समस्तीपुर के हसनपुर प्रखंड के कन्या प्राथमिक विद्यालय मालदह के टीचर वैद्यनाथ रजक पहले भी गानों को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं।
पहले भी चर्चा में रहे हैं वैद्यनाथ। गाना से ही वह बच्चों को बड़ी से बड़ी बात आसानी से समझा देते हैं। वैद्यनाथ का यह अंदाज बच्चों को खूब भाता है। गर्मी से बचाव का गाना हो या फिर क्लास में पढ़ाई को गाना से समझाना, उनका कोई जवाब नहीं है।
वैद्यनाथ रजक का कहना है कि गर्मी की छुट्टी को लेकर भी वह गाना इसलिए ही बनाए हैं कि बच्चों को आसानी से समझ में आ जाए और वह बिना बोर हुए समय के उपयोग को समझ जाएं। टीचर का कहना है कि गर्मी की छुट्टी के पूर्व बच्चों के साथ होमवर्क सहित अन्य बिंदुओं पर चर्चा की और इस दौरान ही गाने से बच्चों को एक संदेश दिया जो बच्चों को काफी पसंद आया और क्लास में गाना पर खूब तालियां भी बजाई।
ससुर की इलाज के दौरान मौत हो गई। साले का इलाज चल रहा है। पुलिस जवान अपनी पत्नी को विदा कराने आया था, लेकिन ससुराल वालों ने मना कर दिया। इससे नाराज होकर सर्विस रिवॉल्वर से गोली चला दी। हत्या के बाद सोनू ने थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।
मोबाइल पर बात करते हुए पत्नी आंचल एवं आंचल की मां पूनम देवी
वारदात बुधवार दोपहर कासिम बाजार थाना क्षेत्र के घोसी टोला इलाके की है। पुलिस जवान सोनू कुमार नालंदा का रहने वाला है। उसकी तैनाती जमुई जिला पुलिस बल में है। सोनू की शादी मुंगेर के गिरधर साह की बेटी आंचल से 10 महीने पहले हुई थी।आंचल ने कहा कि सोनू शादी के बाद टॉर्चर करता रहता था। इसलिए हम यहां से नहीं जा रहे थे।
सड़क पर अतिक्रमण कर व्यवसाय करने वालों के विरुद्ध जहानाबाद जिला प्रशासन का बुलडोजर चला। शहर के काको मोड़ से लेकर हॉस्पिटल मोड़ तक एनएच-83 किनारे अस्थाई रूप से अतिक्रमण कर दुकान लगाने वालों को जेसीबी से हटाया गया।
इसके अलावा सब्जी मंडी में अनाधिकृत रूप से कब्जा कर खाली जगहों पर दुकान लगाने वालों को भी प्रशासन द्वारा हटाया गया। सदर अंचल पदाधिकारी संजय कुमार अम्बष्ट के नेतृत्व में अभियान की शुरुआत काको मोड़ से की गई।
जिसमें नगर थाना की पुलिस के अलावा नगर परिषद के पदाधिकारी भी शामिल रहे। अंचलाधिकारी ने बताया कि डीएम के निर्देश के आलोक में यह अभियान शुरू किया गया है। सड़क पर अवैध अतिक्रमण के कारण आवागमन में उत्पन्न हो रही बाधा तथा जाम लगने की समस्या से निपटने के लिए अतिक्रमणकारियों को हटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हटाए जाने के बाद पुन: अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी तथा उनके सामानों को भी जब्त किया जायेगा।
प्रशासन द्वारा करीब 60 से अधिक फुटपाथ की दुकानों को उजाड़ा गया। प्रशासन के इस अभियान से अतिक्रमणकारियों में खलबली मची रही। वही सड़क किनारे मुख्य रोड पर दुकान लगाने वालों को खुद अपना दुकान हटा लेने की चेतावनी दी गई।
35 दिनों में पूर्व विधायक के चार परिजनों की हो चुकी है हत्या
जहानाबाद । बिहार की राजधानी पटना में भाजपा के पूर्व विधायक चितरंजन शर्मा के भाई शम्भू शर्मा और गौतम शर्मा को ए के 47 से गोलियों से छलनी कर दिए जाने के बाद महज 35 दिनों के अंदर पूर्व विधायक चितरंजन शर्मा के चार परिजनों को मौत के घाट उतार दिया गया है।विगत 26 अप्रैल के चितरंजन शर्मा के चाचा अभिराम शर्मा की जहानाबाद और भतीजे दिनेश शर्मा को मसौढ़ी में मौत के घाट उतार दिया गया था। इधर दो दिन पहले संजय शर्मा के रिश्तेदार सुधीर शर्मा को नीम गांव की रेल पटरी पर शव मिला था और संजय सिंह ग्रुप ने इसे हत्या बताते हुए चितरंजन शर्मा ग्रुप पर हत्या का आरोप लगाया था ।अबतक नीमा गांव में गैंगवार में 9 लोगों की जान जा चुकी है। और आज की घटना को सुधीर की मौत का बदला माना जा रहा है। पांडव सेना से जुड़े लोगों के आपसी गैंगवार में अभी और लाशें गिरने के प्रबल आसार है।
