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लखीसराय के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जलजमाव से स्वास्थ्य सेवाएँ बाधित, निकासी के लिए आपात कार्रवाई का आदेश।

लखीसराय के अलीनगर पंचायत में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य उपकेंद्र में जलजमाव की समस्या ने स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर संकट में डाल दिया है। बारिश के बाद दो फीट तक जल जमा होने से पुराने भवन में मरीजों को इलाज करने की स्थिति अस्थायी रूप से असम्भव हो गई है।

इस बीच, अर्धनिर्मित नए भवन में भी चारों ओर जलजमाव का घेराव बना हुआ है, जिससे रोगियों को दुर्गंध और गंदे पानी के बीच इलाज करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल रोगियों के स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों के कार्यस्थल को भी असुरक्षित बना रही है।

अलीनगर स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण 2018 में शुरू हुआ था, लेकिन पूर्णता तक पहुँचने में कई वर्ष लग गए। प्रारम्भिक योजना में केवल प्राथमिक उपचार सुविधाएँ प्रदान करने का लक्ष्य था, परन्तु वर्षभर की अनियमित बारिश और निकासी प्रणाली की कमी ने जलभारी स्थिति को जन्म दिया। स्थानीय प्रशासन ने

कई बार जल निकासी के लिए पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव दिया, परन्तु बजट प्रतिबंध और तकनीकी अड़चनें इस कार्य को रोकती रही हैं। पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा 1,200 मिलिमीटर रही है, जिससे जलस्तर में निरंतर वृद्धि देखी गई।

वर्षा ऋतु के दौरान, उपकेंद्र के

आसपास की नालीें भी बंद हो जाती हैं, जिससे जल का बहाव रोका जाता है और पानी का स्तर बढ़ता है। इस कारण पुराने भवन के नीचे के कंक्रीट फर्श में दरारें पैदा हो गई हैं, जिससे पानी सीधे इमारत के भीतर प्रवेश करता है। जलजमाव के कारण भवन में नमी

और फफूंद की वृद्धि हुई है, जो रोगियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। साथ ही, जलस्तर की वृद्धि से इलेक्ट्रिकल उपकरणों की सुरक्षा भी जोखिम में पड़ गई है, जिससे बिजली कटौती और उपकरणों की खराबी की घटनाएँ बढ़ी हैं।

स्थानीय मीडिया ने इस मुद्दे को उजागर करने

के बाद, स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित उपायों की घोषणा की। उन्होंने उपकेंद्र के पुराने भवन में जल निकासी के लिए अतिरिक्त पम्प स्थापित करने और अस्थायी ढांचे को मजबूत करने का आदेश दिया। इसके अलावा, नई निर्माणाधीन इमारत में जलरोधी सामग्री का उपयोग करने का निर्देश जारी किया गया। इस प्रक्रिया

के तहत, एक विशेषज्ञ टीम को नियुक्त किया गया है जो जलनिकासी के तकनीकी विवरण और आवश्यक पूंजी खर्च का मूल्यांकन करेगी।

स्वास्थ्य केंद्र के प्रमुख डॉक्टर, डॉ. सविता सिंह ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में रोगियों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में इलाज देना लगभग असंभव हो रहा है।

उन्होंने बताया कि कई रोगियों ने जलजमाव के कारण उत्पन्न बायोफिल्टर को लेकर शिकायत की है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। इस कारण, अस्पताल में रोगियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है, क्योंकि लोग अधिक सुरक्षित विकल्पों की तलाश में अन्य अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं।

डॉक्टर ने यह भी उल्लेख किया कि जलजमाव के कारण दवाओं की भंडारण शर्तें बिगड़ रही हैं, जिससे दवाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जलजमाव की समस्या का समाधान केवल स्वास्थ्य विभाग

के दायरे में नहीं है, बल्कि यह एक समग्र शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे की समस्या है। उन्होंने बताया कि अगले दो हफ्तों में एक विशेष समिति गठित की जाएगी, जो जल निकासी के लिए आवश्यक तकनीकी उपायों की समीक्षा करेगी और तत्काल कार्यवाही का प्रस्ताव प्रस्तुत करेगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने

कहा कि राज्य सरकार को इस दिशा में त्वरित सहायता प्रदान करनी होगी, क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा असर अनदेखा नहीं किया जा सकता।

आधारभूत समस्याओं के समाधान में स्थानीय समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अलीनगर के पिंडस्थ लोगों ने अपने गांव में जल निकासी की व्यवस्था सुधारने

के लिए स्वयंसेवकों के समूह का गठन किया है। उन्होंने निकासी नालों की सफाई, कचरे की उचित निपटान और जलरोधी उपायों के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया है। इस पहल को स्थानीय एनजीओ ने समर्थन दिया है और उन्होंने अतिरिक्त संसाधन प्रदान करने का वचन दिया है। समुदाय की सक्रिय भागीदारी

से कुछ हद तक जलजमाव की समस्या में कमी देखी जा रही है, परन्तु पूर्ण समाधान के लिए अधिक व्यापक कदमों की आवश्यकता है।

राजनीतिक पक्ष ने भी इस समस्या को प्राथमिकता दी है। क्षेत्र के विधायक, श्री अमित कुमार ने संसद में इस मुद्दे को उठ

Updated: September 3, 2026


Heavy rains have flooded both the old and under‑construction blocks of the Ayushman Arogya Mandir health sub‑centre in Alinagar, crippling patient care and endangering staff, while drainage failures have caused structural damage and mold growth. Authorities have ordered emergency pumps and waterproofing measures and are forming a committee to devise a permanent fix, as locals and NGOs rally to improve drainage and sanitation.

Insight: The chronic flooding at Ayushman Arogya Mandir exposes how piecemeal health funding collapses when basic urban infrastructure—drainage, sanitation and resilient construction—is ignored, turning a clinic into a disaster zone.

Unless the state treats health‑care sites as integral nodes of city planning rather

बिहार के दक्षिणी जिलों में बाढ़ के साथ आई विदेशी मछलियों को लेकर सरकार ने जारी की चेतावनी

बिहार के दक्षिणी जिलों में नेपाळ के बाढ़ से बहने वाले अप्रत्याशित मछलियों की आपूर्ति ने स्थानीय बाजारों में हलचल मचा दी, जबकि राज्य सरकार ने इन जीवों को न खाकर न बेचने की सख्त चेतावनी जारी की।
यह चेतावनी इस बात पर आधारित है कि इन मछलियों में जलजनित रोगजनकों की संभावना है, जो स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना प्रसार के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की है और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है।नेपाळ में जुलाई‑अगस्त 2024 में भारी बारिश और बाढ़ ने कई नदियों के प्रवाह को बाधित किया, जिससे जलस्रोतों में विदेशी प्रजातियों का प्रवाह बढ़ गया। इन बाढ़ों ने सन्दी, कोसी और गंडकी जैसी प्रमुख नदियों को प्रभावित किया, जिनके साथ कई छोटे नदियों और नाले भी जुड़े हुए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बाढ़ की तीव्रता और अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कृषि योग्य जमीन पर क्षति और प्रवासी जनसंख्या में वृद्धि हुई।

बिहार में इन मछलियों का प्रकट होना अनपेक्षित था, क्योंकि इस क्षेत्र के पारंपरिक जलजीवों में केवल स्थानीय प्रजातियों का प्रचलन रहा है।

स्थानीय मत्स्य व्यापारियों ने बताया कि बाजार में अचानक सैल्मन, ट्राउट और कुछ विदेशी झींगों की बिक्री बढ़ी है, जो आम तौर पर यहाँ नहीं पाई जातीं। किसानों ने भी रिपोर्ट किया कि खेतों में जलभराव के दौरान इन जीवों का तैरते देखना आम हो गया है, जिससे मत्स्य संसाधनों की पारिस्थितिकी में बदलाव का संकेत मिलता है।

राज्य सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए बिहार के मुख्य सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि वह सभी स्वास्थ्य केंद्रों में इस नई मछली प्रजातियों के संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की जानकारी उपलब्ध कराए। साथ ही, जिला स्तर पर एक आपातकालीन बैठक बुलाकर स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और जनता को जागरूक करने का आदेश दिया गया। सरकार ने इस मुद्दे को हल्के में न लेते हुए, सभी आयु वर्ग के लोगों से इन मछलियों को न छूने, न खाने और न बेचने की अपील की।

प्रमुख शहरों में स्थित प्रमुख मत्स्य बाजारों ने भी इस चेतावनी का पालन किया और इन नई मछलियों की बिक्री को रोक दिया। कई दुकानों ने अपने स्टॉक्स को सुरक्षित स्थान पर रखकर, भविष्य में संभावित जांच के लिए रखरखाव किया। स्थानीय स्वयंसेवी समूहों ने भी सामाजिक मीडिया और पारंपरिक चैनलों के माध्यम से इस चेतावनी को व्यापक रूप से फैलाया, जिससे ग्रामीण इलाकों में भी सूचना की पहुँच सुनिश्चित हुई।

नेपाळ में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने राहत कार्य तेज़ कर दिया है, और जलजन्य रोगों के प्रसार को रोकने के लिए स्वच्छ जल और शुद्धता उपाय प्रदान कर रहे हैं। इन संगठनों ने कहा कि बाढ़ के कारण जलवायु परिवर्तन के प्रभावों में वृद्धि हुई है, जिससे भविष्य में ऐसे अनपेक्षित जैविक विस्फोटों की संभावना बढ़ेगी। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को नियमित निरीक्षण और जल स्रोतों की सफाई के लिए अतिरिक्त संसाधन प्रदान करने की मांग की है।

बिहार सरकार के स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि अभी तक इन मछलियों में विषाक्तता या रोगजनक तत्वों की पुष्टि नहीं हुई है, परंतु सतर्कता के कारण यह कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों को इन जीवों की जैव रसायनिकी का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है, और परिणाम मिलने पर आगे की दिशा निर्धारित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को इन मछलियों के सेवन से स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं तो तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में रिपोर्ट करना आवश्यक है।

विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने इस स्थिति को राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करने की कोशिश नहीं की, बल्कि उन्होंने सरकार की चेतावनी को समर्थन दिया और कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न ऐसी स्थितियों में नीतियों का शीघ्र कार्यान्वयन आवश्यक है। कुछ स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास योजनाओं को तेज़ किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी अनपेक्षित जैविक घटनाओं से बचा जा सके। विपक्ष ने यह भी कहा कि जल संसाधन प्रबंधन में सुधार लाना आवश्यक है।

 

Updated: September 3, 2026

Insight: The influx of foreign fish species from Nepal’s floods could introduce water‑borne pathogens, posing health risks to local populations. The Bihar government’s warning and information campaign aim to prevent consumption and mitigate potential public health impacts.

बिहार में 8 नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, 13 जिलों में बाढ़ संकट, हाई‑अलर्ट जारी

बिहार में बाढ़ की स्थिति अब गंभीर चेतावनी स्तर पर पहुँच गई है; राज्य के आठ प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है, जिससे 13 जिलों में जनजीवन का अभूतपूर्व संकट उत्पन्न हो गया है।
पटना, भागलपुर, मुजफ़रपुर, सहरसा, बक्सर, और कई अन्य क्षेत्रोंमें पानी के बढ़ते स्तर ने सड़कों को बेशुमार जल में डुबो दिया है, जबकि आपातकालीन प्रबंधन प्राधिकरण ने हाई अलर्ट जारी कर सभी नागरिकों को सतर्क रहने का आदेश दिया है। इस लेख में बाढ़ के विकास, प्रभावित क्षेत्रों, सरकारी प्रतिक्रिया और संभावित सामाजिक‑आर्थिक प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

बाढ़ की पूर्वापेक्षा की जड़ें इस साल की अनियमित मौसमी बारिश में निहित हैं, जिसमें जून के मध्य से लेकर अब तक 1,200 mm से अधिक वर्षा दर्ज हुई है। जलवायु विज्ञानियों ने बताया कि हिमालयी जलधारा से बहने वाली गंगा, कोसी, सोन और पुनपुन जैसी नदियों की धारा में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे उनके जलस्तर ने पहले से तय किए गए “खतरे के निशान” को पार कर लिया। इन नदियों के किनारों पर स्थित बाड़ों और बांधों की उम्र और रख‑रखाव की कमी ने भी स्थिति को और बिगाड़ा है।

इतिहासिक आँकड़े दर्शाते हैं कि 2020‑2021 में इस प्रकार की बाढ़ ने लगभग 25 लाख लोगों को प्रभावित किया था, परंतु इस बार के आँकड़े पहले ही 30 लाख से अधिक दर्शा रहे हैं। राज्य के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा के जलस्तर में 2.5 मीटर की वृद्धि, कोसी में 2.2 मीटर, और सोन में 1.9 मीटर की बढ़ोतरी देखी गई है। पुनपुन, बागमती, गंडक, बूढ़ी गंडक और घघरा जैसी नदियों ने भी समान स्तर की वृद्धि दर्ज कराई है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है।

पटना में स्थित गंगा, सोन और पुनपुन के जलस्तर ने पहले ही हाई अलर्ट का स्तर पार कर लिया, जिससे शहर के कई प्रमुख सड़कों पर जल जमा हो गया है। गंगा घाटी में स्थित प्राचीन मंदिरों और व्यापारिक केंद्रों के आसपास की निचली बस्तियों में पानी की सतह 1.5 मीटर तक पहुँच गई है, जिससे निवासियों को अस्थायी शरणस्थल की तलाश करनी पड़ी। स्थानीय पुलिस ने बताया कि कई घरों की छतें भी पानी के नीचे धँस गई हैं, और कई परिवारों को अपनी वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए ऊँची जगहों पर स्थानांतरित होना पड़ा।

बिहार के 13 जिलों में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव स्पष्ट हो रहा है। जल निकासी की खराब व्यवस्था, कच्चे जलनिकायों का टूटना, और स्वास्थ्य सेवाओं की अपर्याप्त उपलब्धता ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। कई प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए हैं, और स्वास्थ्य केंद्रों में रोगी संख्या में तीव्र वृद्धि देखी जा रही है, विशेषकर जलजनित संक्रमण और श्वसन रोगों की शिकायतें बढ़ी हैं।

संबंधित प्राधिकरण ने तुरंत आपातकालीन उपायों के तहत राहत एवं पुनर्वास कार्य शुरू कर दिया है। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने 15 हजार से अधिक स्वयंसेवकों को तैनात कर प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य, जल, और चिकित्सीय सहायता पहुँचाने का आदेश दिया है। भारतीय सेना ने भी सहायता प्रदान करने के लिए दो हेलीकॉप्टर और दो एम्बुलेंस तैनात किए हैं, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल ने जल-उत्खनन मशीनों को तेज़ी से चलाने का आदेश दिया है।

बढ़ते जलस्तर के कारण स्थानीय व्यापारियों ने अपने स्टॉक्स को सुरक्षित रखने के लिए अस्थायी गोदामों में स्थानांतरित किया है, परंतु कई छोटे व्यवसायों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बागमती नदी के किनारे स्थित कृषि बाजार में फसलें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे किसानों को संभावित आय में 30 % तक की घटावट का डर है। इस बीच, सरकारी विभागों ने बाढ़ प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की है, जिसमें प्रत्येक हाउसहोल्ड को 25,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

राज्य के मुख्य मंत्री ने बाढ़ के कारण हुए मानवीय और आर्थिक नुकसान को कम करने हेतु विशेष समिति का गठन किया है, जिसमें जलवायु विशेषज्ञ, जल संसाधन प्रबंधन अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आगामी दो हफ्तों में जल स्तर की निरंतर निगरानी की जाएगी और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त राहत पैकेज जारी किए जाएंगे। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) से अतिरिक्त निधियों की मांग की है, ताकि जल निकासी, बाढ़ रोकथाम और पुनर्वास कार्य को तेज़ी से पूरा किया जा सके।

 

Updated: September 3, 2026


Bihar’s eight major rivers have surged past danger marks, plunging 13 districts into a severe flood crisis that has swamped roads, schools and health centres while displacing thousands. State disaster officials, the army and volunteers are racing to deliver food, water and medical aid as authorities brace for further rises and assess the looming economic fallout.

The flood has pushed water levels of eight major rivers past danger thresholds, endangering infrastructure and public safety.
It has prompted a coordinated emergency response involving state agencies, the military and relief volunteers to protect millions of residents.

बक्सर के डुमरांव स्कूल में दो शिक्षकों ने 12 नाबालिग छात्राओं के साथ दुष्कर्म कर वीडियो बनाकर साझा किया; पुलिस ने दो शिक्षकों को गिरफ्तार किया

बक्सर के डुमरांव प्रखंड में स्थित एक मध्य विद्यालय में दो शिक्षकों द्वारा 12 नाबालिग छात्राओं के साथ दुष्कर्म करने और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का गंभीर मामला उजागर हुआ है।
स्थानीय पुलिस ने इस सूचना पर तत्परता से कार्रवाई करते हुए दो शिक्षकों को गिरफ्तार कर ले लिया है तथा मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। यह घटना न केवल शैक्षिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न लगाती है, बल्कि ग्रामीण समाज में महिलाओं के सुरक्षा मुद्दे को भी नई दिशा में ले जाती है।यह विद्यालय, जो कई वर्षों से बक्सर जिले में शैक्षिक केंद्र के रूप में जाना जाता था, पिछले दो वर्षों से छात्रों की गिरते प्रदर्शन और अनुशासनहीनता से ग्रस्त था। स्थानीय प्रशासन ने इस समस्या को हल करने के लिए कई बार कार्यशालाएँ और काउंसिलिंग सत्र आयोजित किए थे, परंतु अंततः इस प्रकार की हिंसक घटना सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, दो शिक्षकों ने छात्रों को निजी समय में बुलाकर उन्हें शारीरिक अत्याचार किया और फिर उस क्षण को रिकॉर्ड कर इंटरनेट पर साझा किया।

प्राथमिक जांच से पता चला है कि आरोपित शिक्षकों ने इस कृत्य को कई महीनों तक लगातार किया था, जिससे कई छात्राएं शारीरिक और मानसिक रूप से गंभीर रूप से प्रभावित हुईं। अभिभावक संघ ने तुरंत मामला पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दिया, जबकि ग्रामीण समुदाय में इस खबर के प्रसार के साथ ही उग्र प्रतिक्रिया देखी गई। कई गांव के युवा समूहों ने आरोपित शिक्षकों पर भीड़ बनाकर पीट-पीट कर मार दिया, जिससे पुलिस को हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत करना पड़ा।

जिला शिक्षा अधिकारी ने इस घटना को लेकर शोक व्यक्त किया और कहा कि विद्यालय में शारीरिक सुरक्षा के मानकों को पुनः जांचा जाएगा। उन्होंने तत्काल सभी शिक्षकों के पृष्ठभूमि जांच और छात्रों के लिए विशेष सुरक्षा उपायों का आदेश दिया। साथ ही, उन्होंने बताया कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए हर विद्यालय में एक कड़ाई से निरीक्षण प्रणाली लागू की जाएगी।

राज्य सरकार ने इस मामले को लेकर आपातकालीन बैठक बुलाकर सभी संबंधित विभागों को सूचना दी। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में समान प्रकार की जांच को अनिवार्य किया और स्कूल सुरक्षा उपायों को मजबूत करने का निर्देश जारी किया। साथ ही, बाल संरक्षण विभाग ने प्रभावित छात्राओं के लिए त्वरित चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।

साथ ही, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस घटना को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए, बाल शोषण के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है और आरोपी को न्यूनतम सत्रह वर्ष की कठोर जेल की सजा मिलने की संभावना है।

स्थानीय राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। कई विधायक और सांसद ने तत्काल न्याय सुनिश्चित करने की मांग की और कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में सख्त निगरानी और नियमित ऑडिट आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्याय मिलने तक वे प्रभावित परिवारों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेंगे।

पड़ोस के ग्रामीणों ने भी इस घटना के बाद अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था करने की जरूरत महसूस की। कई गांवों ने सामुदायिक सुरक्षा समूह स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिससे स्कूल के निकटवर्ती क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस दिशा में स्थानीय पुलिस ने भी सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सतत निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी।

आर्थिक दृष्टिकोण से इस घटना का प्रभाव शिक्षा क्षेत्र की विश्वसनीयता पर पड़ेगा। कई अभिभावकों ने कहा कि वे अपने बच्चों को इस विद्यालय में प्रवेश नहीं देंगे और निकटवर्ती विद्यालयों में स्थानांतरित करने की योजना बना रहे हैं। इससे स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों की छात्र संख्या में गिरावट और वित्तीय नुकसान की संभावना बनती है। साथ ही, इस प्रकार के मामलों में सरकारी अनुदानों का पुनर्मूल्यांकन भी हो सकता है।

समाजशास्त्रियों और बाल अधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए न केवल कड़ाई से कानूनी सजा, बल्कि सामाजिक जागरूकता और शैक्षणिक संस्थानों में नैतिक शिक्षा को भी मजबूत करना आवश्यक है। वे बताते हैं कि बच्चों के प्रति शारीरिक और लैंगिक शोषण के मामलों में अक्सर रिपोर्टिंग की कमी और सामाजिक कलंक प्रमुख कारक होते हैं, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलना कठिन हो जाता है।

आगे चलकर, इस मामले की जांच के परिणाम और न्यायिक प्रक्रिया के विकास को देखते हुए, बक्सर जिले में शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की संभावना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भविष्य में विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्य स्थापना, शिक्षक चयन प्रक्रिया में सख्त पृष्ठभूमि जांच और छात्र सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र शिकायत निवारण प्राधिकरण की स्थापना की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं।

 

Updated: September 3, 2026


Two teachers in a Buxar village school were arrested for repeatedly raping twelve under‑age girls, recording the assaults and circulating the videos online, prompting a police probe and a special investigative team. The scandal has triggered statewide calls for stricter school security, background checks and rapid victim support, with officials warning of severe legal penalties for the perpetrators.

Insight: The scandal shatters the veneer of trust in rural schools, exposing how institutional neglect can turn educators into predators rather than protectors.
If authorities truly overhaul vetting, monitoring and community oversight, this tragedy could become the catalyst that finally forces India’s education system to prioritize safety over reputation.

