पर हुआ?
  • क्या कार्य की निगरानी में लापरवाही बरती गई?

ग्रामीणों का आरोप: घटिया सामग्री का हुआ इस्तेमाल

स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण में घटिया सीमेंट और कमजोर सरियों का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि कई बार उन्होंने अधिकारियों को इस बारे में सूचित भी किया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों के अनुसार पुल के स्तंभ और स्लैब में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर शुरू से ही संदेह था। कुछ लोगों का दावा है कि शटरिंग और सपोर्ट सिस्टम भी पर्याप्त मजबूत नहीं था, जिसके कारण ढलाई के दौरान अतिरिक्त भार पड़ने से संरचना कमजोर पड़ गई।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन ने तकनीकी जांच का आश्वासन दिया है।

प्रशासन हरकत में, जांच के आदेश

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। निर्माण कार्य को तत्काल रोक दिया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि एक तकनीकी टीम पूरे मामले की जांच करेगी।

जांच के दायरे में निम्न बिंदु शामिल होंगे—

  1. कंक्रीट की गुणवत्ता (कंप्रेसिव स्ट्रेंथ टेस्ट)
  2. लोहे की सरियों की मजबूती
  3. शटरिंग और सपोर्ट सिस्टम की क्षमता
  4. डिजाइन और ड्राइंग के अनुसार निर्माण हुआ या नहीं
  5. सुपरविजन और मॉनिटरिंग में किसी तरह की चूक

यदि जांच में लापरवाही या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है।

बिहार में पुल हादसों का इतिहास और बढ़ती चिंता

बिहार में पिछले कुछ वर्षों में पुलों और सड़कों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं। कई बार निर्माणाधीन पुल ढहने या तैयार पुलों में दरार आने की खबरें चर्चा में रही हैं। इससे राज्य की निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

गोपालगंज की यह घटना भी उसी कड़ी में एक और उदाहरण बन सकती है, यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं।

आरसीसी पुल क्यों गिरते हैं? तकनीकी पहलू समझें

आरसीसी (Reinforced Cement Concrete) संरचनाएं मजबूत मानी जाती हैं, लेकिन उनकी मजबूती कई कारकों पर निर्भर करती है—

1. सही मिश्रण अनुपात

सीमेंट, रेत और गिट्टी का सही अनुपात बेहद जरूरी है। पानी की मात्रा अधिक होने पर कंक्रीट कमजोर हो जाती है।

2. उच्च गुणवत्ता की सरिया

लोहे की सरिया (रीइन्फोर्समेंट) का ग्रेड और उसकी प्लेसमेंट संरचना की मजबूती तय करती है।

3. उचित शटरिंग और सपोर्ट

ढलाई के समय स्लैब को नीचे से मजबूत सपोर्ट मिलना जरूरी है। यदि शटरिंग कमजोर हो तो भार पड़ते ही ढांचा गिर सकता है।

4. क्योरिंग प्रक्रिया

ढलाई के बाद पर्याप्त समय तक कंक्रीट को गीला रखना जरूरी है, जिससे उसकी मजबूती विकसित हो सके।

यदि इन में से किसी भी चरण में लापरवाही बरती जाए तो संरचना अस्थिर हो सकती है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

यह पुल स्थानीय लोगों के लिए जीवन रेखा बनने वाला था। बरसात के दिनों में घोघरी नदी पार करना मुश्किल हो जाता है। पुल के निर्माण से—

  • छात्रों को स्कूल पहुंचने में आसानी होती
  • किसानों को बाजार तक पहुंचने का बेहतर मार्ग मिलता
  • आपातकालीन सेवाओं को सुविधा मिलती

अब निर्माण रुकने से विकास कार्य प्रभावित होंगे और लोगों को असुविधा झेलनी पड़ेगी।

जिम्मेदारी तय होना जरूरी

हर बार हादसे के बाद जांच और कार्रवाई की बात होती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या जिम्मेदारी तय होती है? क्या दोषियों को दंड मिलता है?

अगर निर्माण में गड़बड़ी साबित होती है तो—

  • ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है
  • संबंधित इंजीनियरों पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है
  • परियोजना की दोबारा तकनीकी समीक्षा की जा सकती है

सख्त कार्रवाई ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक सकती है।

पारदर्शिता और थर्ड पार्टी ऑडिट की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी परियोजनाओं में थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए। स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा गुणवत्ता परीक्षण से पारदर्शिता बढ़ेगी।

डिजिटल मॉनिटरिंग, लाइव साइट निरीक्षण और समय-समय पर सैंपल टेस्टिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएं तो जोखिम कम हो सकता है।

अफगानिस्तान का पाकिस्तान पर बड़ा हवाई हमला: रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस सहित कई सैन्य ठिकाने निशाने पर, क्षेत्रीय तनाव चरम पर

दक्षिण एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर कथित हवाई हमलों की खबरों ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, अफगान बलों ने पाकिस्तान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस सहित कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। यह एयरबेस पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के निकट रावलपिंडी में स्थित है और इसे पाकिस्तान वायुसेना की महत्वपूर्ण सैन्य परिसंपत्तियों में गिना जाता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच सीमा पार हमलों, आतंकी गतिविधियों और हवाई कार्रवाई को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध लंबे समय से अविश्वास, सीमा विवाद और आतंकवाद के आरोप-प्रत्यारोप से प्रभावित रहे हैं, लेकिन ताजा घटनाएं इस टकराव को एक नए और अधिक खतरनाक चरण में ले जाती दिखाई दे रही हैं।

क्या हुआ? हमलों की पूरी जानकारी

रिपोर्टों के मुताबिक, अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर समन्वित हवाई कार्रवाई की गई। इनमें सबसे प्रमुख निशाना नूर खान एयरबेस रहा, जो पाकिस्तान वायुसेना के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है।

इसके अलावा जिन ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है, उनमें शामिल हैं:

  • बलूचिस्तान के क्वेटा में स्थित 12वीं कोर मुख्यालय
  • खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र के कुछ सैन्य शिविर
  • सीमावर्ती इलाकों में मौजूद सैन्य प्रतिष्ठान

हालांकि इन हमलों से हुए नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि पाकिस्तान की ओर से तुरंत नहीं की गई। शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि अफगान रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों को “प्रतिकारात्मक कार्रवाई” बताया है।

अफगानिस्तान का दावा: जवाबी कार्रवाई

अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा हाल के दिनों में अफगान क्षेत्र में की गई हवाई कार्रवाइयों के जवाब में यह हमला किया गया। अफगान अधिकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान ने काबुल और अन्य सीमावर्ती इलाकों में सैन्य ठिकानों और संदिग्ध आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था, जिससे नागरिकों की जान को खतरा पैदा हुआ।

अफगानिस्तान का कहना है कि उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया गया, और इसी के जवाब में पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया।

नूर खान एयरबेस क्यों है अहम?

रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस पाकिस्तान वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण एयरबेस में से एक है। इसकी रणनीतिक अहमियत कई कारणों से है:

  1. यह इस्लामाबाद के बेहद करीब स्थित है।
  2. यहां से सैन्य विमान, परिवहन विमान और विशेष ऑपरेशन उड़ानें संचालित होती हैं।
  3. यह पाकिस्तान की सैन्य कमान और नियंत्रण प्रणाली का अहम हिस्सा है।

यदि इस एयरबेस को गंभीर क्षति पहुंची है, तो यह पाकिस्तान की वायु रक्षा और सैन्य संचालन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि इस ठिकाने पर हमला प्रतीकात्मक और सामरिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

घटना के बाद पाकिस्तान की ओर से शुरुआती स्तर पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। हालांकि सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया कि स्थिति की समीक्षा की जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

पाकिस्तान पहले भी अफगानिस्तान पर यह आरोप लगाता रहा है कि उसकी जमीन से संचालित संगठन, विशेषकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), पाकिस्तान में हमलों को अंजाम देते हैं। अफगानिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंध: पृष्ठभूमि

दोनों देशों के बीच लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसे डूरंड रेखा कहा जाता है। अफगानिस्तान लंबे समय से इस सीमा को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करता। यही विवाद दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ में रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में:

  • सीमा पार गोलाबारी की घटनाएं बढ़ी हैं।
  • ड्रोन और हवाई हमलों के आरोप लगे हैं।
  • आतंकी संगठनों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए हैं।

इन घटनाओं ने आपसी भरोसे को और कमजोर किया है।

क्षेत्रीय और वैश्विक असर

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच खुला सैन्य टकराव पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश है, इसलिए किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

संभावित असर:

  1. सीमा पार शरणार्थी संकट
  2. व्यापार मार्गों पर असर
  3. क्षेत्रीय शक्तियों की दखलंदाजी
  4. आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी

चीन, अमेरिका, रूस और खाड़ी देश पहले भी इस क्षेत्र में शांति प्रयासों में भूमिका निभा चुके हैं। यदि तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

US-Iran-Israel War में अमेरिका की सीधी एंट्री: 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत, कई घायल; डोनाल्ड ट्रंप ने कहा—अभियान जारी रहेगा, और भी जानें जा सकती हैं

मध्य पूर्व एक बार फिर व्यापक युद्ध की दहलीज पर खड़ा है। United States और Israel द्वारा Iran पर किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए हैं। ईरान की जवाबी कार्रवाई में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है, जबकि पांच गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह इस नए चरण के संघर्ष में अमेरिका की पहली आधिकारिक सैन्य क्षति है, जिसने वैश्विक राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को हिला दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सैनिकों की मौत पर शोक जताते हुए साफ कहा है कि सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक “सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।” वहीं ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताते हुए बदला लेने की कसम खाई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर United Nations, लगातार संयम और वार्ता की अपील कर रहा है।

संघर्ष की पृष्ठभूमि: क्यों भड़का यह युद्ध?

ईरान और इज़राइल के बीच तनाव कोई नया नहीं है। दशकों से दोनों देश एक-दूसरे पर अप्रत्यक्ष युद्ध, साइबर हमले, खुफिया अभियानों और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने के आरोप लगाते रहे हैं। अमेरिका लंबे समय से इज़राइल का रणनीतिक सहयोगी रहा है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कठोर रुख अपनाता आया है।

पिछले कुछ महीनों में हालात तब और गंभीर हो गए जब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया कि ईरान मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को तेजी से विस्तार दे रहा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। इसके बाद संयुक्त सैन्य कार्रवाई की योजना बनी।

संयुक्त हमले: किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?

अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के भीतर कई महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हवाई और मिसाइल हमले किए। इन हमलों में शामिल थे:

  • मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स
  • एयर डिफेंस सिस्टम
  • सैन्य कमांड सेंटर
  • रिवोल्यूशनरी गार्ड के ठिकाने
  • कुछ सरकारी परिसरों के आसपास के क्षेत्र

रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के आवासीय और प्रशासनिक परिसर के आसपास भी विस्फोट हुए। ईरानी सरकारी मीडिया ने बाद में पुष्टि की कि हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं, और कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में उनकी मौत की भी आशंका जताई गई, हालांकि इस पर आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

अमेरिकी सैनिकों की मौत: क्या हुआ था?

ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी United States Central Command (CENTCOM) के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए। पांच सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।

इन हमलों का मुख्य निशाना खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे थे। हालांकि स्थानों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन यह स्पष्ट है कि ईरान ने सीधे अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को चुनौती दी है।

ट्रंप का बयान: “हम पीछे नहीं हटेंगे”

राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा:

“हमारे तीन बहादुर सैनिकों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। हम उनके परिवारों के साथ खड़े हैं। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान की आक्रामक क्षमता को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आगे और जानें जा सकती हैं, लेकिन अमेरिका पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड से आत्मसमर्पण की अपील भी की, साथ ही कड़ा संदेश दिया कि प्रतिरोध की स्थिति में और सख्त कार्रवाई होगी।

ईरान की प्रतिक्रिया: “यह अस्तित्व की लड़ाई”

ईरानी नेतृत्व ने अमेरिकी और इज़राइली हमलों को “युद्ध की घोषणा” करार दिया है। तेहरान में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। संसद में आपात बैठक बुलाई गई और देशव्यापी सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया।

ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और “हर हमले का जवाब दिया जाएगा।” ईरानी मीडिया ने दावा किया कि उनके मिसाइल हमलों में इज़राइल के कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है।

इज़राइल पर मिसाइल हमले

ईरान की ओर से दागी गई कई मिसाइलें इज़राइल के विभिन्न शहरों की ओर बढ़ीं। इज़राइली डिफेंस सिस्टम ‘आयरन डोम’ ने अधिकांश को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें रिहायशी इलाकों के पास गिरीं। कई नागरिक घायल हुए और कुछ की मौत की भी पुष्टि हुई है।

इज़राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि “ईरान को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी” और सैन्य अभियान को और तेज करने का संकेत दिया।

नागरिकों पर असर: बढ़ता मानवीय संकट

इस युद्ध का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। ईरान में हवाई हमलों के कारण सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई है। बिजली और इंटरनेट सेवाएं कई इलाकों में बाधित हैं।

इज़राइल में भी स्कूल बंद कर दिए गए हैं, सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं और नागरिकों को बंकरों के पास रहने की सलाह दी गई है।

खाड़ी देशों में एयरस्पेस बंद होने से हजारों यात्री फंस गए हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है।

संयुक्त राष्ट्र की आपात बैठक

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई। महासचिव ने दोनों पक्षों से तुरंत संघर्षविराम की अपील की। रूस और चीन ने हमलों की आलोचना की, जबकि कुछ पश्चिमी देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा बताते हुए अमेरिका के सुरक्षा तर्कों का समर्थन किया।

सुरक्षा परिषद में तीखी बहस हुई, लेकिन कोई ठोस प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।

वैश्विक राजनीति पर असर

1. तेल बाजार में उछाल

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अस्थिरता की आशंका से वैश्विक ऊर्जा बाजार चिंतित है।

2. शेयर बाजार में गिरावट

अमेरिका, यूरोप और एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई।

3. क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका

लेबनान में हिज़्बुल्लाह ने भी इज़राइल के खिलाफ मोर्चा खोला है। सीरिया और इराक में भी तनाव बढ़ा है।

अमेरिका के भीतर राजनीतिक बहस

अमेरिका में विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या यह सैन्य कार्रवाई कांग्रेस की अनुमति के बिना की गई? क्या यह लंबा युद्ध बन सकता है? क्या सैनिकों की जान जोखिम में डाली जा रही है?

रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी कुछ धड़े चिंतित हैं कि यह संघर्ष नियंत्रण से बाहर जा सकता है।

ईरान के भीतर सत्ता संतुलन

अगर सर्वोच्च नेता की मौत की पुष्टि होती है, तो ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी। वहां की संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार एक अस्थायी परिषद कार्यभार संभाल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय सत्ता परिवर्तन देश को और अस्थिर कर सकता है।

संभावित परिदृश्य

1. लंबा युद्ध

यदि हमले और जवाबी हमले जारी रहते हैं, तो यह संघर्ष हफ्तों या महीनों तक चल सकता है।

2. क्षेत्रीय युद्ध

ईरान समर्थित मिलिशिया समूह अन्य देशों में अमेरिकी और इज़राइली हितों को निशाना बना सकते हैं।

3. कूटनीतिक समाधान

अगर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता है, तो बैक-चैनल वार्ता शुरू हो सकती है।

4. मानवीय आपदा

लगातार बमबारी से शरणार्थी संकट और खाद्य व दवा की कमी जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

मीडिया कवरेज और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण

वैश्विक मीडिया संस्थानों जैसे BBC, Al Jazeera और NDTV लगातार इस संघर्ष की लाइव रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अलग-अलग देशों के मीडिया में इस युद्ध को अलग नजरिए से देखा जा रहा है—कुछ इसे सुरक्षा की आवश्यकता बता रहे हैं, तो कुछ इसे अनावश्यक आक्रामकता कह रहे हैं।

वैशाली में दर्दनाक हादसा: सेप्टिक टैंक की जहरीली गैस से पिता-पुत्र समेत एक ही परिवार के चार लोगों की मौत, पांच दिन पहले हुई थी बेटे की शादी

वैशाली (बिहार), 2 मार्च 2026।
बिहार के वैशाली जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। हाजीपुर अनुमंडल के सराय थाना क्षेत्र स्थित अनवरपुर गांव में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से एक ही परिवार के चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में पिता-पुत्र और परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं।

इस घटना ने न केवल एक घर की खुशियां छीन लीं, बल्कि पूरे गांव को मातम में डुबो दिया। सबसे मार्मिक तथ्य यह है कि मृतकों में शामिल युवक की शादी महज पांच दिन पहले ही हुई थी। जहां कुछ दिन पहले उसी घर में शहनाई गूंज रही थी, वहीं अब सन्नाटा और चीख-पुकार ने उसकी जगह ले ली है।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, अनवरपुर गांव में एक परिवार अपने घर के सेप्टिक टैंक की सफाई कर रहा था। यह एक सामान्य घरेलू कार्य समझा जा रहा था। परिवार के एक सदस्य ने सबसे पहले टैंक में उतरकर सफाई शुरू की।

लेकिन कुछ ही मिनटों में वह अंदर बेहोश हो गया। माना जा रहा है कि टैंक के भीतर जहरीली गैस — जैसे मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड और कार्बन मोनोऑक्साइड — जमा थी, जिससे ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो गया था।

जब बाहर मौजूद अन्य परिजनों ने देखा कि अंदर गया व्यक्ति प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है, तो घबराहट में दूसरा सदस्य उसे बचाने के लिए टैंक में उतर गया। दुर्भाग्यवश वह भी जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गया।

इसके बाद एक-एक कर परिवार के अन्य सदस्य भी बचाने के लिए नीचे उतरते गए और वही त्रासदी दोहराई गई। कुछ ही मिनटों में चार लोग टैंक के भीतर अचेत हो चुके थे।

चार की मौत, तीन की हालत गंभीर

स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। सराय थाना पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से सभी को टैंक से बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

उन्हें हाजीपुर सदर अस्पताल और आसपास के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। लेकिन डॉक्टरों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया। तीन अन्य लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज जारी है।

मृतकों में पिता और उनका पुत्र भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि मृत पुत्र की शादी 24 फरवरी को ही हुई थी। शादी के बाद अभी घर में रस्में पूरी भी नहीं हुई थीं कि यह भीषण हादसा हो गया।

खुशी से मातम तक — पांच दिन में उजड़ गया घर

गांव के लोगों के अनुसार, जिस घर में कुछ दिन पहले शादी की रौनक थी, वहां अब मातम पसरा है। नई नवेली दुल्हन सदमे में है। परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है।

ग्रामीणों का कहना है कि युवक की शादी बड़ी धूमधाम से हुई थी। रिश्तेदार और मेहमान अभी पूरी तरह लौटे भी नहीं थे कि यह दुर्घटना हो गई।

एक ग्रामीण ने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी इस घर में चार अर्थियां उठेंगी। यह बहुत बड़ा सदमा है।”

जहरीली गैस कैसे बनती है जानलेवा?

विशेषज्ञों के अनुसार, सेप्टिक टैंक, नाले, गड्ढे या बंद स्थानों में अक्सर मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसें जमा हो जाती हैं। ये गैसें न केवल जहरीली होती हैं, बल्कि ऑक्सीजन का स्तर भी कम कर देती हैं।

ऐसी जगहों पर बिना सुरक्षा उपकरण के उतरना बेहद खतरनाक होता है।

  • कुछ ही सेकंड में व्यक्ति चक्कर खाकर गिर सकता है।
  • कुछ मिनटों में ऑक्सीजन की कमी से दम घुट सकता है।
  • समय पर बाहर न निकाले जाने पर मौत हो सकती है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये गैसें दिखाई नहीं देतीं और कई बार इनकी गंध भी तुरंत महसूस नहीं होती।

बचाने वाले क्यों बनते हैं शिकार?

इस तरह के हादसों में अक्सर देखा गया है कि पहला व्यक्ति बेहोश होने के बाद उसे बचाने के लिए दूसरा व्यक्ति बिना सुरक्षा के अंदर उतर जाता है।

घबराहट और जल्दबाजी में लोग यह नहीं सोच पाते कि अंदर जहरीली गैस हो सकती है। परिणामस्वरूप, बचाने वाला भी शिकार बन जाता है।

अनवरपुर की घटना भी इसी पैटर्न का उदाहरण है, जहां एक के बाद एक चार लोग जहरीली गैस की चपेट में आ गए।

प्रशासन की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

प्राथमिक जांच में दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट पोस्टमॉर्टम के बाद ही स्पष्ट होगी।

जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता देने की बात कही है। साथ ही अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सेप्टिक टैंक या बंद स्थानों की सफाई के दौरान विशेषज्ञों की मदद लें और बिना सुरक्षा उपकरण के अंदर न उतरें।

गांव में शोक की लहर

अनवरपुर गांव में घटना के बाद शोक की लहर दौड़ गई है। गांव के लोग बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार के घर पहुंच रहे हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने पहले भी इस तरह की घटनाएं सुनी थीं, लेकिन अपने गांव में पहली बार इतनी बड़ी त्रासदी देखी है।

बिहार में बाढ़ प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा: नेपाल से आने वाली नदियों पर सैटेलाइट निगरानी

बिहार में बाढ़ प्रबंधन को लेकर एक नई पहल शुरू की गई है, जिसमें नेपाल से आने वाली नदियों पर सैटेलाइट निगरानी की जाएगी। यह कदम बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने और लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद करेगा। जल संसाधन विभाग ने इस कार्ययोजना के लिए नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के साथ हाथ मिलाया है, जिसके तहत करीब 6960 वर्ग किलोमीटर के विशाल दायरे को निगरानी तंत्र में शामिल किया गया है।

इस निगरानी प्रणाली से कोसी बेसिन समेत उन तमाम छोटी-बड़ी नदियों का डेटा इकट्ठा किया जाएगा, जो नेपाल से बिहार में प्रवेश करती हैं। सैटेलाइट तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उन इलाकों का भी सटीक पूर्वानुमान दे सकेगी, जहां वर्तमान में कोई गेज (जलस्तर मापने वाला यंत्र) उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, तटबंध विहीन इलाकों पर भी खास ध्यान दिया जाएगा, जहां अचानक आने वाली बाढ़ से निपटना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।

जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार, राज्य सरकार अब आधुनिक तकनीकों के सहारे दीर्घकालीन और अल्पकालीन योजनाओं पर काम कर रही है। सैटेलाइट डेटा के माध्यम से उन संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी जहां तटबंध नहीं हैं, जिससे बाढ़ आने से पहले ही बचाव कार्य शुरू किया जा सकेगा। यह पहल भविष्य में बिहार को बाढ़ की त्रासदी से राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

2 मार्च की प्रमुख खबरें: भारत की सेमीफाइनल में एंट्री, ईरान का संकट गहराया, और दुबई में फंसे झारखंड के लोग

आज की प्रमुख खबरों में, भारत ने टी20 वर्ल्ड कप में वेस्टइंडीज को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। संजू सैमसन ने विजयी चौका लगाकर भारत को जीत दिलाई। इस जीत के साथ, भारत अब 5 मार्च को इंग्लैंड के साथ सेमीफाइनल में भिड़ेगा।

इसके अलावा, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता जा रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद, देश में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं। भारत में भी शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए हैं और जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

दुबई में भी संकट की स्थिति है। इस्राइल और इरान के बीच जंग के कारण दुबई के कई एयरपोर्ट सुरक्षा कारणों से बंद कर दिए गए हैं, जिससे झारखंड के 100 से अधिक लोग फंस गए हैं। ये लोग एक बिजनेस टूर पर गए थे और अब वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

इन खबरों के अलावा, बंगाल विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों की घोषणा से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बंगाल फतह की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने रविवार को परिवर्तन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर कूचबिहार से रवाना किया।

इसके अलावा, ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर आरजेडी ने अपना बयान जारी किया है। पार्टी ने कहा है कि भारत ने अपना एक दोस्त खो दिया है। बिहार के कटिहार जिले में एक 13 साल के लड़के ने नशा करने की शिकायत से नाराज होकर 9 साल की मासूम बच्ची की गला रेतकर हत्या कर दी।

इन खबरों के अलावा, मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC) 2026 बार्सिलोना में 2 से 5 मार्च तक आयोजित होने जा रहा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल और कनेक्टिविटी ट्रेड शो है, जहां स्मार्टफोन कंपनियों से लेकर नेटवर्क दिग्गज और एआई स्टार्टअप तक अपने नये इनोवेशन पेश करेंगे।

मौसम अलर्ट: 3 से 7 मार्च तक मध्यम बारिश और तेज हवाएं, जानें किन राज्यों में होली पर पड़ेगा असर

भारत के विभिन्न हिस्सों में 3 से 7 मार्च के बीच मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत के कुछ राज्यों में मध्यम बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे होली के रंग में भंग पड़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, जम्मू कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि हरियाणा, पंजाब, और उत्तर प्रदेश में 20-30 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवाएं चल सकती हैं।

पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 4 से 7 मार्च के दौरान जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। इसके अलावा, 1 मार्च को असम और मेघालय, सिक्किम, केरल और माहे और लक्षद्वीप में गरज और बिजली के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 4 से 7 मार्च के दौरान जम्मू-कश्मीर में हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है, जबकि 1 से 3 मार्च के दौरान हरियाणा, पंजाब, और उत्तर प्रदेश में 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 5 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। उत्तर पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि मध्य भारत में अगले 5 दिनों में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है।

इसके अलावा, मौसम विभाग ने गर्म और उमस भरे मौसम की चेतावनी जारी की है। 4 और 5 मार्च को कोंकण और गोवा के कुछ इलाकों में और 4 से 7 मार्च के दौरान गुजरात राज्य में गर्म और उमस भरे हालात रहने की संभावना है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को न्यूनतम तापमान 15.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत तापमान से 2.9 डिग्री अधिक है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, दिन के दौरान तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जबकि अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

होली त्योहार के दौरान पटना में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, 94 स्थानों पर मजिस्ट्रेट तैनात

बिहार में होली का त्योहार एक बार फिर उमंग और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया है। राजधानी पटना में 94 संवेदनशील स्थानों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि शराब पीने-बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने साफ कर दिया है कि शराब के अवैध भंडारण, बिक्री या सेवन करने वालों के खिलाफ जेल भेजने वाली कार्रवाई होगी। इसके लिए न सिर्फ पैट्रोलिंग बढ़ाई गई है, बल्कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को भी एक्टिव कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अफवाह को तुरंत दबाया जा सके।
पटना में ड्रोन, सीसीटीवी और सोशल मीडिया पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त हो और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा, पूरे बिहार में 12 कंपनी रेंज रिजर्व बल, 31 कंपनी बीसैप और हजारों की संख्या में होमगार्ड जवानों को तैनात किया गया है। पटना में सबसे अधिक सुरक्षा बल तैनात हैं, जिनमें 3 कंपनी बीसैप और 535 सिपाही शामिल हैं।
होलिका दहन के लिए जारी हुई ‘अग्नि परीक्षा’ गाइडलाइंस के अनुसार, होलिका की ऊंचाई 10 फीट से ज्यादा रखने पर पाबंदी है। आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए निर्देश दिया गया है कि होलिका को बिजली के तारों के नीचे न जलाएं और पास में कम से कम 1000 लीटर पानी का इंतजाम रखें।
प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अस्पतालों में विशेष मेडिकल टीमें तैनात की हैं। अगर आपको बिजली, आग या सुरक्षा से जुड़ी कोई भी परेशानी हो, तो आप तुरंत जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। जिला नियंत्रण कक्ष (0612-2219810) और डायल-112 जैसी सेवाएं 24 घंटे सक्रिय रहेंगी।
पटना डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाए ताकि हुड़दंगियों को मौके पर ही दबोचा जा सके। प्रशासन का संदेश साफ है—त्योहार खुशियों से मनाएं, लेकिन कानून और सुरक्षा नियमों का पालन करें, ताकि होली का रंग फीका न पड़े।

ईरान-अमेरिका संघर्ष: बिहार के परिवारों में बढ़ी चिंता, संजय झा ने विदेश मंत्रालय को दी जानकारी

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने बिहार के कई परिवारों को चिंतित कर दिया है। जनता दल यूनाइटेड के सांसद संजय झा ने बताया कि बिहार और देश के अन्य राज्यों के लाखों लोग इन देशों में काम करते हैं और उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता है।

संजय झा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और उन्हें जमीनी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि युद्ध जैसे हालातों के कारण कई प्रमुख एयरपोर्ट बंद कर दिए गए हैं, जिससे लोगों की तुरंत वापसी में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं।

संजय झा ने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय लोगों से अपील की है कि वे अभी अपने घरों के भीतर ही रहें और किसी भी तरह की अफवाह पर यकीन न करें। उन्होंने कहा कि जैसे ही वहां की स्थिति थोड़ी सामान्य होगी और हवाई सेवाएं बहाल होंगी, भारत सरकार सभी की सुरक्षित वतन वापसी के लिए ठोस रास्ता निकालेगी।

