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बिहार के बिहटा-सरमेरा और उदाकिशुनगंज-भटगामा मार्ग पर लगेंगे टोल प्लाजा, निजी वाहनों से नहीं लिया जाएगा शुल्क

बिहार सरकार ने दो प्रमुख स्टेट हाईवे पर टोल नाकेबंदी की योजना को अंतिम रूप दे दिया है, जिससे राज्य के राजस्व संग्रह में नई दिशा मिलेगी।
बिहटा‑सरमेरा (SH‑78) और उदाकिशुनगंज‑भटगामा (SH‑58) मार्गों पर टोल प्लाज़ा स्थापित किए जाएंगे, जहाँ निजी वाहन मालिकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, जबकि व्यावसायिक वाहनों पर निर्धारित दरों के अनुसार वसूली शुरू होगी। यह पहल इस साल के तीसरे तिमाही से लागू होगी, जिससे सड़कों की देखभाल एवं विस्तार के लिए अतिरिक्त निधि उपलब्ध होगी।स्टेट हाईवे की टोल नीति बनाते समय पथ निर्माण विभाग ने कई तकनीकी एवं सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखा। पिछले दो वर्षों में बिहार में सड़कों की कुल लंबाई में 15 % की वृद्धि हुई है, परन्तु रख‑रखाव के लिये फंड की कमी बनी रही। इस संदर्भ में सरकार ने टोल राजस्व को सीधे सड़कों के मेंटेनेंस फंड में आवंटित करने का प्रस्ताव रखा, जिससे व्यावसायिक वाहनों के संचालन में उत्पन्न होने वाले खर्च को संतुलित किया जा सके।

बिहटा‑सरमेरा और उदाकिशुनगंज‑भटगामा मार्गों का चयन रणनीतिक महत्व रखता है। दोनों हाईवे बिहार के औद्योगिक और कृषि उत्पादन क्षेत्रों को एक साथ जोड़ते हैं, जहाँ बड़े ट्रक और लॉजिस्टिक वाहन नियमित रूप से यात्रा करते हैं। इन मार्गों पर औसत दैनिक ट्रैफिक लगभग 12,000 वाहन है, जिसमें 35 % वाणिज्यिक ट्रकों का योगदान है। इस डेटा के आधार पर विभाग ने टोल दरें निर्धारित कीं, जिससे राजस्व की भविष्यवाणी अधिक सटीक बनी।

टोल प्लाज़ा की निर्माण कार्यवाही पिछले सप्ताह ही शुरू हुई, जहाँ स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी गई। निर्माण स्थल पर अस्थायी सुरक्षा बाड़ें और सूचना बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें यात्रियों को टोल प्रक्रिया और भुगतान विधियों के बारे में बताया गया है। प्रत्येक प्लाज़ा में चार लेन स्थापित की जा रही हैं, दो लेन व्यावसायिक वाहनों के लिए और दो लेन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के लिये, जिससे ट्रैफिक जाम को न्यूनतम किया जा सके।

वित्त विभाग ने कहा कि टोल संग्रह के लिये इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट गेटवे को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे पारदर्शिता और कुशलता बनी रहे। डिजिटल भुगतान विकल्पों में यूपीआई, एटीएम कार्ड और मोबाइल वॉलेट शामिल हैं, जबकि नकद भुगतान को भी सीमित समय के लिये उपलब्ध कराया जाएगा। इस कदम से टैक्स चोरी की संभावना कम होगी और वास्तविक समय में डेटा संग्रहण संभव होगा, जिससे आगे की नीति निर्धारण में मदद मिलेगी।

स्थानीय व्यापारियों और लॉजिस्टिक कंपनियों ने टोल नाकेबंदी को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की। कई बड़े ट्रकिंग फर्मों ने कहा कि अतिरिक्त लागत उनके संचालन खर्च को बढ़ा सकती है, परन्तु वे बेहतर सड़क स्थितियों की उम्मीद भी कर रहे हैं। कुछ छोटे व्यापारी समूहों ने यह संकेत दिया कि टोल शुल्क में किसी भी प्रकार की अनावश्यक वृद्धि उनके लाभ मार्जिन को प्रभावित कर सकती है, इसलिए वे सरकार से न्यूनतम दरें निर्धारित करने का अनुरोध कर रहे हैं।

विपरीत रूप से, ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने इस कदम का स्वागत किया, क्योंकि उन्होंने बताया कि टोल से मिलने वाले फंड से सड़कों की मरम्मत तेज़ी से होगी, जिससे किसानों और स्थानीय नागरिकों की दैनिक यात्रा अधिक सुरक्षित होगी। कई ग्राम पंचायतों ने कहा कि पहले टोल के बिना सड़कों की हालत खराब थी, जिससे वाहन क्षति और ईंधन खर्च बढ़ जाता था।

राजनीतिक दलों ने भी इस योजना को लेकर अपने-अपने दृष्टिकोण पेश किए। मुख्य विपक्षी पार्टी ने कहा कि टोल नीति को लागू करने से पहले विस्तृत सार्वजनिक परामर्श होना चाहिए, जबकि शासक दल ने इसे विकास के एक आवश्यक कदम के रूप में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि टोल से जुटी रक़म का उपयोग केवल सड़क कार्यों में होना चाहिए, अन्य क्षेत्रों में नहीं।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि टोल राजस्व से राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा, परन्तु यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि संग्रह प्रक्रिया में भ्रष्टाचार न हो। उन्होंने सुझाव दिया कि टोल संग्रह के लिए एक स्वतंत्र निगरानी एजेंसी स्थापित की जाए, जो नियमित ऑडिट और सार्वजनिक रिपोर्टिंग करे। इससे जनता का भरोसा बढ़ेगा और नीति की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होगी।

By charging only commercial vehicles, Bihar cleverly monetises the very traffic that stresses its highways while keeping private commuters unhindered—an elegant way to align public benefit with revenue generation. This targeted tolling could also pressure logistics firms to modernise fleets, boosting long‑term road durability and reducing maintenance costs.