बिहार‑झारखंड में येलो अलर्ट, 3‑5 सितंबर तक भारी बारिश से बाढ़‑प्रवण स्थिति

बिहार‑झारखंड में येलो अलर्ट जारी, भारी बारिश की चेतावनी के साथ मौसम विभाग ने 3‑5 सितंबर के बीच संभावित बाढ़‑प्रवण परिस्थितियों की सूचना दी, जिससे प्रदेशों में जल‑संकट की आशंका बढ़ी है।
विभाग की प्रेस रिलीज में बताया गया कि पूर्वी बिहार, विशेषकर पटनागंज, भागलपुर और गयाबंद जिलों में लगातार तेज़ बवंडर‑भरे वर्षा की संभावना है, जबकि झारखंड के दारभंग, रांची और सोलापुर क्षेत्रों में जल‑स्तर तेज़ी से बढ़ने की संभावना है। इस चेतावनी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन उपायों की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे नागरिकों को समय पर सूचना एवं सुरक्षा प्रदान की जा सके।वर्षा‑वृत्तियों की लंबी प्रवृत्ति के अनुसार, इस मौसम में उत्तर‑पूर्वी भारत में मौसमी मानसून की तीव्रता सामान्य से अधिक रही है। पिछले दो हफ्तों में बिहार‑झारखंड के कई हिस्सों में लगातार 60‑80 मिमी प्रतिदिन की भारी वर्षा दर्ज हुई, जिससे नदियों के जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर कई वैज्ञानिक अध्ययन इस क्षेत्र में वर्षा के पैटर्न को अस्थिर बताते हैं, जिससे बार‑बार बाढ़‑प्रवण स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। इन पृष्ठभूमि को समझना आवश्यक है, क्योंकि यह मौजूदा चेतावनी के गंभीरता को दर्शाता है।

बिहार में 3 सितंबर को प्रारंभिक बाढ़‑संकट के संकेत मिल चुके हैं। पटनागंज में जल‑स्तर 2.8 मीटर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के समान अवधि में 1.9 मीटर था। इसी समय, भागलपुर के कोयला‑खदान के पास जल‑स्तर में अचानक बढ़ोतरी ने कार्यस्थल की सुरक्षा को चुनौती दी। झारखंड के रांची में झारखंड नदियों के जल‑स्तर में 1.5 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कई सड़कों पर जलभराव की समस्या उत्पन्न हुई। इन आंकड़ों को देखते हुए, विभाग ने तत्काल चेतावनी जारी की और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने का निर्देश दिया।

विभाग ने 3‑5 सितंबर के दौरान बाढ़‑प्रवण क्षेत्रों में आपातकालीन राहत कार्यों को तेज करने का आदेश दिया। जिला प्रशासन ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अतिरिक्त चिकित्सा आपूर्ति उपलब्ध कराई और प्रभावित गांवों में अस्थायी आश्रय स्थल स्थापित करने की तैयारी की। जल निकासी के लिए विशेष टीमों को तैनात किया गया, जो नदियों के किनारे की बाढ़‑रोकथाम बंधों की मजबूती जाँचेंगी। साथ ही, स्थानीय पुलिस ने आपातकालीन निकास मार्गों को साफ़ करने और ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया।

झारखंड में भी समान उपाय लागू किए जा रहे हैं। रांची के जिलाध्यक्ष ने 48‑घंटे के भीतर सभी जल‑निकासी नालों की सफाई का आदेश दिया, जिससे जल‑स्तर में अचानक बढ़ोतरी को रोका जा सके। डोंगरिया जिले में वन विभाग ने जंगल‑आधारित बाढ़‑रोकथाम उपायों को सक्रिय किया, जिसमें जल‑भरे क्षेत्रों में पेड़‑रोपण एवं धारा‑निर्देशित संरचनाएं शामिल हैं। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं एवं बच्चों को विशेष रूप से सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

इन तैयारियों के बीच, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने प्रदेश स्तर पर एक समन्वित कार्रवाई योजना जारी की। उन्होंने कहा कि येलो अलर्ट के तहत, यदि जल‑स्तर में अत्यधिक वृद्धि होती है तो अलार्म को ऑरेंज में बदल दिया जाएगा, जिससे अतिरिक्त राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएंगे। NDMA ने केंद्रीय जल संसाधन विभाग से अतिरिक्त बाढ़‑नियंत्रण उपकरणों की मांग की है और राज्य सरकार को समय पर डेटा साझा करने का निर्देश दिया है।

प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी इस चेतावनी पर प्रतिक्रिया दी। बिहार सरकार के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने पहले ही बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य एवं आपूर्ति केंद्र स्थापित कर रखे हैं और जनता को सतर्क रहने की सलाह दी। झारखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि जल‑संकट के संभावित प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सभी विभागों ने आपातकालीन योजना तैयार की है। विपक्षी दलों ने सरकार की पूर्व चेतावनी और तैयारी की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में बाढ़‑प्रबंधन में और अधिक निवेश आवश्यक है।

वाणिज्यिक क्षेत्रों में भी इस मौसम के प्रभाव स्पष्ट हैं। कई छोटे व्यापारियों ने कहा कि बाजारों में आने वाले सामान की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो सकती है, जिससे स्थानीय कीमतों में अस्थायी वृद्धि हो सकती है। कृषि उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है; कई धान के खेत जल‑भराव के कारण प्रभावित हो सकते हैं, जिससे फसल कटाई में देरी हो सकती है। इस पर स्थानीय किसान संघों ने तत्काल सहायता एवं बीमा कवरेज की मांग की है।

 

Updated: September 3, 2026

– The yellow alert signals heightened flood risk, prompting coordinated emergency measures to protect lives and property.
– Prompt dissemination of the warning enables authorities and residents to implement preparedness actions, reducing potential water‑related disruptions.

जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट के प्रथम CEO नियुक्त, जबकि नेपाल में बाढ़ ने 1,200 मौतें और 590 विदेशियों को लापता कर

जितेंद्र मिश्रा, जो पहले ऑपरेशन सिंदूर में वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभालने वाले प्रमुख थे, को अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है।
इस निर्णय से ट्रस्ट के प्रशासनिक ढाँचे में पेशेवर प्रबंधन की उम्मीदें बढ़ी हैं। साथ ही, नेपाल में बाढ़ से हुई विनाशकारी तबाही ने 1,204 की मौत और 3,900 के अनुमानित लापता लोगों की संख्या दर्ज कराई, जिसमें 590 विदेशियों के भी हल नहीं मिल पाए हैं। दोनों घटनाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंताओं को उजागर कर रही हैं।जितेंद्र मिश्रा का करियर भारतीय वायुसेना में रिटायर्ड एयर मार्शल के रूप में शुरू हुआ, जहाँ उन्होंने कई उच्चस्तरीय ऑपरेशनों में नेतृत्व किया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी रणनीतिक सोच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने उन्हें वैश्विक सुरक्षा मंच पर प्रतिष्ठित बनाया। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, राम मंदिर ट्रस्ट ने उन्हें अपने CEO के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया, जिससे ट्रस्ट के विकास और प्रबंधन में नई ऊर्जा का संचार हो सके।

त्रिपुरारी, उत्तर प्रदेश में स्थित अयोध्या का राम मंदिर प्रोजेक्ट 2020 में शुरू हुआ, और अब तक कई चरणों में कार्यवाही हुई है। ट्रस्ट का गठन 2019 में हुआ, जिसमें विभिन्न सरकारी और धार्मिक निकाय शामिल हैं। CEO की भूमिका में न केवल दैनिक प्रशासनिक कार्य, बल्कि वित्तीय प्रबंधन, सार्वजनिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की देखरेख भी शामिल है। मिश्रा की नियुक्ति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नेपाल में अप्रैल के अंत में शुरू हुई बाढ़ ने देश के दक्षिणी भाग को तबाह कर दिया। जलवायु परिवर्तन के कारण तीव्र बरसात और तेज़ बहाव ने कई गांवों को पानी में डुबो दिया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने बताया कि बाढ़ की तीव्रता पिछले दशकों में सबसे अधिक रही। इस आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में संचार टूट गया, जिससे राहत कार्य में कठिनाइयाँ बढ़ गईं।

बाढ़ के बाद राहत कार्य में सरकारी एजेंसियों, स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों का सहयोग देखा गया। नेपाल सरकार ने आपातकालीन स्थिति घोषित कर, सेना और पुलिस को तैनात किया। हवाई अड्डों से हेलिकॉप्टरों द्वारा आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आपूर्ति पहुँचाने का प्रयास किया गया। परन्तु बाढ़ के कारण सड़कों का बंटवारा और लैंडलाइन टेलीफोन नेटवर्क टूटने से कार्य में देरी हुई।

विदेशी नागरिकों की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक रही। 34 देशों के कुल 590 विदेशियों की पहचान अभी भी नहीं हो पाई है, जिससे कई देशों की राजनैतिक मिशन ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष कार्रवाई की मांग की। नेपोलियन, यूएसए और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने अपने दूतावासों से मदद की अपील की। इस दौरान, नेपाल की विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की पुकार की।

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर राजनैतिक जगत की प्रतिक्रियाएँ मिश्रित रही हैं। कुछ नेता इस कदम को ट्रस्ट के प्रशासनिक मानकों को उन्नत करने के रूप में सराहते हैं, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जताई। भारतीय गृह मंत्रालय ने कहा कि ट्रस्ट का प्रबंधन पूरी तरह से भारतीय कानूनों के तहत होगा, और कोई भी विदेशी प्रभाव नहीं रहेगा। विपक्षी दल ने इस नियुक्ति को धर्म-राजनीति का मिश्रण करार दिया।

वित्तीय क्षेत्र से भी इस निर्णय पर ध्यान गया है। राम मंदिर ट्रस्ट को अब लगभग 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का प्रबंधन करना होगा, जिसमें निर्माण कार्य, पर्यटक सुविधाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि मिश्रा के प्रबंधन कौशल से इन निधियों की पारदर्शिता और कुशल उपयोग सुनिश्चित हो सकता है। साथ ही, उन्हें आयकर विभाग और अन्य नियामक संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर वित्तीय रिपोर्टिंग को सुदृढ़ करना होगा।

नेपाल में बाढ़ के सामाजिक प्रभाव गहरे हैं। हजारों परिवारों को अस्थायी शरणस्थल में रहना पड़ा, और कई ने अपना घर-धरोहर खो दिया। स्वास्थ्य विभाग ने जलजनित रोगों के प्रकोप की चेतावनी जारी की, जबकि शिक्षा विभाग ने प्रभावित विद्यालयों को पुनः खोलने की योजना बनाई। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की।

आर्थिक दृष्टि से नेपाल की बाढ़ ने कृषि, व्यापार और पर्यटन पर गंभीर दाग लगाया है। प्रमुख कृषि क्षेत्रों में धान और पिकों का नुकसान हुआ, जिससे किसानों की आय में गिरावट आई। व्यापारिक मार्गों के बंद होने से वस्तु आपूर्ति में बाधा आई, और कई छोटे उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ा। पर्यटन क्षेत्र, जो नेपाल की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बाढ़ के कारण बंद हो गया, जिससे विदेशी मुद्रा आय में गिरावट देखी गई।

 

Updated: September 3, 2026


Former Air Chief Marshal Jitendra Misra has been appointed CEO of the Ayodhya Ram Temple Trust, a move seen as bringing professional, military‑grade management to the temple’s multi‑billion‑rupee operations. Meanwhile, Nepal’s catastrophic floods have left over 1,200 dead and thousands missing, prompting a massive rescue effort and international calls for assistance.

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 36 दिन का मेगा ब्लॉक, 12 ट्रेनें रद्द; कई मोहाली-अंबाला से चलेंगी, 15 अक्टूबर तक यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर चल रहे पुनर्निर्माण एवं अपग्रेडेशन कार्य के कारण 10 सितंबर से 15 अक्टूबर तक कुल 36 दिन का पावर और ट्रैफ़िक ब्लॉक लागू किया गया है, जिससे 12 प्रमुख ट्रेनें पूरी तरह रद्द होंगी और 442 ट्रेनें विभिन्न स्तर पर परिवर्तित होंगी।
इस अवधि में यात्रियों को टिकट बुकिंग, प्लेटफ़ॉर्म परिवर्तन और नई रूटिंग के अनुसार अपनी यात्रा योजना पुनः व्यवस्थित करनी पड़ेगी, जिससे दैनिक आवागमन में उल्लेखनीय व्यवधान की संभावना बनी रहती है। रेलवे ने इस ब्लॉक को तीन चरणों में बाँटा है, जिससे कार्य की निरंतरता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके, परन्तु यात्रियों को अग्रिम सूचना के अभाव में असुविधा का सामना करना पड़ेगा।चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का मौजूदा बुनियादी ढाँचा 1970 के दशक में स्थापित था और अब बढ़ती यात्री संख्या तथा माल माल ढुलाई की माँग को पूरा करने में कई तकनीकी सीमाएँ दिखा रहा है। पिछले दो दशकों में इस स्टेशन पर कई छोटे-मोटे नवीनीकरण कार्य किए गए, परन्तु व्यापक पुनर्निर्माण की आवश्यकता लगातार उभरी है। रेल मंत्रालय ने 2022 में इस स्टेशन को ‘हाई‑ट्रैक’ के तहत वर्गीकृत किया और तत्काल अपग्रेडेशन की योजना बनाई, जिसमें सिग्नलिंग प्रणाली, पावर सप्लाई और प्लेटफ़ॉर्म विस्तार शामिल हैं।

ब्लॉक के तीन चरणों में क्रमशः सिग्नलिंग प्रणाली, प्लेटफ़ॉर्म पुनर्निर्माण और पावर ग्रिड अपग्रेडेशन पर कार्य किया जाएगा। पहले चरण में पुराने सिग्नलिंग उपकरण को डिजिटल सिग्नलिंग में बदलना शामिल है, जिससे ट्रेन संचालन की सटीकता और सुरक्षा में सुधार होगा। दूसरे चरण में प्लेटफ़ॉर्म की लंबाई बढ़ाकर दो अतिरिक्त प्लेटफ़ॉर्म जोड़ेंगे,

जिससे बड़ी संख्या में यात्रियों को संभालना आसान होगा। तृतीय चरण में स्टेशन के पावर सप्लाई को स्थिर एवं पर्यावरण‑मित्र बनाना प्रमुख होगा, जिसमें सौर ऊर्जा का उपयोग भी शामिल है।

इन प्रमुख घटनाक्रमों के दौरान 12 ट्रेनें, जिनमें प्रमुख एक्सप्रेस और सुपरफ़ास्ट सेवाएँ शामिल हैं, पूरी तरह रद्द की गई हैं। रद्दीकरण की सूची में ‘बेंगलुरु‑दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस’, ‘मुंबई‑चंडीगढ़ एशिया एक्सप्रेस’ और ‘हैदराबाद‑चंडीगढ़ सुपरफ़ास्ट’ जैसी प्रमुख कनेक्शन शामिल हैं। इन ट्रेनें अब 15 अक्टूबर तक सेवा नहीं देंगी, और रेलवे ने यात्रियों को वैकल्पिक रूट एवं बुकिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल और कॉल सेंटर का उपयोग करने की सलाह दी है।

अन्य कई ट्रेनें प्लेटफ़ॉर्म बदलाव, रूट परिवर्तन या समय सारिणी में परिवर्तन के तहत चलेंगी। उदाहरण के तौर पर, ‘दिल्ली‑अंबाला शताब्दी एक्सप्रेस’ अब मोहाली स्टेशन से शुरू होगी, और ‘अंबाला‑बेंगलुरु एशिया एक्सप्रेस’ के रूट में मध्यवर्ती स्टॉपों को हटाकर सीधे चलाने का निर्णय लिया गया है। इस प्रकार की परिवर्तनशीलता के कारण यात्रियों को टिकट बुकिंग के समय नई जानकारी के साथ पुनः जांच करनी होगी, ताकि किसी भी अनपेक्षित रद्दीकरण से बचा जा सके।

रेलवे ने इस ब्लॉक के दौरान यात्रियों को सुविधा प्रदान करने के लिए अतिरिक्त बैंकरोब और मोबाइल टिकट काउंटर स्थापित किए हैं। इन काउंटरों पर यात्रियों को रियल‑टाइम अपडेट, वैकल्पिक रूट सुझाव और रिफंड प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, यात्रियों को अस्थायी शटल सेवाएँ भी प्रदान की जाएँगी, जो मोहाली, अंबाला और चंडीगढ़ के बीच चलेंगी, जिससे छोटे दूरी के यात्रियों को कुछ हद तक राहत मिलेगी।

रायपुर के प्रमुख रेलवे अधिकारी, डॉ. राजीव सिंह, ने कहा कि “ब्लॉक की अवधि में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी, और कार्य की समयसीमा का कड़ाई से पालन किया जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य के पूरा होने पर स्टेशन की क्षमता में 30 % की वृद्धि होगी और ट्रैफ़िक जाम कम होगा। रेलवे के प्रवक्ता, सुश्री अनीता वर्मा ने कहा कि “रिपोर्टेड ट्रेन रद्दीकरण और रूट परिवर्तन का प्रभाव न्यूनतम करने के लिए हम यात्रियों को निरंतर अपडेट देते रहेंगे।” उन्होंने यात्रियों को आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन से नवीनतम जानकारी प्राप्त करने का आग्रह किया।

स्टेशनों के आसपास के स्थानीय व्यवसायियों ने भी इस ब्लॉक के प्रभाव को लेकर चिंता जताई। मोहाली और अंबाला के बाजारों में यात्रियों की कमी के कारण दैनिक बिक्री में 15 % तक की गिरावट की संभावना दर्शाई गई। होटल एवं भोजनालय संचालक, श्रीमान अजय पांडे, ने कहा कि “यदि ब्लॉक के दौरान यात्रियों का प्रवाह घटता है, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा।”


A 36‑day power and traffic block at Chandigarh station from 10 Sept to 15 Oct will see 12 major trains cancelled and 442 altered as the hub undergoes phased digital signalling, platform extension and green power upgrades. Passengers must re‑book and adapt to new routes, while temporary ticket counters and shuttle services aim to cushion the disruption.

पटना के निकट बरैयाको में पुनपुन नदी का जलस्तर डेंजर लेवल पार, सड़क धँसाव से ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन निकासी

पटना के निकट बरैयाको पंचायत में पुनपुन नदी का जलस्तर डेंजर लेवल पार कर गया, जिससे नदी किनारे स्थित कनेक्टिविटी सड़क में बड़े पैमाने पर धँसाव शुरू हो गया।
स्थानीय प्रशासन के आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले 48 घंटे में सड़क के कई हिस्से पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन निकासी और राहत कार्य तेज़ी से चल रहे हैं। इस आपदा ने न केवल बुनियादी ढाँचे को क्षतिग्रस्त किया, बल्कि नदी के निकट बसे कई घरों को भी जलप्रलय की आशंका में डाल दिया है।पुनपुन नदी, जो गंगा के उपनदी के रूप में बिहार के कई जिलों में जल आपूर्ति करती है, पिछले दो दशकों में मौसमी प्रवाह के कारण कभी‑कभी बाढ़ का कारण बनी है। लेकिन इस वर्ष जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि गंगा के जलस्तर में वृद्धि से सहायक नदियों का जलस्तर भी असामान्य रूप से बढ़ सकता है। 2023 में हुई बाढ़ में पुनपुन का जलस्तर पहले के रिकॉर्ड से 15 प्रतिशत अधिक रहा, और इस बार भी वही प्रवृत्ति जारी है।

सरकारी जल प्रबंधन विभाग के अनुसार, इस मौसम में गंगा पर अत्यधिक वर्षा और हिम पिघलने की प्रक्रिया ने गंगा जल की धारा को अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ाया। पुनपुन नदी के जलस्तर को मापने वाले सेंसर लगातार डेंजर लेवल से ऊपर संकेत दे रहे थे, परंतु स्थानीय स्तर पर पूर्व सूचना प्रणाली की कमी के कारण समय पर सतर्कता नहीं मिल पाई। इस कारण से कई गाँवों में जल स्तर में अचानक बढ़ोतरी को समझना और त्वरित उपाय करना कठिन हो गया।

पटना जिला प्रशासन ने तुरंत आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना लागू की, जिसमें स्थानीय पुलिस, जिला कस्टम्स और जल आपूर्ति विभाग ने मिलकर राहत कार्य शुरू किया। राहत शिविर स्थापित कर भोजन, पानी और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान की गई। साथ ही, सड़कों के धँसाव वाले हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद करके ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर निर्देशित किया गया। प्रशासन ने प्रभावित घरों को निकासी के लिए वैकल्पिक स्थल भी प्रदान किए और पुनःस्थापना के लिए आवश्यक संसाधनों का आकलन किया।

स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि पुनपुन नदी के आसपास की बुनियादी संरचनाओं की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना आवश्यक है। इस दिशा में, नदी किनारे के कंक्रीट बंधनों को सुदृढ़ करने, जल निकासी के लिए अतिरिक्त नहरें बनाने और सटीक जलस्तर मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

पुनपुन के किनारे स्थित बरैयाको ग्राम सभा के प्रमुख ने बताया कि इस वर्ष पहले भी जल स्तर में असामान्य वृद्धि देखी गई थी, परन्तु अब तक कोई ठोस उपाय नहीं किए गए थे। उन्होंने कहा कि सड़क के धँसाव ने गांव के दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है, क्योंकि यह सड़क गाँवों को बाजार, स्कूल और अस्पताल से जोड़ती थी। कई किसान अपने फसल के उत्पादन को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि बाढ़ के कारण खेतों में जलजमाव और मिट्टी का क्षरण बढ़ रहा है।

पटना जिले के पुलिस अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा कारणों से प्रभावित क्षेत्रों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और केवल आवश्यक कार्यकर्ता ही अनुमति प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय जनता को सतर्क रहने और आपातकालीन सूचना चैनलों के माध्यम से अपडेटेड जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

राज्य के जल संसाधन विभाग के आयुक्त ने बताया कि पुनपुन नदी के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए तत्काल उपाय के रूप में बाढ़ रोकथाम के लिए अतिरिक्त बैकवॉटर टैंक स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए नीतिगत बदलाव आवश्यक हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर, भारत सरकार ने इस घटना को देखते हुए जल प्रबंधन में सुधार के लिए विशेष फंड आवंटित करने की घोषणा की। वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस फंड का उपयोग बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे की मजबूती, जल निकासी प्रणाली और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाने में किया जाएगा। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के अध्ययन को तेज़ करने और स्थानीय स्तर पर सतर्कता प्रणाली स्थापित करने के लिए अनुसंधान संस्थानों को सहयोग दिया जाएगा।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की बाढ़ घटनाएँ ग्रामीण आर्थिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। बरियारको जैसे गाँवों में कृषि आय का बड़ा हिस्सा जल पर निर्भर करता है, और बाढ़ के कारण फसल नुकसान और बाजार तक पहुंच में बाधा उत्पन्न होती है। साथ ही, सड़क के धँसाव से परिवहन लागत में वृद्धि होगी, जिससे वस्तुओं की कीमतों में संभावित वृद्धि देखी जा सकती है।


Rising waters of the Punpun River breached danger level near Baraiyako, triggering massive road collapses and prompting emergency evacuations and relief camps across rural Patna district. Authorities have launched rescue operations, sealed the damaged stretch, and announced plans for stronger embankments, extra drainage channels and upgraded flood‑monitoring systems backed by central funding.

