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मिडिल ईस्ट ऑयल शॉक का खतरा: चीन, भारत और जापान की तेल-गैस निर्भरता कितनी? जानिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद होने पर क्या होगा असर

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। तेल और गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा जिस समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, वह है Strait of Hormuz (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़)। यह संकीर्ण जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के ऊर्जा व्यापार की धुरी माना जाता है। यदि यहां किसी कारण से बाधा आती है, तो उसका सीधा असर एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं — चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया — पर पड़ सकता है।

यह रिपोर्ट बताती है कि चीन, भारत और जापान कितनी मात्रा में मध्य पूर्व से कच्चा तेल (Crude Oil) और एलएनजी (LNG) आयात करते हैं, और संभावित ‘ऑयल शॉक’ से उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

  • दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल परिवहन का लगभग 20% इसी मार्ग से गुजरता है।
  • कतर, सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे बड़े निर्यातक देश इसी रास्ते से एशियाई बाजारों तक आपूर्ति करते हैं।
  • एलएनजी (Liquefied Natural Gas) का भी बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से एशिया भेजा जाता है।

यदि इस मार्ग में सैन्य टकराव, नाकेबंदी या जहाजरानी जोखिम बढ़ता है, तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

चीन: दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक

चीन वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है।

चीन की निर्भरता

  • चीन अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 50% मध्य पूर्व से प्राप्त करता है।
  • सऊदी अरब, इराक और ईरान उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।
  • एलएनजी आयात का लगभग 30–35% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, खासकर कतर से।

रणनीतिक भंडार

चीन ने बड़े पैमाने पर रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) तैयार किए हैं, जो अनुमानतः 2–3 महीने के आयात को कवर कर सकते हैं। इससे अल्पकालिक संकट से निपटने में मदद मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि का व्यवधान चीन की औद्योगिक गतिविधियों और विनिर्माण क्षेत्र पर दबाव डाल सकता है।

भारत: तेज़ी से बढ़ती ऊर्जा मांग और बढ़ती निर्भरता

भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी तेल खपत वाली अर्थव्यवस्था है।

भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता

  • भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है।
  • हालिया आंकड़ों के अनुसार, कुल आयात का करीब 55% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है।
  • यह लगभग 2.5–2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन के बराबर है।

भारत के लिए सऊदी अरब, इराक और यूएई प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।

एलएनजी निर्भरता

  • भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है।
  • भारत के कुल एलएनजी आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, खासकर कतर से।

संभावित आर्थिक असर

यदि तेल कीमतें तेजी से बढ़ती हैं:

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी
  • महंगाई (Inflation) में उछाल
  • चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने का खतरा
  • रुपये पर दबाव

भारत के पास रणनीतिक भंडार हैं, जो लगभग 70–75 दिनों की मांग को पूरा कर सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि के संकट में यह पर्याप्त नहीं होगा।

जापान: सबसे ज्यादा जोखिम में

जापान ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर है।

कच्चा तेल

  • जापान के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 90–95% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है।
  • सऊदी अरब और यूएई उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।

एलएनजी

  • जापान दुनिया के बड़े एलएनजी आयातकों में शामिल है।
  • उसका लगभग 10–15% एलएनजी मध्य पूर्व से आता है।

हालांकि जापान के पास अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार 200 दिनों से अधिक का रणनीतिक भंडार है, फिर भी लंबी अवधि का व्यवधान उसकी विनिर्माण और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को प्रभावित कर सकता है।

दक्षिण कोरिया और अन्य एशियाई देश

दक्षिण कोरिया भी:

  • लगभग 70% कच्चा तेल मध्य पूर्व से आयात करता है।
  • 20% के आसपास एलएनजी आयात भी इसी क्षेत्र से होता है।

इसलिए एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मध्य पूर्व की स्थिरता पर काफी हद तक निर्भर हैं।

अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद हो जाए तो क्या होगा?

1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80–100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं।

2. शिपिंग और बीमा लागत बढ़ेगी

टैंकरों के लिए बीमा प्रीमियम बढ़ने से आयात लागत में इजाफा होगा।

3. महंगाई और आर्थिक मंदी का खतरा

ऊर्जा लागत बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और विकास दर पर असर पड़ेगा।

4. वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश

देश अमेरिका, अफ्रीका और रूस से वैकल्पिक आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश करेंगे, लेकिन यह तुरंत संभव नहीं होगा।

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