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इज़राइल-अमेरिका का ईरान पर बड़ा सैन्य हमला: तेहरान में धमाके, परमाणु वार्ता टूटी, मध्य-पूर्व युद्ध की कगार पर

मध्य-पूर्व एक बार फिर व्यापक संघर्ष की दहलीज पर खड़ा है। शनिवार देर रात इज़राइल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की घोषणा की, जिसके तुरंत बाद अमेरिका ने भी “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशन” शुरू करने की पुष्टि की। तेहरान समेत कई अहम शहरों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, हवाई सुरक्षा प्रणालियाँ सक्रिय हुईं और आपातकालीन स्थिति लागू कर दी गई।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता में चल रही परमाणु वार्ताएँ अंतिम चरण में मानी जा रही थीं, लेकिन प्रमुख मुद्दों पर सहमति न बन पाने से बातचीत टूट गई। अब यह टकराव केवल दो देशों के बीच का संघर्ष नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर इसका असर पड़ने की आशंका है।

हमले की शुरुआत: क्या हुआ तेहरान में?

इज़राइली अधिकारियों ने कहा कि यह “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” यानी पूर्व-निरोधात्मक हमला था, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से उत्पन्न “तात्कालिक खतरे” को निष्क्रिय करना था। इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह कार्रवाई देश की सुरक्षा के लिए अनिवार्य थी।

ईरान की राजधानी Tehran में कई स्थानों पर विस्फोटों की पुष्टि हुई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, कुछ धमाके सरकारी परिसरों और रक्षा प्रतिष्ठानों के पास हुए। ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के कार्यालय परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शहर के कुछ हिस्सों में बिजली और संचार सेवाएँ बाधित रहीं। हवाई अड्डों पर उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी गईं और वायुक्षेत्र बंद कर दिया गया।

अमेरिका की भूमिका: ‘मेजर कॉम्बैट ऑपरेशन’ की घोषणा

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने व्हाइट हाउस से संबोधन में पुष्टि की कि अमेरिकी सेना इज़राइल के साथ समन्वित कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि “ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना हमारी प्राथमिकता है।”

अमेरिकी रक्षा सूत्रों के अनुसार, संयुक्त हमलों में ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें संभावित परमाणु अनुसंधान केंद्र, मिसाइल भंडारण स्थल और सैन्य कमांड सुविधाएँ शामिल थीं।

इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी नौसैनिक बेड़े को फारस की खाड़ी में हाई अलर्ट पर रखा गया है। मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी ठिकानों पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

परमाणु वार्ता क्यों टूटी?

पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की राजधानी Muscat में अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही थी। इसके अलावा जिनेवा और वियना में भी बैठकों का दौर हुआ।

मुख्य विवाद के मुद्दे थे:

  1. यूरेनियम संवर्धन (Enrichment):
    ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को “शांतिपूर्ण” बताते हुए संवर्धन जारी रखने की मांग की। अमेरिका ने सख्त अंतरराष्ट्रीय निगरानी और सीमाओं की शर्त रखी।
  2. प्रतिबंधों में राहत:
    तेहरान ने व्यापक आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग की, जबकि वाशिंगटन ने पहले ठोस परमाणु प्रतिबद्धता की शर्त रखी।
  3. मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव:
    अमेरिका चाहता था कि समझौते में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और ईरान समर्थित समूहों की गतिविधियाँ भी शामिल हों। ईरान ने इसे “अस्वीकार्य” बताया।

सूत्रों के अनुसार, अंतिम दौर की बातचीत में कोई निर्णायक प्रगति नहीं हुई, जिसके बाद सैन्य विकल्प को हरी झंडी दी गई।

इज़राइल में आपातकाल

हमले के तुरंत बाद इज़राइल में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए, सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द हुए और नागरिकों को बंकरों के पास रहने की सलाह दी गई।

इज़राइली रक्षा बलों ने आशंका जताई कि ईरान या उसके समर्थित समूह मिसाइल और ड्रोन हमले कर सकते हैं। तेल अवीव और यरूशलम में हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय रखी गई है।

ईरान की प्रतिक्रिया: ‘कड़ा प्रतिशोध’

ईरान की सरकार ने इस कार्रवाई को “खुली आक्रामकता” करार दिया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि “हम अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएँगे।”

क्षेत्र में ईरान समर्थित समूहों—जैसे लेबनान और यमन के संगठन—ने भी इज़राइल के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी है। इससे संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है।

वैश्विक असर: ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक हलचल

मध्य-पूर्व वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। ईरान और फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव से तेल की कीमतों में उछाल देखा गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान और इज़राइल की यात्रा से बचने की सलाह जारी की है।

भारत की एडवाइजरी

भारत सरकार ने ईरान और इज़राइल में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए परामर्श जारी किया है। तेहरान में भारतीय दूतावास ने लोगों से घरों के भीतर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा है। हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।

नई दिल्ली स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि भारत के ऊर्जा और व्यापारिक हित भी इस क्षेत्र से जुड़े हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय रहा है। 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) के बाद कुछ वर्षों तक स्थिति नियंत्रित रही, लेकिन अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने और प्रतिबंधों की वापसी के बाद तनाव बढ़ गया।

इज़राइल लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार क्षमता विकसित कर रहा है, जबकि ईरान इसे सिरे से खारिज करता है।

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