अब तक पूर्व विधायक के चार परिजनों की हो चुकी है हत्या बिहार का जहानाबाद और पटना जिले का मसौढ़ी 26 अप्रैल मंगलवार की सुबह दोहरे हत्या से दहल उठा था ।शहर के नामचीन स्वीट्स कारोबारी अभिराम शर्मा और उनके भतीजे दिनेश शर्मा का अपराधियों ने गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया।मृतकों में अभिराम शर्मा चाचा और दिनेश शर्मा भतीजा थे अभिराम शर्मा को अपराधियों ने जहानाबाद में उनके गोली आवास पर गोली मारी जबकि भतीजे को मसौढ़ी गांधी मैदान गेट के समीप गोलियों से छलनी कर दिया था
स्वीट्स एवं ज़मीन धंधे से जुड़े थे अभिराम
जहानाबाद में अभिराम शर्मा की हत्यारो की तस्वीरे सीसीटीवी कमरे में कैद हो गई थी।सबसे हैरान करने वाली बात है कि जहानाबाद में जिस जगह पर स्वीट्स एवं जमीन कारोबारी को गोली मारी थी उससे चंद कदम के फासले पर जिले के डीएम और एसपी का आवास है।इधर शहर के चर्चित स्वीट्स कारोबारी की सुबह सुबह हुई हत्या से शहर में सनसनी फैल गई ।
शादी का कार्ड देने के बहाने घर मे घुसे अपराधी
हत्यारों ने घटना को बड़े सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया था । घर की प्रत्यक्षदर्शी महिला सदस्य ने बताया दो अपराधी शादी का कार्ड देने के बहाने कमरे आये और सिर में गोली मारकर चलते बने।अपराधियों की तस्वीरें घर मे लगे कैमरे में कैद हो गई थी
नीमा गांव के 5 लोगों ने बनाई थी पांडव सेना दरअसल में 1995 के आसपास पटना जिले के धनरूआ थाना के नीमा गांव के 5 युवकों चितरंजन ,बब्लू, संजय सिंह, अशोक और विपिन ने पांडव सेना बनाई और ताबड़तोड़ हत्या की घटना को अंजाम दिया ।रंगदारी ,हत्या और अपहरण सहित कई संगीन वारदातों से जहानाबाद ,पटना सहित कई जिलों को थर्रा दिया था।जहानाबाद में लगभग एक दर्जन हत्याओ को अंजाम दिया था।बाद में गिरोह में फुट पड़ गयी और चितरंजन और संजय अलग हो गए । चितरंजन ने राजनीति में कदम रखा और अरवल से 2015 में विधायक बन गए।संजय ने भी लोजपा से पाली गंज से चुनाव लड़ा पर सफलता हाथ नही लगी।
पांडव सेना के बबलू और अशोक सिंह हत्या गढ़वा में कर दी गई थी। 26 अप्रैल 2020 को नदवा स्टेशन पर संजय सिंह को तीन गोली मारी गई थी परंतु संजय सिंह बच गया। हमले का आरोप चितरंजन शर्मा पर लगा और इसके प्रतिशोध में 26 अप्रैल 2022 को चितरंजन के चाचा अभिराम और भतीजे दिनेश की हत्या कर दी गई थी और आज दो भाई को छलनी कर दिया गया। पांडव सेना के आपसी गैंगवार में अभी अभी और कई लाशें गिर सकती है।
जहानाबाद। जहानाबाद की जीआरपी थाना पुलिस ने स्थानीय स्टेशन पर जांच के दौरान 36 बोतल शराब के साथ एक कारोबारी को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार शराब कारोबारी से पूछताछ के बाद जीआरपी ने उसे जेल भेज दिया। जीआरपी थानाध्यक्ष मोनू राजा ने बताया कि बुधवार की सुबह स्टेशन पर जांच के दौरान प्लेटफार्म एक पर खड़े एक व्यक्ति को संदेह के आधार पर पकड़ा गया।
मोनू राजा, जीआरपी प्रभारी, जहानाबाद
पकड़े गए व्यक्ति की तलाशी लेने पर उसके पास स्थित बैग से 36 बोतल शराब जो कि 18लीटर है बरामद की गई। जीआरपी ने तत्काल उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार शराब कारोबारी रंजन कुमार जिले के मंगल बिगहा के रहने वाला है।
जहानाबाद । हुलासगंज सड़क पर सुकियावा पुल के समीप पीएनबी कैश वैन की गाड़ी ने मोटरसाइकिल सवार एक युवक को रौंदा दिया। घटनास्थल पर ही युवक की मौत हो गई।
बताया जाता है कि केयाला गांव निवासी नवल शर्मा मोटरसाइकिल सवार होकर मंगलवार को करीब शाम 4 बजे डोगरा गांव गए थे । लेकिन जैसे ही डोंगरा गांव से लौट रहे थे की सुकियावा पुल के समीप वैन से जबरदस्त टक्कर हो गई। दुर्घटना के बाद वाहन भागने में सफल रहा ।
इस घटना की सूचना आसपास के लोगों ने स्थानीय थाने के पुलिस को दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल जहानाबाद भेज दिया । जैसे ही इस घटना की सूचना उनके परिवार जनों को लगा परिवार में कोहराम मच गया।