The flash collapse of Baraiyako’s connector road exposes how fragile rural supply chains are when climate‑driven floods outpace legacy warning systems, turning a single river’s surge into a multi‑sectoral bottleneck.

सुननी महल्लु फेडरेशन ने शेख अल‑हफिज़ के फ़ैसलों पर सार्वजनिक चेतावनी जारी की

सन् 2024 के मध्य में, सुन्नी महल्लु फेडरेशन (SMF) ने कान्थापुरम शेख अल-हफिज़ साहब के आलोचकों को सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी, जिसमें उन्होंने धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप को रोकने का अनुरोध किया।
यह बयान फेडरेशन की एक विशेष सभा में दिया गया, जहाँ उन्होंने कहा कि “धार्मिक विद्वान अपने अनुयायियों के लिए फ़ैसले जारी करते हैं और ऐसे फ़ैसले उन लोगों पर अनिवार्य नहीं होते जो उनका अनुसरण नहीं करते।” इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और कई समाचार पोर्टलों ने इस विषय पर विस्तृत चर्चा शुरू कर दी, जिससे इस विवाद का दायरा राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच गया।कान्थापुरम शेख अल-हफिज़, जो भारतीय सुन्नी समुदाय के एक प्रमुख धार्मिक नेता हैं, को पिछले कई वर्षों से विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने मत व्यक्त करने के लिए जाना जाता है। उनका प्रभाव विशेष रूप से कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के मुस्लमानों में गहरा है। 2022 में उन्होंने एक विवादास्पद फ़ैसला जारी किया, जिसमें उन्होंने कुछ धार्मिक अनुष्ठानों को प्रतिबंधित करने की बात कही थी, जिससे कई मुस्लिम संगठनों ने असहजता व्यक्त की। इस समय के बाद, शेख साहब के विरोधी समूहों ने उनकी वैधता और अधिकार को चुनौती देना शुरू किया, जिससे धार्मिक संवाद में तनाव बढ़ा।

पिछले दो साल में, SMF ने कई बार शेख अल-हफिज़ के फ़ैसलों को सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया और उन्हें मुस्लिम समुदाय में एकजुटता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। फेडरेशन का कहना है कि उनका उद्देश्य मुस्लिम जनसंख्या को एकजुट रखना और बाहरी या आंतरिक दबावों से बचाना है। इस दिशा में उन्होंने कई कार्यक्रम आयोजित किए, जहाँ शेख साहब के विचारों को प्रमुखता दी गई और उनके अनुयायियों को उनके फ़ैसलों की पवित्रता का अहसास कराया गया। इस पृष्ठभूमि ने आज के बयान को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।

फेडरेशन द्वारा जारी किए गए बयान में कई प्रमुख बिंदु उभरे। पहला, उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक फ़ैसले केवल उन लोगों के लिए हैं जो उस विद्वान के अनुयायी हैं, और इन्हें सभी मुस्लमानों पर थोपना अनुचित है। दूसरा, उन्होंने शेख साहब की आलोचनाओं को “धार्मिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप” के रूप में लेबल किया और इसे रोकने का आग्रह किया। तीसरा, उन्होंने यह कहा कि फेडरेशन सभी धार्मिक नेताओं के साथ संवाद करने के लिए तैयार है, लेकिन वह केवल सम्मानजनक और रचनात्मक चर्चा को स्वीकार करेगा। इस बयान में इन बिंदुओं को दोहराते हुए उन्होंने अपने अनुयायियों को शांति एवं एकता बनाए रखने का निर्देश भी दिया।

शेख अल-हफिज़ के समर्थकों ने इस बयान का स्वागत किया, यह कहते हुए कि यह फेडरेशन ने सही दिशा में कदम रखा है। कई स्थानीय मस्जिदों और धार्मिक स्कूलों के प्रमुखों ने इस बयान को “समुदाय में समरसता बनाए रखने की आवश्यकता” बताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक फ़ैसले व्यक्तिगत विश्वास का हिस्सा हैं और इन्हें सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता। इस बीच, शेख साहब के आलोचक, जो मुख्य रूप से युवा मुस्लमानों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिलकर बने हैं, ने इस बयान को “धार्मिक अधिकारों का दमन” कहकर नकारा।

आलोचक समूह ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय के व्यापक संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि धार्मिक नेताओं को सामाजिक परिवर्तन के लिये सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, न कि केवल पारंपरिक मान्यताओं को संरक्षित करना चाहिए। इस समूह के प्रमुख ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “धार्मिक अधिकारों को सामाजिक अधिकारों के साथ संतुलित करना आवश्यक है,” और शेख अल-हफिज़ के फ़ैसलों को “आधुनिक भारत के मूल्यों के विरुद्ध” मानते हुए उन्हें चुनौती देने का इरादा जताया। उन्होंने यह भी कहा कि फेडरेशन का बयान “धार्मिक बहुलता को रोकने की कोशिश” है।

कान्थापुरम शेख अल-हफिज़ ने फेडरेशन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को एकजुट करना और बाहरी राजनीतिक दबावों से बचाना है। उन्होंने अपने आधिकारिक बैनर पर लिखा कि “धर्म एक व्यक्तिगत चयन है, लेकिन जब वह समुदाय को प्रभावित करता है, तो जिम्मेदारी बढ़ती है।” शेख साहब ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी बाहरी समूह के साथ संवाद करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते कि वह संवाद सम्मानजनक ढंग से हो। उन्होंने फेडरेशन को “धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षक” कहा और उनके समर्थन को “समुदाय की शक्ति” के रूप में सराहा।

केंद्र सरकार के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने इस विवाद पर तटस्थ स्वर में टिप्पणी की, यह कहते हुए कि “भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहाँ सभी धार्मिक संस्थाओं को स्वतंत्रता और जिम्मेदारी दोनों मिलती है।” उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी धार्मिक फ़ैसले को कानून के दायरे में आना चाहिए और यदि कोई फ़ैसला सामाजिक व्यवस्था को बाधित करता है तो उसका उचित कानूनी परिक्षण होना चाहिए।


The Sunni Mahallu Federation warned critics of Sheikh Al‑Hafiz to stop meddling in religious matters, stressing that fatwas apply only to his followers and urging respectful dialogue. The statement sparked nationwide debate, with supporters praising its call for communal harmony while opponents accuse it of stifling progressive religious voices.

बिहार में बाढ़ का खतरा: नेपाल-हिमालय में बारिश से बढ़ा जोखिम, सरकार ने जारी किया हाई अलर्ट

बिहार में बाढ़ की खतरे की घंटी बज रही है। नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश और वहां जारी मौसम अलर्ट के बीच राज्य में बाढ़ का जोखिम काफी बढ़ गया है। बिहार सरकार ने इस संभावित आपदा को लेकर सबसे ऊच्च

स्तर पर अलर्ट जारी कर दिया है। राज्य के मंत्रिमंडल में जिम्मेदार सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि भौगोलिक संरचना के कारण नेपाल और हिमालय से आने वाले पानी का सीधा और गहरा असर बिहार के मैदानी इलाकों पर पड़ता है।

सरकारी अधिकारियों का मानना है

कि स्थिति गंभीर है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसलिए बाढ़ से निपटने के लिए जा रही तैयारियों की निगरानी मुख्यमंत्री के भ्रतिकोश स्तर पर की जा रही है। लगातार हो रही बैठकों में विभिन्न विभागों के प्रमुखों से रिपोर्ट मांगी जा

रही है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कैसे तैयार हैं। सरकार का पूरा मशीनरी अब आपात स्थिति के प्रबंधन के लिए सक्रिय हो चुकी है और हर घंटे की जानकारी पर नजर बनी हुई है।

बिहार की भौगोलिक स्थिति इसे प्राकृतिक आपदाओं के प्रति विशेष रूप

से संवेदनशील बनाती है। राज्य उत्तर से नेपाल और पश्चिम से भी हिमालयी श्रृंखला से घिरा हुआ है। जब इन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी वर्षा होती है तो नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है और यह पानी सीधा बिहार की नदियों में मिल

जाता है। इससे नदी तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा सामान्य स्थिति से कहीं ज्यादा तीव्र रूप से उत्पन्न होता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ता है।

नेपाल में भी मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। वहां की संवेदनशील नदियां और वादी क्षेत्र

तेजी से भर रहे हैं। बिहार के प्राकृतिक परिदृश्य के अनुसार, जब नेपाल में बारिश बढ़ती है तब गण्डकी, कोसी और अन्य नदियों का प्रवाह बढ़कर बिहार में प्रवेश कर जाता है। यह प्रक्रिया अक्सर अनियंत्रित होती है जिससे तलहटी क्षेत्रों में तबाही मच जाती

है। सरकार ने इस बाहरी पानी के आगमन के फैलाने का अनुमान लगाकर पूर्व में ही ऐलान कर दिया है कि स्थिति चुस्त होती जा रही है।

चारों ओर से आ रहे पानी की एक तस्वीर साफ है। नदियों का जलस्तर बेहद तेजी से बढ़ रहा

है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बारिश की यह रफ्तार ज्यादा देर तक जारी रही तो मैदानी इलाके जलमग्न हो सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने पहले ही राहत केंद्रों को सक्रिय कर दिया है। खाद्य सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं को लेकर कड़ी नजर रखी जा रही

है। स्थिति के अनुसार और अधिक सहायता प्राधिकरण को तैनात करने की संभावना है ताकि कोई तबाही ही नहीं हो सके।

केंद्र प्रशासन अब ऐसी स्थिति को जहर के घेरे में देख रहा है। मुख्यमंत्री स्तर पर लगातार हो रही समीक्षा बैठकों में इस बात पर

ज़ोर दिया गया है कि सभी विभागों को तत्पर होना चाहिए। अग्निशमन, पुलिस और मेडिकल टीमों को हर क्षेत्र में तैनात करने का आदेश दिया गया है। सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहले से ही संभावित खोई हुई उपज और रहन सहन के लिए जरूरत

की कमी को पूरा करने के लिए योजना बना रही है।

निर्णयों को तुरंत कार्यान्वित किए जाना चाहिए क्योंकि हर मिनट की कीमत होती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में जल संसाधनों की व्यवस्था बेहद नाजुक है। किसी भारतीय मंत्रिमंडल की ओर से जारी

किए जाने वाले खबरे बताते हैं कि सभी निगमों को बाढ़ रोधी डिक्सियों में सतर्कता बरतनी चाहिए। सीमावर्ती जिलों में बाढ़ से व्यापारिक गतिविधियां ठप हो सकती हैं। स्थानीय बंदरगाहों और चारों ओर से आने वाले पानी के प्रबंधन में खफी ज्यादा समय लग रहा

है।

स्थानीय प्रशासन ने भी शिकायतें साफ की हैं कि पर्याप्त संसाधन तैनात न होने की खफिए में भी सीमा पर पानी की पद्धति को नियंत्रित किए बिना मौत को रोकने में कल्याणकारी मुकाबले की जरूरत है। सीमावर्ती क्षेत्रों में तलाक भी होता है तब

Updated: September 2, 2026

Bihar’s geography makes it highly vulnerable to cross-border water inflow from Nepal.
Authorities have activated emergency management systems to mitigate potential flood damage.

चिराग पासवान को लिखित हत्या‑धमकी, गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा स्तर पर त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया।

चिराग पासवान को फिर एक बार जान‑लेवा धमकी प्राप्त हुई, जिसका खुलासा अज्ञात स्रोत से आए पत्र में किया गया है। केंद्रीय मंत्री एवं लखनऊ के सांसद को इस पत्र में स्पष्ट रूप से हत्या की बात लिखी गई थी, जिससे सुरक्षा तंत्र की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लगा है। पत्र को प्राप्त

करने के बाद तुरंत मामला गृह मंत्रालय को सौंपा गया, जहाँ इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की गंभीर चुनौती के रूप में वर्गीकृत किया गया। इस घटना ने न केवल केंद्र सरकार बल्कि बिहार की राज्य प्रशासन को भी अचेत कर दिया, क्योंकि पासवन बिहार के राजनैतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

चिराग पासवन का राजनीतिक सफ़र 1996 में शुरू हुआ, जब वे अपने पिता, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामनाथ पासवन के बाद पहली बार संसद के सदस्य बने। तब से वे विभिन्न केंद्रीय पदों पर रह चुके हैं, जिनमें युवा कल्याण और खेल मंत्रालय की अस्थायी देखरेख भी शामिल है। बिहार में उनका प्रभाव

खासकर सामाजिक और आर्थिक विकास के मुद्दों पर केंद्रित रहा है, जिससे उनका राजनीतिक दायरा स्थानीय स्तर पर भी विस्तारित है। पिछले साल के चुनावों में उनके निर्वाचन क्षेत्र में उन्होंने बड़ी जीत हासिल की, जिससे उनकी सुरक्षा व्यवस्था को विशेष महत्व मिला।

पिछले कुछ महीनों में पासवन को कई बार

धमकी भरे संदेशों और फ़ोन कॉलों की सूचना मिली थी, लेकिन उन सभी को तकनीकी रूप से ट्रेस नहीं किया जा सका। अक्टूबर में उन्हें एक अज्ञात ई‑मेल मिला, जिसमें भी उनकी जान लेने की धमकी दी गई थी; उस पर भी व्यापक जांच हुई थी, परन्तु ठोस प्रमाण नहीं मिल पाया।

इस बार के पत्र में लिखित रूप में हत्या की योजना का उल्लेख है, जिससे इसे पहले की डिजिटल धमकियों से अधिक गंभीर माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने पत्र को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा, ताकि हस्तलिखित शैली, कागज का प्रकार और शर्तों से संभावित स्रोत का पता लगाया जा

सके।

पत्र की प्राप्ति के बाद गृह मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग और विशेष सुरक्षा बलों को सौंप दिया गया है, और सभी संभावित स्रोतों की जांच की जाएगी। साथ ही, मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना एजेंसियों को

सूचित कर, अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावना भी तलाशने का निर्देश दिया। पत्र की सामग्री को देखते हुए, उन्होंने इस खतरे को तुरंत कार्यवाही योग्य माना और सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्त करने का संकेत दिया।

बिहार सरकार ने भी इस घटना पर आपातकालीन बैठक बुलाई। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा

कि यदि किसी भी प्रकार की हत्या का इरादा स्पष्ट है, तो उसे रोकना राज्य की प्राथमिकता होगी। उन्होंने पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया कि पासवन की व्यक्तिगत सुरक्षा को और सुदृढ़ किया जाए, साथ ही उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। इस बीच, बिहार पुलिस ने स्थानीय

स्तर पर सूचना संग्रह शुरू कर दिया, और संभावित स्थानीय स्रोतों को खोजने के लिए साक्षात्कार किए।

सीआरपीएफ (सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फोर्स) को भी इस मामले में विशेष टीम असाइन की गई है। उन्होंने बताया कि पत्र में प्रयुक्त भाषा और शैलियों के आधार पर संभावित दायरा निर्धारित करने का प्रयास

किया जा रहा है। फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, कागज की मोटाई और स्याही के विश्लेषण से यह संभावना बनी है कि पत्र किसी निजी व्यक्ति या समूह द्वारा तैयार किया गया हो सकता है, जो पासवन के राजनैतिक निर्णयों से असंतुष्ट हो।

पात्रों की प्रतिक्रिया के संदर्भ में, चिराग पासवन ने

सार्वजनिक रूप से कहा कि वे इस प्रकार की हिंसक धमकियों को अस्वीकार करते हैं और सभी कानूनी उपायों को अपनाने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उन्हें कोई भी व्यक्तिगत जोखिम नहीं उठाना चाहिए, और सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से इस

मुद्दे का समाधान निकाला जाएगा। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए, यह दावा किया कि ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई न करने से लोकतंत्र के मूल सिद्धांत कमजोर होते हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने पत्रकारों से कहा कि सरकार ने पहले ही

सभी आवश्यक कदम उठाए हैं और सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के उच्चतम स्तर पर लाया गया है और इसे राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखकर न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाया जाएगा। विपक्षी नेता

Updated: September 2, 2026

– The threat to a senior minister underscores the need to evaluate and strengthen existing security mechanisms for public officials.
– It prompts coordination between central and state agencies, illustrating how inter‑governmental response procedures are activated in high‑risk cases.

बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा: गंगा, गंडक और कोसी उफान पर, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर; सरकार अलर्ट

पटना, 2 सितंबर 2026: बिहार में लगातार बारिश और पड़ोसी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण बाढ़ का खतरा एक बार फिर गंभीर होता जा रहा है। राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है और कई निगरानी केंद्रों पर पानी चेतावनी या खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। गंगा, गंडक, कोसी, घाघरा, सोन और बूढ़ी गंडक जैसी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बिहार जल संसाधन विभाग के रीयल-टाइम आंकड़ों के अनुसार, 2 सितंबर की सुबह कई नदी निगरानी केंद्रों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर था। वहीं मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राज्य में बारिश की गतिविधि जारी रहने का अनुमान जताया है।

पटना में गंगा खतरे के निशान से ऊपर

राजधानी पटना में गंगा का जलस्तर चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है। बिहार के आधिकारिक बाढ़ निगरानी आंकड़ों के मुताबिक दीघाघाट और गांधीघाट समेत पटना क्षेत्र के कई निगरानी केंद्रों पर गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। दीघाघाट पर 2 सितंबर की सुबह जलस्तर 50.80 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 50.45 मीटर है। गांधीघाट पर भी जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर था और वहां पानी बढ़ने की प्रवृत्ति दर्ज की गई। हाथीदह में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।

कोसी और गंडक ने बढ़ाई चिंता

उत्तर बिहार में कोसी और गंडक नदी का बढ़ता जलस्तर भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। सुपौल के वीरपुर और बसुआ क्षेत्र में कोसी का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया है। वहीं खगड़िया के बलतारा में कोसी नदी भी खतरे के निशान से ऊपर है। गंडक नदी के हाजीपुर और लालगंज निगरानी केंद्रों पर भी जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया है। पश्चिमी चंपारण के कुकुराहा में गंडक चेतावनी स्तर से ऊपर है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि उत्तर और मध्य बिहार के कई नदी तटीय क्षेत्रों में सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।

घाघरा और सोन नदी भी दबाव में

सिर्फ गंगा, गंडक और कोसी ही नहीं, बल्कि घाघरा और सोन नदी के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है। सीवान के गंगपुर सिसवन और दरौली में घाघरा चेतावनी स्तर से ऊपर है। वहीं पटना जिले के मनेर में सोन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है और इसमें बढ़ोतरी की प्रवृत्ति भी दिखाई गई है। इसका असर नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में जलभराव के रूप में सामने आ सकता है। स्थानीय प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी रखने की आवश्यकता है।

खगड़िया, भागलपुर और वैशाली पर विशेष नजर

नदियों के बढ़ते जलस्तर का प्रभाव कई जिलों में दिखाई दे रहा है। खगड़िया में कोसी और बूढ़ी गंडक दोनों के जलस्तर ने चिंता बढ़ाई है। भागलपुर में गंगा के कई निगरानी केंद्रों पर पानी खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर दर्ज किया गया है। वैशाली में गंडक और गंगा दोनों से जुड़े क्षेत्रों पर निगरानी जरूरी हो गई है। सरकारी आंकड़ों में खगड़िया के बलतारा और बूढ़ी गंडक के खगड़िया स्टेशन पर पानी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया। भागलपुर के अजमाबाद में गंगा का जलस्तर भी खतरे के स्तर से ऊपर था।

मौसम विभाग ने जारी किया बारिश का अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 2 सितंबर को बिहार के लिए बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके बाद 3 और 4 सितंबर को भी राज्य में भारी बारिश की चेतावनी है। साथ ही गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के 2 सितंबर के बिहार चेतावनी बुलेटिन के अनुसार 5 और 6 सितंबर को भी आंधी-तूफान और बिजली गिरने से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है।

नेपाल और पड़ोसी क्षेत्रों की बारिश का भी असर

बिहार की बाढ़ की स्थिति को समझने में नेपाल और पड़ोसी राज्यों में हो रही बारिश महत्वपूर्ण है। उत्तर बिहार की कई प्रमुख नदियों का जलग्रहण क्षेत्र नेपाल में है। नेपाल में लगातार बारिश होने या वहां से नदियों में अतिरिक्त पानी आने पर बिहार के सीमावर्ती जिलों में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। हाल के दिनों में नेपाल में भारी बारिश और फ्लैश फ्लड की घटनाओं के बाद बिहार में भी गंडक समेत प्रमुख नदियों को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। नदी का पानी केवल स्थानीय बारिश से नहीं, बल्कि पूरे नदी बेसिन में होने वाली वर्षा और जलप्रवाह से प्रभावित होता है।

बैराजों से छोड़ा गया पानी भी महत्वपूर्ण

बिहार में बाढ़ की मौजूदा स्थिति में विभिन्न बैराजों से आने वाले पानी की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार वाल्मीकिनगर, कोसी के वीरपुर और सोन के इंद्रपुरी बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा है। कैमूर में लगातार बारिश और दुर्गावती जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन ने फ्लैश फ्लड को लेकर चेतावनी जारी की है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति

बिहार में मौजूदा हालात का असर केवल नदी किनारे के कुछ गांवों तक सीमित नहीं है। आकाशवाणी के अनुसार भागलपुर, औरंगाबाद, बेगूसराय, बक्सर, भोजपुर, मुंगेर, पटना, खगड़िया, वैशाली और जहानाबाद के बाद कैमूर में भी बाढ़ जैसी स्थिति सामने आई है। इससे ग्रामीण सड़कें, संपर्क मार्ग, खेत और निचले इलाकों में रहने वाली आबादी प्रभावित हो सकती है। प्रशासन की प्राथमिकता ऐसे क्षेत्रों में आवागमन बनाए रखने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।

बिहार में बाढ़ निगरानी व्यवस्था सक्रिय

राज्य का जल संसाधन विभाग नदियों के जलस्तर की नियमित निगरानी कर रहा है। विभाग की केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था के तहत अलग-अलग नदी स्टेशनों से जलस्तर का डेटा जुटाया जा रहा है। इन आंकड़ों में खतरे का स्तर, चेतावनी स्तर, वर्तमान जलस्तर और पिछले 24 घंटे में हुए बदलाव की जानकारी शामिल होती है। इससे प्रशासन को यह समझने में मदद मिलती है कि किस नदी में पानी बढ़ रहा है और किन इलाकों में तत्काल सावधानी की जरूरत है।