बिहार सरकार भी केंद्र के साथ तालमेल बनाए हुए है ताकि प्रवासियों को हर संभव मदद पहुंचाई जा सके। इस तनाव का सीधा असर उन लोगों पर पड़ा है जो बिहार से वापस काम पर लौटने वाले थे। हैदराबाद एयरपोर्ट पर अररिया और पूर्णिया के कई परिवारों को रोक दिया गया जब वे कतर जाने के लिए उड़ान भरने की तैयारी में थे।

कुवैत में इस समय करीब दस लाख से ज्यादा भारतीय रह रहे हैं और मिसाइल हमलों के बाद वहां काफी डर का माहौल है। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने एक स्पेशल एडवाइजरी जारी की है और सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

प्रशासनिक फेरबदल: बंगाल में 13 आईपीएस अधिकारियों के तबादले से बढ़ी राजनीतिक हलचल

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है, जिसमें 13 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। यह फेरबदल राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो आगामी चुनावों के मद्देनजर किया गया है।

एडीजी सीआईडी विशाल गर्ग को अब एडीजी-आईजी, पश्चिमी जोन के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि एडीजी पश्चिमी जोन अशोक कुमार प्रसाद को एडीजी, साइबर सेल का जिम्मा सौंपा गया है। इसके अलावा, आईजी, उत्तर बंगाल राजेश कुमार यादव को अब आईजी, बांकुरा रेंज के रूप में तैनात किया गया है।

हावड़ा के संयुक्त आयुक्त सरबरी राजकुमार को डीआईजी, सीआईडी बनाया गया है, जबकि गौरव लाल को हावड़ा का नया संयुक्त आयुक्त नियुक्त किया गया है। प्रवीण प्रकाश को सशस्त्र बलों की छठी बटालियन से बैरकपुर एसएसएफ बटालियन में स्थानांतरित किया गया है। रायगंज के डीआईजी सुधीर कुमार नीलकंठम को अब डीआईजी, मुर्शिदाबाद रेंज के रूप में कार्यभार संभालने का जिम्मा दिया गया है।

शिशराम झझारिया को नए आईजी, ट्रैफिक के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि सुकेश जैन को उत्तर बंगाल के आईजी के रूप में तैनात किया गया है। परिजात बिश्वास को पूर्वी मिदनापुर के एसपी का कार्यभार संभालने का जिम्मा दिया गया है। पूर्वी मिदनापुर के एएसपी मिथुन दे का तबादला जीआरपी खड़गपुर डिवीजन में किया गया है। द्युतिमान भट्टाचार्य को बैरकपुर के डीसीपी (दक्षिण) का कार्यभार सौंपा गया है, जबकि पापिया सुल्ताना को बैरकपुर की नई उप सहायक आयुक्त-एसपी नियुक्त किया गया है।

यह प्रशासनिक फेरबदल राज्य की राजनीतिक हलचल को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है, खासकर जब विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है।

आयतुल्लाह अलीरेज़ा अराफी बने ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर: खामेनेई की मौत के बाद सत्ता परिवर्तन, जानिए पूरा राजनीतिक और वैश्विक विश्लेषण

ईरान की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ उस समय आया जब देश के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मौत की खबर सामने आई। लगभग 37 वर्षों तक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे खामेनेई की अचानक मृत्यु ने न केवल देश के भीतर सत्ता संतुलन को हिला दिया, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी। इस अभूतपूर्व संकट के बीच ईरान ने अपने संविधान के तहत वरिष्ठ धर्मगुरु Alireza Arafi को अंतरिम सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्त किया।

यह केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक संरचना, धार्मिक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय रणनीति के लिए निर्णायक क्षण है। आइए विस्तार से समझते हैं इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक, संवैधानिक और वैश्विक विश्लेषण।


🔹 खामेनेई का दौर और उसका अंत

Ali Khamenei ने 1989 में Ruhollah Khomeini के निधन के बाद सत्ता संभाली थी। उनके नेतृत्व में ईरान ने खुद को एक मज़बूत इस्लामी गणराज्य के रूप में स्थापित किया। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव, अमेरिका और इजरायल के साथ टकराव—ये सभी उनके कार्यकाल की प्रमुख विशेषताएँ रहीं।

हालिया सैन्य हमले में उनके मारे जाने की खबर ने ईरान में आपात स्थिति जैसे हालात पैदा कर दिए। चूँकि सुप्रीम लीडर देश के सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर और अंतिम निर्णयकर्ता होते हैं, इसलिए उनका अचानक जाना सत्ता के शीर्ष पर खालीपन पैदा कर सकता था। लेकिन ईरान के संविधान में ऐसी स्थिति के लिए स्पष्ट प्रावधान मौजूद है।


🔹 संविधान का अनुच्छेद 111 और नेतृत्व परिषद

ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, सुप्रीम लीडर के निधन या अयोग्यता की स्थिति में एक अस्थायी नेतृत्व परिषद (Leadership Council) बनाई जाती है। इस परिषद में शामिल होते हैं:

  1. राष्ट्रपति
  2. मुख्य न्यायाधीश
  3. गार्जियन काउंसिल से एक वरिष्ठ धर्मगुरु

इसी प्रक्रिया के तहत Alireza Arafi को परिषद का धार्मिक सदस्य नियुक्त किया गया। परिषद में उनके साथ वर्तमान राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और मुख्य न्यायाधीश Gholamhossein Mohseni Ejei शामिल हैं।

यह परिषद तब तक देश का संचालन करेगी, जब तक कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए स्थायी सुप्रीम लीडर का चुनाव नहीं कर लेती।


🔹 कौन हैं आयतुल्लाह अलीरेज़ा अराफी?

Alireza Arafi का जन्म 1959 में ईरान के यज़्द प्रांत में हुआ। उन्होंने क़ुम के धार्मिक केंद्रों में इस्लामी न्यायशास्त्र और दर्शन की उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे लंबे समय से ईरान की धार्मिक संस्थाओं में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं।

प्रमुख भूमिकाएँ:

  • अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रमुख
  • गार्जियन काउंसिल के सदस्य
  • असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य
  • धार्मिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष

अराफी को प्रशासनिक दक्षता और वैचारिक निष्ठा के लिए जाना जाता है। वे कट्टर इस्लामी शासन मॉडल के समर्थक माने जाते हैं, लेकिन उनकी छवि एक संगठित और संस्थागत नेता की है।


🔹 क्या अराफी स्थायी सुप्रीम लीडर बन सकते हैं?

यह सवाल ईरान और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों में चर्चा का विषय है। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ही अंतिम निर्णय लेगी। अराफी की धार्मिक योग्यता, संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक संतुलन उन्हें मजबूत दावेदार बना सकता है।

हालाँकि, ईरान की राजनीति में कई अन्य वरिष्ठ आयतुल्लाह और प्रभावशाली चेहरे भी संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं। अंतिम निर्णय सत्ता संतुलन, सैन्य प्रतिष्ठान (विशेषकर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) और राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।


🔹 घरेलू राजनीति पर असर

1. सत्ता संतुलन

खामेनेई के लंबे कार्यकाल ने सत्ता संरचना को स्थिर बनाया था। उनके जाने के बाद विभिन्न गुट सक्रिय हो सकते हैं। अंतरिम परिषद का उद्देश्य इसी अस्थिरता को रोकना है।

2. जनभावनाएँ

हाल के वर्षों में आर्थिक संकट, प्रतिबंधों और महँगाई के कारण जनता में असंतोष बढ़ा था। नेतृत्व परिवर्तन से नई उम्मीदें भी जुड़ी हैं, लेकिन अनिश्चितता भी बनी हुई है।

3. सुरक्षा तंत्र

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) सत्ता में बड़ी भूमिका निभाती है। नए नेतृत्व को सेना और सुरक्षा तंत्र का भरोसा बनाए रखना होगा।


🔹 अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

🌍 अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव

खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। यदि टकराव बढ़ता है, तो यह मध्य-पूर्व को व्यापक संघर्ष की ओर ले जा सकता है।

🌍 परमाणु कार्यक्रम

ईरान का परमाणु कार्यक्रम पहले से ही वैश्विक चिंता का विषय रहा है। अंतरिम नेतृत्व इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाएगा या कूटनीतिक रास्ता चुनेगा—यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

🌍 रूस और चीन

पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस और चीन ईरान के रणनीतिक साझेदार रहे हैं। नेतृत्व परिवर्तन इन संबंधों को और गहरा भी कर सकता है।


🔹 आगे की राह

अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की है, जो स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन करेगी। यह प्रक्रिया गोपनीय और जटिल होती है। चयनित नेता को धार्मिक योग्यता, राजनीतिक समझ और सुरक्षा मामलों में अनुभव होना चाहिए।

अंतरिम परिषद का मुख्य लक्ष्य स्थिरता बनाए रखना है। यदि यह सफल रहती है, तो ईरान बड़े राजनीतिक संकट से बच सकता है। लेकिन यदि गुटबाजी बढ़ती है, तो आंतरिक अस्थिरता की आशंका भी रहेगी।

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट का प्रकाशन: 7.08 करोड़ वोटर को 3 श्रेणियों में बांटा गया

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में मतदाता सूची का प्रकाशन हो गया है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट जारी करना शुरू कर दिया है। शनिवार को अधिकारियों ने बताया कि वोटर लिस्ट फेज वाईज जारी होंगे। उनका कहना है कि बांकुड़ा जैसे कुछ जिलों में मतदाता सूची की ‘हार्ड कॉपी’ उपलब्ध करा दी गयी है।

वोटर लिस्ट के प्रकाशन से 7.08 करोड़ मतदाताओं को ‘स्वीकृत’, ‘हटाये गये’ या ‘विचाराधीन’ के रूप में वर्गीकृत किया जायेगा। विचाराधीन की श्रेणी में वैसे वोटर्स को रखा गया है, जिनके नामों की न्यायिक अधिकारियों द्वारा वर्तमान में जांच की जा रही है। सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी होने के बाद पता चलेगा कि किन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किये गये हैं और किनके नाम हटाये गये हैं।

पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया 4 नवंबर 2025 को मतदाताओं के बीच जनगणना प्रपत्रों के वितरण के साथ शुरू हुई थी। निर्वाचन आयोग को राजनीतिक उथल-पुथल, दस्तावेज सत्यापन नियमों में संशोधन और कानूनी चुनौतियों के बीच इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से पूरा करने और अंतिम लेकिन अपूर्ण सूची प्रकाशित करने में 116 दिन लगे।

मसौदा मतदाता सूची यानी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित हुई थी। इसके अनुसार, मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गयी। मसौदा मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं को इस आधार पर गणना प्रपत्र वितरित किये गये थे कि उनके नाम अगस्त 2025 तक राज्य की मतदाता सूची में शामिल हैं। 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मृत्यु, प्रवास, नाम दोहराव या पता नहीं मिलने के कारण हटा दिये गये हैं।

अब जो वोटर लिस्ट जारी हुए हैं, उसमें मतदाताओं की संख्या घटकर 7.04 करोड़ रह गयी है। इनमें 3,60,22,642 पुरुष, 3,44,35,260 महिला और 1,382 थर्ड जेंडर वोटर हैं। मुख्य निर्वचान अधिकारी (सीईओ) ने बताया कि फॉर्म 6 और फॉर्म 6ए भरकर 1,82,036 लोग वोटर बने हैं। 89,445 पुरुष और 92,583 महिलाओं के साथ-साथ 8 थर्ड जेंडर वोटर भी मतदाता सूची में शामिल हुए हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ शुरू, अमित शाह और जेपी नड्डा होंगे शामिल

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए राज्यव्यापी ‘परिवर्तन यात्रा’ शुरू करने की घोषणा की है। यह यात्रा 1 मार्च को 5 जगहों से और 2 मार्च को 4 जगहों से शुरू होगी।

भाजपा के अनुसार, यह यात्रा ऐतिहासिक होगी और इसका मुख्य नारा ‘पलटानो दरकार, चाई बीजेपी सरकार’ होगा। इस यात्रा के दौरान, भाजपा के 100 से अधिक प्रमुख नेता शामिल होंगे, जिनमें अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, नितिन नबीन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हैं।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य बंगाल के लोगों की आवाज बनना और राज्य में लोकतंत्र की बहाली करना है। भाजपा का लक्ष्य 1 करोड़ लोगों से संपर्क स्थापित करना और 5000 किलोमीटर की यात्रा करना है। इस यात्रा के दौरान, 63 बड़ी रैलियां और 281 स्वागत सभाएं आयोजित की जाएंगी।

भाजपा के अनुसार, यह यात्रा बंगाल के लोगों के लिए एक आंदोलन है और इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में विकसित पश्चिम बंगाल की राह तैयार करना है। इस यात्रा के दौरान, भाजपा महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार, और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगी।

इस यात्रा का समापन कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक विशाल जनसभा के साथ होगा। इस यात्रा के दौरान, भाजपा के सभी 9 संगठनात्मक डिवीजन शामिल होंगे और 38 संगठनात्मक जिलों में 230 से अधिक विधानसभा क्षेत्र को कवर किया जाएगा।

ईरान में आयातोल्लाह अली खामेनेई की हत्या: मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक प्रभाव

ईरान के सर्वोच्च नेता आयातोल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने की है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल द्वारा चलाए गए बड़े सैन्य हमले के दौरान हुई थी। यह घटना मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है और विश्व समुदाय में गंभीर प्रभाव डाला है।

आयातोल्लाह अली खामेनेई, जिन्होंने 1989 से देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व का नेतृत्व किया, की मौत संयुक्त अमेरिका-इज़राइली हवाई हमले में हुई। ईरानी सरकार ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है और सरकारी दफ्तरों को सात दिनों के लिए बंद रखने की घोषणा की गई है।

आयातोल्लाह अली खामेनेई का शासन 36 वर्षों तक चला और इस दौरान उन्होंने ईरान को एक कठोर धार्मिक शासन के रूप में स्थापित किया। उनकी विदेश नीति में संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल के प्रति तीखी प्रतिकूलता रही, जिसने मध्य पूर्व में तनाव को बढ़ाया।

संयुक्त अमेरिका और इज़रायल ने एक बड़े सैन्य अभियान का नाम “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” रखा, जिसमें हवाई हमले, मिसाइल और ड्रोन हमलों के माध्यम से ईरान की सैन्य और राजनीतिक संरचना को लक्षित किया गया। इस हमले में आयातोल्लाह अली खामेनेई का कार्यालय भी निशाना बनाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई।

ईरानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने उन लोगों के खिलाफ “सबसे भयंकर अभियान” का वादा किया जो आयातोल्लाह अली खामेनेई की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं। ईरानी मीडिया ने कहा कि हर संभव जवाब देने के लिए राष्ट्रीय निर्णय लिया जाएगा।

इस घटना का वैश्विक प्रभाव भी गहरा होगा। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल की प्रतिक्रिया में कहा गया है कि यह कदम ईरान के विस्तारवादी और परमाणु उद्देश्यों को रोकने के लिए आवश्यक था। सीरिया, लेबनान और यमन सहित क्षेत्र में ईरान समर्थित समूहों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, जो संकट के समय सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

वैश्विक बाजारों पर भी इस घटना का प्रभाव पड़ेगा। तेल की कीमतें, सुरक्षा-खतरा संकेतक और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है। ईरान के भविष्य की अनिश्चितता भी एक बड़ा मुद्दा है, क्योंकि आयातोल्लाह अली खामेनेई के पास स्पष्ट रूप से घोषित उत्तराधिकारी नहीं थे। इससे देश के अंदर और बाहर दोनों जगह गंभीर राजनीतिक बदलाव की संभावना बन गई है।

बिहार में भीषण सड़क हादसा: ट्रक की टक्कर से बाइक सवार इंजीनियर का हाथ कटा, गंभीर हालत में

बिहार के वैशाली जिले में गांधी सेतु पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ है, जिसमें एक बाइक सवार इंजीनियर गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा तब हुआ जब एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक को टक्कर मार दी, जिससे इंजीनियर का हाथ कटकर पुल से नीचे गिर गया। घटना के बाद इंजीनियर को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। यह हादसा सड़क सुरक्षा की महत्ता को फिर से उजागर करता है और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण की आवश्यकता पर बल देता है।

पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव परिणाम: NSUI की शानदार जीत, ABVP को मिला झटका

पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में उतरे प्रत्याशियों के भविष्य का फैसला आज ही हो गया है। मतदान के बाद अब सभी को परिणाम का इंतजार है। इस चुनाव में महज 37 प्रतिशत मतदान हुआ, जो कि एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है। रात तक परिणाम तय होने की उम्मीद है, और फिलहाल दो राष्ट्रीय दलों की छात्र इकाई के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। एनएसयूआई ने इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है, जबकि एबीवीपी को अध्यक्ष पद पर झटका लगा है। यह परिणाम पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।

बिहार सरकार का खजाना खाली होने की खबर के बाद सरकार बैकफुट पर: रद्द किया विवादित वित्त विभाग आदेश, वेतन छोड़ अन्य भुगतान रोकने का फैसला वापस

बिहार की सियासत और प्रशासन में 27 फरवरी 2026 को अचानक भूचाल आ गया, जब राज्य के बिहार वित्त विभाग ने एक ऐसा आदेश जारी किया, जिसने सरकारी तंत्र, ठेकेदारों, कर्मचारियों और राजनीतिक दलों को हैरान कर दिया। आदेश के मुताबिक 10 मार्च 2026 तक राज्य के सभी कोषागारों (Treasury) से केवल वेतन, पेंशन और मानदेय का भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा किसी भी अन्य मद में भुगतान पर रोक लगा दी गई थी।

यह आदेश जारी होते ही पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। विभागों के कामकाज पर सीधा असर पड़ने लगा। कई विकास योजनाओं, निर्माण कार्यों और आपूर्ति भुगतान पर संकट के बादल मंडराने लगे। लेकिन आदेश लागू होने के 24 घंटे के भीतर ही सरकार ने यू-टर्न लेते हुए इसे वापस ले लिया।

यह पूरा घटनाक्रम अब बिहार की प्रशासनिक कार्यशैली और वित्तीय प्रबंधन पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।


आदेश क्या था? विस्तार से समझिए

27 फरवरी 2026 को वित्त विभाग की ओर से एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया। यह पत्र विभाग के विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल के हस्ताक्षर से जारी हुआ था। इसमें राज्य के सभी विभागों, जिला पदाधिकारियों, आयुक्तों और कोषागार अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि:

  • 10 मार्च 2026 तक
  • केवल वेतन, पेंशन और मानदेय का भुगतान किया जाए
  • अन्य सभी मदों के भुगतान पर अस्थायी रोक रहेगी

इसका अर्थ था कि:

  • निर्माण कार्यों के बिल नहीं पास होंगे
  • सप्लायर और ठेकेदारों को भुगतान नहीं मिलेगा
  • चल रही योजनाओं के भुगतान लंबित रहेंगे
  • विभागीय खर्च और सामग्री आपूर्ति प्रभावित होगी

यह आदेश वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में आया, जब अधिकांश विभाग अपने खर्चों का समायोजन कर रहे होते हैं।


आदेश का संभावित कारण क्या था?

हालांकि आदेश में स्पष्ट कारण का उल्लेख नहीं था, लेकिन वित्तीय जानकारों के अनुसार यह कदम संभवतः वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन से पहले राजकोषीय संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया था।

हर साल मार्च के आसपास राज्य सरकारें:

  • बजट संतुलन की समीक्षा करती हैं
  • अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण लगाती हैं
  • अंतिम समय में होने वाले भुगतान पर नजर रखती हैं

संभव है कि सरकार वेतन और पेंशन जैसी अनिवार्य देनदारियों को प्राथमिकता देना चाहती थी। लेकिन जिस तरह से यह आदेश अचानक जारी किया गया, उसने इसे विवादास्पद बना दिया।


प्रशासन में मचा हड़कंप

जैसे ही आदेश विभागों तक पहुंचा, सचिवालय से लेकर जिलों तक अफरा-तफरी मच गई।

विभागों की परेशानी

  • कई विभागों के लाखों-करोड़ों रुपये के बिल लंबित थे
  • ठेकेदार भुगतान की प्रतीक्षा में थे
  • कई योजनाओं की समयसीमा नजदीक थी

यदि भुगतान रुक जाता, तो:

  • परियोजनाओं की गति रुक जाती
  • कार्य प्रभावित होते
  • कानूनी विवाद खड़े हो सकते थे

कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अनौपचारिक बातचीत में माना कि यह आदेश “व्यावहारिक रूप से लागू करना कठिन” था।


ठेकेदारों और सप्लायरों की चिंता

सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों ने सबसे पहले चिंता जताई। उनका कहना था कि:

  • पहले से ही भुगतान में देरी होती है
  • यदि 10 मार्च तक भुगतान रुका रहता, तो मजदूरों को भुगतान मुश्किल हो जाता
  • बैंक ऋण और ब्याज का दबाव बढ़ता

पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में कई ठेकेदार संघों ने इस आदेश को लेकर नाराजगी जताई।


राजनीतिक घमासान

विपक्षी दलों ने इस आदेश को सरकार की वित्तीय बदहाली का संकेत बताया। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में “कैश क्रंच” है और सरकार के पास अन्य मदों में भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है।

हालांकि सत्तारूढ़ पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल अस्थायी वित्तीय अनुशासन का कदम था।

लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया और सरकार की आलोचना शुरू हो गई।


24 घंटे में यू-टर्न

जैसे-जैसे विरोध बढ़ा, सरकार ने स्थिति की गंभीरता को समझा। 28 फरवरी 2026 को वित्त विभाग ने नया आदेश जारी कर पहले वाले निर्देश को रद्द कर दिया।

फिर से:

  • सभी मदों में भुगतान सामान्य रूप से शुरू करने के निर्देश दिए गए
  • कोषागारों को नियमित प्रक्रिया अपनाने को कहा गया

यह निर्णय भी मुकेश कुमार लाल द्वारा ही जारी किया गया।


आदेश वापसी के पीछे संभावित कारण

विश्लेषकों के अनुसार आदेश वापसी के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

1. प्रशासनिक दबाव

विभागों ने स्पष्ट कर दिया कि यह आदेश कामकाज ठप कर देगा।

2. आर्थिक असर

छोटे व्यवसायों और ठेकेदारों पर सीधा प्रभाव पड़ता।

3. राजनीतिक नुकसान

विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया था।

4. जनविश्वास

सरकार नहीं चाहती थी कि राज्य में वित्तीय संकट की अफवाह फैले।


क्या सच में था कैश संकट?

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि:

  • राज्य के पास वेतन और अन्य देनदारियों के लिए पर्याप्त संसाधन हैं
  • यह निर्णय केवल व्यय नियंत्रण के लिए था

लेकिन यह भी सच है कि:

  • कई राज्यों की तरह बिहार भी राजकोषीय दबाव में है
  • केंद्र से मिलने वाली राशि और आंतरिक राजस्व पर निर्भरता है
  • विकास योजनाओं के लिए निरंतर संसाधन जुटाना चुनौतीपूर्ण है

वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों की चुनौती

हर साल मार्च के महीने में:

  • विभाग अधिकतम खर्च दिखाने की कोशिश करते हैं
  • लंबित बिल क्लियर किए जाते हैं
  • बजट समायोजन होता है

ऐसे समय में यदि अचानक भुगतान रोक दिया जाए, तो:

  • लेखा समायोजन प्रभावित होता है
  • योजना प्रगति रिपोर्ट बाधित होती है
  • फंड उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित रह जाते हैं

प्रशासनिक सीख

यह पूरा घटनाक्रम कई महत्वपूर्ण सबक देता है:

1. संवाद जरूरी है

ऐसे निर्णय से पहले विभागों से परामर्श आवश्यक है।

2. पारदर्शिता जरूरी है

यदि वित्तीय अनुशासन लागू करना है, तो उसका कारण स्पष्ट होना चाहिए।

3. चरणबद्ध नीति बेहतर

पूर्ण रोक के बजाय आंशिक नियंत्रण बेहतर विकल्प हो सकता था।


अधिकारियों की प्रतिक्रिया

कई अधिकारियों ने राहत की सांस ली जब आदेश वापस लिया गया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:
“अगर यह आदेश 10 मार्च तक लागू रहता, तो कई विभागों का काम रुक जाता।”

1 मार्च से लागू हो सकते हैं नए नियम: जानें WhatsApp, रेलवे टिकट, LPG, UPI और बैंकिंग में क्या बदलेगा

1 मार्च से कई नए नियम लागू हो सकते हैं जो आम लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित करेंगे। इन नियमों में WhatsApp, रेलवे टिकट, LPG, UPI और बैंकिंग से संबंधित बदलाव शामिल हैं। इन नियमों को समझना जरूरी है ताकि आप परेशानी से बच सकें।

WhatsApp और Telegram पर सिम बाइंडिंग नियम लागू हो सकता है, जिसका अर्थ है कि आपका अकाउंट उसी नंबर से जुड़ा होना चाहिए जिससे आपने अकाउंट बनाया था। अगर आप सिम निकाल देते हैं या किसी और फोन में डाल देते हैं, तो आपका अकाउंट बंद हो सकता है। यह नियम फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए लागू किया जा रहा है।

रेलवे टिकट बुकिंग को आसान बनाने के लिए एक नया ऐप लॉन्च किया जा सकता है, जिससे जनरल टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट और लोकल ट्रैवल जैसी सुविधाएं एक ही जगह मिल सकेंगी। इससे टिकट बुकिंग प्रक्रिया सरल और तेज हो सकती है।

एलपीजी सिलेंडर के दामों की समीक्षा 1 मार्च को की जाएगी, जिसमें कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। घरेलू उपभोक्ताओं को भी कीमतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए, खासकर त्योहारों से पहले।

कई सरकारी बैंक न्यूनतम बैलेंस के नियम में बदलाव कर सकते हैं, जिससे ग्राहकों को राहत मिल सकती है और बिना वजह कटने वाले चार्ज कम हो सकते हैं। अब पूरे महीने के औसत बैलेंस के आधार पर तय किया जाएगा कि जुर्माना लगेगा या नहीं।

₹2000 से अधिक के लेनदेन पर अतिरिक्त सुरक्षा जांच हो सकती है, जिससे यूपीआई फ्रॉड को रोकने में मदद मिलेगी। यदि ट्रांजैक्शन नए डिवाइस, नई लोकेशन या असामान्य राशि से जुड़ा होगा, तो ऐप दोबारा पिन डालने या अतिरिक्त कन्फर्मेशन मांग सकता है।

रणजी ट्रॉफी 2026: जम्मू-कश्मीर ने रचा इतिहास, 67 साल बाद जीता पहला खिताब

जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने शनिवार, 28 फरवरी को इतिहास रच दिया जब उन्होंने अपना पहला रणजी ट्रॉफी खिताब जीता। यह जीत 67 साल के लंबे इंतजार के बाद मिली, जब टीम ने हुबली में खेले गए फाइनल मुकाबले में कर्नाटक को हराया।

जम्मू-कश्मीर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और अपनी पहली पारी में 584 रन बनाए। इसके जवाब में कर्नाटक की टीम सिर्फ 293 रन ही बना सकी, जिससे जम्मू-कश्मीर को 291 रन की बड़ी बढ़त मिल गई।

आमतौर पर इतनी बढ़त मिलने पर टीम सामने वाली टीम को फॉलोऑन देती है, लेकिन जम्मू-कश्मीर ने रणनीतिक रूप से दूसरी पारी खेलने का फैसला किया। दूसरी पारी में टीम ने मजबूती से बल्लेबाजी जारी रखी और पांचवें और अंतिम दिन चार विकेट पर 342 रन बना लिए थे।

कामरान इकबाल और साहिल लोत्रा ने शानदार शतक जड़े और जम्मू-कश्मीर को विजेता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब जम्मू-कश्मीर की कुल बढ़त 633 रन हो गई, तब दोनों टीमों के कप्तानों ने आपसी सहमति से मैच ड्रॉ करने का फैसला किया और पहली पारी की बढ़त के कारण जम्मू-कश्मीर को विजेता घोषित किया गया।

यह जीत जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय है और टीम ने साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और सही रणनीति से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

टी20 वर्ल्ड कप: पाकिस्तान की जीत के बावजूद श्रीलंका ने सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर कर दिया

पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच टी20 वर्ल्ड कप में एक रोमांचक मुकाबला हुआ, जिसमें पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट खोकर 212 रन का स्कोर बनाया। श्रीलंका को मुकाबला जीतने के लिए 213 रन बनाने थे, लेकिन पाकिस्तान की जीत के बावजूद श्रीलंका ने सेमीफाइनल की दौड़ से पाकिस्तान को बाहर कर दिया।