स्वाधीनता के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हम सभी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं| 75 वर्षों के इस कालखंड में भारत ने एक राष्ट्र के रूप में उल्लेखनीय उपलब्धियों को हासिल किया है और आज जब देश कर्मशील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है तो हम यह कह सकते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के मानचित्र पर अपनी वह छाप छोड़ेगा जिसकी कल्पना आजादी के लड़ाई में भाग लेने वाले सभी क्रांतिकारियों ने की थी |
राष्ट्र जीवन की दिशा नामक पुस्तक में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने राष्ट्र को किसी कालखंड की गणनात्मक इकाई की जगह एक शाश्वत इकाई माना है। वास्तविकता भी यही है। राष्ट्र की संकल्पना विशेषकर इस धरा भारत के संदर्भ में अनादि काल से विद्यमान रहा है । इसकी झलक सांस्कृतिक रूप से देश के जन-जन में हमेशा से विद्यमान रही है और यह राजनीतिक रूप से हमारे राजा महाराजाओं में चक्रवर्ती सम्राट बनने की लालसा में दृष्टिगोचर होती है। यूरोपीय नूतन राष्ट्रवाद से इसकी तुलना बिल्कुल बेतुकी है। भारत में कांग्रेस तथा उसके वित्त पोषित वामपंथ के द्वारा वर्तमान में राष्ट्र एवं राष्ट्रवाद के संदर्भ में जिस विरोधाभास को प्रतिस्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है , वह वास्तव में नेहरूवियन आइडिया ऑफ इंडिया के विफल होने का ही प्रमाण है।
राम मंदिर तथा काशी विश्वनाथ का निर्माण हमारे पूर्वजों के संघर्ष तथा बलिदान की क्षतिपूर्ति मात्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वास्तव में इन्हें देश के ऐतिहासिक कालखंड में एक ऐसे मोड़ के रूप में देखा जा सकता है जहां से भारत अपनी सांस्कृतिक एवं आत्मिक आइडिया ऑफ भारत को अंगीकार करने की दिशा में बढ़ चला है। इस दृष्टि से पीढ़ियों को जोड़ने तथा माननीय नरेंद्र मोदी जी जैसे विराट नेतृत्व में अपने सभी पुरोधाओं को नमन करते हुए राष्ट्र को विकसित व पल्लवित करने में तन मन धन से खुद को समर्पित करने का वक्त आ गया है।
माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी ,प्रभावी एवं साहसी नेतृत्व एवं देश भर के कार्यकर्ताओं के अटूट मेहनत का नतीजा है कि आज भाजपा एक सबल भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर है | विश्व के मानचित्र पर भारत का नाम अब गौरव से लिया जाता है क्योंकि नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर के महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर जिस प्रकार अपना प्रामाणिक हस्तक्षेप किया है वह अभिनंदनीय है | विगत एक महीने में सम्पन्न हुए संयुक्त राष्ट्र, क्वाड, जी-23 सहित दुनिया के तेल उत्पादक देशों के संघ के बीच भारत ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है तथा चीन एवं पाकिस्तान द्वारा भारत की सीमाओं पर लगातार किए जा रहे कुत्सित प्रयासों से दुनिया को अवगत कराकर उन्हे अलग-थलग करने में उल्लेखनीय सफलता पायी है |
आजादी के बाद 70 वर्षों तक कॉंग्रेस, वामपंथ तथा समाजवाद के नाम पर गैर-यथार्थवादी, सांप्रदायिक, परिवार केंद्रित नेतृत्व ने विकास की संभावनाओं को कुंद करने में कोई कसर नहीं छोड़ा | लोकतंत्र की हत्या करके इमरजेंसी लगाई गई । कांग्रेस ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई राज्य सरकारों को लगभग 90 बार बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया । कॉंग्रेस ने जहां देश में निर्भर अर्थव्यवस्था को खड़ा किया, वामपंथियों ने भारत के मौलिक चिंतन धारा को कुंद करने का कुत्सित प्रयास किया वहीं तथाकथित समाजवादियों ने जातिवाद, भ्रष्टाचार तथा परिवारवाद को पोषित किया है | लोकतंत्र की हत्या करके इमरजेंसी लगाई गई । कांग्रेस ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई राज्य सरकारों को लगभग 90 बार बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन क्या यह सच्चाई नहीं है इन्हीं दलों ने जयप्रकाश नारायण, लोहिया, कर्पूरी ठाकुर जैसे नेताओं के विचारों को तिलांजलि देकर अपने परिवार को मजबूत किया है और भ्रष्टाचार के प्रतिमान गढ़े ।जबकि भाजपा की आधारशिला लोकतंत्र , सांस्कृतिक राष्ट्रवाद , लोक कल्याण , सामाजिक समरसता तथा अंत्योदय के लक्ष्यों में निहित है । श्री नरेंद्र मोदी ने इन्हीं उद्देश्यों को अंगीकार करते हुए सबका साथ , सबका विकास , सबका विश्वास और सब का प्रयास को अपने शासन का मूल मंत्र बनाया ।
