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हेम्बल सुरंग निर्माण पर जल संकट की आशंका, जलविज्ञानियों ने उठाए गंभीर सवाल

बेंगलुरु शहर के हेम्बल क्षेत्र में स्थित 3.5 एकड़ क्षेत्र में निर्मित छोटा सुरंग, पर्यावरणीय लागत और उपयोगिता को लेकर नागरिकों में तीव्र चर्चा जारी है।
शहर के जल संसाधन विशेषज्ञ शशांक पाळुर, जो WELL Labs में हाइड्रोलॉजिस्ट हैं, ने इस परियोजना के संभावित जल-परिस्थिति प्रभावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हेम्बल सरोवर का एक विस्तृत भाग इस सुरंग के निर्माण में उपयोग किया गया है, जिससे शहर के जल-परिस्थति तंत्र पर अनदेखी प्रभाव पड़ सकते हैं। यह मुद्दा स्थानीय निकायों और पर्यावरण संगठनों के बीच तीव्र बहस का कारण बन रहा है।हेम्बल सरोवर बेंगलुरु के प्रमुख जलाशयों में से एक है, जो कई छोटे-छोटे जलाशयों से जुड़ा हुआ एक जटिल प्रवाह प्रणाली बनाता है। इस सरोवर से निकलने वाला जल कई अन्य तालाबों में बहता है, जिससे शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जल उपलब्धता बनती है। इस प्रकार के जल-प्रवाह नेटवर्क को बिगड़ना न केवल स्थानीय जल आपूर्ति को प्रभावित करता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के समय में शहरी बाढ़ जोखिम को भी बढ़ा सकता है। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, हेम्बल के छोटे सुरंग निर्माण की वैधता पर प्रश्न उठते हैं।

परियोजना के समर्थन में स्थानीय प्रशासन ने कहा कि इस सुरंग का उद्देश्य यातायात जाम को कम करना और शहरी परिवहन को सुगम बनाना है। उन्होंने बताया कि इस मार्ग से दैनिक यात्रा समय में लगभग 15-20 मिनट की बचत होगी, जिससे आर्थिक लाभ की उम्मीद है। साथ ही, निर्माण के दौरान पर्यावरणीय मानदंडों का पालन किया गया, यह भी कहा गया। हालांकि, इन दावों के बावजूद, जलविज्ञानी शशांक पाळुर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जल-परिस्थितियों की जटिलता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

वास्तविक जांच से पता चलता है कि सुरंग के निर्माण में सरोवर की सतह के नीचे 3.5 एकड़ जमीन को हटाया गया, जिससे जल-संचरण की प्राकृतिक गति बाधित हुई। यह परिवर्तन जल के प्रवाह को बदल सकता है, जिससे डाउनस्ट्रीम तालाबों में जल स्तर घट सकता है। कुछ पर्यावरणीय संगठनों ने बताया कि इस परिवर्तन से जल जीवों के प्रजनन स्थल प्रभावित हो सकते हैं, और जल की शुद्धता में भी गिरावट आ सकती है।

स्थानीय नागरिक समूह हरा बेंगलुरु ने इस मुद्दे को लेकर कई सार्वजनिक सभाओं का आयोजन किया और नगरपालिका को पारदर्शी रिपोर्ट पेश करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरोवर के जल को बाधित किया गया, तो शहर के कई हिस्सों में जल की कमी और जल गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। समूह ने यह भी कहा कि ऐसी बड़ी परियोजना के लिए पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) ने कहा कि उन्होंने सभी आवश्यक मंज़ूरी प्रक्रियाओं का पालन किया है और परियोजना को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप माना गया। उन्होंने यह भी कहा कि सुरंग के निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक हैं और इच्छुक नागरिक इनको देख सकते हैं। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि सरोवर की जल गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त जल शोधन इकाइयाँ स्थापित की जाएँगी।

पर्यावरणीय NGOs ने इस जवाब को स्वीकारते हुए भी कहा कि केवल दस्तावेज़ीकरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतर निगरानी और डेटा संग्रह आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि जल स्तर, जल गुणवत्ता और जैव विविधता पर नियमित सर्वेक्षण किए जाएँ। NGOs ने यह भी कहा कि अगर कोई अनपेक्षित जल संकट उत्पन्न होता है, तो तत्काल उपायों की आवश्यकता होगी।

राज्य के जल विभाग ने बताया कि हेम्बल सरोवर के जल प्रवाह पर निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि जल विज्ञानियों को इस क्षेत्र में विस्तृत अध्ययन करने का निर्देश दिया गया है, ताकि किसी भी संभावित जल आपूर्ति बाधा को समय रहते पहचाना जा सके। विभाग ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो तो जल पुनरुद्धार उपाय लागू किए जाएंगे।

वित्तीय दृष्टिकोण से, बेंगलुरु के शहरी विकास प्राधिकरण (BDA) ने इस परियोजना को आर्थिक लाभ के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि सुधरे हुए ट्रैफ़िक प्रवाह से व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और शहर की समग्र उत्पादकता में सुधार होगा।

बेंगलुरु के जंगल-शहर संतुलन में यह सुरंग बुनियादी ढांचे की जीत नहीं, बलकि जल सुरक्षा के लिए चुनौती है।

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