Press "Enter" to skip to content

Bihar Bridge Collapse : घोघरी नदी पर बन रहा 2.89 करोड़ का आरसीसी पुल ढलाई के दौरान ढहा, बाल-बाल बचे मजदूर — गोपालगंज में निर्माण गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल

बिहार में एक बार फिर अधूरे पुल के गिरने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। गोपालगंज जिले के सिधवलिया प्रखंड के गंगवा गांव के पास घोघरी नदी पर बन रहा आरसीसी (Reinforced Cement Concrete) पुल का एक हिस्सा ढलाई के दौरान अचानक भरभराकर गिर गया। यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूर स्लैब की कंक्रीट ढलाई कर रहे थे। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और सभी मजदूर सुरक्षित बच निकले।

करीब 2.89 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल का निर्माण अंतिम चरण में बताया जा रहा था। लेकिन स्लैब ढलाई के दौरान अचानक संरचना का एक हिस्सा गिर जाने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग इसे “बड़ा हादसा टल गया” कह रहे हैं, जबकि प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

हादसा कैसे हुआ: मिनटों में ढह गया पुल का हिस्सा

घटना 2 मार्च 2026 की दोपहर की है। सिधवलिया प्रखंड के अंतर्गत गंगवा गांव के समीप बहने वाली घोघरी नदी पर आरसीसी पुल का निर्माण कार्य जारी था। मजदूर स्लैब की ढलाई कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक तेज आवाज के साथ स्लैब का एक हिस्सा नीचे की ओर धंस गया और कुछ ही क्षणों में पूरी संरचना का एक भाग गिर पड़ा।

ढलाई के दौरान कंक्रीट का भार, लोहे की सरियों का दबाव और अस्थायी सपोर्ट स्ट्रक्चर (शटरिंग) पर लोड अधिक होने के कारण यह हादसा हुआ या फिर निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी थी — यह अभी जांच का विषय है। लेकिन घटना ने निर्माण एजेंसी और निगरानी तंत्र दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

बाल-बाल बचे मजदूर, टल गया बड़ा हादसा

हादसे के समय कई मजदूर मौके पर मौजूद थे। जैसे ही ढांचा गिरा, अफरातफरी मच गई। मजदूरों ने भागकर अपनी जान बचाई। स्थानीय लोगों के अनुसार यदि स्लैब का गिरना कुछ सेकंड पहले या बाद में होता तो कई मजदूर उसकी चपेट में आ सकते थे।

इस घटना ने यह साफ कर दिया कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन कितना आवश्यक है। अगर सेफ्टी नेट, चेतावनी तंत्र और संरचनात्मक परीक्षण सही समय पर किए गए होते तो संभव है कि इस तरह की दुर्घटना से बचा जा सकता था।

2.89 करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल

बताया जा रहा है कि यह पुल लगभग 29 मीटर लंबा है और इसकी कुल लागत 2.89 करोड़ रुपये है। यह पुल आसपास के गांवों को जोड़ने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। ग्रामीणों के लिए यह आवागमन का मुख्य साधन बनने वाला था।

अब जब निर्माण अंतिम चरण में था, तभी उसका एक हिस्सा ढह जाना कई सवाल खड़े करता है—

  • क्या निर्माण सामग्री मानक के अनुरूप थी?
  • क्या तकनीकी निरीक्षण समय पर हुआ?
  • क्या कार्य की निगरानी में लापरवाही बरती गई?

ग्रामीणों का आरोप: घटिया सामग्री का हुआ इस्तेमाल

स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण में घटिया सीमेंट और कमजोर सरियों का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि कई बार उन्होंने अधिकारियों को इस बारे में सूचित भी किया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों के अनुसार पुल के स्तंभ और स्लैब में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर शुरू से ही संदेह था। कुछ लोगों का दावा है कि शटरिंग और सपोर्ट सिस्टम भी पर्याप्त मजबूत नहीं था, जिसके कारण ढलाई के दौरान अतिरिक्त भार पड़ने से संरचना कमजोर पड़ गई।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन ने तकनीकी जांच का आश्वासन दिया है।