हमे विश्वास है कि धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर भी राज्य और केंद्र सरकार गंभीरता से विचार करेगी । देश ने केंद्र में कॉंग्रेस नीत यूपीए सरकार तथा बिहार में राजद के शासनकाल को देखा है और उसके दंश को झेला है | यूपीए 1 एवं 2 में राजद कॉंग्रेस पार्टी का साझीदार था | इस सरकार के भ्रष्टाचार के कारनामों ने दुनियाभर में भारत को शर्मसार किया था | राजद के पंद्रह साल के कालखंड में अलकतरा घोटाला,चारा घोटाला , पैसों का गबन, नौकरियों के बदले जमीन या मकान लिखवाना साथ-साथ अपराध का वह सिलसिला जिसमें हत्या, लूट, नक्सलवादी आंदोलन, जातीय हिंसा जैसे कारनामें रोजमर्रा की बातें हो गई थी | शाम ढलते ही सड़कों के सुनसान होने की बात आज भी लोगों के रोंगटे खड़ा कर देता है।
आज श्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार हो या बिहार में एनडीए की सरकार भ्रष्टाचार का कहीं नाम नहीं है | प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा है कि हमने 8 वर्षों के गरीब कल्याण, सेवा और सुशासन को समर्पित कार्यकाल में एक भी ऐसा काम नहीं किया है जिससे हमारा देश या देशवासियों का सर झुके | यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है कि इस अवधि मे इस सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोपनहीं लगा |माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जो विषय 8 वर्ष पहले कहा था कि ना खाऊँगा ना खाने दूंगा आज उसको चरितार्थ कर दिया है | आज जब विरोधियों पर भ्रष्टाचार सम्बन्धी कोई कार्यवाई होती है तो वे अपने काले कारनामों पर से लोगों का ध्यान हटाने के लिए स्वयं को सताये जाने का आरोप लगते हैं ।
रामधारी सिंह दिनकर ने परशुराम की प्रतीक्षा में इनके जैसे हीं नेताओं के काले कारनामों को देखकर लिखा था – घातक है जो देवता-सदृश दिखता है लेकिन, कमरे में गलत हुक्म लिखता है। जिस पापी को गुण नहीं गोत्र प्यारा है समझो उसने ही हमें मारा है।
हलांकि ये पंक्तियाँ उन्होंने कॉंग्रेस के कार्यशैली पर लिखी थी जो आज भी काँग्रेस और राजद जैसी दलों पर सटीक बैठती है ।
समाज के सभी वर्गों, जातियों के लिए भाजपा तथा एनडीए की सरकार ने श्रेष्ठ प्रयास किए हैं | पिछड़े वर्ग को संवैधानिक दर्जा देना एक ऐसा कदम है जिसे राजद ने वर्षों तक यूपीए सरकार के वक्त दबाकर रखा था ।बाबा साहब अंबेडकर के जन्म स्थली , शिक्षा स्थान सहित पांच स्थानों को पंच तीर्थ स्थल के रूप में विकसित कर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें यथोचित सम्मान दिया । उनके व्यक्तित्व को पूर्ववर्ती सरकारों ने मान्यता नहीं दी थी । माननीय प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटा कर वहां के कमजोर वर्ग विशेषकर बाल्मीकि और बक्करवाल समाज को आरक्षण उपलब्ध करा कर सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर दी है।नीट में ओबीसी को 27% एवं सामान्य वर्ग के गरीबों को 10% आरक्षण का प्रावधान इसी दिशा मे उठाए गए कदमहैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने “प्रधानमंत्री मतस्य संपदा योजना” के माध्यम से निषाद समुदाय के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं | इस योजना के अंतर्गत 20,050 करोड़ रुपए निषाद समुदाय की आर्थिक उन्नति के लिए दिए गए हैं बिहार मीठे पानी में मछली उत्पादन में देश में अव्वल राज्य बन चुका है | आज बिहार में 2005की तुलना मे मछली का उत्पादन लगभग 3 गुना बढ़ चुका है |
