बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह द्वारा शराबबंदी खत्म करने की मांग उठाए जाने के बाद नीतीश सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने उन्हें नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बोलने से पहले शराबबंदी के सकारात्मक पहलुओं पर भी चर्चा होनी चाहिए।
अनंत सिंह के बयान से सियासी हलचल में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा था कि बिहार में शराबबंदी अपने उद्देश्य में सफल नहीं हुई है और राज्य में आज भी शराब की खपत जारी है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि शराबबंदी के बाद सूखे नशे का चलन तेजी से बढ़ा है।
मंत्री दिलीप जायसवाल ने अनंत सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी नेता को इस मुद्दे पर बोलने से पहले शराबबंदी के फायदे भी बताने चाहिए। उन्होंने कहा कि शराबबंदी और सूखे नशे को एक नजर से नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन समाधान और संतुलित चर्चा भी जरूरी है।
दिलीप जायसवाल ने कहा कि शराबबंदी को लेकर केवल आलोचना ही नहीं, बल्कि इसके अच्छे प्रभावों पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बहस संतुलित होनी चाहिए, ताकि सही दिशा में निर्णय लिया जा सके।
बिहार में साल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। इसके तहत राज्य में शराब के निर्माण, बिक्री और सेवन पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इस कानून का उद्देश्य समाज में सुधार और अपराधों में कमी लाना था।
हालांकि, शराबबंदी के बाद राज्य में अवैध शराब के धंधे और पड़ोसी राज्यों व नेपाल से तस्करी बढ़ने की बात सामने आती रही है। वहीं, शराब नहीं मिलने के कारण सूखे नशे का प्रचलन भी बढ़ा है, खासकर युवाओं के बीच, जो चिंता का विषय बन गया है।
यह पहली बार नहीं है जब शराबबंदी पर सवाल उठे हैं। विधानसभा के पिछले बजट सत्र में भी विपक्ष के साथ-साथ कुछ सत्तापक्ष के विधायकों ने इस कानून की समीक्षा की मांग की थी। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया था कि फिलहाल शराबबंदी खत्म करने का कोई इरादा नहीं है।