शहरी इलाकों में भी जलजमाव की चुनौती

लगातार बारिश और नदियों के ऊंचे जलस्तर के कारण शहरी क्षेत्रों में भी जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। पटना जैसे शहरों में नदी का बढ़ा हुआ जलस्तर और भारी बारिश एक साथ होने पर निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसी स्थिति में नगर निकायों के लिए पंपिंग व्यवस्था, नालों की सफाई और संवेदनशील इलाकों में त्वरित जल निकासी महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी सड़क और पुल-पुलियों की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है।

किसानों के सामने फसल नुकसान का खतरा

बाढ़ का सबसे सीधा असर किसानों पर पड़ता है। खेतों में पानी भरने से धान, मक्का, सब्जियों और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। लंबे समय तक जलजमाव रहने पर मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। नदी किनारे बसे किसानों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि अचानक पानी बढ़ने पर खेतों से कृषि उपकरण और पशुधन सुरक्षित स्थान पर ले जाने का समय कम मिल सकता है। ऐसे में प्रशासन को राहत और कृषि क्षति के आकलन की तैयारी भी साथ-साथ करनी होगी।

लोगों के लिए जरूरी सावधानियां

बाढ़ प्रभावित या संभावित बाढ़ वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी और तेज बहाव वाले पानी से दूर रहने की सलाह दी जाती है। बच्चों को नदी, नहर, तालाब और जलमग्न सड़कों के पास नहीं जाने देना चाहिए। बिजली के खंभों और खुले तारों से विशेष सावधानी बरतनी जरूरी है। लोगों को अपने मोबाइल फोन चार्ज रखने, जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने और प्रशासन की ओर से जारी चेतावनी पर नजर रखने की सलाह है। यदि प्रशासन सुरक्षित स्थान पर जाने का निर्देश देता है तो इसे टालना नहीं चाहिए।

अफवाहों से बचें, आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें

बाढ़ जैसी आपदा के समय अफवाहें स्थिति को और गंभीर बना सकती हैं। सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो या गलत जलस्तर की जानकारी तेजी से फैल सकती है। इसलिए लोगों को केवल जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, जल संसाधन विभाग और मौसम विभाग की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए। मौसम की ताजा चेतावनी के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण है।

अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण

मौसम विभाग की ओर से 2 सितंबर को बहुत भारी बारिश और अगले दो दिनों में भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए आने वाले 48 घंटे बिहार के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। यदि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है और नदियों में अतिरिक्त पानी आता है, तो पहले से ऊंचे जलस्तर वाले इलाकों में दबाव और बढ़ सकता है। दूसरी ओर, यदि बारिश की तीव्रता कम होती है तो कुछ स्थानों पर जलस्तर स्थिर या नीचे भी आ सकता है। इसलिए किसी एक समय के आंकड़े के बजाय जलस्तर की लगातार बदलती प्रवृत्ति पर नजर रखना जरूरी है।

बिहार के लिए बड़ी चुनौती: चेतावनी से आगे बढ़कर स्थायी समाधान

मौजूदा बाढ़ स्थिति एक बार फिर यह सवाल सामने लाती है कि क्या केवल अलर्ट और राहत व्यवस्था से बिहार की बाढ़ समस्या का स्थायी समाधान संभव है। राज्य की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि नेपाल और हिमालयी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश का प्रभाव उत्तर बिहार की नदियों पर तेजी से पड़ता है। इसलिए लंबे समय के समाधान के लिए नदी बेसिन स्तर पर योजना, तटबंधों का रखरखाव, पर्याप्त जल निकासी, जलाशयों का बेहतर प्रबंधन और पड़ोसी क्षेत्रों से समय पर जल संबंधी आंकड़ों का आदान-प्रदान जरूरी है।

बिहार इस समय एक बार फिर बढ़ते नदी जलस्तर और बारिश की दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। गंगा, गंडक, कोसी, घाघरा और सोन समेत कई नदियों के अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर पानी चेतावनी या खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। पटना, खगड़िया, भागलपुर, वैशाली, सीवान, सुपौल और अन्य जिलों में स्थिति पर विशेष नजर रखने की जरूरत है।

मौसम विभाग की 2 से 4 सितंबर तक की बारिश संबंधी चेतावनी को देखते हुए प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए सतर्क रहना जरूरी है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है—घबराएं नहीं, लेकिन लापरवाही भी न करें। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन की चेतावनियों पर लगातार नजर रखें और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर जाएं।

शिक्षक दिवस पर बिहार के 38 शिक्षकों को मिलेगा राजकीय सम्मान, हर जिले से एक शिक्षक चयनित; देखें पूरी सूची

पटना: बिहार में शिक्षक दिवस इस बार सरकारी स्कूलों के उन शिक्षकों के लिए खास होने जा रहा है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। राज्य सरकार ने 38 जिलों से एक-एक शिक्षक का चयन राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया है। चयनित शिक्षकों को 5 सितंबर, राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर पटना में आयोजित विशेष समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस सूची में महिला और पुरुष दोनों शिक्षक शामिल हैं। कुल 38 चयनित शिक्षकों में 17 महिला शिक्षिकाएं हैं। सरकार का कहना है कि यह सम्मान सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और विद्यार्थियों के हित में बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों के योगदान को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

5 सितंबर को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में होगा समारोह

राजकीय शिक्षक पुरस्कार समारोह का आयोजन 5 सितंबर को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में किया जाएगा। इसी अवसर पर चयनित शिक्षकों को राज्य स्तरीय सम्मान प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा चयनित शिक्षकों को पुरस्कार दिए जाने की जानकारी सामने आई है। शिक्षक दिवस के अवसर पर होने वाले इस समारोह में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहेंगे। सरकार की ओर से ऐसे शिक्षकों को सम्मानित करने का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करना है।

सभी 38 जिलों से एक-एक शिक्षक का चयन

इस बार पुरस्कार की सबसे खास बात यह है कि बिहार के सभी 38 जिलों से एक-एक शिक्षक को चुना गया है। इससे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में शिक्षा के लिए काम कर रहे शिक्षकों को राज्य स्तरीय पहचान मिलने का अवसर मिलेगा। चयनित शिक्षकों में प्रधान शिक्षक, प्रधान शिक्षिका, प्रभारी प्रधानाध्यापक और विशिष्ट शिक्षक शामिल हैं। ग्रामीण और दूरदराज के विद्यालयों में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने और स्कूलों की व्यवस्था में योगदान देने वाले शिक्षकों को भी इस सूची में जगह दी गई है।

पटना से अपराजिता कुमारी को सम्मान

पटना जिले से पालीगंज के प्राथमिक विद्यालय वलीपुर हरिजनटोली की प्रधान शिक्षिका अपराजिता कुमारी का चयन राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया है। उनके चयन से पटना जिले के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के बीच भी उत्साह है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी सूची में उनका नाम शामिल किया गया है। इसी तरह गया जिले से डोभी के मध्य विद्यालय बहेराडीह की प्रभारी प्रधानाध्यापिका गुड्डी कुमारी को चुना गया है। नालंदा जिले से अस्थावां के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बहादुरपुर के विशिष्ट शिक्षक सौरभ कुमार पुरस्कार प्राप्त करेंगे।

चंपारण के दो शिक्षकों को भी मिलेगा सम्मान

चंपारण क्षेत्र से भी दो शिक्षकों का चयन किया गया है। पूर्वी चंपारण जिले से आदापुर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय शेखवा टोला के प्रधान शिक्षक मो. नुरूल होदा को पुरस्कार के लिए चुना गया है। वहीं पश्चिमी चंपारण जिले से मझौलिया के राजकीय उर्दू मध्य विद्यालय गढ़वा भोगाड़ी के प्रधानाध्यापक दुर्योधन बैठा का चयन हुआ है। सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में शिक्षकों की भूमिका को देखते हुए इन नामों का चयन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीमांचल के तीन जिलों से भी चयन

सीमांचल क्षेत्र के पूर्णिया, अररिया और किशनगंज जिलों से भी शिक्षकों को राजकीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। पूर्णिया से अजय कुमार पंडित, अररिया से बेबी अर्चना और किशनगंज से शहजाद अनवर को सम्मानित किया जाएगा। इन शिक्षकों के चयन से सीमांचल के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को भी राज्य स्तर पर पहचान मिली है।

भागलपुर, मुजफ्फरपुर और दरभंगा के शिक्षक भी शामिल

भागलपुर जिले से कहलगांव स्थित नव प्राथमिक विद्यालय हरिजन टोला कलगीगंज की विशिष्ट शिक्षिका निवेदिता कुमारी का चयन किया गया है। मुजफ्फरपुर से मुरौल के प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर उर्दू के प्रधान शिक्षक केशव कुमार को पुरस्कार मिलेगा। वहीं दरभंगा जिले से बिरौल के प्राथमिक विद्यालय फकिरना के प्रधान शिक्षक कुमार प्रशांत का नाम सूची में शामिल है। इन शिक्षकों के चयन से कोसी-मिथिला और उत्तर बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े शिक्षकों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ है।

17 महिला शिक्षिकाओं को भी मिलेगा राजकीय सम्मान

इस वर्ष चयनित 38 शिक्षकों में 17 महिला शिक्षिकाएं हैं। यह संख्या सरकारी स्कूलों में महिला शिक्षकों की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है। चयनित महिला शिक्षकों में भोजपुर की प्रमिला कुमारी, गोपालगंज की पुनीता कुमारी, सारण की चंचला तिवारी, खगड़िया की मधु कुमारी और सीतामढ़ी की शमा परवीन शामिल हैं। महिला शिक्षिकाओं का चयन शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और विद्यालयों में उनकी भूमिका को राज्य स्तर पर सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दक्षिण बिहार से कई शिक्षकों का चयन

दक्षिण बिहार के कई जिलों से भी शिक्षकों को राजकीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। औरंगाबाद से राजकुमार प्रसाद गुप्ता, बांका से उमाकांत कुमार, रोहतास से कमलेश कुमार, बक्सर से मो. इमाम अली अंसारी, कैमूर से सुमित कुमार और जमुई से किसलय प्रसाद का नाम चयनित शिक्षकों की सूची में है। इसके अलावा जहानाबाद से पवन कुमार, अरवल से पंकज रंजन और लखीसराय से राज कुमार को भी सम्मानित किया जाएगा।

कोसी और मिथिला क्षेत्र से भी शिक्षक सम्मानित होंगे

कोसी और मिथिला क्षेत्र के कई जिलों से भी शिक्षकों का चयन हुआ है। सहरसा से पुनीता कुमारी, मधुबनी से उषा कुमारी, मधेपुरा से डॉ. नीलू रानी और सुपौल से नरेश कुमार निराला को राजकीय शिक्षक पुरस्कार मिलेगा। वहीं समस्तीपुर से राकेश कुमार, बेगूसराय से प्रभा कुमारी और नवादा से निकिता भारती का भी चयन किया गया है। इससे स्पष्ट है कि पुरस्कार के लिए पूरे राज्य से शिक्षकों का प्रतिनिधित्व रखा गया है।

सरकारी स्कूलों में बेहतर काम करने वालों को प्राथमिकता

राजकीय शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य केवल शिक्षकों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि सरकारी विद्यालयों में बेहतर कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना भी है। विद्यार्थियों की पढ़ाई में सुधार, स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों में योगदान, नवाचार, अनुशासन और विद्यालय के समग्र विकास जैसे पहलुओं को शिक्षक सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे पुरस्कार शिक्षकों को अपने काम में नए प्रयोग करने और विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के योगदान को सलाम

शिक्षक दिवस भारत में हर वर्ष 5 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन देश के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन शिक्षकों के योगदान को सम्मानित किया जाता है। बिहार में राजकीय शिक्षक पुरस्कार समारोह भी इसी भावना को आगे बढ़ाता है। सरकारी स्कूलों में लाखों बच्चों को शिक्षा देने वाले शिक्षकों के योगदान को सार्वजनिक मंच पर सम्मान मिलना उनके लिए गौरव का विषय है।

पूरी सूची पर एक नजर

बिहार के 38 जिलों से चयनित शिक्षकों में अलग-अलग क्षेत्रों और विद्यालयों का प्रतिनिधित्व देखने को मिलता है। सूची में पटना की अपराजिता कुमारी, गया की गुड्डी कुमारी, नालंदा के सौरभ कुमार, पूर्वी चंपारण के मो. नुरूल होदा, पश्चिमी चंपारण के दुर्योधन बैठा, पूर्णिया के अजय कुमार पंडित, अररिया की बेबी अर्चना और किशनगंज के शहजाद अनवर शामिल हैं। भागलपुर की निवेदिता कुमारी, मुजफ्फरपुर के केशव कुमार और दरभंगा के कुमार प्रशांत भी सम्मानित होंगे। दक्षिण बिहार, कोसी और मिथिला के कई शिक्षक भी इस सूची में शामिल हैं।

सम्मान से बढ़ेगा शिक्षकों का मनोबल

राजकीय शिक्षक पुरस्कार को शिक्षकों के मनोबल से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सरकारी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के सामने कई तरह की चुनौतियां होती हैं। इसके बावजूद जो शिक्षक अपने विद्यालय और विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त प्रयास करते हैं, उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने से अन्य शिक्षकों को भी प्रेरणा मिल सकती है। खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार उनके काम की पहचान को मजबूत करता है।

5 सितंबर को मिलेगा इंतजार का जवाब

अब चयनित 38 शिक्षक 5 सितंबर को पटना में होने वाले समारोह में सम्मान प्राप्त करेंगे। शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित यह कार्यक्रम बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में योगदान देने वाले शिक्षकों के लिए यादगार अवसर होगा। सभी जिलों से एक-एक शिक्षक के चयन से राज्य के हर हिस्से को इस सम्मान में प्रतिनिधित्व मिला है। 17 महिला शिक्षिकाओं की मौजूदगी भी इस बार की सूची की खास विशेषता है। सरकार की ओर से दिए जाने वाले इस सम्मान से उम्मीद है कि बिहार के सरकारी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा और नवाचार को और बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय रेल ने पितृपक्ष 2026 के लिए दिल्ली, पटना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल से विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की

पितृपक्ष मेला के दौरान गया में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेल ने विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश की पटना, और पश्चिम बंगाल के हावड़ा से सीधे गया जंक्शन के लिए अतिरिक्त कोच वाले ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
यह कदम श्रद्धालुओं को तर्पण‑तिथि के करीब टिकेट बुकिंग की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे यात्रा में भीड़भाड़ और असुविधा कम होगी। इस सप्ताह के अंत तक आरक्षित सीटों की उपलब्धता को लेकर कई यात्रियों ने अग्रिम बुकिंग शुरू कर दी है, जिससे रेल विभाग पर भीड़ नियंत्रण की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।पितृपक्ष 2026 के मुख्य तिथि 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक निर्धारित हैं, जबकि पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को मनाई जाएगी। इस अवधि में देश भर के हिन्दुओं के लिए पितरों को अर्पित करने हेतु गया के शरदाब्धी तीर्थस्थल पर विशेष आकर्षण रहेगा।

इस वर्ष विशेष रूप से काव्य, संगीत और धार्मिक व्याख्यानों के साथ एक विस्तृत कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिससे तीर्थयात्रियों को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव मिल सके। पितृपक्ष के इस धार्मिक उत्सव की पृष्ठभूमि में भारतीय परम्परा के अनुसार पितरों का सम्मान और उनके कर्मों का फल प्राप्त करने की मान्यता निहित है।

पिछले कुछ वर्षों में पितृपक्ष के दौरान गया में श्रद्धालुओं की संख्या में निरन्तर वृद्धि देखी गई है। 2022 में 2.5 लाख और 2025 में 3.1 लाख यात्रियों ने इस तीर्थस्थल का दौरा किया, जिससे स्थानीय बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा। इस प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय ने 2026 के पितृपक्ष के लिए अतिरिक्त विशेष ट्रेनों को जोड़ने का निर्णय लिया। इन ट्रेनों में एसी, एसी टियर 2 और सामान्य वर्ग के कोच उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे विभिन्न आर्थिक वर्ग के यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित हो सके।

दिल्ली से गया तक चलने वाली विशेष ट्रेन ‘श्री गंगा एक्सप्रेस’ ने 23 सितंबर से बुकिंग शुरू कर दी है। यह ट्रेन रोज़ाना दो बार चलती है, प्रत्येक यात्रा में 12 घंटे का समय लेती है। टिकट बुकिंग के लिए यात्रियों को कम से कम 30 दिन पहले आरक्षण करना अनिवार्य किया गया है, जिससे सीटों का उचित वितरण हो सके। पटना से भी प्रतिदिन दो ट्रेनों का संचालन होगा, जहाँ पहले कोच में एसी स्लीपर और दूसरे में सामान्य कोच रखे गए हैं। हावड़ा से यात्रा करने वालों को विशेष रूप से बुकिंग में 25 दिन का अग्रिम समय दिया गया है, जिससे ट्रेनों की लोडिंग को संतुलित किया जा सके।

इन सभी ट्रेनों की किराये में विशेष छूट और रियायतें लागू की गई हैं। वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन और छात्र वर्ग के लिए 30 प्रतिशत तक की रियायत दी गई है। साथ ही, पितृपक्ष के दौरान एक बार यात्रा करने वाले यात्रियों को ‘तीर्थ‑पैकेज’ के अंतर्गत मुफ्त भोजन वंदना वंदन सेवा प्रदान की जाएगी। इन सुविधाओं का उद्देश्य यात्रियों को आर्थिक बोझ कम करते हुए धार्मिक कर्तव्य पूरा करने में सहायता करना है। रेलवे ने बताया कि इस विशेष योजना से यात्रा की सुरक्षा एवं समयबद्धता में सुधार होगा।

रेल विभाग ने पितृपक्ष के दौरान ट्रेनों में सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने का आदेश जारी किया है। प्रत्येक ट्रेन में सुरक्षा गश्त दल की संख्या बढ़ा कर दो गुना कर दी गई है, और यात्रियों को मास्क व सैनिटाइज़र प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही, स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त टिकट काउंटर और सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे। इस दिशा में स्थानीय पुलिस और रेलवे पुलिस ने भी सहयोग का आश्वासन दिया है, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और सहज यात्रा मिल सके।

गया के स्थानीय प्रशासन ने भी पितृपक्ष के लिए विशेष व्यवस्था की घोषणा की है। शहर में आवागमन को सुगम बनाने हेतु अतिरिक्त बसें और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्य रथ स्टेशन पर भीड़ कम करने के लिए टाइम‑टेबिल को पुनः व्यवस्थित किया गया है। साथ ही, पवित्र स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए सफाई दलों को लगातार तैनात किया गया है। ये सभी कदम यात्रियों के समग्र अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।

धार्मिक संगठनों ने पितृपक्ष के दौरान शांति एवं सद्भाव बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपने कर्तव्य के निर्वहन में अनुशासन बनाए रखें और सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार से बचें। कई धार्मिक समूहों ने विशेष रूप से युवा वर्ग को सामाजिक दूरी बनाए रखने तथा स्वच्छता के नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। इन संगठनों ने यह भी कहा कि पितृपक्ष के समय में सामाजिक सहयोग और परोपकार के कार्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया: BCI के सभी नीतिगत निर्णयों में अटॉर्नी जनरल एवं सॉलिसिटर जनरल की लिखित राय होगी अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के कार्यक्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया कि BCI के सभी नीतिगत निर्णयों में भारत के अटॉर्नी जनरल तथा सॉलिसिटर जनरल की भागीदारी अनिवार्य होगी।
यह आदेश राष्ट्रीय स्तर पर वकीलों के पेशेवर नियमन एवं न्यायिक उत्तरदायित्व के परिप्रेक्ष्य में एक नई दिशा स्थापित करता है। न्यायालय ने इस निर्णय को “सभी हितधारकों के विश्वास को सुदृढ़ करने” हेतु आवश्यक बताया, जिससे कानूनी प्रणाली में पारदर्शिता व जवाबदेही की अपेक्षा को पुनः स्थापित किया जा सके।BCI, जो कि भारत में वकीलों के पेशेवर नियमन, शैक्षणिक मानकों तथा आचार संहिता का मुख्य प्राधिकारी है, पहले भी विभिन्न नीतिगत बदलावों के लिए स्वतंत्र निर्णय लेने की प्रवृत्ति रखता रहा है। परन्तु अटॉर्नी जनरल एवं सॉलिसिटर जनरल दोनों की भागीदारी का प्रस्ताव, इस संस्था के निर्णय प्रक्रिया में एक नया नियंत्रण तंत्र जोड़ता है।

अतीत में कई बार BCI द्वारा जारी किए गए नियमों को लेकर वकीलों के समूहों और न्यायालय के बीच टकराव देखे गए हैं, जिनमें अक्सर यह प्रश्न उठाया गया था कि क्या ये नियम न्यायिक स्वतंत्रता तथा वैधता के मानदण्डों पर खरे उतरते हैं।

न्यायिक इतिहास में, अटॉर्नी जनरल तथा सॉलिसिटर जनरल को विभिन्न सरकारी नीतियों के कानूनी परामर्शदाता के रूप में नियुक्त किया गया है। उनका मुख्य कर्तव्य है कि वह सरकारी निर्णयों की विधिसम्मतता की जांच कर, आवश्यकतानुसार संशोधन का सुझाव दें। इस संदर्भ में, सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इस बात की ओर संकेत करता है कि BCI के नीतिगत फैसले भी समान स्तर पर कानूनी जांच के अधीन हों, जिससे उन्हें सार्वजनिक हित के अनुरूप माना जा सके। यह कदम उन स्थितियों को रोकने के लिए उठाया गया है जहाँ नियमावली में संभावित असंगतियों को बिना पर्याप्त कानूनी मूल्यांकन के लागू किया जाता था।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहरा ने इस आदेश को पारदर्शिता के सिद्धांत पर आधारित कहा। उन्होंने कहा कि “वकीलों के पेशे को नियंत्रित करने वाली संस्था को भी अपने कार्यों में विधिक परामर्श की आवश्यकता है, ताकि वह न्याय के मूलभूत सिद्धांतों के साथ सामंजस्य स्थापित कर सके”। इस टिप्पणी के बाद अदालत ने एक विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया, जिसमें कहा गया कि BCI को प्रत्येक नीतिगत प्रस्ताव पर अटॉर्नी जनरल तथा सॉलिसिटर जनरल की लिखित राय प्राप्त करनी होगी, और यदि आवश्यक हो तो उनकी सिफ़ारिशों के आधार पर पुनरावलोकन करना होगा।

BCI ने इस आदेश के बाद तत्कालिक कार्यवाही शुरू कर दी। अध्यक्ष ने बताया कि आगामी दो सप्ताह में एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें दोनों कानूनी अधिकारियों को आमंत्रित किया जाएगा। इस मंच पर नीतिगत प्रस्तावों की चर्चा, संभावित कानूनी चुनौतियों का विश्लेषण तथा सुधारात्मक उपायों का सुझाव दिया जाएगा। BCI ने यह भी कहा कि वह अपने मौजूदा नीतियों को पुनः मूल्यांकन करेगा और आवश्यकतानुसार संशोधन करेगा, जिससे न्यायिक निगरानी के साथ संरेखित रह सके।

अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने इस आदेश को “देश के न्यायिक प्रणाली में एक सकारात्मक कदम” के रूप में स्वागत किया। उन्होंने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य यह है कि सभी नियामक संस्थाएँ अपने कार्यों में कानूनी मानकों का पालन करें, जिससे नागरिकों का विश्वास बना रहे। सॉलिसिटर जनरल ने भी कहा कि यह निर्णय “संपूर्ण विधिक ढाँचे को सुदृढ़ करेगा” और “वकीलों के पेशे में नैतिकता व गुणवत्ता के मानकों को और भी कड़ा करेगा”। दोनों कार्यालयों ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में वे विस्तृत कानूनी राय प्रदान करेंगे, जिससे BCI को स्पष्ट दिशा मिलेगी।

वकील संघों ने इस आदेश पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ व्यक्त कीं। राष्ट्रीय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि अटॉर्नी जनरल एवं सॉलिसिटर जनरल की भागीदारी “ज्यादा नियामक नियंत्रण” का संकेत दे सकती है, जिससे BCI की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। वहीं, कई युवा वकीलों ने इस कदम को “पेशे की प्रतिष्ठा को बढ़ाने” के रूप में सराहा, क्योंकि इससे नियमावली में संभावित त्रुटियों की शीघ्र पहचान संभव होगी। इस बीच, कई वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि यह प्रक्रिया “निर्णय की गति को धीमा कर सकती है” परन्तु “लंबी अवधि में न्यायिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करेगी”।

आर्थिक प्रभाव की बात करें तो, BCI के नियमन में बदलाव का सीधा असर वकीलों के प्रशिक्षण, लाइसेंस नवीनीकरण और अदालतों में केस प्रबंधन पर पड़ सकता है।

Updated: September 2, 2026


मुख्य न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सभी नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की अनिवार्य सहमति पर जोर दिया है, ताकि कानूनी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इस निर्णय से जुड़े कानूनी परामर्श के नए दायरे के बाद वकील समुदाय में प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कुछ अधिवक्ताओं ने इसे संस्थागत निगरानी और निर्णय प्रक्रिया में स्पष्टता बढ़ाने वाला कदम बताया है, जबकि अन्य का मानना है कि इससे बार काउंसिल की स्वायत्तता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में इस व्यवस्था के व्यावहारिक प्रभाव और विभिन्न संस्थाओं के अधिकारों के संतुलन पर आगे कानूनी बहस जारी रहने की संभावना है।

Insight: The Supreme Court’s directive ensures the Attorney General and Solicitor General review all BCI policy decisions, adding a formal legal check. This step aims to align the council’s regulations with national legal standards and enhance transparency.

