ईरान के सर्वोच्च नेता आयातोल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने की है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल द्वारा चलाए गए बड़े सैन्य हमले के दौरान हुई थी। यह घटना मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है और विश्व समुदाय में गंभीर प्रभाव डाला है।
आयातोल्लाह अली खामेनेई, जिन्होंने 1989 से देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व का नेतृत्व किया, की मौत संयुक्त अमेरिका-इज़राइली हवाई हमले में हुई। ईरानी सरकार ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है और सरकारी दफ्तरों को सात दिनों के लिए बंद रखने की घोषणा की गई है।
आयातोल्लाह अली खामेनेई का शासन 36 वर्षों तक चला और इस दौरान उन्होंने ईरान को एक कठोर धार्मिक शासन के रूप में स्थापित किया। उनकी विदेश नीति में संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल के प्रति तीखी प्रतिकूलता रही, जिसने मध्य पूर्व में तनाव को बढ़ाया।
संयुक्त अमेरिका और इज़रायल ने एक बड़े सैन्य अभियान का नाम “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” रखा, जिसमें हवाई हमले, मिसाइल और ड्रोन हमलों के माध्यम से ईरान की सैन्य और राजनीतिक संरचना को लक्षित किया गया। इस हमले में आयातोल्लाह अली खामेनेई का कार्यालय भी निशाना बनाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई।
ईरानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने उन लोगों के खिलाफ “सबसे भयंकर अभियान” का वादा किया जो आयातोल्लाह अली खामेनेई की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं। ईरानी मीडिया ने कहा कि हर संभव जवाब देने के लिए राष्ट्रीय निर्णय लिया जाएगा।
इस घटना का वैश्विक प्रभाव भी गहरा होगा। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल की प्रतिक्रिया में कहा गया है कि यह कदम ईरान के विस्तारवादी और परमाणु उद्देश्यों को रोकने के लिए आवश्यक था। सीरिया, लेबनान और यमन सहित क्षेत्र में ईरान समर्थित समूहों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, जो संकट के समय सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
वैश्विक बाजारों पर भी इस घटना का प्रभाव पड़ेगा। तेल की कीमतें, सुरक्षा-खतरा संकेतक और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है। ईरान के भविष्य की अनिश्चितता भी एक बड़ा मुद्दा है, क्योंकि आयातोल्लाह अली खामेनेई के पास स्पष्ट रूप से घोषित उत्तराधिकारी नहीं थे। इससे देश के अंदर और बाहर दोनों जगह गंभीर राजनीतिक बदलाव की संभावना बन गई है।