स्वास्थ्य, सड़कें-हाइवे, बिजली, पानी, उद्योग, कृषि, शिक्षा, शुद्ध पेयजल सहित अन्य सभी महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं के क्षेत्र में हमने तेजी से काम संपादित किए है | राज्य में प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2005 के 8000 रुपए के मुकाबले आज 48000 रुपए तक पहुँच गयी है और जीडीपी की दर जो 2005 के पूर्व 3% के आसपास थी वह आज 11% पार कर चुकी है | आज हमें इस बात की खुशी है की विगत वर्षों में राज्य में मँझले कद के उद्योगों का संजाल विकसित हो रहा है
आज देश अपने सांस्कृतिक विरासतों तथा उसके वैभव को पुनः स्थापित कर रहा है | नेहरू के छद्म-सेक्युलरवाद का दर्शन जिसे हम वामपंथ का भी साझा दर्शन कह सकते हैं उसने हिंदुओं के सांस्कृतक अधिष्ठानों, उसके प्रामाणिक जीवनशैली तथा उसके परम्पराओं के संदर्भ में लगातार दुष्प्रचार किए हैं | क्या यह सच्चाई नहीं है कि भारत का समाज हिंदुओं की बहुलता की वजह से सहिष्णु है और हमने भारत के साझी विरासत में सभी को स्थान दिया है ? आज आतंकवाद केवल कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों मे सिमट के रह गया है ।कॉंग्रेस तथा राजद के युवराज पाकिस्तान समर्थक तथाकथित सेमिनारों में भारत-विरोध की भाषा बोल रहे हैं | कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के जिस प्रांगण में वो भारत विरोधी “आइडिया ऑफ इंडिया” सेमीनार का हिस्सा बनने गए थे उससे उन्हें वामपंथीयों की मान्यता तो जरूर मिल सकती है परंतु देश की जनता उन्हे कभी माफ नहीं करेगी |
भारत प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इतिहास से सबक लेकर एक सबल-सक्षम तथा क्रियाशील राष्ट्र के रूप में समावेशी सांस्कृतिक अधिष्ठान वाली पहचान को पुनर्जीवित कर रहा है | काशी का ज्ञानवापी हो या कश्मीर घाटी में फैले सूर्य मंदिर के अवशेष सभी राम मंदिर और काशी विश्वनाथ की तरह वापस जीवंत हो उठने को तत्पर हैं । राजनीति की तमाम चुनौतियों के बीच भाजपा ने देश की जनता के बीच नई आशा और विश्वास का संचार किया हैऔर भारत श्री नरेंद्र मोदी के साहसी और कुशल नेतृत्व में विश्व गुरु बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
सुपौल में व्हाट्स एप के विभिन्न ग्रुपों में सुबह से ही एक वायरल वीडियों ने सबको चौंका दिया है .जिसमें एक लङकी स्कूल में जांच कर रहे शिक्षा विभाग के डीपीओ को चप्पल दिखाते हुए पहले वेतन देने फिर विद्यालय की जांच करने को कह रही है .
मामला छातापुर ते प्राथमिक विद्यालय कटही शर्मा टोला से जुङा है .जहां शिक्षा विभाग के डीपीओ राहुल चंद्र चौधरी विद्यालय में शिक्षक रमेश कुमार रमण के वेतन भुगतान करने को लेकर विभिन्न अभिलेख की जांच करने पहुँचे थे .इसी बीच एक लङकी विद्यालय में घुस कर वीडियो बनाते हुए उन्हे चप्पल दिखा कर पहले शिक्षक रमेश कुमार रमण को वेतन देने की मांग करने लगी .इस दौरान डीपीओ ने संयम का परिचय देते हुए किसी तरह वहां से निकले .
दरअसल जिस लङकी का वीडियो वायरल हो रहा है वो शिक्षक रमेश कुमार रमण की पुत्री बतायी जाती है .इधर शिक्षक रमेश कुमार रमण 65 माह से वेतन नही मिलने के कारण सुपौल बिजली विभाग कार्यालय के पास 4 दिनों से आमरण अनशन पर है . जिसमें उनके साथ नगर प्रारंभिक शिक्षक संध के अन्य शिक्षक भी 16 माह से वेतन नही मिलने के कारण उनके ही साथ अनशन पर बैठे है.
इधर आमरण अनशन से दवाब में आये शिक्षा विभाग ने वेतन प्रक्रिया के दौरान जब विद्यालय में अभिलेख की जांच करने पहुँचे तो डीपीओ स्थापना के साथ ये वाकया सामने आया है .इधर शिक्षा विभाग का कहना है कि 2017 में शिक्षक रमेश कुमार रमण कटही शर्मा टोला विद्यालय के प्रभारी एचएम थे .उस वक्त उनके द्वारा पोशाक एवं छात्रवृति राशि का वितरण नही करने पर ग्रामीणों ने सङक जाम कर प्रदर्शन किया था .जिसके बाद शिक्षा विभाग ने उनका डिप्टेशन दुसरे विद्यालय में कर दिया गया .
इस बीच जब 65 माह से वेतन नही मिलने पर शिक्षक अपने अन्य साथियों के साथ आमऱण अनशन पर बैठे तो शिक्षा विभाग ने 3 सदस्यीय टीम गठित कर मामलें की जांच शुरु की तो साल 2017-2018 का शिक्षक का उपस्थिति पंजी विभाग को मिला ही नही . इतना ही विद्यालय में अनशनकारी शिक्षक रमेश कुमार रमण के कार्यकाल के दौरान का रोकङ पंजी भी उपलब्ध नही था .
वही जिस जगह पर प्रतिनियोजन किया गया वहां भी उनकी उपस्थिति के कोई साक्ष्य शिक्षा विभाग की जांच टीम को नही मिला . इधर लङकी द्वारा चप्पल दिखाने के मामलें ने शिक्षक के वेतन भुगतान प्रक्रिया को और पेचिंदा बना दिया है .
संघ लोक सेवा आयोग #UPSC2021 का रिजल्ट जारी होने के साथ ही बिहार के अलग अलग हिस्सों से छात्रों के सफल होने की खबर भी आनी शुरु हो गयी है गया।
सबसे बेहतर परिणाम मोतिहारी के पताही प्रखंड स्थित नारायणपुर गांव निवासी शुभंकर प्रत्यूष पाठक का रहा है जिसका रैंक 11 है। उनके पिता आरके पाठक भारत सरकार में तकनीकी विकास बोर्ड में सचिव हैं। उन्होंने IIT धनबाद से बीटेक किया है। वहीं, मुंगेर की अंशु प्रिया यादव को 16वीं रैंक मिला है। उनके पिता शैलेंद्र कुमार यादव सरकारी शिक्षक हैं।
अंशु प्रिया यादव को 16वीं रैंक मिला
पहले ही प्रयास में आशीष ने हासिल किया 23वां रैंक पटना के बिस्कोमान कॉलोनी के रहने वाले आशीष ने 23वां स्थान हासिल किया है। उनका यह पहला अटेम्प्ट था। वह सिटी कॉर्पोरेशन की नौकरी छोड़ तैयारी में जुटे थे। उनके पिता हरेंद्र सिंह शेखपुरा के बरबीघा में ITI कॉलेज का संचालन करते हैं। उन्होंने बताया, ‘बेटा बचपन से ही मेधावी था। 10वीं और 12वीं बोर्ड में 99% से ज्यादा अंक प्राप्त मिले थे। 12वीं तक की पढ़ाई उसने सरस्वती विद्या मंदिर मरचा-मरची, पटना से की है। स्कूलिंग पूरा करने के बाद उसने IIT की तैयारी की और वो इसमें भी कामयाब रहा। IIT BHU से उसने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।’
आशीष ने परीक्षा में 23वां स्थान प्राप्त किया
वहीं, कटिहार के अमन को 88वां मिला है। उनके पिता दुर्गा लाल अग्रवाल कटिहार के राज हाता के रहने वाले हैं। नवादा के आलोक रंजन को 346वां स्थान मिला है। वे रोह प्रखंड के गोरिहारी गांव के रहने वाले हैं।
रोहतास के लड़के ने भी मारी बाजी वहीं, रोहतास के अमन आकाश ने 360वां रैंक प्राप्त किया है। अमन बिक्रमगंज शहर के शांति नगर मुहल्ला के निवासी हैं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा बिक्रमगंज के गांधी इंटर स्कूल से हुई है। इसके बाद इंटरमीडिएट सैनिक स्कूल से किया। अमन ने MP में SBI के मैनेजर पद पर कार्यरत रहते हुए यह रैंक हासिल किया है।
मजदूर के बेटे को भी मिली सफलता मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड के मुकसुदपुर के रहने वाले विशाल कुमार को 484वां रैंक मिला है। विशाल के मजदूर पिता बिकाऊ प्रसाद की मौत के बाद परिवार कर्ज में डूब गया था। मैट्रिक की परीक्षा में जिला टापर रहे, फिर पूर्व DGP अभयानंद के मार्गदर्शन में पढ़ाई की और IIT कानपुर में केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद तैयारी कर रहे थे।
वहीं मुजफ्फरपुर के ही मीनापुर के टेंगराहां के अभिनव कुमार को 146 रैंक मिला है।
146 रैंक लाने वाले अभिनव कुमार
गोपालगंज के दिव्यांश शुक्ला उर्फ गौरव शुक्ला को 153 वा रैंक.मिला है थावे के मौजे वृंदावन के रहने वाले है दिव्यांश शुक्ला।
दिव्यांश शुक्ला उर्फ गौरव शुक्ला को मिला 153 वा रैंक
सिवान । सिवान में बेखौफ अपराधियों ने इंडियन बैंक में बड़ी लूट की घटना का अंजाम दिया है। हथियार से लैस करीब 6 की संख्या में नकाबपोश अपराधी बैंक में घुस करीब 20 लाख रुपए कि लूट की है।
घटना नगर थाना क्षेत्र के सीवान-छपरा मुख्य रोड स्थित राजेंद्र पथ की है जहां हथियार से लैस नकाबपोश अपराधी इंडियन बैंक में घूस कर्मियों को बंधक बना रुपए लूट फरार हो गए।सीवान में अपराधी कितना बेखौफ है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिनदहाड़े अपराधियों द्वारा लूट की घटना का अंजाम दें आसानी से अपराधी फरार हो गए।घटना के बाद बैंक में SP और SDPO सहित कई थाने के पुलिस बैंक में पहुच सीसी फुटेज खंगालने में जुटी हुई है।