साहिबजादा फरहान और फखर जमान ने पाकिस्तान को अच्छी शुरुआत दिलाई, जिन्होंने पहले विकेट के लिए 176 रनों की साझेदारी बनाई। साहिबजादा फरहान ने 60 गेंदों में 9 चौके और 5 छक्कों की मदद से 100 रनों की पारी खेली, जबकि फखर जमान 42 गेंदों में 9 चौके और 4 छक्कों की मदद से 84 रन पर आउट हुए।

पाकिस्तान ने अपनी टीम में तीन बदलाव किए, जिनमें बाबर आजम, साइम अयूब और सलमान मिर्जा को टीम से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह पर नसीम शाह, ख्वाजा नफे और अबरार अहमद को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। श्रीलंका ने भी अपनी टीम में दो बदलाव किए, जिनमें कामिल मिश्रा कुसल मेंडिस की जगह टीम में आए और दुशान हेमंथा की जगह पर जेनिथ लियानगे को टीम में शामिल किया गया।

पाकिस्तान के लिए यह मुकाबला करो या मरो वाला था, लेकिन श्रीलंका ने पाकिस्तान को सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर कर दिया। पाकिस्तान को 65 या उससे अधिक रनों से श्रीलंका को हराना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब पाकिस्तान को टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होना पड़ेगा।

पटना NEET छात्रा मामले में कोर्ट की सख्ती: CBI से पूछे तीखे सवाल, मनीष को नहीं मिली जमानत

पटना के NEET छात्रा मामले में कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने CBI से तीखे सवाल पूछे और मनीष रंजन को जमानत देने से इनकार कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी।

कोर्ट ने CBI से पूछा कि जब मामला गंभीर है तो पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया? CBI ने 12 फरवरी को 307 यानी हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया था। कोर्ट ने पूछा कि 15 दिन की जांच में मनीष रंजन के खिलाफ क्या सबूत जुटाए गए? क्या अब भी उसकी जरूरत जांच के लिए है? अगर केवल अटेम्प्ट टू मर्डर का केस है, तो स्पष्ट बताएं कि हिरासत क्यों जरूरी है।

कोर्ट ने SIT और थानेदार के बयान में फर्क भी पाया। 17 जनवरी तक केस की जांच चित्रगुप्त नगर थाने की तत्कालीन प्रभारी रौशनी कुमारी कर रही थीं। बाद में जांच SIT को सौंपी गई। कोर्ट ने रौशनी से पूछा कि मनीष पर क्या आरोप हैं? कौन-कौन से सबूत जब्त किए? सबूत 24 घंटे में कोर्ट में क्यों नहीं दिए?

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि सबूतों से छेड़छाड़ हुई है। कोर्ट ने SDPO से भी पूछताछ की। SIT को लीड कर रहीं सचिवालय SDPO-1 डॉ. अन्नू कुमारी से कोर्ट ने सवाल किए। मनीष कब और कहां था? बिहार से बाहर कब गया? कब पकड़ा गया? क्या बयान दिया?

मामले की जांच कर रही CBI टीम प्रभात अस्पताल भी पहुंची। एक महिला स्टाफ से करीब 5 घंटे पूछताछ हुई। स्टाफ ने बताया कि छात्रा बेहोशी की हालत में लाई गई थी। उसके शरीर पर खरोंच के निशान थे। उसने कहा कि अस्पताल में दुष्कर्म की चर्चा थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म का जिक्र है। जबकि अस्पताल ने मौत की वजह नशीली दवा का ओवरडोज बताया था। इस विरोधाभास को लेकर भी सवाल उठे हैं।

मनीष रंजन पिछले 45 दिनों से बेउर जेल में बंद है। 14 जनवरी को उसे गिरफ्तार किया गया था। वह शंभू गर्ल्स हॉस्टल चलने वाली बिल्डिंग का मालिक है। पीड़ित परिवार ने कोर्ट में जमानत का विरोध किया। उनके वकील ने कहा कि मनीष इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता है। उसे बेल नहीं दी जानी चाहिए। अब 2 मार्च को अगली सुनवाई में सभी की नजरें टिकी हैं। कोर्ट CBI और SIT के जवाबों पर आगे फैसला लेगा।

बिहार में महिला रोजगार योजना की जांच शुरू: 1.81 करोड़ महिलाओं ने 10 हजार रुपये का किया क्या?

बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 1.81 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपये रोजगार के लिए दिए हैं। अब सरकार ने यह जानने के लिए जांच शुरू की है कि इन महिलाओं ने इस राशि से क्या किया है। ग्रामीण विकास विभाग की जीविका ने जिला से लेकर प्रखंड स्तर पर जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं ने 10 हजार रुपये से गांवों में किराने की छोटी दुकानें खोली हैं, बकरी पालन शुरू किया है, और सिलाई मशीन लेकर सिलाई और बुनाई का काम कर रही हैं। जीविका के अधिकारियों ने बताया कि जिन महिलाओं ने रोजगार शुरू नहीं किया है, उनको भी चिह्नित किया जा रहा है। राशि लेकर रोजगार शुरू नहीं करने वाली महिलाओं को आगे की किस्त पाने में बाधा होगी।

दूसरे चरण में महिलाओं को 20 हजार रुपये दिए जाएंगे, जिसमें उन्हें 5 हजार रुपये अपनी ओर से जोड़कर रोजगार शुरू करना होगा। तीसरे चरण में सरकार की ओर से 40 हजार रुपये दिए जाएंगे, जिसमें महिलाओं को 10 हजार रुपये स्वयं निवेश करना होगा। चौथे चरण में 80 हजार रुपये दिए जाएंगे, जिसमें महिलाओं को 20 हजार रुपये अपनी ओर से लगाने होंगे। अंतिम चरण में व्यवसाय के विस्तार के लिए मार्केटिंग, ब्रांडिंग और पैकेजिंग मद में 60 हजार रुपये की राशि दी जाएगी।

Bihar News बिहार की ताज़ा खबरें: पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर में स्वास्थ्य, पर्यटन, उद्योग और कानून-व्यवस्था पर बड़े अपडेट

बिहार के प्रमुख जिलों Patna, Gaya, Muzaffarpur और Bhagalpur में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, पर्यटन सुरक्षा, लीची व रेशम उद्योग को बढ़ावा और कानून-व्यवस्था सख्ती जैसे अहम कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार विकास परियोजनाओं को तेज कर रही है, जिससे रोजगार और निवेश के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

🏥 AIIMS Patna में अत्याधुनिक मशीन की शुरुआत

पटना स्थित एम्स में न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग को और मजबूत किया गया है। अस्पताल में नई SPECT-CT गामा कैमरा मशीन की शुरुआत की गई है, जिससे कैंसर समेत कई जटिल बीमारियों की जांच अधिक सटीक तरीके से हो सकेगी। इससे बिहार और पूर्वी भारत के मरीजों को उन्नत इलाज की सुविधा मिलेगी।


🛣️ Patna में फ्लाईओवर निर्माण का निरीक्षण

जिला प्रशासन ने खगौल-नौबतपुर रोड पर बन रहे फ्लाईओवर का निरीक्षण किया। यह परियोजना राज्य की बड़ी आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल है। अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे यातायात जाम की समस्या में राहत मिलेगी।


🌾 Gopalganj में सासामुसा चीनी मिल के पुनरुद्धार की तैयारी

बिहार सरकार ने Sasamusa Sugar Mill को फिर से चालू करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि मिल शुरू होने से स्थानीय किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


💰 माइक्रोफाइनेंस कंपनियों पर सख्ती

राज्य में माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को लेकर नए नियम लागू किए जाने की तैयारी है। इन प्रस्तावित नियमों से लोन देने वाली कंपनियों पर नियंत्रण बढ़ेगा। उद्योग जगत ने इस पर चिंता जताई है कि इससे छोटे कर्ज लेने वालों को परेशानी हो सकती है।


🗳️ पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर?

बिहार में आगामी पंचायत चुनाव पार्टी चिन्ह पर कराए जाने पर विचार चल रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह स्थानीय निकाय चुनावों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जाएगा।


📍 पटना: स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

राजधानी Patna में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। AIIMS Patna में न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग को अत्याधुनिक SPECT-CT गामा कैमरा मशीन से लैस किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कैंसर, हृदय और हड्डी संबंधी बीमारियों की जांच पहले से अधिक सटीक और तेज होगी। राज्य के दूर-दराज इलाकों से आने वाले मरीजों को अब दिल्ली या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

वहीं शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए खगौल-नौबतपुर रोड पर फ्लाईओवर निर्माण कार्य की समीक्षा की गई। जिला प्रशासन ने निर्माण एजेंसियों को समयसीमा का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। राजधानी में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए यह परियोजना अहम मानी जा रही है। इसके अलावा स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के तहत ड्रेनेज सिस्टम, सड़क चौड़ीकरण और स्ट्रीट लाइटिंग पर भी तेजी से काम चल रहा है।


📍 गया: पर्यटन और उद्योग को बढ़ावा

धार्मिक और पर्यटन नगरी Gaya में पर्यटन सीजन को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में है। महाबोधि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। होटल व्यवसायियों का कहना है कि इस वर्ष पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

उद्योग के क्षेत्र में भी गया में निवेश आकर्षित करने के प्रयास हो रहे हैं। राज्य सरकार की औद्योगिक नीति के तहत छोटे और मध्यम उद्यमों को जमीन और बिजली कनेक्शन में रियायत देने की प्रक्रिया तेज की गई है। स्थानीय युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं, ताकि उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकें।

साथ ही, गया जिले के ग्रामीण इलाकों में सिंचाई योजनाओं की समीक्षा की जा रही है। किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने विशेष शिविर लगाए हैं।


📍 मुजफ्फरपुर: लीची उद्योग और कानून-व्यवस्था

उत्तर बिहार का प्रमुख जिला Muzaffarpur अपनी प्रसिद्ध शाही लीची के लिए जाना जाता है। इस बार मौसम अनुकूल रहने से लीची उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है। कृषि वैज्ञानिकों ने बागानों का निरीक्षण कर किसानों को फसल सुरक्षा के उपाय बताए हैं। निर्यात बढ़ाने के लिए कोल्ड स्टोरेज और पैकेजिंग सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।

वहीं कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन सक्रिय है। हाल के दिनों में बढ़ी चोरी और लूट की घटनाओं के बाद विशेष गश्ती अभियान चलाया गया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि कई मामलों का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी मुजफ्फरपुर आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय और कॉलेजों में परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन पोर्टल को अपडेट किया गया है।


📍 भागलपुर: उद्योग और गंगा तट विकास

रेशम नगरी के नाम से मशहूर Bhagalpur में उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में प्रयास तेज हैं। रेशम उद्योग से जुड़े कारीगरों को आधुनिक मशीनें और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना पर काम चल रहा है। सरकार का मानना है कि इससे निर्यात में वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

गंगा तट के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास के लिए भी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। नदी किनारे घाटों का जीर्णोद्धार और लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

कृषि क्षेत्र में मक्का और दलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। किसानों को सब्सिडी पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

इज़राइल-अमेरिका का ईरान पर बड़ा सैन्य हमला: तेहरान में धमाके, परमाणु वार्ता टूटी, मध्य-पूर्व युद्ध की कगार पर

मध्य-पूर्व एक बार फिर व्यापक संघर्ष की दहलीज पर खड़ा है। शनिवार देर रात इज़राइल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की घोषणा की, जिसके तुरंत बाद अमेरिका ने भी “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशन” शुरू करने की पुष्टि की। तेहरान समेत कई अहम शहरों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, हवाई सुरक्षा प्रणालियाँ सक्रिय हुईं और आपातकालीन स्थिति लागू कर दी गई।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता में चल रही परमाणु वार्ताएँ अंतिम चरण में मानी जा रही थीं, लेकिन प्रमुख मुद्दों पर सहमति न बन पाने से बातचीत टूट गई। अब यह टकराव केवल दो देशों के बीच का संघर्ष नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर इसका असर पड़ने की आशंका है।

हमले की शुरुआत: क्या हुआ तेहरान में?

इज़राइली अधिकारियों ने कहा कि यह “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” यानी पूर्व-निरोधात्मक हमला था, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से उत्पन्न “तात्कालिक खतरे” को निष्क्रिय करना था। इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह कार्रवाई देश की सुरक्षा के लिए अनिवार्य थी।

ईरान की राजधानी Tehran में कई स्थानों पर विस्फोटों की पुष्टि हुई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, कुछ धमाके सरकारी परिसरों और रक्षा प्रतिष्ठानों के पास हुए। ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के कार्यालय परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शहर के कुछ हिस्सों में बिजली और संचार सेवाएँ बाधित रहीं। हवाई अड्डों पर उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी गईं और वायुक्षेत्र बंद कर दिया गया।

अमेरिका की भूमिका: ‘मेजर कॉम्बैट ऑपरेशन’ की घोषणा

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने व्हाइट हाउस से संबोधन में पुष्टि की कि अमेरिकी सेना इज़राइल के साथ समन्वित कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि “ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना हमारी प्राथमिकता है।”

अमेरिकी रक्षा सूत्रों के अनुसार, संयुक्त हमलों में ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें संभावित परमाणु अनुसंधान केंद्र, मिसाइल भंडारण स्थल और सैन्य कमांड सुविधाएँ शामिल थीं।

इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी नौसैनिक बेड़े को फारस की खाड़ी में हाई अलर्ट पर रखा गया है। मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी ठिकानों पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

परमाणु वार्ता क्यों टूटी?

पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की राजधानी Muscat में अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही थी। इसके अलावा जिनेवा और वियना में भी बैठकों का दौर हुआ।

मुख्य विवाद के मुद्दे थे:

  1. यूरेनियम संवर्धन (Enrichment):
    ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को “शांतिपूर्ण” बताते हुए संवर्धन जारी रखने की मांग की। अमेरिका ने सख्त अंतरराष्ट्रीय निगरानी और सीमाओं की शर्त रखी।
  2. प्रतिबंधों में राहत:
    तेहरान ने व्यापक आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग की, जबकि वाशिंगटन ने पहले ठोस परमाणु प्रतिबद्धता की शर्त रखी।
  3. मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव:
    अमेरिका चाहता था कि समझौते में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और ईरान समर्थित समूहों की गतिविधियाँ भी शामिल हों। ईरान ने इसे “अस्वीकार्य” बताया।

सूत्रों के अनुसार, अंतिम दौर की बातचीत में कोई निर्णायक प्रगति नहीं हुई, जिसके बाद सैन्य विकल्प को हरी झंडी दी गई।

इज़राइल में आपातकाल

हमले के तुरंत बाद इज़राइल में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए, सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द हुए और नागरिकों को बंकरों के पास रहने की सलाह दी गई।

इज़राइली रक्षा बलों ने आशंका जताई कि ईरान या उसके समर्थित समूह मिसाइल और ड्रोन हमले कर सकते हैं। तेल अवीव और यरूशलम में हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय रखी गई है।

ईरान की प्रतिक्रिया: ‘कड़ा प्रतिशोध’

ईरान की सरकार ने इस कार्रवाई को “खुली आक्रामकता” करार दिया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि “हम अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएँगे।”

क्षेत्र में ईरान समर्थित समूहों—जैसे लेबनान और यमन के संगठन—ने भी इज़राइल के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी है। इससे संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है।

वैश्विक असर: ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक हलचल

मध्य-पूर्व वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। ईरान और फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव से तेल की कीमतों में उछाल देखा गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान और इज़राइल की यात्रा से बचने की सलाह जारी की है।

भारत की एडवाइजरी

भारत सरकार ने ईरान और इज़राइल में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए परामर्श जारी किया है। तेहरान में भारतीय दूतावास ने लोगों से घरों के भीतर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा है। हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।

नई दिल्ली स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि भारत के ऊर्जा और व्यापारिक हित भी इस क्षेत्र से जुड़े हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय रहा है। 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) के बाद कुछ वर्षों तक स्थिति नियंत्रित रही, लेकिन अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने और प्रतिबंधों की वापसी के बाद तनाव बढ़ गया।

इज़राइल लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार क्षमता विकसित कर रहा है, जबकि ईरान इसे सिरे से खारिज करता है।

पटना में बर्ड फ्लू का खतरा: जानें क्या हैं इसके लक्षण और बचाव के तरीके

पटना में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। शहर के कंकड़बाग और हाईकोर्ट इलाकों में कई पक्षियों की मौत हो गई है, जिसके बाद उनके सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजे गए थे। अब रिपोर्ट में बर्ड फ्लू यानी H5N1 की पुष्टि हो गई है।

प्रशासन ने बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए कई कदम उठाए हैं। जिस जगह पर पक्षियों की मौत हुई, उसके आसपास एक किलोमीटर के दायरे को संक्रमित क्षेत्र घोषित किया गया है। एहतियात के तौर पर करीब 4575 मुर्गियों को मार दिया गया है, ताकि संक्रमण आगे न फैले। साथ ही 9662 अंडे और करीब 530 किलो दाना भी नष्ट कर दिया गया है।

पटना जू और जू-सेक्टर पार्क को एक हफ्ते के लिए बंद कर दिया गया है, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पूरे इलाके में दवा का छिड़काव किया गया है और साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

अधिकारियों ने लोगों से घबराने को नहीं कहा है, लेकिन सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर दिया है। अगर कहीं मरे हुए पक्षी दिखें तो उन्हें हाथ न लगाएं और तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचना दें। चिकन और अंडा खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह पका लें और अफवाहों पर ध्यान न दें, सिर्फ सही जानकारी पर भरोसा करें।

बर्ड फ्लू के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, और सांस लेने में परेशानी शामिल हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बर्ड फ्लू से बचाव के लिए हाथों को बार-बार धोएं, चिकन और अंडे को अच्छी तरह पकाएं, और पक्षियों से दूरी बनाए रखें।

बंगाल में मांसाहार पर सियासत: तृणमूल कांग्रेस ने बिहार के फैसले को लेकर भाजपा पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बिहार सरकार के एक फैसले ने राज्य की राजनीति में एक नए विवाद को जन्म दिया है। बिहार में सार्वजनिक स्थानों पर मांस-मछली की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा लोगों के खानपान पर नियंत्रण करना चाह रही है और अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनी तो यहां भी मांस-मछली की खरीद-बिक्री पर रोक लगा देगी।

बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस फैसले को स्वच्छता के लिए उठाया गया कदम बताया है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसे देशव्यापी प्रतिबंध का एजेंडा बताया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनी तो वे मछली और मांस की बिक्री पर रोक लगा देंगे।

तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मछली और चावल खाने वाले बंगाली को निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने कहा है कि भाजपा की नीतियां बंगालियों के अस्तित्व को खतरा पहुंचा सकती हैं। भाजपा ने भी इस मुद्दे पर सफाई दी है और कहा है कि बंगाल में मछली और मांस की बिक्री जारी रहेगी।

पश्चिम बंगाल में मांसाहार पर विवाद नया नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले भी मांस और मछली के सेवन पर टिप्पणी की थी, जिस पर सीएम ममता बनर्जी ने जवाब दिया था। इसके अलावा, कोलकाता में गीता पाठ कार्यक्रम स्थल के पास मांस के टुकड़े बेच रहे एक स्ट्रीट वेंडवेंर पर हमले का वीडियो वायरल होने के बाद भी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।

अमेरिका-भारत व्यापार समझौता: पीयूष गोयल ने कहा- देशहित को प्राथमिकता, टैरिफ दरों में बदलाव की संभावनाएं

अमेरिका में टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद वैश्विक व्यापार माहौल में नई हलचल पैदा हो गई है। इस बदलती स्थिति के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ किया है कि भारत फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार और निगरानी की रणनीति अपना रहा है। सरकार का कहना है कि हर कदम देश के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखकर उठाया जाएगा।

मंत्री ने एक कार्यक्रम में कहा कि यह स्थिति लगातार बदल रही है और भारत घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ संवाद जारी है और आंतरिक स्तर पर भी व्यापक विचार-विमर्श हो रहा है। उनका कहना था कि जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होगा, क्योंकि परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।

अमेरिका के साथ संवाद जारी है, और दोनों देशों के बीच हुए संयुक्त वक्तव्य में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि हालात बदलते हैं तो समझौते को दोबारा संतुलित किया जा सकता है। मंत्री ने संकेत दिया कि अमेरिकी सरकार के पास नीतिगत फैसलों के कई विकल्प हैं, इसलिए अंतिम तस्वीर साफ होने में समय लग सकता है। ऐसे में भारत का रुख संतुलित और व्यावहारिक है।

टैरिफ दरों में बदलाव का क्या मतलब है? मंत्री ने “तुलनात्मक लाभ” की बात कही। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बहुत मायने रखती है। यदि भारत पर लागू टैरिफ दर प्रतिस्पर्धी देशों से कम होती है, तो भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिल सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 50 प्रतिशत जैसी ऊंची टैरिफ दर भारतीय निर्यात को नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं, यदि दर कम होकर 15 प्रतिशत जैसी हो जाए और यह अन्य देशों से कम हो, तो भारत को स्पष्ट लाभ मिल सकता है।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी व्यापार समझौते को केवल टैरिफ के आंकड़ों से नहीं आंका जा सकता। इसमें बाजार तक पहुंच, निवेश के अवसर, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी शामिल होती हैं। हालांकि अंतिम समझौते के पूरे विवरण साझा नहीं किए जा सकते, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि समझौते में भारत के लिए कई सकारात्मक पहलू शामिल हैं। सरकार ने उद्योग जगत और निर्यातकों को आश्वस्त किया है कि भारत वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप रणनीतिक फैसले लेगा। उद्देश्य यह है कि भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिले और नए अवसरों के द्वार खुलें।

रेलवे में अग्निवीरों के लिए नौकरी के नए अवसर, 5000 पदों पर निकलेगी वैकेंसी

भारतीय सेना और भारतीय रेलवे ने मिलकर एक नए को-ऑपरेशन फ्रेमवर्क की शुरुआत की है, जिसके तहत रिटायर अग्निवीरों को रेलवे में नौकरी दी जाएगी। यह पहल पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों को दोबारा रोजगार उपलब्ध कराने के लिए की गई है। रेल मंत्रालय ने रेलवे में खाली पोस्ट को जल्द-से-जल्द भरने के लिए 5,000 से अधिक पूर्व सैनिकों को ‘प्वाइंट्समैन’ के पद पर संविदा आधार पर नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

इस पहल के तहत, लेवल-1, लेवल-2 और उससे ऊपर के पदों पर रिजर्वेशन लागू किया जाएगा। पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों को रेलवे में नौकरी देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। रेलवे ने देश के विभिन्न रेलवे जोन और मंडलों में इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

रेलवे में पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। लेवल-2 और उससे ऊपर के पदों में पूर्व सैनिकों के लिए 10% आरक्षण और लेवल-1 पदों में 20% आरक्षण दिया जाएगा। पूर्व अग्निवीरों के लिए लेवल-2 और उससे ऊपर के पदों में 5% आरक्षण और लेवल-1 पदों में 10% आरक्षण दिया जाएगा।

वर्ष 2024 और 2025 में अधिसूचित रिक्तियों में पूर्व सैनिकों के लिए 14,788 पद आरक्षित किए गए हैं। इनमें 6,485 पद लेवल-1 और 8,303 पद लेवल-2 व उससे ऊपर के शामिल हैं। पॉइंट्समैन पोस्ट एक महत्वपूर्ण पद है, जिसका मुख्य काम ट्रेनों के लिए रेलवे ट्रैक की लाइन बदलने वाले हिस्से को सही दिशा में सेट करना होता है।

इससे पहले भी पूर्व सैनिकों को सीएपीएफ और दिल्ली पुलिस जैसी सेवा में आरक्षण दिया गया है। दिल्ली पुलिस में सिपाही भर्ती में 20% आरक्षण तय किया गया है। सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और दिल्ली पुलिस भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण देने का प्रावधान किया है।

अग्निवीर योजना के तहत, सेना में अग्निवीर की भर्ती होती है। अग्निपथ योजना साल 2022 में 14 जून को लाई गई थी। इसके तहत युवाओं को सेना, नौसेना और वायुसेना में 4 वर्ष के लिए भर्ती किया जाता है। चार साल बाद केवल 25% अग्निवीरों को स्थायी सेवा मिलती है। शेष 75% अग्निवीरों को सेवा मुक्त कर दिया जाता है।

वृंदावन में रंगों की बारिश: बांके बिहारी और राधारानी-श्रीकृष्ण ने खेली फूलों की होली, मथुरा में जमकर नाच-Gान

वृंदावन और मथुरा में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। बांके बिहारी जी के मंदिर में रंगभरी एकादशी पर अनोखा नजारा दिखा, जहां पुजारियों ने भगवान को रंग और अबीर लगाया और भक्तों पर प्रसादी गुलाल बरसाया। मंदिर रंग-बिरंगे गुलाल में डूबा नजर आया और प्रसाद पाने के लिए भक्तों में होड़ मच गई।

इस बीच, राधारानी और श्रीकृष्ण ने भी फूलों की होली खेली। मथुरा के डीएम चंद्रप्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने भी होली के गानों पर डांस किया और अधिकारियों के साथ जमकर होली खेली। गोपियों ने केशव वाटिका में मनाई गई होली में हुरियारों पर जमकर लाठी बरसाईं, जिसमें पुलिस वाले भी उनकी लाठी से बचते नजर आए।

वृंदावन की गलियां शुक्रवार दिनभर भक्तों से खचाखच भरी रहीं और हर तरफ अबीर-गुलाल उड़ता दिखा। रंगों से रंगे भक्तों ने ‘आज ब्रज में होली रे रसिया’ गाने पर जमकर डांस किया और बड़ी संख्या में भक्तों ने वृंदावन की पंचकोसी परिक्रमा की। कई भक्त अपने लड्डू गोपाल को गोद में लेकर पहुंचे थे। अनुमान है कि ब्रज की होली खेलने के लिए करीब 10 लाख भक्त वृंदावन पहुंचे हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस पर साधा निशाना, पूछा – सोनिया गांधी, राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा जेल गए हैं क्या?

आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस की ओर से की गई टिप्पणी पर केजरीवाल ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को शर्म आनी चाहिए, क्योंकि वे खुद जेल गए हैं, लेकिन सोनिया गांधी, राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा जेल गए हैं क्या?

केजरीवाल ने कहा कि वे खुद, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह जेल में गए, लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने कभी जेल का मुंह नहीं देखा। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस किस मुंह से बात कर रही है, उन्हें शर्म नहीं आती? केजरीवाल ने कहा कि अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है और मौजूदा परिस्थितियों में जब सभी संस्थाएं हमले के घेरे में हैं, न्यायाधीश ने आदेश पारित करने में जबरदस्त साहस दिखाया है।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को शराब नीति मामले में बरी कर दिया है। साथ ही सीबीआई से नाराजगी जताते हुए कहा कि उसका मामला न्यायिक समीक्षा में खरा उतरने में पूरी तरह विफल रहा है। केजरीवाल ने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी को दिल्ली में नए सिरे से चुनाव कराने की चुनौती देते हैं और अगर बीजेपी 10 से अधिक सीट जीतती है, तो वे राजनीति छोड़ देंगे।

झारखंड निकाय चुनाव परिणाम से लेकर पाक-अफगान संघर्ष तक, 28 फरवरी की टॉप 20 खबरें

आज के समय में खबरें बहुत तेजी से बदलती हैं और हर दिन नए-नए घटनाक्रम सामने आते हैं। 28 फरवरी को भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला, जब झारखंड निकाय चुनाव के परिणाम सामने आए, पाक-अफगान संघर्ष में 274 लड़ाकों के मारे जाने की खबर आई, और इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया। इन सभी खबरों के अलावा भी बहुत कुछ हुआ, जो आपको जानना चाहिए।

झारखंड निकाय चुनाव के परिणाम में भाजपा के संजय सरदार आदित्यपुर नगर निगम के मेयर बने, जबकि चक्रधरपुर नगर परिषद की कमान सन्नी उरांव के हाथ में आई। रामगढ़ नगर परिषद अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस समर्थित कुसुमलता कुमारी ने जीत हासिल की, और खूंटी नगर पंचायत की अध्यक्ष रानी टूटी बनीं।

इसके अलावा, पाक-अफगान संघर्ष में 274 तालिबान लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है, जो एक बड़ा घटनाक्रम है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, और रॉबर्ट वाड्रा के जेल जाने की खबरों पर अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस पर हमला बोला, और तेजस्वी यादव ने दिल्ली में दोबारा चुनाव कराने की मांग की।

बिहार राज्यसभा चुनाव में पांचवीं सीट पर महागठबंधन के उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया गया है, और एआईएमआईएम ने समर्थन मांगा है। पटना के कंकड़बाग से हाईकोर्ट तक बर्ड फ्लू की खबरें आईं, और पटना जू को एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है।

इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया, जिससे पाकिस्तान की सेमीफाइनल उम्मीदें अभी भी जिंदा हैं। 1 मार्च से सिम बाइंडिंग नियम लागू होंगे, जिसके तहत बिना एक्टिव सिम के मैसेजिंग ऐप्स काम नहीं कर पाएंगे। मार्च में स्मार्टफोन लॉन्च की भरमार होगी, और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म ईबे ने 800 लोगों को निकालने का फैसला किया है।