सम्राट कैबिनेट ने छात्र क्रेडिट कार्ड योजना और झांसी में 700 एकड़ औद्योगिक पार्क के निर्माण को मंजूरी दी

सम्राट कैबिनेट की बैठक में 27 एजेंडे पर चर्चा हुई, जिसमें छात्र क्रेडिट कार्ड योजना और 700 एकड़ के नये औद्योगिक क्षेत्र की घोषणा प्रमुख रही। यह बैठक, जो राजधानी के राजभवन में दोपहर को आयोजित हुई, प्रधानमंत्री के अध्यक्षत्व में चली और विभिन्न मंत्रालयों के प्रमुखों ने उपस्थितियों को अपने‑अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किए।
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मुख्य निर्णयों में छात्र वर्ग को विशेष ऋण सुविधा प्रदान करने की योजना, तथा उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में 700 एकड़ के औद्योगिक पार्क के निर्माण को मंजूरी देना शामिल है। इन दो पहलुओं को आर्थिक विकास और सामाजिक उत्थान के प्रमुख स्तंभ माना गया।पिछले तीन वर्षों में भारतीय सरकार ने युवा वर्ग की वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, परन्तु छात्र क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधा अभी तक व्यापक नहीं थी। इस योजना के तहत, मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के अंतर्गत पढ़ने वाले छात्रों को सीमित सीमा तक बिना वार्षिक शुल्क के क्रेडिट कार्ड जारी किया जाएगा, जिससे उन्हें शैक्षणिक सामग्री, ऑनलाइन पाठ्यक्रम और आवश्यक उपकरण खरीदने में आसानी होगी। इस पहल का वित्त पोषण राष्ट्रीय शिक्षा निधि के अतिरिक्त बजट से किया जाएगा, जिसका अनुमानित खर्च वार्षिक 1,200 करोड़ रुपये है।औद्योगिक क्षेत्र की बात करें तो, 700 एकड़ की जमीन को विकसित करके 1,500 से अधिक इकाइयों के लिए आधार तैयार करने की योजना है। इस परियोजना में विशेष आर्थिक ज़ोन (SEZ) के रूप में मान्यता मिलने की संभावना है, जिससे विदेशी निवेशकों को टैक्‍स में रियायतें और आसान नियामक प्रक्रिया प्रदान की जाएगी। योजना के अनुसार, इस क्षेत्र में उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली और लॉजिस्टिक हब की स्थापना होगी, जिससे अगले पाँच वर्षों में लगभग 20 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

बैठक में शिक्षा मंत्रालय ने छात्र क्रेडिट कार्ड के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। इस योजना के तहत, छात्रों को आयु सीमा 18 से 25 वर्ष, और वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक न होने पर पात्र माना जाएगा। साथ ही, कार्डधारकों को न्यूनतम ब्याज दर 7.5% और छूट दर पर लेन‑देन की सुविधा दी जाएगी। योजना के लिए एक स्वतंत्र निरीक्षण निकाय का गठन किया जाएगा, जो दुरुपयोग की रोकथाम और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।

औद्योगिक योजना के पक्ष में, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बताया कि इस 700 एकड़ के क्षेत्र को विकसित करने में लगभग 4,500 करोड़ रुपये का निजी निवेश आकर्षित किया गया है। इसमें प्रमुख भारतीय और विदेशी कंपनियों ने पहले से ही टेंडर में भाग लिया है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में विशेष जल आपूर्ति, निरंतर बिजली ग्रिड और हाई‑स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था की जाएगी, जिससे उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

वित्त मंत्रालय ने इन दो प्रस्तावों के आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण प्रस्तुत किया। छात्र क्रेडिट कार्ड से अनुमानित रूप से अगले दो वर्षों में 12,000 करोड़ रुपये का उपभोग खर्च बढ़ेगा, जबकि औद्योगिक क्षेत्र के विकास से जीडीपी में 0.3% का अतिरिक्त योगदान हो सकता है। इस संदर्भ में, राजस्व संग्रह में भी वृद्धि होगी, क्योंकि नई आय उत्पन्न करने वाली इकाइयों से करों का प्रवाह बढ़ेगा।

बाजार विशेषज्ञों ने इन निर्णयों को सकारात्मक माना। मुंबई के प्रमुख स्टॉक ब्रोकरेज के विश्लेषक ने कहा कि छात्र वर्ग के खर्च में वृद्धि से रिटेल सेक्टर और ई‑कॉमर्स कंपनियों के शेयरों में हल्की उछाल देखी जा सकती है। इसी प्रकार, औद्योगिक क्षेत्र के विकास से धातु, रसायन और मशीनरी कंपनियों के स्टॉक्स में दीर्घकालिक लाभ की संभावना है।

विद्यार्थी संघों ने इस पहल पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कुछ संघों ने कहा कि क्रेडिट कार्ड सुविधा छात्रों को वित्तीय दबाव से बचाएगी, जबकि कुछ ने अत्यधिक ऋण जोखिम को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने पारदर्शी शर्तें और ऋण पर पुनर्भुगतान के लिए उचित अवधि की मांग की।

औद्योगिक परियोजना पर स्थानीय किसानों और सामाजिक संगठनों ने अपने आपत्तियों को दर्ज किया। उन्होंने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में उचित पुनर्वास और क्षतिपूर्ति की मांग की, और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन की कड़ाई से जांच का आग्रह किया। इसके जवाब में, राज्य सरकार ने कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा और सतत विकास के मानकों को लागू किया जाएगा।

राजनीतिक पक्ष में, विपक्षी दलों ने इस बजट को ‘आर्थिक असमानता को बढ़ावा देने वाला’ कहा और सामाजिक न्याय की कमी की ओर इशारा किया। हालांकि, प्रमुख विपक्षी नेता ने कहा कि अगर वास्तविक रूप में छात्र वर्ग को लाभ पहुंचाया गया तो यह एक सकारात्मक कदम है, परन्तु कार्यान्वयन में पारदर्शिता और निगरानी आवश्यक है।

आर्थिक दृष्टिकोण से, इस दोहरी पहल से वित्तीय समावेशन और उत्पादन क्षमता दोनों में वृद्धि की उम्मीद है।

The student credit‑card scheme could act as a catalyst that nudges a generation of young Indians from passive savings into active consumption, giving retail and ed‑tech firms a fresh demand surge just as the new industrial hub is set to flood the market with manufactured goods.

बिहार के आरुष कुमार का चीन में जलवा, रस्सी कूद प्रतियोगिता में जीते चार पदक

चीन के ऐतिहासिक शहर शिआन में आयोजित सार्वभौमिक रस्सी कूद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिमरी प्रखंड के डुमरी गाँव के निवासी आरुष कुमार ने चार पदक अर्जित कर भारत एवं बिहार के नाम को रोशन किया है।
इस प्रतियोगिता में विश्व के विभिन्न देशों के प्रतिभागियों के बीच आरुष ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। उनकी इस उपलब्धि को लेकर डुमरी और सिमरी के लोगों में बड़ी खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई है।इवेंट का आयोजन 2024 के जून माह में शिआन के ओलंपिक स्टेडियम परिसर में हुआ था। यह प्रतियोगिता 1993 से हर चार वर्ष में आयोजित होती रही है, जिसमें रस्सी कूद के विभिन्न आयु और वजन वर्गों में विश्व के श्रेष्ठ खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। भारत के प्रतिनिधि दल ने 12 सदस्यों को भेजा, जिनमें से आरुष ने पुरुष वर्ग के हल्के वज़न में भाग लिया।

पहले ही सत्र में आरुष ने अपने रिले प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया। उनकी शुरुआत से पहले ही श्रोताओं की तालियाँ गूँज उठीं। 10 मीटर के अंतराल पर कूदते हुए उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल के लिए अग्रसर किया।

दूसरे दिन के प्रतियोगिता में आरुष ने फ्रीस्टाइल रूटीन में भी भाग लिया। उन्होंने जटिल संयोजन के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस रूटीन में उन्होंने 7.5 अंकों के उच्चतम स्कोर के साथ सिल्वर पदक जीता।

तीसरे दिन के फाइनल में आरुष ने टीम इवेंट में हिस्सा लिया। भारतीय टीम ने अन्य तीन देशों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से 12 सेकंड के भीतर 24 कूद पूरी की। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय रिकॉर्ड से बेहतर था और टीम को गोल्ड मेडल दिलाया।

विपरीत पक्षों ने इस जीत को कैसे स्वीकार किया, इसका स्पष्ट चित्र स्पष्ट है। शिआन के खेल मंत्री ने भारतीय टीम के प्रति प्रशंसा व्यक्त करते हुए कहा, “भारत की युवा शक्ति ने विश्व मंच पर उत्कृष्टता दिखाई है।”

बिहार सरकार के खेल मंत्री ने भी इस अवसर पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए आरुष की प्रशंसा की और उन्हें ‘राजा’ का उपाधि दी। उन्होंने कहा, “यह जीत हमारे क्षेत्र के लिए गर्व का कारण है।”

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, चीनी मीडिया ने भी इस इवेंट का विस्तृत कवरेज किया। उन्होंने आरुष को “भविष्य की आशा” के रूप में सराहा और बताया कि उनकी तकनीक और मानसिक दृढ़ता विश्व स्तर पर प्रशंसनीय है।

राजनीतिक दृष्टि से इस जीत से भारत-चीन के खेल संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। दोनों देशों के युवा खेल प्रशंसकों के बीच यह कार्यक्रम सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक सशक्त माध्यम बनता है।

आर्थिक प्रभाव के संदर्भ में, शिआन शहर के पर्यटन विभाग ने रिपोर्ट की कि इस प्रतियोगिता के दौरान शहर में 50,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए। इससे स्थानीय व्यापार और होटल उद्योग को एक उछाल मिला।

सामाजिक स्तर पर, डुमरी और सिमरी प्रखंड की युवा पीढ़ी में खेल के प्रति उत्साह और प्रेरणा बढ़ी है। स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों ने अब रस्सी कूद के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं।

विषयगत विशेषज्ञ, प्रोफेसर राजेश कुमार, ने कहा, “आरुष की सफलता एक व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक, भारतीय खेल संस्कृति में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार करती है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह सफलता अन्य राज्यों में खेल कार्यक्रमों के लिए एक मिसाल बनेगी।

आगे क्या हो सकता है, इस पर विचार करते हुए यह स्पष्ट है कि भारत सरकार अपने खेल विकास कार्यक्रमों को तेज करेगी। शैक्षिक संस्थानों में रस्सी कूद को एक प्रमुख अनुशासन के रूप में शामिल किया जा सकता है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम की उपस्थिति बढ़ाई जाएगी, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की छवि और प्रतिष्ठा में सुधार होगा।

Updated: September 2, 2026

Arush’s triple‑medal burst from a remote Bihar village signals that world‑class talent can sprout far beyond traditional sports hubs, urging policymakers to seed grassroots gymnastics nationwide.

 

कटिहार के विज्ञान‑गणित शिक्षक विप्लव कुमार को राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया, 5 सितंबर को पटना में पुरस्कार समारोह आयोजित

कटिहार जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित मध्य विद्यालय अरिहाना, आजमनगर के विज्ञान‑गणित शिक्षक विप्लव कुमार को बिहार सरकार द्वारा आयोजित राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2026 में चयनित किया गया है।
यह चयन 5 सितंबर को पटना में आयोजित होने वाले शिक्षक दिवस समारोह में किया जाएगा, जहाँ राज्य के कुल 38 शिक्षकों को समान पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। चयन प्रक्रिया, मानदंड तथा पुरस्कार के स्वरूप को लेकर प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने विस्तृत निर्देश जारी किए हैं, जो इस वर्ष के शैक्षिक सम्मान कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बन गया है।विप्लव कुमार ने पिछले पाँच वर्षों में अपने कक्षा में खेल‑खेल में गणित और विज्ञान के प्रयोगात्मक अध्यापन को अपनाया है। उनके द्वारा तैयार किए गए ‘इंटरएक्टिव लर्निंग मॉड्यूल’ में स्थानीय खेल, पारम्परिक खेल और सरल प्रयोगशाला सेट‑अप को मिलाकर छात्रों की जिज्ञासा को प्रज्वलित किया गया है। इस पद्धति से छात्रों की गणितीय अवधारणाओं की समझ में 30 % तक की वृद्धि देखी गई है, जैसा कि विद्यालय के वार्षिक रिपोर्ट में दर्ज है। इसके अलावा, उन्होंने ग्रामीण छात्रों के लिए मोबाइल लैब का प्रावधान किया, जिससे विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों को वास्तविक प्रयोग के माध्यम से सिखाया गया।

विप्लव कुमार की पृष्ठभूमि को समझना उनके शैक्षणिक नवाचार को समझने में मदद करता है। उन्होंने अपने स्नातकोत्तर अध्ययन में शैक्षिक प्रौद्योगिकी पर विशेष ध्यान दिया और राष्ट्रीय शैक्षिक परिषद के कई कार्यशालाओं में भाग लिया। 2018 में उन्होंने ‘ग्राम्य विज्ञान शिक्षा’ नामक परियोजना शुरू की, जिसका लक्ष्य ग्रामीण स्कूलों में विज्ञान शिक्षा की गुणवत्ता को सुधरना था। इस परियोजना के अंतर्गत उन्होंने स्थानीय कारीगरों और किसानों को विज्ञान शिक्षा में सम्मिलित किया, जिससे शैक्षिक सामग्री स्थानीय संदर्भ में अधिक प्रासंगिक बनी। इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया और कई शैक्षिक सम्मेलनों में प्रस्तुत किया गया।

विप्लव कुमार की नवाचारी विधियों को राज्य सरकार ने भी मान्यता दी है। बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशक कुमार निशांत विवेक ने पत्र में कहा कि ‘विप्लव जी ने ग्रामीण शैक्षिक चुनौतियों को समझते हुए अभिनव समाधान प्रस्तुत किए हैं, जो न केवल छात्र प्रदर्शन को बढ़ाते हैं बल्कि शैक्षणिक प्रणाली में स्थायी परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं’। इस संदर्भ में, निदेशालय ने बताया कि राजकीय शिक्षक पुरस्कार के चयन में शैक्षणिक प्रभाव, नवाचार, तथा सामाजिक योगदान को प्रमुख मानदंड माना गया है। चयन समिति में शैक्षिक विशेषज्ञ, अनुभवी शिक्षक एवं सरकारी अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने विस्तृत मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद इस निर्णय पर पहुँचे।

राजकीय शिक्षक पुरस्कार की प्रक्रिया पिछले दो दशकों में कई बार संशोधित हुई है। 2015 के बाद से, पुरस्कार केवल शैक्षिक उपलब्धियों पर नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और नवाचार पर भी आधारित है। इस वर्ष के चयन में कुल 1,250 नामित शिक्षकों में से केवल 38 को सम्मानित किया गया, जिससे चयन की कठोरता स्पष्ट होती है। पुरस्कार में मानद उपाधि के साथ-साथ 2 लाख रुपए की नकद राशि तथा एक सम्मान पत्र भी प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, विजेताओं को राज्य के विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर भी मिलता है, जिससे उनका अनुभव विस्तृत होता है।

विप्लव कुमार के साथ ही कई अन्य शिक्षकों को भी सम्मानित किया जाएगा, जिनमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं। उनके बीच दो महिला शिक्षिकाएँ भी हैं, जिन्होंने विशेष रूप से बालिका शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। इस विविध समूह का चयन यह दर्शाता है कि सरकार शैक्षिक उत्कृष्टता के साथ समानता और समावेशन को भी महत्व देती है। पुरस्कार समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के प्रमुख भाषण की उम्मीद है, जिससे शैक्षिक सुधार के महत्व पर प्रकाश डाला जाएगा।

विप्लव कुमार ने पुरस्कार के चयन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम नहीं, बल्कि पूरे विद्यालय टीम और स्थानीय समुदाय के सहयोग का फल है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण छात्रों के मन में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पैदा करने के लिए उन्हें निरंतर समर्थन की आवश्यकता होती है, और यह पुरस्कार उन समर्थन की मान्यता है। विद्यालय प्राचार्य ने भी कहा कि इस सम्मान से विद्यालय में शैक्षणिक उत्साह बढ़ेगा और अन्य शिक्षकों को भी नवाचार की दिशा में प्रेरित करेगा। इस बीच, कई अभिभावकों ने सामाजिक मीडिया पर धन्यवाद संदेश लिखे, जिसमें उन्होंने अपने बच्चों की शैक्षिक प्रगति को सराहा।

राजनीतिक पक्षों ने भी इस घटना पर टिप्पणी की। राज्य के शिक्षा मंत्री ने कहा कि ‘ऐसे शिक्षक हमारे भविष्य के निर्माण में मुख्य स्तम्भ हैं और सरकार उनके नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएँ चला रही है’। विपक्षी दल के नेता ने इस अवसर पर शैक्षिक बजट में वृद्धि की मांग की, यह तर्क देते हुए कि ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षिक संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए अधिक निवेश आवश्यक है।

MP Weather Kal Ka Mausam: कल 2 सितंबर को फिर बरसेंगे बादल, कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट; जानें अपने जिले का हाल

मध्य प्रदेश के कई जिलों में 2 सितंबर को भी लगातार बूँदाबाँदी की संभावना बनी हुई है, मौसम विभाग ने पूर्वी भाग में “भारी से बहुत भारी” बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि तेज़ हवाओं के साथ गरज‑चमक, बिजली गिरने की स्थितियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे कृषि, परिवहन तथा दैनिक जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। इस चेतावनी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन कार्यवाही की तैयारी कर रखी है और नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पिछले दो हफ़्तों से मध्य प्रदेश में लगातार मौसमी असमानताएँ दर्ज की हैं। मानसून की सामान्य प्रगति के विपरीत, इस वर्ष जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से मौसमी पैटर्न में अनियमितता देखी जा रही है। विशेषकर पूर्वी मध्य प्रदेश में सतत वर्षा, बाढ़ की स्थितियों को उत्पन्न कर रही है, जबकि पश्चिमी भाग में सूखे की स्थिति बनी हुई है। इस असंतुलन ने राज्य के जल संसाधन प्रबंधन पर नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।

पिछले महीने में प्रदेश के बरेली, सौन, और जासवंत जिले में रिकॉर्ड स्तर की वर्षा हुई थी, जिससे कई गाँवों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हुआ था। इस बार भी वही जिलों को मुख्य जोखिम क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है। मौसम विभाग ने कहा है कि आगामी 24 घंटे में 50 मिमी से अधिक वर्षा के आँकड़े कई क्षेत्रों में दर्ज हो सकते हैं, जिससे निचले इलाकों में जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है।

रायपुर में स्थित राज्य मौसम विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि इस वर्ष की मानसून अवधि में कुल मिलाकर औसत से 30 प्रति शत अधिक वर्षा हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान मौसमी मॉडल के अनुसार, अगले दो दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश के अधिकांश भाग में 70‑100 मिमी तक की तीव्र वर्षा की संभावना बनी हुई है। इस अनुमान के आधार पर, जिले के स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन प्रबंधन योजनाओं को सक्रिय कर दिया है।

वित्त मंत्रालय ने इस बार की बारिश को लेकर विशेष राहत पैकेज की घोषणा नहीं की, पर राज्य सरकार ने पहले ही प्रभावित जिलों के लिए अस्थायी शरणस्थली और आपूर्ति केंद्र स्थापित कर रखे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिया है और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों को तैनात किया गया है।

कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ती वर्षा ने कृषि क्षेत्र को दोधारी तलवार बना दिया है। किसान संघों ने बताया कि अत्यधिक जलसेवन के कारण धान तथा गन्ने की फसलें जलजली से प्रभावित हो सकती हैं, जबकि कुछ हिस्सों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। इस बीच, जलस्रोत प्रबंधन विभाग ने जलभंडारण को संतुलित करने हेतु बाँधों में जलस्तर को नियंत्रित करने की योजना तैयार की है।

वाणिज्य व उद्योग विभाग ने बताया कि लगातार बारिश से परिवहन नेटवर्क में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। रेलवे, सड़कों और हवाई अड्डों पर जलभराव के कारण देरी और रद्दीकरण की संभावना बढ़ी है। उद्योग परिसरों में उत्पादन रुकने की आशंका भी है, विशेषकर उन इकाइयों में जहाँ जलरोधी उपाय नहीं किए गये हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने इस वर्ष के मानसून में बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि राज्य के स्थानीय अधिकारी को सतत निगरानी रखनी चाहिए और समय‑समय पर बाढ़‑रोकथाम के उपाय लागू करने चाहिए। साथ ही, उन्होंने नागरिकों को आपातकालीन नंबरों पर कॉल करने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है।

राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी इस मौसमी आपदा पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दर्ज की है। कांग्रेस के राज्य प्रमुख ने कहा कि सरकार को बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत कार्य और पुनरुद्धार योजना बनानी चाहिए। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मौसमी आपदाओं के लिए पूर्व तैयारी और जल संसाधन प्रबंधन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

वित्तीय विशेषज्ञों ने बताया कि बारिश के कारण कृषि उत्पादन में संभावित हानि से राज्य की वार्षिक कृषि आय में कमी आ सकती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। इसके साथ ही, जलस

Updated: September 1, 2026

The relentless downpours in eastern Madhya Pradesh are turning the monsoon into a paradox: while farmers finally get the water they’ve begged for, the same deluge threatens to drown crops and cripple supply chains, exposing the state’s fragile water‑allocation balance. If climate‑driven swings keep widening

मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार से बिहार में युवा नेताओं को नई केंद्रीय पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

बिहार के राजनैतिक दर्पण में एक नया हलचल देखी जा रही है; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सितंबर 2026 की शुरुआत में कैबिनेट विस्तार की संभावना जताई है, जिससे केंद्र में कई मंत्रालयों में पुनर्संरचना हो सकती है। इस फैसले का असर सीधे बिहार के प्रतिनिधियों की पदस्थापना पर पड़ेगा, क्योंकि पिछले दो सालों में राज्य

से कई अनुभवी नेता केंद्र में अपने पदों से हटते देखे गए हैं। नई नियुक्तियों की उम्मीदें अब उभरते चेहरे, विशेषकर पचास वर्ष से कम आयु वाले, को भी अवसर प्रदान कर सकती हैं। इस संदर्भ में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भाजपा के युवा सशक्तिकरण के कार्यक्रम के साथ तालमेल रखता है।

बिहार के

राजनीतिक परिदृश्य को समझने के लिए पिछले पाँच वर्षों की पृष्ठभूमि को देखना आवश्यक है। 2021 में राज्य के दो प्रमुख मंत्री—विजय प्रताप सिंह और जॉनी सिंह—को केंद्र में मंत्रिपद से हटाने के बाद, राज्य में शेष वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया गया था। उसी समय, बिहार के सामाजिक-आर्थिक आंकड़े में निरंतर सुधार

दिखा, जिससे केंद्र में राज्य की आवाज़ को अधिक महत्व मिला। परन्तु, 2024 में राज्य के कुछ वरिष्ठ मंत्री—जिनमें दो बार चुनाव जीत चुके हैं—को पार्टी के अंदर असंतोष के कारण हटाया गया, जिससे पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन में बदलाव आया।

इन पृष्ठभूमि घटनाओं के बाद, इस साल के शुरुआती महीनों में भाजपा के मुख्यालय में कैबिनेट

विस्तार की संभावनाओं पर कई बार चर्चा हुई। पार्टी के वरिष्ठ कार्यकारियों ने कहा कि नई नियुक्तियों में युवा शक्ति को शामिल करना जरूरी है, ताकि भविष्य के चुनावों में नई ऊर्जा का संचार हो सके। वहीं, बिहार की मुख्य राजनीतिक इकाई—बिहार विधान सभा—में कई वरिष्ठ नेता, जो अब तक केंद्र में पद धारण कर रहे थे,

अपनी सीटों की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखे। इस संदर्भ में, कई बार संवाददाता ने इन वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ की, परन्तु वे स्पष्ट उत्तर देने से बचते रहे।

कैबिनेट विस्तार की घोषणा के बाद, बिहार से दो प्रमुख नेता—राजनैतिक विश्लेषक अजय कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन—के कार्यालयों में तुरंत भीड़भाड़ हो गई। अजय कुमार ने

कहा कि यदि नई नियुक्तियों में उनकी भागीदारी नहीं होगी, तो यह संकेत देगा कि पार्टी युवा वर्ग को प्राथमिकता दे रही है, जबकि वरिष्ठ अनुभव को नजरअंदाज किया जा रहा है। राजीव रंजन ने अपने बयान में कहा कि उनके लिए यह समय परिवर्तन का है, और उन्होंने केंद्र में अपने काम को सफलतापूर्वक समाप्त करने

का आश्वासन दिया। दोनों ने यह भी कहा कि वे अपने समर्थकों को आश्वस्त करेंगे कि चाहे कोई भी परिवर्तन हो, राज्य की विकासशील नीति में कोई बाधा नहीं आएगी।

इन बयानों के बाद, बिहार के प्रमुख जिलों—पटना, दरभंगा और मुजफरपुर—में विभिन्न राजनीतिक सभाओं का आयोजन किया गया। इन सभाओं में स्थानीय कांग्रेस, राष्‍ट्रीय जनता दल (राव) और

अन्य गठबंधनों ने भी इस विकास को लेकर अपनी-अपनी राय व्यक्त की। कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने कहा कि कैबिनेट विस्तार से राज्य में युवा नेताओं को अवसर मिलना चाहिए, परन्तु यह भी आवश्यक है कि अनुभवी नेताओं को भी सम्मानित किया जाए। राव के नेता ने कहा कि यह निर्णय राज्य के विकास में नई ऊर्जा का

संचार कर सकता है, परन्तु इसे सावधानीपूर्वक लागू किया जाना चाहिए। इन विभिन्न प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट हुआ कि सभी पक्ष इस प्रक्रिया को गहन रूप से देख रहे हैं।

बिहार के व्यापारियों और उद्योगपतियों ने भी इस विकास पर अपने मत रखे। पटना के एक प्रमुख व्यापार संघ के अध्यक्ष ने कहा कि यदि नई नियुक्तियों में

युवा उद्यमियों को मंत्रालय मिलते हैं, तो राज्य के आर्थिक वातावरण में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि नई नीति के तहत छोटे और मध्यम उद्यमों को समर्थन मिल सकता है, जिससे रोजगार सृजन में वृद्धि होगी। वहीं, मुजफरपुर के एक कृषि संस्थान के प्रमुख ने कहा कि कृषि मंत्रालय में युवा प्रतिनिधि होने से

किसानों की समस्याओं को शीघ्रता से हल किया जा सकता है। इस प्रकार, आर्थिक वर्ग की प्रतिक्रियाएँ भी इस परिवर्तन की दिशा को प्रभावित कर रही हैं।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के अलावा, सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। बिहार के कई महिला संगठनों ने कहा कि यदि नई कैबिनेट में महिला मंत्री

शामिल नहीं किए जाते, तो यह सरकार की सामाजिक समानता के प्रति प्रतिबद्धता को कम आँक सकता है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि युवा महिलाओं को भी प्रमुख पदों पर नियुक्त किया जाए। इसी प्रकार, युवाओं के प्रतिनिधि समूहों ने कहा कि यह अवसर नई पीढ़ी के नेताओं को मंच प्रदान करेगा, जिससे राजनीति में नवाचार

और पारदर्शिता बढ़ेगी। इस प्रकार, सामाजिक दायरे में भी इस निर्णय को लेकर उत्सुकता स्पष्ट है।

राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस विकास को व्यापक दृष्टिकोण से देखा है। दिल्ली स्थित एक प्रमुख नीति अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ विश्लेषक ने बताया कि कैबिनेट विस्तार का उद्देश्य केवल पार्टी की आंतरिक संतुलन नहीं

Updated: September 1, 2026


PM Modi’s cabinet reshuffle in September 2026 is expected to prioritize fresh faces under 50 from Bihar, shifting power away from sidelined veterans. While opposition parties and civil groups urge inclusive representation, business leaders welcome the potential for renewed economic focus on SMEs and agriculture.

पटना-हटिया एक्सप्रेस हादसे का शिकार होने से बची, खुसरूपुर में पटरी में आयी दरार, 40 मिनट थमा ट्रेनों का परिचालन

पटना‑हटिया एक्सप्रेस की यात्रा के दौरान खुसरूपुर स्टेशन के पास रेल पटरी में दरार का पता चलने से संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई। सुबह लगभग नौ बजे पोल संख्या 513/17 और 19 के पास यह दरार दिखी, जिससे तत्काल ट्रेनों का परिचालन रद्द कर दिया गया। रेलवे सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत क्षेत्र को सुरक्षित किया और पटरी की मरम्मत कार्य शुरू किया, जिसके कारण लगभग 40 मिनट तक दो मुख्य अप‑लाइन पर ट्रेनों का संचालन रुका रहा। इस तत्परता के कारण कई यात्रियों की जान बची, जिससे इस घटना को एक ‘संकट‑निवारक’ कदम कहा जा रहा है।

खुसरूपुर स्टेशन की रणनीतिक स्थिति पटना‑मोकामा रेलखंड के महत्वपूर्ण भाग के रूप में जानी जाती है। यह मार्ग दैनिक रूप से कई पांडा एक्सप्रेस, पटना‑हटिया एक्सप्रेस एवं अन्य लोकल ट्रेनें चलाता है, जो प्रदेश के मुख्य आर्थिक केंद्रों को जोड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में इस रेलखंड में बुनियादी ढांचे की उम्र बढ़ने के कारण कई छोटे‑मोटे तकनीकी दोष दर्ज किए गए हैं, परंतु इस प्रकार की गंभीर दरार पहली बार देखी गई है।

रेलवे विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पटना‑मोकामा खंड में 2015‑2022 के बीच औसत 15‑20 तकनीकी समस्याएँ रिपोर्ट हुई हैं, जिनमें ट्रैक का असमान घिसाव, सिग्नल दोष और कुछ स्थानों पर जल निकासी की कमी प्रमुख रही। इन समस्याओं को समय‑समय पर मरम्मत कार्य के द्वारा नियंत्रित किया गया, परन्तु मौसमीय परिवर्तन, भारी वर्षा और तेज़ तापमान परिवर्तन ने बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डाला है। इस कारण से दरार जैसी समस्याएँ अचानक उभर कर सामने आईं।

दरार का पता चलने के बाद रेलवे पोर्टर ने तुरंत स्थानीय रेल प्रबंधक को सूचना दी। प्रबंधक ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत तुरंत सभी चल रही ट्रेनों को रोक दिया और निकटतम सिग्नल बॉक्स को सक्रिय कर दिया। इस बीच, रेल विभाग की तकनीकी टीम ने दरार के आकार, गहराई और संभावित जोखिम का त्वरित मूल्यांकन किया। जांच में पता चला कि दरार लगभग 1.2 मीटर लंबी और 5 सेंटीमीटर चौड़ी थी, जिससे ट्रेनों के गुजरते ही पटरी का समर्थन कमजोर हो जाता।

तकनीकी टीम ने तुरंत ट्रैक पर एक अस्थायी सुरक्षा जाल स्थापित किया और फिर दरार को सील करने के लिए विशेष एपॉक्सी सामग्री का प्रयोग किया। इस कार्य में लगभग 25 मिनट लगे, जिसके दौरान दो मुख्य अप‑लाइन पर सभी ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से मोड़ दिया गया। मरम्मत समाप्त होने पर सिग्नल सिस्टम को पुनः सक्रिय किया गया और लगभग 09:45 बजे दो मुख्य ट्रेनों ने सामान्य गति से अपनी यात्रा जारी रखी।

इस घटना पर रेलवे पोर्टर ने कहा, “हमारी सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया ने इस संभावित आपदा को टाल दिया। हम सभी कर्मचारियों को याद दिलाते हैं कि सुरक्षा के प्रति सतर्कता कभी भी कम नहीं करनी चाहिए।” स्थानीय रेल प्रबंधक ने भी कहा कि “ऐसी घटनाएँ हमारे लिए सीख का स्रोत हैं। हम भविष्य में इसी तरह की समस्याओं से बचने के लिए नियमित निरीक्षण को और कड़ा करेंगे।”

रिपोर्टों के अनुसार, इस दरार के कारण लगभग 1,200 यात्रियों की यात्रा में देरी हुई, लेकिन कोई गंभीर चोटें नहीं आईं। यात्रियों ने इस देरी को समझदारी के साथ स्वीकार किया और रेलवे द्वारा प्रदान की गई वैकल्पिक बस सेवाओं का उपयोग किया। स्थानीय मीडिया ने इस घटना को ‘संकट‑से‑रक्षा’ के रूप में उजागर किया, जिससे रेलवे कर्मचारियों के कार्य को सराहा गया।

राज्य के रेल विभाग ने बताया कि इस प्रकार की दरारें अक्सर मौसमीय तनाव और बुनियादी ढांचे की उम्र बढ़ने के कारण उत्पन्न होती हैं। उन्होंने कहा कि आगामी महीनों में इस रेलखंड के सभी प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण किया जाएगा, जिससे संभावित जोखिमों की पहचान कर समय पर मरम्मत कार्य किए जा सकें।

वित्त मंत्रालय ने भी इस घटना को नोट किया और कहा कि रेल बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ाया जाएगा, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ पटरी की उम्र अधिक है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी प्रणाली को और उन्नत किया जाएगा।

समाजसेवी संगठनों ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए

Updated: September 1, 2026

Insight: The crack discovered near Khusropur Station prevented a potentially dangerous derailment on the Patna‑Hatia Express route. Prompt inspection and repairs halted train operations for 40 minutes, ensuring passenger safety and maintaining service continuity.

बिहार में 2‑4 सितंबर तक आंधी‑तूफान, तेज़ हवाएँ और हल्की‑मध्यम बारिश के कारण 20 से अधिक जिलों में य

बिहार में अगले तीन दिनों तक जारी रहने वाले आंधी‑तूफान और बारिश के कारण राष्ट्रीय मौसम विभाग (IMD) ने 20 से अधिक जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है, इस पर राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया है। 2 से 4 सितंबर तक मौसम की तस्वीर में बताया गया है कि अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज, तेज़ हवाओं और बौछारों की संभावना है। यह चेतावनी मौसम विज्ञानियों की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें दक्षिण‑पूर्वी बिहार के कई हिस्सों में जल स्तर में वृद्धि और जलभराव की संभावना भी बताई गई है। सरकार ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और आवश्यक उपाय करने का निर्देश दिया है।

बिहार में इस प्रकार के मौसमी परिवर्तन का इतिहास लंबा है; हर वर्ष मानसून के आगमन के साथ कई बार तीव्र बारिश और हवाओं से नुकसान होता रहा है। पिछले दो दशकों में, इसी अवधि में कई बार बाढ़ की स्थिति बन चुकी थी, जिसके कारण कृषि, परिवहन और सार्वजनिक सेवाओं पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इस बार मौसम विभाग ने पहले ही संकेत दे दिया है कि संभावित जोखिम को कम करने के लिए पूर्व-भविष्यवाणी पर आधारित तैयारियां की जानी चाहिए।

IMD की पूर्वानुमान रिपोर्ट के अनुसार, 2 सितंबर को पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पटना, बहरिया और भागलपुर जैसे प्रमुख जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज का अनुमान है। अगले दो दिनों में कुछ जिलों में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में केवल बौछारें ही होंगी। मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि तेज़ हवाओं से कुछ क्षेत्रों में पेड़ गिरने और विद्युत लाइनों में खलाबिल हो सकता है, जिससे बिजली कटौती की संभावना बन सकती है।

वर्षा के साथ ही बाढ़ की संभावना को लेकर कई स्थानीय अधिकारी चिंतित हैं। जल प्रबंधन विभाग ने बताया कि गंगा और उसके सहायक नदियों के स्तर में पहले से ही वृद्धि दर्ज की गई है, और लगातार बरसाती मौसम से ये स्तर और ऊपर उठ सकते हैं। इस पर राज्य सरकार ने बाढ़ नियंत्रण उपायों को तेज करने का आदेश दिया है, जिसमें नदियों के किनारे की सफाई, बंधनों की मजबूती और आपातकालीन बचाव दलों की तैनाती शामिल है।

राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने भी इस मौसम के मद्देनज़र सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि पानी के जमाव से जलजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है, विशेषकर डेंगर, मलेरिया और जलजनित संक्रमणों के मामले में। स्वास्थ्य केंद्रों को तैयार रखने और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही, ग्रामीण इलाकों में पानी की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए जल शोधन इकाइयों को सक्रिय रखने की सलाह भी दी गई है।

परिवहन विभाग ने भी मौसम की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए राज्य के सड़कों और राजमार्गों की स्थिति पर नज़र रखी है। कई हिस्सों में जलभराव की संभावना के कारण ट्रैफ़िक जाम और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए, विभाग ने प्रमुख हाईवे और पुलों पर सतर्कता बढ़ाने और आवश्यकतानुसार ट्रैफ़िक रूटिंग को बदलने का प्रस्ताव रखा है। स्थानीय बस सेवाओं को भी संभावित बाधाओं के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी गई है।

इन घटनाओं पर राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों ने विभिन्न प्रतिक्रियाएँ दर्ज करवाई हैं। ruling party के मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सभी आवश्यक कदम उठाए हैं और लोगों से सहयोग की अपील की है। विपक्षी दलों ने प्रशासन से कहा कि पिछले बाढ़ प्रबंधन में कई कमियों के कारण बड़ी क्षति हुई थी और अब सुधारात्मक उपायों को शीघ्र लागू किया जाना चाहिए। स्थानीय जनता ने भी सामाजिक मीडिया पर मौसम से जुड़ी चुनौतियों को लेकर अपनी चिंताएँ व्यक्त की हैं।

किसान संघों ने भी इस मौसम को लेकर विशेष रूप से फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अनपेक्षित बारिश और तेज़ हवाओं से धान, गेहूँ और गन्ने की फसलें प्रभावित हो सकती हैं, जिससे कृषि उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इन संघों ने राज्य सरकार से फसल बीमा, क्षतिपूर्ति और आपातकालीन समर्थन की माँग की है, ताकि किसान नुकसान से बच सकें।

उद्योग जगत ने भी इस मौसम के संभावित आर्थिक प्रभावों पर ध्यान दिया है। बिहार में कई छोटे और मध्यम उद्योग जलभारी क्षेत्रों में स्थित हैं, जहाँ बाढ़ और बिजली कटौती से उत्पादन में व्यवधान हो सकता है। उद्योग प्रतिनिधियों ने ऊर्जा विभाग से बिजली आपूर्ति की निरंतरता और आपातकालीन जनरेटर की व्यवस्था की माँग की है, ताकि उत्पादन लाइनें सुचारू रूप से चलती रहें।

आर्थिक विश्लेषकों ने बताया कि इस तरह की मौसमी व्यवधानों से राज्य की जीडीपी वृद्धि पर असर पड़ सकता है, विशेषकर कृषि और निर्माण क्षेत्रों में। यदि बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई तो स्थानीय व्यापार में गिरावट, उपभोक्ता खर्च में कमी और रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव

Updated: September 1, 2026

Bihar’s looming storm shows how climate‑induced weather is becoming a fiscal shock absorber, tightening the state’s budget for flood control, health and power continuity.
The political debate around this alert underscores a growing recognition that preventive investment in infrastructure and disaster insurance is as essential as immediate relief.

कैंपुर के सरदार वल्लभभाई पटेल महाविद्यालय ने सेमेस्टर‑3 परीक्षा फॉर्म भरने हेतु अंतिम तिथि 10 सितंबर 2026 तय की है

कैंपुर के सरदार वल्लभभाई पटेल महाविद्यालय, भभुआ ने सेमेस्टर‑3 की परीक्षा फॉर्म भरने संबंधी आधिकारिक सूचना जारी की, जिसमें फॉर्म भरने की अंतिम तिथि, आवश्यक दस्तावेज़ और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया स्पष्ट की गई। महाविद्यालय ने बताया कि वैर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा की आधिकारिक वेबसाइट पर परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन 10 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगा, और इस तिथि के बाद कोई नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह सूचना स्नातक कला एवं विज्ञान संकाय (सत्र 2025‑2029) के सभी प्रथम‑सेकेंडरी छात्रों के लिए अनिवार्य है, जिससे परीक्षा प्रशासन में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी।

सत्र 2025‑2029 के छात्रों को सेमेस्टर‑3 में कुल पाँच प्रमुख विषयों में परीक्षा देनी होगी, जिनमें इतिहास, अर्थशास्त्र, गणित, भौतिकी और अंग्रेजी शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने पिछले दो वर्षों में फॉर्म भरने के लिए ऑनलाइन पोर्टल को सरल बनाया, जिससे छात्रों को व्यक्तिगत रूप से कैंपस में जाकर लंबी कतारों का सामना नहीं करना पड़े। इस बार भी वैर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय ने समान डिजिटल प्रक्रिया अपनाई, जिसमें छात्र अपने व्यक्तिगत विवरण, शैक्षणिक रिकॉर्ड और संपर्क जानकारी भर कर फॉर्म जमा करेंगे।

पृष्ठभूमि में यह देखा गया है कि पिछले वर्ष फॉर्म भरने की अंतिम तिथि में कई बार बदलाव होने के कारण छात्रों में भ्रम उत्पन्न हुआ था। इस कारण महाविद्यालय ने इस बार सभी आवश्यक जानकारी एकत्रित कर एक ही सूचना में प्रकाशित की है, जिससे छात्रों को समय पर कार्रवाई करने में सुविधा होगी। इसके साथ ही, महाविद्यालय ने एक विशेष हेल्पलाइन नंबर और ई‑मेल आईडी प्रदान की है, जहाँ छात्र फॉर्म भरने या दस्तावेज़ जमा करने संबंधी किसी भी समस्या के समाधान के लिए संपर्क कर सकते हैं।

मुख्य घटनाक्रम के अनुसार, फॉर्म भरने का प्रारम्भिक चरण 1 सितंबर 2026 से शुरू होगा, और छात्र ऑनलाइन पोर्टल में लॉगिन करके अपना प्रोफ़ाइल अपडेट करेंगे। प्रोफ़ाइल में शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और पासपोर्ट आकार की तस्वीर अपलोड करनी होगी। इस चरण के बाद, छात्र को एक अस्थायी फॉर्म आईडी प्राप्त होगी, जिसका उपयोग वे आगे के दस्तावेज़ अपलोड और शुल्क भुगतान के लिए करेंगे।

दूसरे चरण में, छात्रों को निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य है। शुल्क की राशि प्रत्येक विषय के लिए अलग‑अलग तय की गई है और कुल मिलाकर INR 3,500 होगी। यह राशि ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई या डेबिट/क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान की जा सकती है। भुगतान के बाद, छात्र को एक रसीद मिलेगी, जिसे उन्हें अगले चरण में कॉलेज में जमा करना होगा।

तीसरे चरण में, छात्रों को अपने मूल दस्तावेज़ों की प्रमाणित प्रतियों के साथ फॉर्म प्रिंट कर कॉलेज कार्यालय में जमा करने होंगे। इसमें 10वीं और 12वीं की रिपोर्ट कार्ड, कॉलेज की प्रवेश पत्रिका, तथा पहचान प्रमाण (आधार कार्ड या पैन कार्ड) शामिल हैं। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि सभी दस्तावेज़ एक ही दिन में जमा करने पर ही फॉर्म को अंतिम मान्यता मिलेगी, और देर से जमा किए गए फॉर्म को अस्वीकार किया जा सकता है।

प्रमुख पक्षों की प्रतिक्रियाओं में, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि इस बार प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सभी चरणों को स्पष्ट रूप से बताया गया है, जिससे छात्रों को अनावश्यक परेशानियों से बचा जा सके। उन्होंने यह भी जोड दिया कि फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि के बाद कोई अपील स्वीकार नहीं की जाएगी, इसलिए छात्रों को समय सीमा का पालन करना आवश्यक है।

छात्र संघ के अध्यक्ष अंशु वर्मा ने कहा कि ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया में तकनीकी समस्या होने पर उन्हें तुरंत मदद मिलती है, क्योंकि महाविद्यालय ने एक तकनीकी सहायता टीम गठित की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई छात्रों ने पहले साल में फॉर्म भरने के समय देर से जमा करने के कारण परीक्षा से वंचित होना पड़ा, इसलिए इस बार वे सभी छात्रों को समय से पहले फॉर्म जमा करने की सलाह दे रहे हैं।

वित्तीय विभाग के अधिकारी ने बताया कि परीक्षा शुल्क का संग्रहण विश्वविद्यालय के खाते में किया जाएगा, और इस राशि का उपयोग परीक्षा प्रबंधन, प्रश्नपत्र तैयार करने और मूल्यांकन प्रक्रिया में किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि शुल्क जमा करने के बाद किसी भी प्रकार की रिफंड प्रक्रिया नहीं होगी, इसलिए छात्रों को शुल्क का भुगतान सावधानीपूर्वक करना चाहिए।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में, इस क्षेत्र के विधायक श्री. शिवनाथ सिंह ने कहा कि शिक्षा संस्थानों की समयबद्ध प्रक्रिया छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करती है, और वे विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय प्रशासन को सराहना देते हैं। उन्होंने यह भी जोड दिया कि यदि कोई छात्र फॉर्म भरने में कठिनाई का सामना करता है, तो राज्य सरकार की शिक्षा विभाग की सहायता उपलब्ध है।

आर्थिक दृष्टिकोण से, इस परीक्षा फॉर्म प्रक्रिया में ऑनलाइन भुगतान का परिचय छात्र और संस्थान दोनों के लिए लागत में कमी लाता है। डिजिटल लेनदेन के कारण कागज, पोस्टेज और यात्रा खर्च घटते हैं, जिससे छात्रों के


कैंपुर के सरदार वल्लभभाई पटेल महाविद्यालय ने सेमेस्टर‑3 परीक्षा फ़ॉर्म के लिए 10 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करने की सूचना जारी की, जिसमें दस्तावेज़ तथा INR 3,500 के शुल्क भुगतान की विस्तृत प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। महाविद्यालय ने हेल्पलाइन और तकनीकी सहायता टीम भी गठित की है ताकि छात्रों को समय पर और सुगम फॉर्म जमा करने में मदद मिल सके

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बिहार के छह जिलों में दिल्ली‑गुवाहाटी रूट की डबल रेल लाइन का कार्यान्वयन,

बिहार में दिल्ली‑गुवाहाटी मल्टी‑ट्रैकिंग परियोजना के तहत छह जिलों में डबल रेल लाइन की शुरुआत हो रही है, जिससे राजधानी‑पूर्वी उत्तर‑पूर्व कनेक्शन में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। इस पहल से प्रतिदिन लाखों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और अधिक आवृत्ति वाले ट्रेन सेवाओं का लाभ मिलेगा, और क्षेत्रीय आर्थिक गतिशीलता में नया आयाम जुड़ने की संभावना है।

परियोजना की रूपरेखा 2022 में राष्ट्रीय रेल नीति के भाग के रूप में तैयार की गई थी, जिसमें उत्तर‑पूर्व को मुख्यधारा के आर्थिक नेटवर्क से जोड़ने के लिए कई मल्टी‑ट्रैक सेक्शन का निर्माण शामिल है। बिहार के भागलपुर, सिवान, और खगड़िया सहित चार अन्य जिलों में पहले से ही दोहरी पटरियों का काम चल रहा था, पर नई योजना इन क्षेत्रों को अतिरिक्त दो ट्रैक प्रदान कर वर्तमान क्षमताओं को दोगुना करेगी।

डबलिंग का प्राथमिक उद्देश्य मौजूदा एकल पटरियों पर बढ़ते यातायात को सुगम बनाना और ट्रेन की औसत गति को 15‑20 प्रतिशत तक बढ़ाना है। इसके साथ ही, रूट पर स्थित छोटे-छोटे स्टेशन पर स्टॉप समय को घटाकर कुल यात्रा समय को लगभग दो घंटे तक कम किया जा सकेगा। इस तकनीकी सुधार के पीछे भारतीय रेलवे की दीर्घकालिक रणनीति है, जिसमें बुनियादी ढांचा को आधुनिकीकरण कर राष्ट्रीय स्तर पर लॉजिस्टिक बॉटलनेक्स को दूर किया जा रहा है।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 15 अगस्त को नई डबलिंग योजना को विस्तृत मानचित्र के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली‑गुवाहाटी रूट का कुल लंबाई 1,600 किलोमीटर है, जिसमें 380 किलोमीटर की डबलिंग कार्य जल्द ही शुरू होगी। मानचित्र में दर्शाए गए छह जिलों के बीच की दूरी, जंक्शन पॉइंट और संभावित स्टेजिंग एरिया का उल्लेख किया गया, जिससे परियोजना की पारदर्शिता और समय‑सीमा स्पष्ट हुई।

परियोजना के लिए अनुमानित निवेश 12,500 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की साझेदारी शामिल है। इस निधि को मुख्यतः ट्रैक कार्य, सिग्नलिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिकलीकृत लाइन और नई पुल एवं टनल निर्माण में उपयोग किया जाएगा। वित्तीय योजना के अनुसार, अगले दो वर्षों में 65 प्रतिशत कार्य पूरा होगा, जबकि शेष हिस्से को 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस विकास को राज्य के सामाजिक‑आर्थिक उन्नयन का मुख्य स्तम्भ बताया। उन्होंने कहा कि डबल ट्रैक से न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि मालवाहन में भी तेज़ी आएगी, जिससे कृषि एवं उद्योग उत्पादों की बाजार पहुंच में सुधार होगा। इस संदर्भ में उन्होंने राज्य के औद्योगिक क्लस्टर और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के साथ इस रूट को जोड़ने की योजना का उल्लेख भी किया।

रेल मंत्री ने बताया कि डबलिंग के साथ ही नई सिग्नलिंग तकनीक, जैसे कि एंटी‑कोलिजन सिस्टम और एटीपी (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन) स्थापित किए जाएंगे। इससे ट्रेन की सुरक्षा मानक उच्चतम स्तर पर पहुंचेंगे और दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी। इस तकनीकी उन्नति से भारतीय रेलवे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तुलनीय बनाया जा रहा है।

दिल्ली‑गुवाहाटी रूट पर प्रमुख भारतीय रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि डबलिंग से मौजूदा 120‑सेकंड की हेडवे टाइम को घटाकर 80‑सेकंड तक लाया जा सकेगा। इससे ट्रेनों के बीच का अंतराल कम होगा और पिक-ऑफ समय में उल्लेखनीय सुधार होगा। इस सुधार के साथ, दिल्ली‑गुवाहाटी के बीच दैनिक 12‑15 अतिरिक्त ट्रेनों की संभावना बन जाएगी।

राज्य के व्यापारिक मंडलों ने इस विकास को आर्थिक बूम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना। पटना व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने कहा कि डबल ट्रैक के कारण उत्तर‑पूर्व भारत में निर्यात‑आयात की लागत घटेगी और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। इसके साथ ही, पर्यटन उद्योग को भी लाभ होगा, क्योंकि गुवाहाटी और असम के प्रमुख पर्यटन स्थल अब दिल्ली‑पटना के माध्यम से सीधे जुड़े होंगे।

सामाजिक दृष्टिकोण से इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। स्थानीय श्रमिकों को निर्माण, रख‑रखाव और संचालन में रोजगार मिलने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण आय में वृद्धि होगी। साथ ही, बेहतर रेल कनेक्शन से स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी, जिससे सामाजिक समावेशी विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

वित्तीय विश्लेषकों ने इस डबलिंग को भारतीय रेलवे की आय वृद्धि में सकारात्मक योगदान मानते हुए कहा कि माल परिवहन में 18‑20 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है। इस वृद्धि से राष्ट्रीय राजस्व में अनुमानित 2,800 करोड़ रुपये का इज़ाफ़ा हो सकता है, जिससे आगे के बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।

राजनीतिक रूप से यह कदम केंद्र-राज्य सहयोग का एक उदाहरण बनता है

Updated: September 1, 2026

अगस्त 2026 में यूपीआई लेन‑देन मूल्य 29.82 लाख करोड़ रुपए, वर्ष‑दर‑वर्ष 20 % वृद्धि; 8.5

अगस्त 2026 में भारत के यूपीआई (Unified Payments Interface) लेन‑देन का कुल मूल्य 29.82 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जिससे पिछले वर्ष के समान महीने में दर्ज 24.85 लाख करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई। यह आंकड़ा राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली के सबसे तेज़ विस्तार को दर्शाता है और वित्तीय

समावेशन के लक्ष्य को साकार करने में यूपीआई की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने इस वृद्धि को डिजिटल भुगतान के समर्थन में नई नीतियों और व्यापक बुनियादी ढाँचे के विकास के परिणामस्वरूप बताया।

यूपीआई का परिचय 2016 में हुआ था, जब इसे तत्काल, सुरक्षित और मुक्त

लेन‑देन की सुविधा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था। तब से यह भारत में डिजिटल भुगतान का मुख्य आधार बन गया है, जिसके अंतर्गत मोबाइल एप्लिकेशन, बैंकिंग वेबसाइट और विभिन्न फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं। 2018‑2020 के बीच यूपीआई लेन‑देन में वार्षिक औसत वृद्धि 50 प्रतिशत से अधिक थी, और 2022

में इसका कुल मूल्य पहली बार 20 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया था। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, अगस्त 2026 में 29.82 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा इस प्रणाली की निरंतर लोकप्रियता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

पिछले पाँच वर्षों में यूपीआई के उपयोग में कई प्रमुख कारक योगदान कर रहे हैं। सबसे

पहले, सरकारी डिजिटल पहल जैसे ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आधार’ के एकीकरण ने उपयोगकर्ता आधार को विस्तारित किया है। दूसरे, निजी वित्तीय संस्थानों द्वारा जारी किए गए नई एप्लिकेशन और सुविधाओं ने उपभोक्ता अनुभव को बेहतर बनाया है। तीसरे, कोविड‑19 महामारी के दौरान कैश‑लेस भुगतान की माँग में तीव्र वृद्धि ने यूपीआई

को तेज़ी से अपनाने के लिए प्रेरित किया। इन सभी पहलुओं ने मिलकर लेन‑देन के मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि को संभव बनाया है।

अगस्त माह में यूपीआई लेन‑देन की मात्रा में भी उल्लेखनीय उछाल देखी गई। राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने कुल 8.5 अर्ब लेन‑देन किए गए, जो

पिछले साल के समान अवधि में 7.1 अर्ब से 20 प्रतिशत अधिक है। औसत लेन‑देन राशि लगभग 350 रुपए रही, जबकि बड़े व्यापारिक लेन‑देन में वृद्धि ने कुल मूल्य में योगदान दिया। इसके अलावा, रेमिटेंस, बिल भुगतान, ई‑कॉमर्स और छोटे‑मध्यम उद्यमों (SMEs) के भुगतान में यूपीआई का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों

में भी मोबाइल नेटवर्क के विस्तार के साथ इस प्रणाली का उपयोग बढ़ा है।

उपभोक्ता व्यवहार में भी परिवर्तन स्पष्ट है। कई उपयोगकर्ता अब दैनिक खर्च, किराना खरीद और सार्वजनिक बिलों का भुगतान सीधे यूपीआई के माध्यम से करना पसंद कर रहे हैं। बैंक और फिनटेक कंपनियों द्वारा प्रदान की जाने वाली

रिवॉर्ड और कैशबैक योजनाओं ने उपयोगकर्ता सहभागिता को और बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, छोटे व्यापारियों ने अपने POS (Point of Sale) सिस्टम में यूपीआई को एकीकृत किया है, जिससे नकद लेन‑देन की तुलना में तेज़ और सुरक्षित भुगतान संभव हुआ है। इस प्रवृत्ति ने व्यापारियों की आय में सुधार और

ग्राहक संतुष्टि में वृद्धि को उत्पन्न किया है।

तकनीकी पक्ष से देखते हुए, NPCI ने इस महीने नई सुरक्षा सुविधाओं का परिचय दिया, जिसमें दो‑कारक प्रमाणीकरण और एन्क्रिप्शन मानक में सुधार शामिल है। इन उपायों ने धोखाधड़ी के मामलों में कमी का संकेत दिया है; RBI की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में

यूपीआई धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। साथ ही, नई इंटरऑपरेबिलिटी प्रोटोकॉल ने विभिन्न भुगतान एप्लिकेशन के बीच सहज डेटा ट्रांसफ़र को संभव बनाया, जिससे उपयोगकर्ता अनुभव में और सुधार हुआ। इस प्रकार की तकनीकी उन्नति ने प्रणाली की स्थिरता और विश्वसनीयता को बढ़ाया है।

रिपोर्टिंग एजेंसियों ने

इस आंकड़े को राष्ट्रीय आर्थिक विकास के संकेतक के रूप में विश्लेषित किया है। आर्थिक विश्लेषक मानते हैं कि यूपीआई लेन‑देन में इस स्तर की वृद्धि से उपभोगकर्ता खर्च में बढ़ोतरी और व्यवसायिक नकदी प्रवाह में सुधार हो सकता है। वित्त मंत्रालय ने इस वृद्धि को ‘डिजिटल अर्थव्यवस्था’ की दिशा में

एक सकारात्मक कदम बताया है, और भविष्य में इस मंच को और विस्तारित करने की योजना बना रहा है। वहीं, वित्तीय समावेशन की दृष्टि से, अधिकाधिक ग्रामीण और कमजोर वर्गों को डिजिटल भुगतान प्रणाली में जोड़ने के प्रयास जारी हैं।

बैंकिंग संघ ने इस विकास को लेकर अपने सदस्य बैंकों को अतिरिक्त

समर्थन प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि यूपीआई के माध्यम से लेन‑देन को सरल बनाने के लिए अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सहायता आवश्यक है। इसके अलावा, कई प्रमुख बैंकों ने अपने मोबाइल एप्लिकेशन में नई सुविधाएँ

Updated: September 1, 2026

Insight: The August 2026 UPI transaction value reached ₹29.82 lakh crore, a 20 % year‑on‑year rise, indicating rapid expansion of India’s digital payments infrastructure. The growth reflects broader adoption across consumers, businesses, and rural areas, supporting financial inclusion goals.

बांका में बीडीओ अमित प्रताप सिंह और मामा बच्चन कुमार को 75 हज़ार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार, भ्रष्टाचार विरोधी निग

बांका जिले में निगरानी विभाग की छठी कार्रवाई ने स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मचा दिया; फुल्लीडुमर प्रखंड के बीडीओ अमित प्रताप सिंह को 75 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया, और साथ ही उनका मामा बच्चन कुमार भी पकड़ा गया। यह घटना जिले के भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों की निरंतरता को दर्शाती

है, जहाँ पटना स्थित निगरानी टीम ने तेज़ी से जांच कर इस बड़े घोटाले को उजागर किया। गिरफ्तारी के बाद अधिकारी ने कहा, यह कार्रवाई निवारक चेतावनी के तौर पर की गई है, जिससे भविष्य में अनियमित लेन‑देनों को रोका जा सके।

बांका में निगरानी विभाग की सक्रियता पिछले पाँच वर्षों में कई बार दिखी है।

2019 में इस विभाग ने पहले तीन कार्रवाईयों में दो बड़े स्कीम में अनधिकृत निधियों की बरबादी को रोकने में सफलता पाई थी। 2021 में जल आपूर्ति योजनाओं के तहत नकली बिलों का पर्दाफाश हुआ, जबकि 2023 में सड़क निर्माण के अनुबंधों में घोटाले का पता चलकर कई ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया। इन घटनाओं

के बाद विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली को सुदृढ़ किया, तकनीकी सहायता और स्थानीय सूचना नेटवर्क को बढ़ाया, जिससे भ्रष्टाचार के संकेत मिलते ही त्वरित कार्रवाई संभव हो पायी।

अभियुक्त बीडीओ अमित प्रताप सिंह ने पिछले दो वर्षों में कई सरकारी योजनाओं के तहत धन का दुरुपयोग किया था। जांच के अनुसार, वह 33 विभिन्न विकास योजनाओं

में अनुचित लाभ के लिए रिश्वत की माँग करता था। इस दौरान वह स्थानीय ठेकेदारों और व्यापारियों से रिश्वत लेता, जिससे योजनाओं की गुणवत्ता और समयसीमा पर नकारात्मक असर पड़ता। विभाग की रिपोर्ट में बताया गया कि इस तरह की वित्तीय अनियमितताएँ परियोजनाओं की लागत में 15‑20 प्रतिशत तक वृद्धि का कारण बनती हैं, जिससे लाभार्थियों

को सीधे नुकसान होता है।

जांच में पता चला कि बच्चन कुमार, अमित प्रताप सिंह के मामा, रिश्वत की राशि को सुरक्षित रखने और वितरित करने के लिए मध्यस्थ का काम कर रहे थे। उन्होंने कई बार नकली दस्तावेज तैयार किए और वित्तीय लेन‑देन को छुपाने के लिए विभिन्न गुप्त खातों का उपयोग किया। विभाग ने

कहा कि इस प्रकार के मध्यस्थों की भागीदारी भ्रष्टाचार को और जटिल बनाती है, क्योंकि वे पैसे की गमन‑पथ को ट्रेस करना मुश्किल बना देते हैं। इस कारण से निगरानी टीम ने मामा को भी गिरफ्तार कर लिया, ताकि सम्पूर्ण नेटवर्क का विघटन हो सके।

गिरफ्तारी के बाद, स्थानीय पुलिस ने बीडीओ के घर से अतिरिक्त

1.2 लाख रुपये की नकद राशि और कई सट्टा नोटबुक्स बरामद कीं। साथ ही, उन्होंने कई अनुबंध दस्तावेज और झूठे रिपोर्टों को भी जब्त किया, जो योजनाओं के वित्तीय रिकॉर्ड को गड़बड़ करने के इरादे से तैयार किए गए थे। पुलिस ने कहा, यह सभी साक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया में प्रस्तुत किए जाएंगे, और आरोपितों को गंभीर

अपराधी ठहराया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद विभाग ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी।

निगरानी विभाग के प्रमुख अधिकारी ने बताया कि इस मामले की सूचना एक स्थानीय नागरिक ने दी थी, जिसने भ्रष्टाचार की संभावना को नोटिस किया और तुरंत विभाग को

सूचित किया। सूचना मिलने के बाद टीम ने तुरंत एक वैरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू की, जिससे शंकास्पद लेन‑देन की पुष्टि हुई। इस प्रकार की सार्वजनिक सहयोगी सूचना निगरानी विभाग की कार्यक्षमता को बढ़ाती है, क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार की पहचान और रोकथाम में मदद करती है। अधिकारियों ने नागरिकों से आगे भी ऐसे मामलों

की रिपोर्ट करने की अपील की।

गिरफ्तारी के बाद, जिला प्रशासन ने इस घटना पर तत्काल प्रतिक्रिया दी। जिला आयुक्त ने कहा कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है और सभी सार्वजनिक अधिकारी इससे सीख लेकर अपने कार्य में पारदर्शिता लाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी

भी प्रकार की अनियमितता को लेकर शून्य सहिष्णुता नीति लागू रहेगी। इस बीच, बंधुश्री सिंह के सहयोगियों ने यह दावा किया कि आरोपों में कुछ गलतफहमी हो सकती है, और वे कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने बिंदु स्पष्ट करेंगे।

राज्य सरकार ने इस कार्रवाई को लेकर सार्वजनिक बयान जारी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंजर जिले

में विकास कार्यों को भ्रष्टाचार के बिना आगे बढ़ाने के लिए सरकार सभी आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि निगरानी विभाग को और अधिक अधिकार और संसाधन प्रदान किए जाएंगे, ताकि वे समय पर कार्रवाई कर सकें। आर्थिक विभाग ने बताया कि इस प्रकार के मामलों से राज्य के निवेश माहौल पर

नकारात्मक असर पड़ता है, इसलिए रोकथाम को प्राथमिकता दी जाएगी।

स्थानीय व्यापारियों और नागरिक संगठनों ने भी इस खबर पर प्रतिक्रिया दी। कई व्यापारी ने कहा कि बीडीओ के भ्रष्टाचार के कारण उनके व्यवसायों पर असमान प्रतिस्पर्धा और आर्थिक दबाव बना रहता था। कुछ

