मध्य-पूर्व में चल रहा युद्ध लगातार खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है। ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे संघर्ष में अब अमेरिका भी पूरी तरह शामिल हो गया है। ताज़ा घटनाक्रम में इज़राइल के प्रमुख शहर Tel Aviv के आसमान में कई जोरदार धमाके सुने गए, जब ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन की एक नई खेप दागी।
इसी बीच अमेरिकी सेना ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने अब तक 30 से अधिक ईरानी नौसैनिक जहाज़ों को डुबो दिया है, जिससे ईरान की समुद्री सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। इस तेजी से बढ़ते युद्ध ने पूरे मध्य-पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
नीचे इस युद्ध के ताज़ा घटनाक्रम, पृष्ठभूमि और संभावित असर की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
तेल अवीव में मिसाइल हमले, आसमान में कई धमाके
ईरान ने एक बार फिर इज़राइल पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों का मुख्य निशाना इज़राइल का आर्थिक और तकनीकी केंद्र Tel Aviv रहा।
हमले के दौरान पूरे शहर में एयर-रेड सायरन बजने लगे और लोगों को तुरंत बंकरों में जाने के निर्देश दिए गए। इज़राइल की वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलों के गिरने से शहर के ऊपर तेज धमाके सुने गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:
- आसमान में तेज रोशनी दिखाई दी
- लगातार कई विस्फोटों की आवाज़ें सुनाई दीं
- कई इलाकों में धुआँ उठता देखा गया
इज़राइल की सेना ने कहा कि अधिकांश मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान टल गया।
ईरान का दावा: जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी
ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह इज़राइल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों का जवाब है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक इज़राइल उसके सैन्य ठिकानों पर हमला बंद नहीं करता, तब तक उसकी मिसाइल और ड्रोन कार्रवाई जारी रहेगी।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार:
- हमले “प्रतिशोधी अभियान” का हिस्सा हैं
- इज़राइल के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है
- क्षेत्र में अमेरिकी ठिकाने भी संभावित लक्ष्य हो सकते हैं
अमेरिका का बड़ा दावा: 30 से अधिक ईरानी जहाज़ डुबोए
युद्ध के समुद्री मोर्चे पर भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण है। अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने अब तक 30 से ज्यादा ईरानी नौसैनिक जहाज़ों को नष्ट कर दिया है।
अमेरिकी सैन्य कमान United States Central Command के अनुसार, इन हमलों में ड्रोन लॉन्च करने वाले जहाज़ और युद्धपोत शामिल थे।
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि:
- ईरान की समुद्री सैन्य क्षमता को कमजोर किया जा सके
- खाड़ी क्षेत्र में जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके
- ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोका जा सके
ईरानी युद्धपोत पर घातक हमला
युद्ध के दौरान सबसे बड़ा नौसैनिक नुकसान तब हुआ जब ईरान का युद्धपोत IRIS Dena अमेरिकी हमले में डूब गया।
यह जहाज़ भारतीय महासागर से लौट रहा था, तभी एक अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने उस पर टॉरपीडो से हमला कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार:
- जहाज़ पर सवार लगभग 80 से अधिक सैनिकों की मौत हुई
- कई सैनिक अब भी लापता बताए जा रहे हैं
- यह हमला हाल के वर्षों का सबसे बड़ा नौसैनिक हमला माना जा रहा है
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह घटना दिखाती है कि युद्ध अब केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समुद्र में भी बड़े स्तर पर टकराव शुरू हो चुका है।
युद्ध की शुरुआत कैसे हुई
वर्तमान संघर्ष की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई जब इज़राइल ने ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमला किया। इस अभियान को Operation Lion’s Roar नाम दिया गया।
इस ऑपरेशन के दौरान:
- ईरान के मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया
- सैन्य कमांड सेंटरों पर हमले हुए
- परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचाया गया
इसके बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए, जिससे युद्ध तेजी से फैल गया।
क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ा
इस संघर्ष के कारण पूरे मध्य-पूर्व में युद्ध फैलने का खतरा बढ़ गया है। ईरान समर्थित संगठन Hezbollah ने भी इज़राइल के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह युद्ध और फैलता है तो इसमें कई अन्य देश भी शामिल हो सकते हैं, जैसे:
- लेबनान
- सीरिया
- खाड़ी देश
इसके अलावा अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी संभावित खतरा बताया जा रहा है।
बढ़ती मौतें और मानवीय संकट
युद्ध के कारण अब तक भारी जान-माल का नुकसान हो चुका है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार:
- ईरान में 1200 से अधिक लोगों की मौत
- इज़राइल में भी कई नागरिक घायल
- कई शहरों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध लंबा चला तो मानवीय संकट और गहरा सकता है।
वैश्विक असर: तेल और अर्थव्यवस्था पर खतरा
मध्य-पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। इसलिए इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं
- वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है
- समुद्री मार्गों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है
कई एयरलाइनों ने मध्य-पूर्व के ऊपर से उड़ानें रद्द कर दी हैं और कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना शुरू कर दिया है।
दुनिया भर में चिंता
दुनिया के कई देशों ने इस युद्ध को लेकर गहरी चिंता जताई है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने भी तत्काल युद्धविराम की मांग की है। हालांकि फिलहाल किसी भी पक्ष के पीछे हटने के संकेत नहीं मिल रहे हैं।