पटना NEET छात्रा मौत मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को जमानत देने से इनकार कर दिया गया है। सोमवार को कोर्ट में करीब पौने दो घंटे तक सुनवाई चली, लेकिन कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली तारीख दे दी। अब इस मामले में 11 मार्च को सीबीआई के मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई होगी।
जमानत पर बहस के दौरान तीखी नोकझोंक हुई। पीड़ित परिवार के वकील और सीबीआई के वकील के बीच तीखी बहस हुई। परिवार के वकील ने जांच में लापरवाही का आरोप दोहराया और कहा कि शुरुआत से ही जांच ठीक से नहीं की गई। इस पर सीबीआई के वकील ने आपत्ति जताई और कहा कि यह जमानत की सुनवाई है, एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का मंच नहीं है।
सीबीआई ने कोर्ट में लिखित तौर पर कहा कि फिलहाल उन्हें जांच में मनीष रंजन की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने सीबीआई से कई सख्त सवाल किए, जिनमें पूछा गया कि मनीष रंजन पर आखिर ठोस आरोप क्या हैं? उनके खिलाफ सबूत क्या हैं? क्या एजेंसी को अब भी उनकी जरूरत है? कोर्ट ने यह भी पूछा कि केस में पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया?
सुनवाई के दौरान एसआईटी और सीबीआई का अलग रुख दिखा। एसआईटी ने कहा कि मनीष रंजन एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, सीबीआई ने कहा कि अब जांच उनके पास है और उन्हें मनीष रंजन की जरूरत नहीं है।
कोर्ट ने तत्कालीन आईओ रौशनी कुमारी से भी पूछताछ की और पूछा कि छात्रा का मोबाइल और हॉस्टल का डीवीआर जब्त करने के बाद एफएसएल जांच क्यों नहीं कराई गई? सबूत 24 घंटे में कोर्ट में क्यों पेश नहीं किए गए? रौशनी ने कहा कि उन्होंने 17 जनवरी को सभी सामान एसआईटी को सौंप दिए थे, लेकिन एसआईटी ने कहा कि उन्हें यह सामग्री 24 जनवरी को मिली। दोनों के बयानों में अंतर दिखा, जिस पर पीड़ित परिवार ने सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली तारीख 11 मार्च तय की और मनीष रंजन को जमानत देने से इनकार कर दिया।
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