भूमि अधिग्रहण के मुद्दे की जड़ें नॉइडा की शहरी विकास योजनाओं में हैं, जहाँ सरकारी और निजी कंपनियों ने बड़ी पैमाने पर जमीन खरीदने की योजना बनाई थी। २०१५ में शुरू हुए नॉइडा एक्स्प्रेसवे और आवासीय परियोजनाओं के लिए लगभग २,५०० हेक्टेयर कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया, जिससे स्थानीय किसानों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। पिछले कुछ वर्षों में, कई बार सरकार ने प्रतिपूर्ति को लेकर पुनर्विचार किया, परंतु किसानों का मानना है कि प्रस्तावित मुआवजा बाजार मूल्यों से कई गुना कम है।
वर्षों से चल रहे इस विवाद ने कई बार स्थानीय स्तर पर ध्वनि उत्पन्न की है, लेकिन २०२२ के बाद से विरोध प्रदर्शन में वृद्धि देखी गई है। २०२३ में, किसानों ने दिल्ली-नॉइडा हाईवे के विस्तार कार्य को लेकर एक बड़े विरोध में हिस्सा लिया था, जहाँ उन्होंने १०० किलोमीटर के हाईवे के निर्माण को रोकने की मांग की थी। इस दौरान, कई किसानों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।
पिछले सप्ताह, राकेश टिकैत ने नॉइडा के एक प्रमुख बाजार में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में कहा कि प्रशासन किसानों को प्रदर्शन करने से रोक रहा है और उनके प्रतिनिधियों से मिलने पर प्रतिबंध लगा रहा है। टिकैत ने यह भी कहा कि सरकार ने अब तक नॉइडा के किसानों को कोई स्पष्ट योजना नहीं दी है, जिससे उन्हें अपनी भविष्य की सुरक्षा के बारे में अनिश्चितता महसूस हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शीघ्र ही उचित मुआवजा और पुनर्वास योजना नहीं पेश करती, तो किसान व्यापक स्तर पर विरोध जारी रखेंगे।
इस संदर्भ में, किसानों ने नॉइडा नगर निगम के प्रमुख और राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों को कई लिखित याचिकाएँ भेजी हैं, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से भूमि के उचित मूल्यांकन, पुनर्वास सुविधाओं और आर्थिक सहायता की मांग की है। याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि अधिग्रहित भूमि को औद्योगिक विकास के बजाय आवासीय और वाणिज्यिक उपयोग के लिए बदल दिया गया है, जिससे मूल किसानों को उनकी कृषि आय से बाहर कर दिया गया है।
कई स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, किसानों ने इस सप्ताह के अंत में नॉइडा के मुख्य राजमार्ग पर एक बड़े मार्च का आयोजन किया, जिसमें लगभग ५,००० किसान और उनके समर्थनकर्ता शामिल हुए। मार्च के दौरान, किसान ने सड़कों को अवरुद्ध किया और सरकार को तत्काल समाधान देने का आह्वान किया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास में कई बार जलदावेज़ी का उपयोग किया, जिससे कई लोगों को चोटें आईं।
प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया तुलनात्मक रूप से संयमित रही है। राज्य कृषि मंत्री ने एक सार्वजनिक बयान में कहा कि सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाएगी और उचित प्रतिपूर्ति के लिए एक विशेष समिति बनाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के दायरे में रहते हुए ही सभी विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित किया जाएगा, और किसी भी प्रकार के हिंसक प्रदर्शन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं, नॉइडा के प्रमुख रियल एस्टेट विकासकों ने कहा कि उन्होंने स्थानीय समुदाय को पुनर्वास और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए कई परियोजनाएँ शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण के दौरान उचित मुआवजा दिया गया है और आगे भी सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। इस बीच, कुछ विकास कंपनियों ने कहा कि वे किसानों को नई आवासीय इकाइयाँ प्रदान करने के लिए तैयार हैं, जो भविष्य में उनकी आर्थिक स्थिति को स्थिर कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, किसानों और विकास पक्ष के बीच संवाद में अभी भी अंतराल बना हुआ है। कई किसान समूहों ने कहा कि उन्होंने कई बार सरकार को लिखित में अपनी मांगें भेजी, परंतु कोई ठोस उत्तर नहीं मिला। इसके विपरीत, विकास कंपनियों ने कहा कि उन्होंने सभी नियामक अनुमतियों को प्राप्त कर लिया है और कार्य को आगे बढ़ाने में कोई बाधा नहीं है। इस कारण दोनों पक्षों के बीच विश्वास का स्तर गिर गया है, जिससे आगे के समाधान के लिए मध्यस्थता की आवश्यकता स्पष्ट हो रही है।
राजनीतिक प्रभाव के संदर्भ में, इस आंदोलन ने नॉइडा के स्थानीय निर्वाचन क्षेत्रों में भी हलचल मचा दी है। कई विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की नीतियों पर प्रश्न उठाए और किसानों के पक्ष में सार्वजनिक समर्थन जताया। विशेषकर, राज्य विधानसभा में कई सदस्य इस मुद्दे
Updated: September 14, 2026
Summary: Farmers around Noida intensified protests over land acquisition, demanding fair compensation and rehabilitation after government and private developers earmarked thousands of hectares for residential projects, while police restrictions on gatherings have sparked further unrest. State officials claim a compensation committee is underway, but farmers say repeated pleas have yielded no concrete response, keeping the dispute volatile.
The Noida land grab is morphing from a local grievance into a political fault line, exposing how “development” can erode rural trust when compensation is seen as a token rather than a lifeline. Unless the state brokers a credible, farmer‑centric rehabilitation package, the protests will keep feeding
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