जुड़ शीतल पर्व मैथिली समाज में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो 15 अप्रैल को मनाया जाता है। यह पर्व शीतलता, स्वास्थ्य और पारिवारिक आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग बासी जल से स्नान करते हैं और मां शीतला की पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा के बाद बासी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है, जिसमें कढ़ी-बड़ी, भात, सत्तू, दही-चूड़ा और आम की चटनी शामिल होते हैं।
जुड़ शीतल पर्व की सबसे खास परंपरा है बड़ों द्वारा छोटों को आशीर्वाद देना। सुबह-सुबह घर के बुजुर्ग परिवार के सदस्यों के सिर पर चुल्लू भर ठंडा पानी डालते हैं और ‘जुड़ायल रहु’ का आशीर्वाद देते हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक भावना को दर्शाती है, बल्कि भीषण गर्मी में शरीर को ठंडक पहुंचाने का प्रतीक भी है।
जुड़ शीतल पर्व पर मैथिली समाज में लोकसंस्कृति और उत्सव का रंग भर जाता है। लोकगीत, पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक आयोजन पूरे वातावरण को उत्सवमय बना देते हैं। परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी मिलकर इस पर्व का आनंद लेते हैं, जिससे सामाजिक संबंध भी मजबूत होते हैं।
जुड़ शीतल पर्व के आसपास अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक तिथियां भी आती हैं। 15 अप्रैल को प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी, जबकि 17 अप्रैल को अमावस्या तिथि शाम तक रहेगी, जिस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व माना जाता है। इस प्रकार जुड़ शीतल पर्व परंपरा, स्वास्थ्य और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश देता है।
Be First to Comment