बिहार के किसानों ने एक नई चुनौती का सामना करना पड़ा, जो उनकी जीवनशैली को बदलने के लिए तैयार हैं। बिहार सरकार ने बृहद मैदानी क्षेत्र में पांच सैटेलाइट टाउनशिप बनाने की योजना बनाई है। इन टाउनशिप में से कुछ बिहार के प्रमुख शहरों में प्रस्तावित हैं।
इन टाउनशिप के निर्माण के बाद, किसानों के खेतों को खत्म करने का खतरा बढ़ जाएगा। स्थानीय रिटेन क्रीम प्राप्तकर्ताओं व्यथित हैं क्योंकि उन्हें मालूम है कि अगर ये टाउनशिप बनाई जाती हैं तो उनकी जमीन का कब्ज़ा हो जाएगा। बिहार के पारंपरिक खेतों को खत्म करने का खतरा बढ़ गई है।
बिहार के किसानों ने सरकार से इन टाउनशिप के निर्माण के प्रति अपना विरोध दर्ज किया है। उनका कहना है कि इन्हें खोने से उनके परिवारों का आय पर निर्भर रहने की क्षमता कम हो जाएगी। सरकार को इन टाउनशिप बनाने के बजाय उन्हें खेती के प्रमुख केन्द्रों बनाने की पहल करनी चाहिए।
किसानों के अलावा अन्य संगठन भी इन टाउनशीप के विरुद्ध हैं। पार्टी नेताओं ने मांग की कि भूमि अधिग्रहण राष्ट्रीय पुनर्निर्माण संविधान के प्रावधानों के अनुसार हो। स्थानीय सरकार के अधिकारियों का कहना है कि टाउनशिप को बिल्कुल पर्यावरण अनुकूल बनाएंगे।
इन टाउनशिप का निर्माण शीघ्र ही शुरू होगा। सरकार ने इसके लिए 5,000 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है। इस बजट से टाउनशिप के निर्माण के अलावा अन्य सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी। सरकार का कहना है कि इसमें से अधिकांश सुविधाएं प्रगट सामर्थ्य हैं।
यह निर्णय सामाजिक, राजनीतिक और अर्थिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ता है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की बेरोजगारी को कम करना है। सरकार का कहना है कि इन टाउनशिप के निर्माण से करीब 20,00,000 लोगों को रोज़गार मिलेगा।
अगर टाउनशिप के निर्माण को बढ़ावा दिया जाता है, तो यह देश के आर्थिक विकास की दिशा में एक अतिशय महत्वपूर्ण कदम होगा। सरकार की इस योजना से देश के बेरोजगारी रेट में कमी होगी। यह योजना बिहार के विकास में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बिहार में इस टाउनशिप का निर्माण होने से किसानों ने सरकार से अपील की कि इन टाउनशिप के निर्माण को रोक दिए जाए। अगर सरकार ने इनका खत्म कर दिया, तो कई परिवारों को अपना मुख्य आय-धारक कमजोर हो जाएगा।
यह विकास महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसानों की जीवनशैली को प्रभावित करेगा। इससे आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन हो सकते हैं।
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