प्रशासन हरकत में, जांच के आदेश

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। निर्माण कार्य को तत्काल रोक दिया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि एक तकनीकी टीम पूरे मामले की जांच करेगी।

जांच के दायरे में निम्न बिंदु शामिल होंगे—

  1. कंक्रीट की गुणवत्ता (कंप्रेसिव स्ट्रेंथ टेस्ट)
  2. लोहे की सरियों की मजबूती
  3. शटरिंग और सपोर्ट सिस्टम की क्षमता
  4. डिजाइन और ड्राइंग के अनुसार निर्माण हुआ या नहीं
  5. सुपरविजन और मॉनिटरिंग में किसी तरह की चूक

यदि जांच में लापरवाही या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है।

बिहार में पुल हादसों का इतिहास और बढ़ती चिंता

बिहार में पिछले कुछ वर्षों में पुलों और सड़कों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं। कई बार निर्माणाधीन पुल ढहने या तैयार पुलों में दरार आने की खबरें चर्चा में रही हैं। इससे राज्य की निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

गोपालगंज की यह घटना भी उसी कड़ी में एक और उदाहरण बन सकती है, यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं।

आरसीसी पुल क्यों गिरते हैं? तकनीकी पहलू समझें

आरसीसी (Reinforced Cement Concrete) संरचनाएं मजबूत मानी जाती हैं, लेकिन उनकी मजबूती कई कारकों पर निर्भर करती है—

1. सही मिश्रण अनुपात

सीमेंट, रेत और गिट्टी का सही अनुपात बेहद जरूरी है। पानी की मात्रा अधिक होने पर कंक्रीट कमजोर हो जाती है।

2. उच्च गुणवत्ता की सरिया

लोहे की सरिया (रीइन्फोर्समेंट) का ग्रेड और उसकी प्लेसमेंट संरचना की मजबूती तय करती है।

3. उचित शटरिंग और सपोर्ट

ढलाई के समय स्लैब को नीचे से मजबूत सपोर्ट मिलना जरूरी है। यदि शटरिंग कमजोर हो तो भार पड़ते ही ढांचा गिर सकता है।

4. क्योरिंग प्रक्रिया

ढलाई के बाद पर्याप्त समय तक कंक्रीट को गीला रखना जरूरी है, जिससे उसकी मजबूती विकसित हो सके।

यदि इन में से किसी भी चरण में लापरवाही बरती जाए तो संरचना अस्थिर हो सकती है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

यह पुल स्थानीय लोगों के लिए जीवन रेखा बनने वाला था। बरसात के दिनों में घोघरी नदी पार करना मुश्किल हो जाता है। पुल के निर्माण से—

  • छात्रों को स्कूल पहुंचने में आसानी होती
  • किसानों को बाजार तक पहुंचने का बेहतर मार्ग मिलता
  • आपातकालीन सेवाओं को सुविधा मिलती

अब निर्माण रुकने से विकास कार्य प्रभावित होंगे और लोगों को असुविधा झेलनी पड़ेगी।

जिम्मेदारी तय होना जरूरी

हर बार हादसे के बाद जांच और कार्रवाई की बात होती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या जिम्मेदारी तय होती है? क्या दोषियों को दंड मिलता है?

अगर निर्माण में गड़बड़ी साबित होती है तो—

  • ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है
  • संबंधित इंजीनियरों पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है
  • परियोजना की दोबारा तकनीकी समीक्षा की जा सकती है

सख्त कार्रवाई ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक सकती है।

पारदर्शिता और थर्ड पार्टी ऑडिट की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी परियोजनाओं में थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए। स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा गुणवत्ता परीक्षण से पारदर्शिता बढ़ेगी।

डिजिटल मॉनिटरिंग, लाइव साइट निरीक्षण और समय-समय पर सैंपल टेस्टिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएं तो जोखिम कम हो सकता है।

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from खबर बिहार कीMore posts in खबर बिहार की »

Be First to Comment

    प्रातिक्रिया दे

    आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *