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खगड़िया के एसपी भानु प्रताप सिंह और पत्नी पूजा सिंह के बीच वैवाहिक विवाद; भरतपुर में बेटी से मिलने की शिकायत दर्ज

भानु प्रताप सिंह, खगड़िया एसपी और आईपीएस अधिकारी, तथा उनकी पत्नी पूजा सिंह के बीच चल रहा वैवाहिक संघर्ष अब राजस्थान के भरतपुर तक फैल गया है। पूजन ने मथुरा गेट थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि छह साल की बेटी से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है और ससुराल में दरवाजा भी बंद कर दिया गया है। यह घटना तब उत्पन्न हुई जब पूजन ने अपने पति और ससुराल के साथ पारिवारिक संबंधों को सामान्य बनाने की मांग की, जबकि उन्हें लगातार सामाजिक और कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

भानु प्रताप सिंह ने 2020 में आईपीएस में शामिल होकर कई प्रमुख पदों पर कार्य किया, जिसमें बिहार के खगड़िया में एसपी का कार्यकाल भी शामिल है। उनकी पत्नी पूजा, एक निजी क्षेत्र की पेशेवर, पिछले छह वर्षों से उनके साथ रही हैं और दो बच्चों की मां हैं। इस विवाद की जड़ें तब से हैं जब उनके वैवाहिक जीवन में अंतर-व्यक्तिक मतभेद उभरे, जिससे पारिवारिक माहौल तनावपूर्ण हो गया।

बिहार में उनके कार्यकाल के दौरान कई उच्च-प्रोफ़ाइल केसों में उनका नाम उल्लेखनीय रहा, जिससे उन्हें सार्वजनिक और मीडिया की नजरों में लाया गया। इस दौरान, पूजन ने कई बार सामाजिक कार्यक्रमों और बच्चों की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे उनके बीच सामंजस्य की आशा बनी रही। परन्तु, हाल के वर्षों में ससुराल के साथ संबंध बिगड़ने लगे, और यह मतभेद सार्वजनिक विवाद में बदल गया।

पूजन ने मथुरा गेट थाने में शिकायत दर्ज कराते समय कहा कि उनके पति ने उन्हें घर से बाहर कर दिया और बेटी से मिलने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने यह भी बताया कि ससुराल ने दरवाजा बंद करके उन्हें घर से बाहर रहने पर मजबूर किया, जिससे उन्हें मानसिक तनाव और शारीरिक असुविधा का सामना करना पड़ा। इस शिकायत के बाद स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज किया और दोनों पक्षों से बयान लिए।

भानु प्रताप सिंह ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पारिवारिक विवाद निजी मामला है और इसे सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने कर्तव्यों के प्रति पूर्णतः निष्ठावान हैं और इस मुद्दे को अदालत के माध्यम से सुलझाने का इरादा रखते हैं। उन्होंने पुलिस को सहयोग करने का आश्वासन भी दिया, जिससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

ससुराल के प्रमुख सदस्य ने कहा कि घर में किसी भी प्रकार की अनैतिक गतिविधि नहीं हो रही है और परिवार के अंदर के मतभेद को सुलझाने के लिए सभी पक्षों को संवाद करना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बेटी का स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए सबसे उपयुक्त माहौल प्रदान करने की कोशिश की जा रही है, और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से बचाव किया जा रहा है।

राज्य के गृह विभाग ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी व्यक्तिगत विवाद में फँसता है, तो उसे अपने कर्तव्यों को प्रभावित नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं में न्यायिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है और जांच में देरी नहीं होनी चाहिए।

बिहार पुलिस ने बताया कि इस प्रकार के मामलों में सामाजिक प्रभाव को देखते हुए शीघ्र कार्यवाही की जाती है। उन्होंने कहा कि शिकायत के बाद उन्होंने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है और आवश्यक साक्ष्य एकत्र कर रहे हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कानून का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का प्रभाव सार्वजनिक विश्वास पर पड़ सकता है, विशेषकर क्योंकि दोनों पक्ष सार्वजनिक सेवा में हैं। उन्होंने यह संकेत दिया कि इस प्रकार के निजी विवादों को सार्वजनिक मंच पर लाने से सरकारी संस्थानों की छवि पर प्रश्न उठ सकते हैं। इस संदर्भ में, विपक्षी पार्टियों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो ऐसे विवादों से सार्वजनिक खर्च पर अनावश्यक बोझ पड़ सकता है, क्योंकि जांच और सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त संसाधन लगते हैं। साथ ही, यदि इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया लंबी हो जाती है, तो संबंधित अधिकारी के कार्यस्थल पर अस्थायी अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है, जिससे प्रशासनिक कार्यवाही में बाधा आ सकती है।

सामाजिक प्रभाव के लिहाज़ से, इस मामले ने महिलाओं के अधिकार और पारिवारिक सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उभारा है। कई सामाजिक संगठनों ने इस अवसर पर महिला सुरक्षा और बाल अधिकारों के संरक्षण की मांग की है, यह दर्शाते हुए कि घरेलू विवादों को न्यायिक रूप से सुलझाना आवश्यक है। इस दिशा में, महिला सहायता समूह ने समर्थन की

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