लखनऊ शहर उस समय स्तब्ध रह गया जब शहर की जानी-मानी वर्धमान पैथोलॉजी के मालिक मानवेंद्र सिंह की निर्मम हत्या का खुलासा हुआ। शुरुआत में यह मामला एक रहस्यमयी गुमशुदगी का प्रतीत हो रहा था, लेकिन पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परत-दर-परत जो सच्चाई सामने आई, उसने रिश्तों, विश्वास और परिवार की परिभाषा को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला कोई और नहीं, बल्कि उनका अपना बेटा अक्षत प्रताप सिंह उर्फ राजा है।
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद आरोपी ने न केवल शव को ठिकाने लगाने के लिए बारीकी से योजना बनाई, बल्कि खुद को संदेह से बचाने के लिए 135 फोन कॉल कर ‘बेचैन बेटे’ की छवि भी गढ़ने की कोशिश की। यूट्यूब पर वीडियो देखे गए, ऑनलाइन चाकू और आरी मंगाई गई, बाजार से कार के आकार का ड्रम खरीदा गया, मोटी पॉलिथीन और 20 लीटर तारपीन का तेल लाया गया—यह सब किसी आवेश में की गई हरकत नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रयास का संकेत देता है।
नीचे पूरे घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल प्रस्तुत है।
हत्या की सुबह: 20 फरवरी, तड़के 4:30 बजे
पुलिस जांच के अनुसार, 20 फरवरी की सुबह लगभग 4:30 बजे घर के अंदर यह वारदात हुई। उस समय घर में और कोई मौजूद नहीं था। आरोप है कि पिता-पुत्र के बीच पहले से चल रहे तनाव ने उस सुबह हिंसक रूप ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि हत्या अचानक गुस्से में नहीं, बल्कि मानसिक रूप से तैयार होकर की गई प्रतीत होती है।
हत्या के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी—करीब 110 किलो वजनी शव को कैसे हटाया जाए? यही वह बिंदु था जहां से आरोपी की योजनाबद्ध गतिविधियां शुरू होती हैं।
दो दिन की ‘योजना’: शव ठिकाने लगाने का खौफनाक प्रयास
हत्या के बाद आरोपी ने तुरंत शव को बाहर ले जाने की कोशिश नहीं की। पुलिस के मुताबिक, उसने करीब दो दिन तक विभिन्न विकल्पों पर विचार किया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इतने भारी शरीर को अकेले कैसे हटाया जाए।
पूछताछ में उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि शव को छोटे हिस्सों में बांटना ही एकमात्र रास्ता बचा था। इसके लिए उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से धारदार चाकू और आरी मंगाई। डिलीवरी का समय, पैकेज रिसीव करने का तरीका—सब कुछ सामान्य गतिविधि की तरह रखा गया ताकि किसी को शक न हो।
यूट्यूब बना ‘गुरु’: डिजिटल दुनिया से अपराध की सीख
जांच में सामने आया कि हत्या के बाद आरोपी ने इंटरनेट का सहारा लिया। यूट्यूब पर उसने ऐसे वीडियो खोजे जिनमें शव को ठिकाने लगाने के तरीके बताए गए थे। यह तथ्य पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि वह अपराध को छिपाने के लिए सक्रिय रूप से जानकारी जुटा रहा था।
डिजिटल फॉरेंसिक टीम अब उसके मोबाइल और लैपटॉप की हिस्ट्री खंगाल रही है—कौन से वीडियो देखे गए, कितनी देर तक देखे गए, किन-किन कीवर्ड्स की सर्च की गई।
ड्रम की तलाश: ब्रेजा कार में फिट होने वाला ‘नीला कंटेनर’
शव के टुकड़े करने के बाद अगला चरण था धड़ को ठिकाने लगाना। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी अपनी ब्रेजा कार लेकर बाजार में ड्रम की तलाश में निकला। तीन अलग-अलग दुकानों पर पूछताछ के बाद उसे ऐसा ड्रम मिला जो कार की डिक्की में फिट हो सकता था।
उसने नीले रंग का बड़ा प्लास्टिक ड्रम खरीदा। सीसीटीवी फुटेज और बिलिंग रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। ड्रम को घर लाकर वह कई घंटों तक मोहल्ले में सन्नाटा होने का इंतजार करता रहा।
इसके साथ ही उसने आर्मी पैटर्न की मोटी पॉलिथीन और 20 लीटर तारपीन का तेल भी खरीदा। अनुमान है कि तारपीन का तेल बदबू को कम करने या साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से लिया गया होगा।
हाथ-पैर अलग, धड़ अलग: क्रूरता की पराकाष्ठा
पुलिस का दावा है कि आरोपी ने शव के हाथ-पैर अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिए। इन हिस्सों को ठिकाने लगाने में उसे अपेक्षाकृत कम कठिनाई हुई। लेकिन धड़ का वजन अधिक होने के कारण वह उसे अकेले नहीं उठा पा रहा था।
यहीं से उसकी योजना लड़खड़ाने लगी। जितनी बारीकी से उसने योजना बनाई थी, उतनी ही तेजी से मानसिक दबाव भी बढ़ता गया।
शक से बचने की चाल: 135 कॉल और गुमशुदगी की रिपोर्ट
हत्या के बाद आरोपी ने एक और रणनीति अपनाई—खुद को परेशान और व्याकुल दिखाने की। पुलिस के अनुसार, घटना के दिन से लेकर गिरफ्तारी तक उसके मोबाइल से 135 कॉल की गईं।
इन कॉल्स में रिश्तेदार, दोस्त, परिचित और कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे जिनसे वह नियमित संपर्क में नहीं था। उद्देश्य स्पष्ट था—ऐसा माहौल बनाना कि वह पिता की तलाश में हर संभव कोशिश कर रहा है।
वह एक साथी के साथ आशियाना थाने पहुंचा और गुमशुदगी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान उसका व्यवहार सामान्य से अधिक चिंतित दिखाने की कोशिश करता हुआ बताया गया है।
‘वकील अंकल, आपसे अकेले मिलना है’
हत्या के बाद आरोपी ने परिवार से जुड़े एक वकील को फोन कर अकेले मिलने की जिद की। उसने कहा कि उसे बहुत जरूरी बात करनी है। हालांकि वकील अदालत में व्यस्त थे और मुलाकात नहीं हो पाई।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि आरोपी को धीरे-धीरे एहसास हो रहा था कि वह कानून से बच नहीं पाएगा। मानसिक दबाव में उसने कुछ करीबी लोगों के सामने हत्या की बात स्वीकार भी की, हालांकि यह बयान आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं हुआ है।
19 फरवरी की बहस: 50 लाख रुपये बना कारण?
जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से एक दिन पहले यानी 19 फरवरी को पिता-पुत्र के बीच पैसों को लेकर तीखी बहस हुई थी। चर्चा है कि करीब 50 लाख रुपये को लेकर विवाद था।
कुछ सूत्रों का दावा है कि बहस के दौरान थप्पड़ भी मारा गया था। हालांकि पुलिस ने इस पर औपचारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन यह स्पष्ट है कि आर्थिक विवाद ने रिश्ते में पहले से मौजूद दरार को और चौड़ा कर दिया था।
पुराने घाव: मां की आत्महत्या और रिश्तों में जहर
परिवार के करीबी लोगों की सोशल मीडिया पोस्ट से एक और आयाम सामने आया है। जब आरोपी 11 साल का था, तब उसकी मां ने आत्महत्या कर ली थी। उस घटना के बाद ससुराल पक्ष ने पिता को दोषी ठहराया।
बताया जाता है कि यह धारणा वर्षों तक बनी रही और बच्चों के मन में पिता के प्रति नकारात्मकता गहराती गई। समय के साथ संवाद कम होता गया और दूरी बढ़ती गई।
मानवेंद्र सिंह के एक महिला मित्र से संबंधों की चर्चा भी परिवार में तनाव का कारण बनी। बच्चों की नजर में पिता की छवि और खराब होती चली गई।
प्रेम संबंध और पैसों का विवाद
कुछ करीबी लोगों के अनुसार, आरोपी की एक लड़की से नजदीकियां थीं। आरोप है कि घर के लाखों रुपये संभवतः उसी पर खर्च किए गए। पिता को यह स्वीकार्य नहीं था।
पिता-पुत्र के बीच पैसों, संपत्ति और निजी जीवन को लेकर लगातार टकराव होता रहा। यह टकराव अंततः हिंसा में बदल गया—ऐसा पुलिस का अनुमान है।
जेल की पहली रात: बेचैनी और अनिद्रा
25 फरवरी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद आरोपी ने जेल में खाना नहीं खाया। जेल सूत्रों के अनुसार, वह पूरी रात जागता रहा और बेहद बेचैन नजर आया।
मानसिक दबाव, अपराधबोध या भविष्य की चिंता—कारण जो भी हो, उसकी पहली रात सामान्य कैदी जैसी नहीं थी।
पुलिस की आगे की जांच
फिलहाल पुलिस निम्न बिंदुओं पर गहन जांच कर रही है:
- कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की पूरी पड़ताल
- ऑनलाइन ऑर्डर की टाइमलाइन
- सीसीटीवी फुटेज से खरीदारी की पुष्टि
- संभावित सहयोगियों की पहचान
- डिजिटल सर्च हिस्ट्री का विश्लेषण
पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या आरोपी ने अकेले पूरा अपराध किया या किसी ने उसकी मदद की।