इस तरह दिनदहाड़े बैंक में बड़ी लूट की घटना पुलिस के लिए एक चुनौती है।सीवान एसपी ने बताया कि पांच की संख्या में अपराधी आए और कैशियर को बंधक बनाकर काउंटर पर रखे पैसा की लूट कर ली फिलहाल कितना रुपए है पता किया जा रहा है लेकिन करीब 20 लख रुपए बताई जा रही है। मामले की जानकारी ली जा रही है।
इस लूट के बाद बैंक की बड़ी लापरवाही सामने आई है उस बैंक में इतनी बड़ी रकम होने के बाद न गार्ड है और जो सीसीटीवी लगा हुआ है वह खराब पड़ा है।तो इस तरह बैंक में बड़ी लापरवाही सामने आई है।अब जब इस बैंक की सीसी टी खराब है तो अब जांच में और अपराधियों की गिरफ्तारी करने में या चिन्हित करने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करना पड़ेगा।
इस लूट के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर गार्ड क्यों बैंक में तैनात था और सीसी क्यों नहीं काम कर रहा है।
पटना । उत्तर बिहार के लोगों के लिए राहत की खबर पटना को जोड़ने वाली लाइफ लाइन गांधी सेतू का पूर्वी लेन शीघ्र होगा चालू।
गांधी सेतु का पूर्वी लेन बनकर तैयार हो चुका है. सात जून को इसके उद्घाटन की तैयारी चल रही है। 20 महीना में पूर्वी लेन का निर्माण पूरा हुआ है और इस पर लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
एक अक्तूबर 2020 को इसका निर्माण शुरू हुआ जो पिचिंग और पेंटिंग पूरा होने के साथ ही शनिवार को सौ फीसदी पूरा हो गया और रविवार से उद्घाटन की तैयारी भी शुरू हो गयी है।
पटना । सुहागन महिलाओं द्वारा अपने पति की स्वस्थ और दीर्घायु जीवन के लिए मनाया जाने वाला व्रत वट सावित्री पूजन सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
इस दौरान व्रती महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज और विधि विधान के साथ वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर अपने अक्षत सुहाग की कामना की।
नीतीश को पीएम बनाने की सोच पर साधा निशाना पार्टी संगठन में छेड़छाड़ पर उठाया सवाल बीजेपी का साथ नहीं छोड़ने को दिया नसीहत मंत्री पद से नहीं देगे इस्तीफा
आरसीपी सिंह ने कहा कि नीतीश बाबू के साथ मेरा 25वां साल है। उन्होंने कहा कि नीतीश बाबू ने हमेशा मेरे हित में ही फैसला लिया है। इस बार भी उन्होंने मेरे और पार्टी के हित में ही फैसला लिया होगा। उन्होंने कहा कि दल के लिए उन्होंने काफी काम किया है। उन्होंने बताया कि वे संसदीय राजनीति में 12 साल से काम कर रहे हैं।
इससे अधिक वक्त उन्होंने पार्टी के संगठन के लिए दिया है। आगे भी वे संगठन के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आज तक किसी को नाराज करने वाला काम मैंने नहीं किया है। अगर किसी के नाराज होने की बात सामने आती है, तो उससे मिलकर नाराजगी दूर करता हूं। नीतीश कुमार की मेरे प्रति नाराजगी की खबरों का कोई आधार नहीं है।
नीतीश कुमार का हर फैसला उन्हें मंजूर है। हमारे नेता ने जो किया, वह पार्टी और उनकी भलाई के लिए ही किया होगा। मंत्री पद से इस्तीफे के सवाल पर कहा कि अभी छह जुलाई तक हूं। दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलूंगा। जो कहा जाएगा, करूंगा। मैं पहले भी संगठन के लिए काम करता था।
आगे भी करूंगा। नीतीश से उनका 25 वर्ष का रिश्ता है। जदयू का अहसान भी जताया। कहा कि उन्होंने पार्टी को बूथ स्तर तक कार्यकर्ता दिए। पार्टी ने उन्हें महासचिव बनाया, सदन में दल का नेता बनाया, राष्ट्रीय अध्यक्ष् बनाया और अभी नेतृत्व की सहमति से ही केंद्रीय मंत्री हूं। जो जिम्मेदारी दी गई, उसे निष्ठा से निभाया।
