जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने शनिवार, 28 फरवरी को इतिहास रच दिया जब उन्होंने अपना पहला रणजी ट्रॉफी खिताब जीता। यह जीत 67 साल के लंबे इंतजार के बाद मिली, जब टीम ने हुबली में खेले गए फाइनल मुकाबले में कर्नाटक को हराया।
जम्मू-कश्मीर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और अपनी पहली पारी में 584 रन बनाए। इसके जवाब में कर्नाटक की टीम सिर्फ 293 रन ही बना सकी, जिससे जम्मू-कश्मीर को 291 रन की बड़ी बढ़त मिल गई।
आमतौर पर इतनी बढ़त मिलने पर टीम सामने वाली टीम को फॉलोऑन देती है, लेकिन जम्मू-कश्मीर ने रणनीतिक रूप से दूसरी पारी खेलने का फैसला किया। दूसरी पारी में टीम ने मजबूती से बल्लेबाजी जारी रखी और पांचवें और अंतिम दिन चार विकेट पर 342 रन बना लिए थे।
कामरान इकबाल और साहिल लोत्रा ने शानदार शतक जड़े और जम्मू-कश्मीर को विजेता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब जम्मू-कश्मीर की कुल बढ़त 633 रन हो गई, तब दोनों टीमों के कप्तानों ने आपसी सहमति से मैच ड्रॉ करने का फैसला किया और पहली पारी की बढ़त के कारण जम्मू-कश्मीर को विजेता घोषित किया गया।
यह जीत जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय है और टीम ने साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और सही रणनीति से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।