पटना के NEET छात्रा मामले में कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने CBI से तीखे सवाल पूछे और मनीष रंजन को जमानत देने से इनकार कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी।
कोर्ट ने CBI से पूछा कि जब मामला गंभीर है तो पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया? CBI ने 12 फरवरी को 307 यानी हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया था। कोर्ट ने पूछा कि 15 दिन की जांच में मनीष रंजन के खिलाफ क्या सबूत जुटाए गए? क्या अब भी उसकी जरूरत जांच के लिए है? अगर केवल अटेम्प्ट टू मर्डर का केस है, तो स्पष्ट बताएं कि हिरासत क्यों जरूरी है।
कोर्ट ने SIT और थानेदार के बयान में फर्क भी पाया। 17 जनवरी तक केस की जांच चित्रगुप्त नगर थाने की तत्कालीन प्रभारी रौशनी कुमारी कर रही थीं। बाद में जांच SIT को सौंपी गई। कोर्ट ने रौशनी से पूछा कि मनीष पर क्या आरोप हैं? कौन-कौन से सबूत जब्त किए? सबूत 24 घंटे में कोर्ट में क्यों नहीं दिए?
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि सबूतों से छेड़छाड़ हुई है। कोर्ट ने SDPO से भी पूछताछ की। SIT को लीड कर रहीं सचिवालय SDPO-1 डॉ. अन्नू कुमारी से कोर्ट ने सवाल किए। मनीष कब और कहां था? बिहार से बाहर कब गया? कब पकड़ा गया? क्या बयान दिया?
मामले की जांच कर रही CBI टीम प्रभात अस्पताल भी पहुंची। एक महिला स्टाफ से करीब 5 घंटे पूछताछ हुई। स्टाफ ने बताया कि छात्रा बेहोशी की हालत में लाई गई थी। उसके शरीर पर खरोंच के निशान थे। उसने कहा कि अस्पताल में दुष्कर्म की चर्चा थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म का जिक्र है। जबकि अस्पताल ने मौत की वजह नशीली दवा का ओवरडोज बताया था। इस विरोधाभास को लेकर भी सवाल उठे हैं।
मनीष रंजन पिछले 45 दिनों से बेउर जेल में बंद है। 14 जनवरी को उसे गिरफ्तार किया गया था। वह शंभू गर्ल्स हॉस्टल चलने वाली बिल्डिंग का मालिक है। पीड़ित परिवार ने कोर्ट में जमानत का विरोध किया। उनके वकील ने कहा कि मनीष इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता है। उसे बेल नहीं दी जानी चाहिए। अब 2 मार्च को अगली सुनवाई में सभी की नजरें टिकी हैं। कोर्ट CBI और SIT के जवाबों पर आगे फैसला लेगा।
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