अमेरिकी टैरिफ पर भारत का ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाई है, और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि देशहित सर्वोपरि रहेगा। सीबीएसई का कंप्यूटर का पेपर आसान रहा, और स्टूडेंट्स ने बताया कि एनसीईआरटी से सवाल पूछे गए थे। साउथ अफ्रीका से वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट में करियर बनाने के लिए कोर्स किया जा सकता है, और हाई कोर्ट से ‘द केरल स्टोरी 2’ को रिलीज पर लगा बैन हटा दिया गया है।

इन सभी खबरों के अलावा भी बहुत कुछ हुआ, जो आपको जानना चाहिए। तो आइए, इन खबरों को विस्तार से जानते हैं और समझते हैं कि वे क्या कहती हैं और उनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

बिहार में शिक्षकों को मिलेगा प्रमोशन, विधानसभा में धर्म परिवर्तन पर हुई जोरदार बहस

बिहार के सरकारी शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। नीतीश सरकार ने लगभग दस साल से काम कर रहे शिक्षकों को प्रमोशन देने का फैसला किया है। अप्रैल से शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। एमएलसी प्रोफेसर संजय कुमार सिंह ने विधान परिषद में शिक्षकों के प्रमोशन का मुद्दा उठाया, जिस पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

बिहार विधानसभा में धर्म परिवर्तन और कथित लव जिहाद को लेकर जोरदार बहस हुई। बीजेपी के 12 विधायकों ने राज्य में इस पर कड़ा कानून बनाने की मांग उठाई। बीजेपी विधायक वीरेंद्र कुमार ने कहा कि धर्मांतरण की वजह से बिहार में मुसलमानों और ईसाइयों की आबादी तेजी से बढ़ी है। उन्होंने सीमावर्ती जिलों का खास तौर पर जिक्र किया और कहा कि कई इलाकों में मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है।

इस पर प्रभारी गृह मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार के पास फिलहाल धर्म परिवर्तन रोकने से संबंधित कोई कानून लाने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान के दायरे में रहकर काम करती है।

वहीं, राजद एमएलसी सुनील सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोला और शराबबंदी और पैसों के लेन-देन के मुद्दे पर दस्तावेज दिखाने का दावा किया। उन्होंने जदयू पर 1000 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली का आरोप लगाया और कहा कि कुछ कंपनियों से भारी चंदा लिया गया है।

बिहार विधानसभा का बजट सत्र खत्म हो गया, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। धर्म परिवर्तन से लेकर फंडिंग और शराबबंदी तक, कई मुद्दों ने सियासत को गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में इन आरोपों पर राजनीति और तेज हो सकती है।

CAG रिपोर्ट से बिहार की सियासत में भूचाल: करोड़ों के घोटाले के आरोप, विधानसभा में हंगामा

बिहार में इन दिनों सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। कारण है नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी Comptroller and Auditor General of India (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट, जिसे लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के कथित घोटालों का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के कुछ अंश सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा से लेकर सड़क तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और सरकार व विपक्ष आमने-सामने हैं।

क्या है पूरा मामला?

सीएजी की रिपोर्ट में राज्य के विभिन्न विभागों में वित्तीय प्रबंधन, योजनाओं के क्रियान्वयन और राजस्व संग्रहण से जुड़ी कई खामियों की ओर इशारा किया गया है। विपक्ष का दावा है कि रिपोर्ट में कई ऐसे बिंदु हैं, जो सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और घपले की ओर संकेत करते हैं। विशेष रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

विपक्षी दलों का कहना है कि इनपुट क्रेडिट के नाम पर करोड़ों रुपये का नुकसान राज्य को हुआ है और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। उनका आरोप है कि राजस्व की निगरानी और वसूली में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे राज्य को भारी वित्तीय क्षति उठानी पड़ी।

विधानसभा में गरमाया माहौल

रिपोर्ट के मुद्दे पर विधानसभा में तीखी बहस देखने को मिली। राजद विधायकों ने सरकार से जवाब मांगते हुए आरोप लगाया कि सीएजी की टिप्पणियां राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं की निष्पक्ष जांच हो, तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

विपक्ष ने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। कुछ विधायकों ने तो यहां तक कहा कि सरकार पारदर्शिता से बच रही है और रिपोर्ट के तथ्यों को दबाने की कोशिश कर रही है।

सरकार का पक्ष

सरकार की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। सत्तापक्ष का कहना है कि सीएजी की रिपोर्ट एक ऑडिट प्रक्रिया का हिस्सा होती है, जिसमें कई बार प्रक्रियात्मक कमियों को भी ‘अनियमितता’ के रूप में दर्ज कर लिया जाता है। सरकार का दावा है कि रिपोर्ट में जिन मामलों का उल्लेख है, उनमें से कई पर पहले ही सुधारात्मक कदम उठाए जा चुके हैं।

वित्त विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ऑडिट आपत्तियों का जवाब संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर दिया जाता है और आवश्यक सुधार भी किए जाते हैं। सरकार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अधूरी जानकारी के आधार पर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

इनपुट क्रेडिट घोटाले का मुद्दा

इनपुट क्रेडिट से जुड़ा मामला इस विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा बनकर उभरा है। विपक्ष का आरोप है कि कुछ फर्जी कंपनियों और संदिग्ध लेनदेन के माध्यम से टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग हुआ, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। इस मामले में संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट प्रणाली जटिल होती है और यदि निगरानी तंत्र मजबूत न हो तो गड़बड़ियों की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में सीएजी की टिप्पणियां प्रशासन के लिए चेतावनी की तरह देखी जा रही हैं।

राजनीतिक असर क्या होगा?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सीएजी रिपोर्ट अक्सर सरकारों के लिए असहज स्थिति पैदा करती रही है, खासकर तब जब विपक्ष मजबूत और मुखर हो। बिहार में भी यह मुद्दा आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के मुद्दे के रूप में जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।

वहीं, सत्तापक्ष इस विवाद को तकनीकी और प्रक्रियात्मक त्रुटियों तक सीमित बताकर राजनीतिक नुकसान को कम करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार किसी जांच की घोषणा करती है या विधानसभा की समिति के जरिए रिपोर्ट की समीक्षा कराई जाती है।

जनता पर क्या असर?

सीएजी रिपोर्ट का सीधा असर आम जनता पर भले न दिखे, लेकिन यदि वित्तीय अनियमितताएं साबित होती हैं तो इसका मतलब होगा कि विकास योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध संसाधनों में कमी आई। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग स्वाभाविक है।

जनता यह जानना चाहती है कि क्या वाकई सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है, और यदि हुआ है तो उसकी भरपाई कैसे होगी। साथ ही, भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

ICC Men’s T20 World Cup, 2026 IND vs ZIM: भारत की 72 रन की धमाकेदार जीत, अब 1 मार्च को वेस्टइंडीज से सेमीफाइनल की निर्णायक जंग

ICC Men’s T20 World Cup, 2026 के सुपर-8 चरण में भारत ने जिंबाब्वे को 72 रन से करारी शिकस्त देकर टूर्नामेंट में अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा है। इस जीत के साथ ग्रुप-1 का समीकरण और भी रोमांचक हो गया है। भारत की जीत से जहां दक्षिण अफ्रीका ने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली, वहीं अब भारतीय टीम के लिए 1 मार्च को वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाला मुकाबला ‘करो या मरो’ की स्थिति में बदल गया है। जो भी टीम इस मैच में जीत दर्ज करेगी, वही सेमीफाइनल में कदम रखेगी।

यह मुकाबला सिर्फ दो टीमों के बीच की भिड़ंत नहीं, बल्कि रणनीति, दबाव और प्रदर्शन की असली परीक्षा होगा। भारत ने जिंबाब्वे के खिलाफ जिस तरह से बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में संतुलित प्रदर्शन किया, उसने टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है।

भारत का विस्फोटक प्रदर्शन: 256 रन का विशाल स्कोर

पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने टी20 विश्व कप इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया। निर्धारित 20 ओवरों में भारत ने 4 विकेट के नुकसान पर 256 रन बनाए। यह स्कोर न केवल मैच की दिशा तय करने वाला था, बल्कि विपक्षी टीम पर मानसिक दबाव बनाने के लिए भी काफी था।

अभिषेक शर्मा की आक्रामक वापसी

सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने फॉर्म में दमदार वापसी की। उन्होंने महज 30 गेंदों में 55 रन बनाए, जिसमें चार चौके और चार छक्के शामिल थे। उनकी पारी की खासियत थी बेखौफ बल्लेबाजी और पावरप्ले का भरपूर इस्तेमाल। उन्होंने शुरुआत से ही जिंबाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बनाया और रन गति को कभी धीमा नहीं होने दिया।

अभिषेक की यह पारी इसलिए भी अहम रही क्योंकि पिछले कुछ मैचों में वे बड़े स्कोर नहीं बना पा रहे थे। इस मैच में उन्होंने दिखा दिया कि वे बड़े मंच पर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।

हार्दिक पंड्या की कप्तानी पारी

मध्यक्रम में हार्दिक पंड्या ने विस्फोटक अंदाज में बल्लेबाजी की। उन्होंने 23 गेंदों पर नाबाद 50 रन बनाए, जिसमें चार छक्के और दो चौके शामिल थे। उनकी स्ट्राइक रेट 200 से ज्यादा रही, जिसने भारतीय पारी को आखिरी ओवरों में नई ऊंचाई दी।

हार्दिक ने न सिर्फ तेजी से रन बनाए, बल्कि दूसरे छोर पर बल्लेबाजों को संभलकर खेलने की आजादी भी दी। डेथ ओवर्स में उनके आक्रमण ने जिंबाब्वे की गेंदबाजी को पूरी तरह बिखेर दिया।

संतुलित बल्लेबाजी क्रम

भारत की बल्लेबाजी की खास बात यह रही कि शीर्ष और मध्यक्रम दोनों ने योगदान दिया। टीम ने जोखिम उठाते हुए रन बनाने की रणनीति अपनाई, जिसका परिणाम 256 रन के विशाल स्कोर के रूप में सामने आया। यह स्कोर सुपर-8 जैसे दबाव वाले चरण में बनाना भारतीय बल्लेबाजी की गहराई और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

जिंबाब्वे की संघर्षपूर्ण पारी: 184 रन पर थमी उम्मीद

257 रन के लक्ष्य का पीछा करना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होता, और जिंबाब्वे के लिए तो यह पहाड़ जैसा लक्ष्य था। हालांकि टीम ने कोशिश की, लेकिन निर्धारित 20 ओवरों में 6 विकेट खोकर 184 रन ही बना सकी।

ब्रायन बेनेट की जुझारू पारी

जिंबाब्वे के सलामी बल्लेबाज ब्रायन बेनेट ने शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने 59 गेंदों पर नाबाद 97 रन बनाए, जिसमें छह छक्के और आठ चौके शामिल थे। बेनेट ने अंत तक संघर्ष किया और शतक से मात्र तीन रन दूर रह गए।

उनकी पारी ने मैच को पूरी तरह एकतरफा होने से बचाया। हालांकि दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। यदि कोई और बल्लेबाज लंबी पारी खेलता, तो मुकाबला थोड़ा और रोमांचक हो सकता था।

सिकंदर रजा का योगदान

कप्तान सिकंदर रजा ने 31 रन की पारी खेली, लेकिन वे भी रन गति को लगातार बनाए रखने में सफल नहीं हो सके। भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर जिंबाब्वे को मैच से दूर रखा।

भारतीय गेंदबाजी का कमाल

256 रन बनाने के बाद भी भारतीय टीम ढीली नहीं पड़ी। गेंदबाजों ने अनुशासित लाइन-लेंथ के साथ गेंदबाजी की और विपक्षी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

अर्शदीप सिंह बने हीरो

भारत की ओर से सबसे सफल गेंदबाज अर्शदीप सिंह रहे। उन्होंने 4 ओवर में 24 रन देकर 3 विकेट झटके। अर्शदीप ने पावरप्ले और डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर और बदलाव के साथ गेंदबाजी की, जिससे जिंबाब्वे की रन गति पर अंकुश लगा।

अन्य गेंदबाजों का सहयोग

अक्षर पटेल ने 35 रन देकर 1 विकेट लिया। वरुण चक्रवर्ती ने भी 35 रन खर्च कर 1 विकेट झटका। शिवम दुबे ने 46 रन देकर एक सफलता हासिल की। सभी गेंदबाजों ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई और टीम की जीत सुनिश्चित की।

ग्रुप-1 का समीकरण और सेमीफाइनल की जंग

सुपर-8 के ग्रुप-1 में अब स्थिति बेहद रोचक हो गई है। दक्षिण अफ्रीका लगातार दो मैच जीतकर 4 अंकों के साथ शीर्ष पर है और सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है। वेस्टइंडीज 2 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि भारत भी 2 अंक लेकर तीसरे स्थान पर है।

हालांकि नेट रन रेट के मामले में वेस्टइंडीज (+1.791) भारत (-0.100) से आगे है। ऐसे में 1 मार्च को भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाला मुकाबला निर्णायक होगा। जो भी टीम इस मैच में जीत दर्ज करेगी, वही सेमीफाइनल का टिकट हासिल करेगी।

1 मार्च: भारत बनाम वेस्टइंडीज – आर-पार की टक्कर

अब सभी निगाहें 1 मार्च के मुकाबले पर टिकी हैं। यह मैच किसी फाइनल से कम नहीं होगा। भारत के लिए यह मैच सिर्फ जीत का नहीं, बल्कि नेट रन रेट और रणनीति का भी खेल होगा।

भारतीय टीम को बल्लेबाजी में इसी तरह आक्रामक शुरुआत की जरूरत होगी। साथ ही गेंदबाजों को पावरप्ले में विकेट निकालकर दबाव बनाना होगा। वेस्टइंडीज की टीम अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जानी जाती है, इसलिए भारतीय गेंदबाजों को सटीक रणनीति के साथ उतरना होगा।

लखनऊ पैथोलॉजी मालिक हत्याकांड: बेटे ने यूट्यूब से सीखा शव ठिकाने लगाने का तरीका, 135 कॉल कर रचा गुमराह करने का जाल

लखनऊ शहर उस समय स्तब्ध रह गया जब शहर की जानी-मानी वर्धमान पैथोलॉजी के मालिक मानवेंद्र सिंह की निर्मम हत्या का खुलासा हुआ। शुरुआत में यह मामला एक रहस्यमयी गुमशुदगी का प्रतीत हो रहा था, लेकिन पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परत-दर-परत जो सच्चाई सामने आई, उसने रिश्तों, विश्वास और परिवार की परिभाषा को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला कोई और नहीं, बल्कि उनका अपना बेटा अक्षत प्रताप सिंह उर्फ राजा है।

पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद आरोपी ने न केवल शव को ठिकाने लगाने के लिए बारीकी से योजना बनाई, बल्कि खुद को संदेह से बचाने के लिए 135 फोन कॉल कर ‘बेचैन बेटे’ की छवि भी गढ़ने की कोशिश की। यूट्यूब पर वीडियो देखे गए, ऑनलाइन चाकू और आरी मंगाई गई, बाजार से कार के आकार का ड्रम खरीदा गया, मोटी पॉलिथीन और 20 लीटर तारपीन का तेल लाया गया—यह सब किसी आवेश में की गई हरकत नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रयास का संकेत देता है।

नीचे पूरे घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल प्रस्तुत है।

हत्या की सुबह: 20 फरवरी, तड़के 4:30 बजे

पुलिस जांच के अनुसार, 20 फरवरी की सुबह लगभग 4:30 बजे घर के अंदर यह वारदात हुई। उस समय घर में और कोई मौजूद नहीं था। आरोप है कि पिता-पुत्र के बीच पहले से चल रहे तनाव ने उस सुबह हिंसक रूप ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि हत्या अचानक गुस्से में नहीं, बल्कि मानसिक रूप से तैयार होकर की गई प्रतीत होती है।

हत्या के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी—करीब 110 किलो वजनी शव को कैसे हटाया जाए? यही वह बिंदु था जहां से आरोपी की योजनाबद्ध गतिविधियां शुरू होती हैं।

दो दिन की ‘योजना’: शव ठिकाने लगाने का खौफनाक प्रयास

हत्या के बाद आरोपी ने तुरंत शव को बाहर ले जाने की कोशिश नहीं की। पुलिस के मुताबिक, उसने करीब दो दिन तक विभिन्न विकल्पों पर विचार किया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इतने भारी शरीर को अकेले कैसे हटाया जाए।

पूछताछ में उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि शव को छोटे हिस्सों में बांटना ही एकमात्र रास्ता बचा था। इसके लिए उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से धारदार चाकू और आरी मंगाई। डिलीवरी का समय, पैकेज रिसीव करने का तरीका—सब कुछ सामान्य गतिविधि की तरह रखा गया ताकि किसी को शक न हो।

यूट्यूब बना ‘गुरु’: डिजिटल दुनिया से अपराध की सीख

जांच में सामने आया कि हत्या के बाद आरोपी ने इंटरनेट का सहारा लिया। यूट्यूब पर उसने ऐसे वीडियो खोजे जिनमें शव को ठिकाने लगाने के तरीके बताए गए थे। यह तथ्य पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि वह अपराध को छिपाने के लिए सक्रिय रूप से जानकारी जुटा रहा था।

डिजिटल फॉरेंसिक टीम अब उसके मोबाइल और लैपटॉप की हिस्ट्री खंगाल रही है—कौन से वीडियो देखे गए, कितनी देर तक देखे गए, किन-किन कीवर्ड्स की सर्च की गई।

ड्रम की तलाश: ब्रेजा कार में फिट होने वाला ‘नीला कंटेनर’

शव के टुकड़े करने के बाद अगला चरण था धड़ को ठिकाने लगाना। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी अपनी ब्रेजा कार लेकर बाजार में ड्रम की तलाश में निकला। तीन अलग-अलग दुकानों पर पूछताछ के बाद उसे ऐसा ड्रम मिला जो कार की डिक्की में फिट हो सकता था।

उसने नीले रंग का बड़ा प्लास्टिक ड्रम खरीदा। सीसीटीवी फुटेज और बिलिंग रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। ड्रम को घर लाकर वह कई घंटों तक मोहल्ले में सन्नाटा होने का इंतजार करता रहा।

इसके साथ ही उसने आर्मी पैटर्न की मोटी पॉलिथीन और 20 लीटर तारपीन का तेल भी खरीदा। अनुमान है कि तारपीन का तेल बदबू को कम करने या साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से लिया गया होगा।

हाथ-पैर अलग, धड़ अलग: क्रूरता की पराकाष्ठा

पुलिस का दावा है कि आरोपी ने शव के हाथ-पैर अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिए। इन हिस्सों को ठिकाने लगाने में उसे अपेक्षाकृत कम कठिनाई हुई। लेकिन धड़ का वजन अधिक होने के कारण वह उसे अकेले नहीं उठा पा रहा था।

यहीं से उसकी योजना लड़खड़ाने लगी। जितनी बारीकी से उसने योजना बनाई थी, उतनी ही तेजी से मानसिक दबाव भी बढ़ता गया।

शक से बचने की चाल: 135 कॉल और गुमशुदगी की रिपोर्ट

हत्या के बाद आरोपी ने एक और रणनीति अपनाई—खुद को परेशान और व्याकुल दिखाने की। पुलिस के अनुसार, घटना के दिन से लेकर गिरफ्तारी तक उसके मोबाइल से 135 कॉल की गईं।

इन कॉल्स में रिश्तेदार, दोस्त, परिचित और कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे जिनसे वह नियमित संपर्क में नहीं था। उद्देश्य स्पष्ट था—ऐसा माहौल बनाना कि वह पिता की तलाश में हर संभव कोशिश कर रहा है।

वह एक साथी के साथ आशियाना थाने पहुंचा और गुमशुदगी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान उसका व्यवहार सामान्य से अधिक चिंतित दिखाने की कोशिश करता हुआ बताया गया है।

‘वकील अंकल, आपसे अकेले मिलना है’

हत्या के बाद आरोपी ने परिवार से जुड़े एक वकील को फोन कर अकेले मिलने की जिद की। उसने कहा कि उसे बहुत जरूरी बात करनी है। हालांकि वकील अदालत में व्यस्त थे और मुलाकात नहीं हो पाई।

पुलिस सूत्रों का दावा है कि आरोपी को धीरे-धीरे एहसास हो रहा था कि वह कानून से बच नहीं पाएगा। मानसिक दबाव में उसने कुछ करीबी लोगों के सामने हत्या की बात स्वीकार भी की, हालांकि यह बयान आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं हुआ है।

19 फरवरी की बहस: 50 लाख रुपये बना कारण?

जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से एक दिन पहले यानी 19 फरवरी को पिता-पुत्र के बीच पैसों को लेकर तीखी बहस हुई थी। चर्चा है कि करीब 50 लाख रुपये को लेकर विवाद था।

कुछ सूत्रों का दावा है कि बहस के दौरान थप्पड़ भी मारा गया था। हालांकि पुलिस ने इस पर औपचारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन यह स्पष्ट है कि आर्थिक विवाद ने रिश्ते में पहले से मौजूद दरार को और चौड़ा कर दिया था।

पुराने घाव: मां की आत्महत्या और रिश्तों में जहर

परिवार के करीबी लोगों की सोशल मीडिया पोस्ट से एक और आयाम सामने आया है। जब आरोपी 11 साल का था, तब उसकी मां ने आत्महत्या कर ली थी। उस घटना के बाद ससुराल पक्ष ने पिता को दोषी ठहराया।

बताया जाता है कि यह धारणा वर्षों तक बनी रही और बच्चों के मन में पिता के प्रति नकारात्मकता गहराती गई। समय के साथ संवाद कम होता गया और दूरी बढ़ती गई।

मानवेंद्र सिंह के एक महिला मित्र से संबंधों की चर्चा भी परिवार में तनाव का कारण बनी। बच्चों की नजर में पिता की छवि और खराब होती चली गई।

प्रेम संबंध और पैसों का विवाद

कुछ करीबी लोगों के अनुसार, आरोपी की एक लड़की से नजदीकियां थीं। आरोप है कि घर के लाखों रुपये संभवतः उसी पर खर्च किए गए। पिता को यह स्वीकार्य नहीं था।

पिता-पुत्र के बीच पैसों, संपत्ति और निजी जीवन को लेकर लगातार टकराव होता रहा। यह टकराव अंततः हिंसा में बदल गया—ऐसा पुलिस का अनुमान है।

जेल की पहली रात: बेचैनी और अनिद्रा

25 फरवरी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद आरोपी ने जेल में खाना नहीं खाया। जेल सूत्रों के अनुसार, वह पूरी रात जागता रहा और बेहद बेचैन नजर आया।

मानसिक दबाव, अपराधबोध या भविष्य की चिंता—कारण जो भी हो, उसकी पहली रात सामान्य कैदी जैसी नहीं थी।

पुलिस की आगे की जांच

फिलहाल पुलिस निम्न बिंदुओं पर गहन जांच कर रही है:

  • कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की पूरी पड़ताल
  • ऑनलाइन ऑर्डर की टाइमलाइन
  • सीसीटीवी फुटेज से खरीदारी की पुष्टि
  • संभावित सहयोगियों की पहचान
  • डिजिटल सर्च हिस्ट्री का विश्लेषण

पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या आरोपी ने अकेले पूरा अपराध किया या किसी ने उसकी मदद की।

बिहार में शिक्षा और आर्थिक सुधार: विधानसभा ने छह महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी

बिहार विधानसभा ने हाल ही में छह महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया है, जो राज्य में शिक्षा और आर्थिक सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इन विधेयकों में से एक निजी संस्थानों द्वारा वसूली जाने वाली फीस पर नियंत्रण लगाने के लिए है, जो व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को मनमानी फीस वसूली से बचाने में मदद करेगा।

इसके अलावा, सूदखोरी के मामलों में शोषण को रोकने के लिए एक अन्य विधेयक पारित किया गया है, जो सूदखोरों को जेल जैसी सख्त सजा दिलाने में मदद करेगा। यह कदम बिहार सरकार द्वारा नागरिकों के हितों की रक्षा और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

इन विधेयकों के पारित होने से बिहार में शिक्षा और आर्थिक सुधार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी, जो नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद करेगी। जल्द ही, ये विधेयक कानून के रूप में लागू होंगे और राज्य में एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगे।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: अमित शाह की परिवर्तन यात्रा के लिए कोलकाता आगमन

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारी शुरू हो गई है, और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। परिवर्तन यात्रा में शामिल होने के लिए देश के गृह मंत्री अमित शाह 1 मार्च को कोलकाता आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा ने यह जानकारी दी है कि अमित शाह 1 मार्च 2026 को रात 9:50 बजे दमदम के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरेंगे और कोलकाता में रात्रि विश्राम करेंगे।

अगले दिन, 2 मार्च को सुबह 11:15 बजे अमित शाह नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हेलीकॉप्टर से रवाना होंगे और परिवर्तन यात्रा में शामिल होंगे। दक्षिण 24 परगना के रायदिघी में अमित शाह की एक जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें वे परिवर्तन यात्रा को संबोधित करेंगे। भाजपा का कहना है कि अमित शाह की इस जनसभा में भारी संख्या में लोग शामिल होंगे।

पश्चिम बंगाल में अप्रैल या मई में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है, और इस बार सभी 294 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में चुनाव कराए जाने की उम्मीद है। अमित शाह की परिवर्तन यात्रा के दौरान, वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनसभाओं को संबोधित करेंगे और भाजपा के लिए समर्थन जुटाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि अमित शाह की परिवर्तन यात्रा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में क्या प्रभाव डालती है।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की पुनरीक्षण प्रक्रिया में तेजी: कलकत्ता हाईकोर्ट ने ओडिशा और झारखंड से मांगे 200 न्यायिक अधिकारी

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड से 200 न्यायिक अधिकारियों की मांग की है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए उठाया गया है, जिसमें मतदाता सूची में विसंगतियों को दूर करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस प्रक्रिया के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की गई है, जो उन लोगों के दावों और आपत्तियों पर निर्णय लेंगे जिन्हें तार्किक विसंगति सूचियों में डाला गया है और जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाये जा सकते हैं।

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 532 जजों को इस काम में लगाया गया है, जिनमें से 273 ने काम शुरू कर दिया है। हालांकि, काम की विशालता को देखते हुए और अधिक न्यायिक अधिकारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। कलकत्ता हाईकोर्ट अब झारखंड और ओडिशा के जवाब का इंतजार कर रहा है, ताकि इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को त्रुटिहीन बनाया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने पुनरीक्षण प्रक्रिया के लिए राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त संख्या में ‘ए’ श्रेणी के अधिकारी मुहैया नहीं कराये जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल से एसआईआर कार्य में सहायता के लिए कुछ न्यायिक अधिकारियों एवं पूर्व न्यायाधीशों को उपलब्ध कराने को 20 फरवरी को कहा था। यह कदम मतदाता सूची में विसंगतियों को दूर करने के लिए उठाया गया है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिल सके।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: एक चरण में वोटिंग के लिए 2500 सीएपीएफ कंपनियों की आवश्यकता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) ने निर्वाचन आयोग को सूचित किया है कि अगर सभी 294 सीटों पर एक ही चरण में वोटिंग कराई जाती है, तो इसके लिए सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) की 2500 कंपनियों की आवश्यकता होगी।

सीईओ ने इलेक्शन कमीशन को एक ही चरण में मतदान कराने का प्रस्ताव भेजा था, और कहा है कि इस मामले में आखिरी फैसला चुनाव आयोग ही लेगा। गृह मंत्रालय से चर्चा करेगा इलेक्शन कमीशन, और सीएपीएफ की 2500 कंपनियों की उपलब्धता पर गृह मंत्रालय की अंतिम राय के बाद ही तय होगा कि बंगाल में कितने चरणों में चुनाव कराये जायेंगे।

इस बीच, निर्वाचन आयोग ने बंगाल में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का खाका तैयार कर लिया है। चुनाव की घोषणा से पहले ही शनिवार से केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती शुरू हो जायेगी। आयोग ने बताया है कि पूरे राज्य में सबसे अधिक सुरक्षाकर्मी उत्तर 24 परगना जिले में तैनात किये जायेंगे, जहां 3 पुलिस जिलों और 2 कमिश्नरेट में कुल 30 कंपनियां तैनात की जायेंगी।

कोलकाता की सुरक्षा के लिए 12 कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी गयी है, और निर्वाचन आयोग की इस कार्ययोजना के प्रथम चरण में एक मार्च से राज्य भर में 240 कंपनियां मोर्चा संभाल लेंगी। इसके ठीक बाद 10 मार्च तक अतिरिक्त 240 कंपनियां राज्य में पहुंच जायेंगी, जिससे सुरक्षा बलों की कुल संख्या 480 कंपनियों तक पहुंच जायेंगी।