Updated: September 1, 2026

The swift bust of BDO Amit Pratap Singh underscores how a single whistle‑blower can turn a routine audit into a deterrent that reshapes the risk calculus for corrupt officials.
If Bihar’s monitoring unit keeps pairing tech‑driven verification with community tips, the cost inflation that once blo

बिहार बोर्ड ने मैट्रिक‑इंटर परीक्षा आवेदन की अंतिम तिथि 16 सितंबर तक बढ़ा दी; छात्रों को दो सप्ताह अतिरिक्त संशोधन का मौका मिला।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने मैट्रिक तथा इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि को 16 सितंबर तक बढ़ा दिया है, जिससे छात्र‑छात्राओं को फॉर्म भरने एवं डमी रजिस्ट्रेशन कार्ड में त्रुटियों को सुधरने का अतिरिक्त दो हफ्ते मिलेंगे। यह निर्णय पिछले निर्धारित 22 अगस्त की

समयसीमा के बाद लिया गया है, जिससे कई उम्मीदवारों को अपने दस्तावेज़ीकरण संबंधी समस्याओं का समाधान करने का अवसर मिला है। बोर्ड ने इस विस्तार को राज्यभर के सभी उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और प्लस‑टू स्कूलों के प्राचार्यों को सूचित किया है और ऑनलाइन पोर्टल पर तुरंत लागू किया

गया है।

बिहार बोर्ड की यह पहल 2024‑25 शैक्षणिक सत्र की परीक्षाओं की तैयारी के दौरान कई छात्रों द्वारा सामने लाए गए आवेदन प्रक्रियात्मक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए लाई गई। पिछले कुछ वर्षों में फॉर्म भरने में तकनीकी गड़बड़ी, नेटवर्क लैग और दस्तावेज़ अपलोड त्रुटियों की शिकायतें

प्रचलित रही हैं, जिनके कारण कई अभ्यर्थी समय सीमा से पहले ही फॉर्म जमा नहीं कर पा रहे थे। इसी संदर्भ में बोर्ड ने अपने आधिकारिक वेबसाइट पर विस्तृत मार्गदर्शिका प्रकाशित की थी, परंतु वास्तविक उपयोगकर्ता अनुभव ने अतिरिक्त समय की आवश्यकता को स्पष्ट किया।

पिछले महीने बोर्ड ने

ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए नई प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया था, जिसमें व्यक्तिगत विवरण, शैक्षणिक रिकॉर्ड और पहचान प्रमाण अपलोड करने की प्रक्रिया शामिल है। हालांकि, कई स्कूलों से यह रिपोर्ट आया कि कुछ छात्रों के डमी रजिस्ट्रेशन कार्ड में नाम, जन्म तिथि या विद्यालय कोड जैसी मूलभूत जानकारी

में त्रुटि बनी हुई है, जिससे आगे के चरणों में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं। इन त्रुटियों को सुधारने के लिए विशेष रूप से ऑनलाइन ‘त्रुटि सुधार’ विकल्प प्रदान किया गया था, परंतु प्रारंभिक समय सीमा से पहले यह सुविधा समाप्त होनी थी।

BSEB ने इस निर्णय के साथ

ही छात्रों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें बताया गया है कि कैसे मौजूदा फॉर्म को पुनः खोल कर संशोधन किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि सुधार के दौरान केवल उन क्षेत्रों में बदलाव की अनुमति होगी जो प्रारंभिक फॉर्म में गलत दर्ज हुए थे,

जबकि नए दस्तावेज़ या अतिरिक्त जानकारी जोड़ना अनुमति नहीं है। साथ ही, बोर्ड ने ऑनलाइन हेल्पलाइन और ई‑मेल सहायता सेवा को दो गुना कर दिया है, ताकि तकनीकी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जा सके।

समय सीमा विस्तार से पहले कुछ स्कूलों ने अपने छात्रों को सलाह दी थी

कि वे जल्द से जल्द फॉर्म जमा कर लें, क्योंकि नेटवर्क भीड़ और सर्वर लोड के कारण पोर्टल पर बार‑बार त्रुटि संदेश आते रहे थे। इस बीच, कई निजी ट्यूशन संस्थानों ने भी विद्यार्थियों को फॉर्म भरने के लिए अतिरिक्त सत्र आयोजित किए थे, जिससे छात्रों को आवश्यक

सहायता मिल सके। अब दी गई नई तिथि तक, अनुमानित रूप से 12 लाख से अधिक अभ्यर्थी इस परीक्षा में भाग ले सकते हैं, जिससे राज्य के शैक्षणिक आँकड़ों में महत्वपूर्ण वृद्धि देखने को मिल सकती है।

बोर्ड के spokesperson ने कहा कि यह निर्णय न केवल छात्रों के हित

में है, बल्कि परीक्षा प्रबंधन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को भी बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि फॉर्म भरने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए भविष्य में अधिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे, जिससे डेटा चोरी या अनधिकृत परिवर्तन की संभावना कम

हो सके। इस संदर्भ में, बोर्ड ने अपने आईटी विभाग को अतिरिक्त संसाधन प्रदान करने का इरादा जताया है।

प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी इस कदम को स्वागत किया है। राज्य सरकार के शिक्षा मंत्री ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में लचीलापन प्रदान करना छात्र‑केन्द्रित नीति का हिस्सा है

और इससे सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी समान अवसर मिलेगा। विपक्षी नेता हालांकि यह तर्क दे रहे हैं कि अंतिम तिथि में बार‑बार बदलाव से प्रशासनिक अस्थिरता पैदा हो सकती है, लेकिन उन्होंने इस बार के विस्तार को छात्रों के लिए “वास्तविक राहत” कहा। कई सामाजिक

संगठनों ने भी इस फैसले को सकारात्मक रूप में देखा और इसे शैक्षिक समानता की दिशा में एक कदम कहा।

छात्र प्रतिनिधियों के समूह ने इस विस्तार को “अंतिम समय की घबराहट से बचाव” के रूप में सराहा।

Updated: September 1, 2026

Extending the BSEB deadline signals a shift toward a more student‑centric bureaucracy, acknowledging that digital rollout flaws can deepen existing inequities.
If the extra two weeks translate into higher enrollment, the board’s move may become a template for other Indian states grappling with tech‑driven access gaps.

महाराष्ट्र‑उत्तराखंड के ग्रामीण कचरा मॉडल ने राष्ट्रीय नीति‑निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया है

भारत के दो ग्रामीण जिलों ने कचरा प्रबंधन में अपनाए गए नवाचारी मॉडल ने राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी और उत्तराखंड के चमोली में शुरू किए गए सामुदायिक कचरा संकलन एवं पुनर्चक्रण कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण

क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन की वैश्विक समस्या का समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं। इन पहलों ने न केवल कचरे के खुले ढंग से जलाए जाने या नदियों में फेंके जाने को रोका है, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। इस प्रकार, इन दो जिलों की सफलता

को भारत के ग्रामीण कचरा प्रबंधन में एक संभावित मॉडल माना जा रहा है।

रक्तनागिरी जिले का कचरा प्रबंधन मॉडल 2018 में स्थानीय स्वशासन संस्थान (Panchayat) और राज्य पर्यावरण विभाग के सहयोग से शुरू किया गया। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक घर को बायोडिग्रेडेबल और नॉन‑बायोडिग्रेडेबल कचरे के लिए अलग-अलग डिब्बे

प्रदान किए गए। कचरे को एकत्रित कर सौर ऊर्जा संचालित कम्पोस्टिंग यूनिट में भेजा जाता है, जहाँ जैविक कचरे को उर्वरक में बदल दिया जाता है। वहीं, प्लास्टिक और कांच के कचरे को निकटवर्ती पुनर्चक्रण केंद्रों में भेजा जाता है, जहाँ उन्हें नई वस्तुओं में बदलने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस

प्रणाली ने ग्रामीण घरों में कचरा निपटान की आदतों में मूलभूत परिवर्तन लाया है।

चमोली जिले ने 2019 में “ग्रामीण कचरा समाधान” नामक एक सामुदायिक पहल शुरू की, जिसमें गांव-स्तर पर स्वयंसेवक समूहों को प्रशिक्षित कर कचरा संग्रहण, वर्गीकरण और पुनर्चक्रण के कार्य सौंपे गए। इस पहल में स्थानीय महिलाओं को

विशेष रूप से शामिल किया गया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के स्रोत उपलब्ध हुए। कचरा संग्रह के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों का प्रयोग किया गया, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रति भी सकारात्मक कदम उठाए गए। इन सभी उपायों ने ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन को व्यवस्थित और टिकाऊ

बनाया है।

इन दोनों जिलों में कचरा संग्रहण की आवृत्ति अब सप्ताह में दो बार सुनिश्चित की जाती है, जबकि पहले यह अनियमित और अक्सर न करने योग्य था। स्थानीय प्रशासन ने कचरा प्रबंधन के लिए एक विशेष फंड स्थापित किया, जिसमें राज्य एवं केंद्र सरकार के अनुदान, तथा निजी दानदाता

शामिल हैं। इस फंड का प्रमुख उपयोग कचरा संग्रहण उपकरण, कम्पोस्टिंग टैंक और पुनर्चक्रण सुविधाओं के निर्माण में किया जाता है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण स्कूलों में कचरा जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं, जहाँ छात्रों को कचरा वर्गीकरण और पुनर्चक्रण के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाता है।

रक्तनागिरी में स्थापित

कम्पोस्टिंग यूनिट ने पहली वर्ष में लगभग 10,000 टन जैविक कचरा संसाधित किया, जिससे स्थानीय कृषि में उपयोगी उर्वरक का उत्पादन हुआ। इस उर्वरक को स्थानीय किसानों को कम कीमत पर उपलब्ध कराया गया, जिससे कृषि उत्पादन में 8% तक की वृद्धि दर्ज हुई। पुनर्चक्रण केंद्र ने प्लास्टिक कचरे का 70% पुनः

उपयोग योग्य सामग्री में बदल दिया, जिससे न केवल कचरे की मात्रा घटी, बल्कि पर्यावरणीय प्रदूषण में भी कमी आई। इस प्रकार, कचरा प्रबंधन ने आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डाला है।

चमोली में महिलाओं द्वारा स्थापित “कचरा उद्यम” ने प्लास्टिक कचरे को पुनः निर्माण करके हस्तशिल्प

वस्तुओं में बदला, जो स्थानीय बाजार और पर्यटन स्थल में बिकती हैं। इस पहल ने महिलाओं को औसत 5,000 रुपये की मासिक आय प्रदान की, जिससे उनके आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान मिला। साथ ही, सौर ट्रैक्टरों के उपयोग से डीजल खपत में 30% की कमी आई, जिससे ग्रामीण परिवहन लागत में भी

कमी आई। इन पहल के परिणामस्वरूप, जिले की कुल कचरा निपटान दर 85% तक पहुंच गई, जो राष्ट्रीय औसत 30% से कहीं अधिक है।

इन जिलों के मॉडल को देखते हुए, राष्ट्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इनका अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ टीम गठित की। टीम ने कहा कि ग्रामीण कचरा

प्रबंधन में स्थानीय स्तर पर स्वायत्तता और समुदाय की भागीदारी मुख्य कारक हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि इन जिलों की सफलता में सरकारी अनुदान, सौर ऊर्जा का उपयोग और महिला सशक्तिकरण के तत्व प्रमुख रहे। टीम ने सुझाव दिया कि इस प्रकार के मॉडल को अन्य राज्यों में दोहराया जाए, विशेषकर उन

क्षेत्रों में जहाँ कचरा संग्रहण की सुविधा नहीं है।

स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधियों ने इन पहलों की प्रशंसा की और कहा कि यह ग्रामीण विकास का एक नया आयाम प्रस्तुत करता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने रत्नागिरी मॉडल को “देश की स्वच्छता दिशा का उदाहरण” कहा, जबकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने च

Updated: September 1, 2026


India’s Ratanagiri and Chamoli districts have set a new benchmark for rural waste management, turning discarded materials into income‑generating resources and boosting local employment. The success of community‑led collection, solar‑powered composting and recycling has drawn national attention, prompting the Environment Ministry to consider scaling the model across the country.

बिहार सरकार ने अधूरे बायोडाटा के कारण 52 हज़ार शिक्षकों की ट्रांसफ़र‑पदोन्नति व वेतनवृद्धि प्रक्रिया रोक दी

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने 52 हजार सरकारी शिक्षकों के ट्रांसफर‑पोस्टिंग, प्रमोशन और वेतनवृद्धि प्रक्रियाओं को ई‑शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड किए गए बायोडाटा के अधूरे डेटा के कारण रोक दिया है।
विभाग ने कहा कि इस पोर्टल पर आवश्यक जानकारी पूरी न होने पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। इस निर्णय के बाद कई शिक्षक अपने करियर विकास और वित्तीय लाभों को लेकर अनिश्चित स्थिति में फँस गए हैं। विभाग ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया, परंतु अभी तक स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी गई।पिछले दो वर्षों में बिहार में 52,000 से अधिक शिक्षकों को विभिन्न वर्गों में पदोन्नति और वेतनवृद्धि के लिए आवेदन करना अनिवार्य कर दिया गया था। इन प्रक्रियाओं के लिए ई‑शिक्षा कोष पोर्टल पर व्यक्तिगत बायोडाटा, शैक्षणिक योग्यता, कार्यकाल और सेवा रिकॉर्ड अपलोड करना अनिवार्य था। हालांकि, कई शिक्षकों ने बताया कि पोर्टल पर फॉर्म भरते समय तकनीकी गड़बड़ियों और डेटा वेलिडेशन त्रुटियों के कारण अपना बायोडाटा पूर्ण नहीं कर पाए। इससे बायोडाटा अधूरा रहने की समस्या उत्पन्न हुई।

शिक्षा विभाग ने बताया कि बायोडाटा में नाम, पद, सेवा अवधि, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और पिछले पदोन्नति विवरण जैसी मूलभूत जानकारी अनिवार्य है। कई शिक्षकों के बायोडाटा में इनमें से कुछ या सभी खंड खाली रह गए, जिसके कारण पोर्टल ने आवेदन को अस्वीकार कर दिया। विभाग ने कहा कि इस त्रुटि को ठीक करने के लिए विशेष तकनीकी टीम गठित की गई है, परंतु अभी तक सभी डेटा को अपडेट नहीं किया जा सका। इस कारण से ट्रांसफर, प्रमोशन और वेतनवृद्धि के सभी मौजूदा प्रॉसेस रुक गए हैं।

बायोडाटा में अपूर्णता के कारण शिक्षक वर्ग में बड़े पैमाने पर असंतोष देखी जा रही है। कई शिक्षकों ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि वे अपने वेतनवृद्धि और पदोन्नति का लाभ नहीं उठा पाएंगे, जबकि उनका कार्यकाल कई वर्षों से पूरा हो चुका है। कुछ शिक्षकों ने यह भी बताया कि उनका सर्विस बुक, अवकाश और रिटायरमेंट से जुड़ी प्रक्रियाएँ भी प्रभावित हो सकती हैं। इस स्थिति को लेकर शिक्षकों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा विभाग से शीघ्र सुधारात्मक कदम और स्पष्ट समय‑सीमा की मांग की है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस मुद्दे को हल करने के लिए तकनीकी टीम ने पोर्टल की कार्यक्षमता को पुनः जांचा है और डेटा एंट्री में आने वाली गड़बड़ियों को दूर करने के लिए नई प्रणाली लागू करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों को एक निर्धारित अवधि के भीतर अपना बायोडाटा पूर्ण करना अनिवार्य है, और इस अवधि के बाद ही ट्रांसफर और प्रमोशन की प्रक्रिया पुनः आरम्भ की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा कि इस दौरान किसी भी शिक्षक के मौजूदा वेतन या वेतनवृद्धि पर असर नहीं पड़ेगा, बशर्ते वह बायोडाटा को समय पर पूरा कर ले।

शिक्षक संघों ने इस निर्णय पर तीखा प्रतिकार किया और कहा कि यह कदम शिक्षकों के अधिकारों के उल्लंघन के बराबर है। उन्होंने कहा कि बायोडाटा की अधूरी स्थिति के कारण कई शिक्षकों को आर्थिक नुकसान हो सकता है, विशेषकर उन लोगों को जो पहले ही अपने करियर के महत्वपूर्ण चरण में हैं। संघ ने सरकार से आग्रह किया कि वे एक अस्थायी समाधान प्रदान करें, जिससे प्रभावित शिक्षक अपने वेतन व वृद्धि को बिना किसी देरी के प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने पोर्टल की तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई की मांग की।

राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि शिक्षक वर्ग की समस्या को गंभीरता से लिया गया है और विभाग को आवश्यक निर्देश दे कर समाधान प्रक्रिया तेज की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान में वित्त विभाग और आईटी विभाग की सहायता ली जा रही है, जिससे डेटा प्रोसेसिंग में सुधार हो सके। सरकार ने यह भी कहा कि शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और किसी भी प्रकार की देरी को समाप्त करने के लिए विशेष समिति गठित की गई है।

 


Bihar has halted promotions and transfers for 52,000 teachers due to incomplete profiles on the E-Shiksha Kosh portal. The Education Department urged staff to rectify data errors, while unions demand a clear timeline amid fears of financial loss and career stagnation.

The portal glitch has turned a routine admin task into a de‑facto strike, exposing how digit‑first reforms can weaponise bureaucracy against already vulnerable public servants.

आईआईटी पूर्व छात्र ने स्वच्छ नाली रोबोटिक प्रणाली विकसित की, स्टार्ट‑अप का मूल्यांकन 15 करोड़ रुपये

बिहार के एक छोटे कस्बे के बगल में स्थित छोटे प्रयोगशाला में, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व छात्र अभिषेक सिंह ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो मानव श्रम को हटाकर नालियों की सफाई में रोबोट का उपयोग कर सकेगी।
इस नवाचारी परियोजना को “स्वच्छ नाली” नामक स्टार्ट‑अप के रूप में कार्यान्वित किया गया है, जिसकी वर्तमान बाजार मूल्यांकन लगभग पंद्रह करोड़ रुपये बताया गया है। यह पहल न केवल शहरी स्वच्छता में सुधार का वादा करती है, बल्कि जोखिमभरे कार्य में श्रमिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।अभिषेक सिंह ने आईआईटी बनारस में मेक्ट्रॉनिक्स में स्नातकोत्तर किया और अपने गृह नगर दरभंगा में ही इस विचार को धरातल पर उतारने का निर्णय लिया। कई वर्षों तक भारत में नालियों की सफाई के लिए हाथों‑से काम करने वाले श्रमिकों को अत्यधिक स्वास्थ्य जोखिम झेलना पड़ता था, जिससे इस क्षेत्र में स्वचालन की आवश्यकता स्पष्ट थी। इस पृष्ठभूमि में, स्थानीय निकायों और निजी संस्थाओं ने भी इस समस्या को हल करने के लिए विभिन्न उपाय आज़माए, पर तकनीकी समाधान अभी तक उपलब्ध नहीं था।

स्टार्ट‑अप “स्वच्छ नाली”की स्थापना 2022 में हुई, जब अभिषेक ने अपने प्रोटोटाइप को एक स्थानीय स्वच्छता निगम के सामने प्रदर्शित किया। प्रारंभिक चरण में उन्होंने दो प्रकार के रोबोट विकसित किए: एक जो नाली के अंदरूनी भाग को स्कैन करके गंदगी की पहचान करता है, और दूसरा जो स्वचालित रूप से कचरा इकट्ठा कर उसे प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुँचाता है। इन रोबोटों को सौर ऊर्जा और बैटरी दोनों से संचालित किया जाता है, जिससे संचालन लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।

प्रोतो‑टाइप परीक्षण के दौरान, अभिषेक की टीम ने 10 किलोमीटर लंबी नाली नेटवर्क पर रोबोट का प्रयोग किया। परिणामस्वरूप, शुद्धता स्तर 95 प्रतिशत तक पहुँच गया, जबकि मानव श्रमिकों द्वारा किए जाने वाले कार्य में औसत त्रुटि दर 12 प्रतिशत थी। इस परीक्षण ने न केवल सफाई की गति बढ़ाई, बल्कि जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में कार्बन उत्सर्जन को भी लगभग 30 प्रतिशत घटाया।

स्थानीय नगर निगम के प्रमुख, शरद सिंह ने इस तकनीक को अपनाने की घोषणा की और कहा कि अगले छह महीने में 50 रोबोट को स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह पहल शहरी स्वच्छता के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मददगार होगी और साथ ही श्रमिकों को अन्य उत्पादक कार्यों में पुनःस्थापित किया जा सकेगा। इसी क्रम में, राज्य सरकार ने इस स्टार्ट‑अप को अनुदान की रूपरेखा तैयार की, जिससे आगे के विकास में वित्तीय समर्थन सुनिश्चित हो सके।

वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि “स्वच्छ नाली” का मूल्यांकन पंद्रह करोड़ रुपये होना एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि स्वच्छता और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश धीरे‑धीरे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी कंपनियों के साथ तुलना करने पर, अभिषेक की तकनीक अधिक किफायती और पर्यावरण‑अनुकूल मानी जा रही है। निवेशकों ने कहा कि यदि यह मॉडल बड़े शहरी केंद्रों में सफल रहता है, तो कंपनी की बाजार पूंजी में दो‑तीन गुना वृद्धि की संभावना है।

श्रम संघ के प्रतिनिधियों ने इस पहल पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। एक तरफ, उन्होंने रोबोटिक सफाई से श्रमिकों की सुरक्षा में सुधार की सराहना की, जबकि दूसरी ओर उन्होंने रोजगार के संभावित नुकसान को लेकर चिंता जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को पुनःप्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना चाहिए, जिससे प्रभावित श्रमिक नई तकनीकी भूमिकाओं में स्थान पा सकें।

नागरिक समूहों ने भी इस विकास को सकारात्मक रूप से देखा। दिल्ली स्थित पर्यावरण संरक्षण फोरम के प्रवक्ता ने कहा कि नालियों की स्वच्छता में सुधार से सार्वजनिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होगा, विशेषकर मौसमी बाढ़ के समय में। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकी नवाचारों को सार्वजनिक‑निजी साझेदारी के माध्यम से विस्तार देना चाहिए, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लाभ मिल सके।

Updated: September 1, 2026

The robot‑based sewer‑cleaning system automates inspection and waste removal, reducing reliance on manual labor. Its deployment is expected to lower operational costs, improve safety for workers, and cut carbon emissions in municipal sanitation.