आरसीपी सिंह का टिकट काटना बीजेपी की शिखंडी के सहारे राजनीति करने की शैली पर नीतीश कुमार का यह दूसरा बार हमला है और इस हमले के साथ यह तो तय हो गया है कि आने वाले समय में नीतीश बीजेपी को लेकर और भी कड़े फैसले ले सकते हैं ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा तक बिहार की राजनीति में कोई बड़ा उलटफेर हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी । 1–नीतीश दुश्मनी भी बड़ी शिद्दत से करते हैं नीतीश कुमार जिस परिवेश से आते हैं या फिर जिस तरह की राजनीति करते हैं उसमें नीतीश की मजबूरी है कि उनकी छवि सख्त वाली रहे और यही वजह है कि जिसने भी आंख उठाया उसको नीतीश ने बड़ी शिद्दत से ठिकाने लगा दिया ।चाहे वो जार्ज हो ,शरद यादव हो ,दिग्विजय सिंह हो या फिर प्रभुनाथ सिंह ये सारे कभी जदयू के बड़े चेहरे रहे हैं। इसी तरह चिराग पासवान 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए शिखंडी की तरह नीतीश को पराजित करने के लिए उम्मीदवार को खड़े किये और उसका खासा नुकसान जदयू को हुआ लेकिन सरकार के गठन के कुछ महीने बाद ही नीतीश कुमार ने चिराग का ऐसा ऑपरेशन किया कि मंत्री पद की कौन कहे आवास तक खाली करना पड़ा और बीजेपी खामोशी के साथ वो सब कुछ करता रहा जो नीतीश कहते गये।
आरसीपी सिंह को भी वफादारी बदलने की ही सजा मिली है उन्हें लगा कि नीतीश कुमार के दिन अब लद गये हैं और वो अब चाह करके भी कुछ नहीं कर पायेंगे, केन्द्र में मंत्री हैं, नीतीश के स्वजातीय हैं ,नीतीश कुमार के राजदार रहे हैं उनके हर कर्म और कुकर्म के साझेदार रहे हैं ऐसे में वफादारी बदल भी लेंगे तो भी नीतीश कुमार इस स्थिति में नहीं है कि मेरा टिकट काट दे ।हलांकि राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद नीतीश कुमार जिस तनाव से गुजर रहे थे उससे ये समझ में आ रहा था कि आरसीपी सिंह का टिकट काटने का फैसला लेना कितना मुश्किल था।
2—आरसीपी सिंह के बाद किसकी बारी आरसीपी सिंह का टिकट काट कर नीतीश कुमार ने बीजेपी को सीधा संदेश दिया है कि पार्टी अभी भी नीतीश कुमार का है और जो नीतीश चाहेंगे वही होगा साथ ही नीतीश कुमार ने यह संदेश भी दे दिया है कि बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन नीतीश कुमार के शर्तों पर चलेगा ।
ऐसे में आने वाले दिनों में अमित शाह और बिहार की राजनीति में उनके साथ खड़े नेता के साथ साथ बिहार के राज्यपाल ,बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और बीजेपी कोटे के कुछ मंत्रियों का पत्ता साफ हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्यों कि बीजेपी के अंदर भी जिस तरीके से केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं उससे संकेत साफ है कि बिहार आने वाले दिनों में जंग का मैदान बन सकता है ।
क्यों कि सुशील मोदी जिस तरीके से बोचहा उप चुनाव के परिणाम के सहारे पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी है ,फिर राज्यपाल को हटाये जाने की मांग के साथ साथ जातीय जनगणना के समर्थन में बयान देकर अमित शाह को झुकने पर मजबूर कर दिया ऐसे में संकेत साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार बीजेपी के अंदर से भी मोदी और शाह को चुनौती मिलनी शुरु हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। वैसे बीजेपी के अंदर से राज्यसभा टिकट वितरण को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं ऐसे में नीतीश कुमार जिस तरीके से आरसीपी सिंह का टिकट काटे हैं उससे बीजेपी के अंदर जो शाह विरोधी खेमा है उसको बल मिला है ।
लद्दाख में सड़क हादेश में शहीद हुए पटना जिले के पालीगंज अनुमंडल के परियो गांव निवासी शहीद लास नायक रामानुज कुमार का पार्थिव शरीर पहुंचा पैतृक गांव परियो अधिकारी एव गाँव के लोग दे रहे हैं श्रधांजलि, मौके पर पालीगंज एसडीम मुकेश कुमार, पालीगंज के एएसपी के अलावा अन्य कई अधिकारी जनप्रतिनिधि है मौजूद ।
पटना। प्रसूति महिला की मौत पर परिजनों का हंगामा, एनएमसीएच के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में किया जमकर हंगामा।आक्रोशितों ने ने डॉक्टर की गाड़ी में की तोड़फोड़, डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का लगाया आरोप।
पुलिस पहुंची मौके पर, आक्रोशित परिजनों को समझाने बुझाने में जुटी, मृतका विभा देवी आलमगंज के चैलीटाल मोहल्ले की थी निवासी, आज सुबह प्रसव को लेकर एनएमसीएच में कराई गई थी भर्ती।
पटना, 28 मई, 2022 : मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कैमूर जिलान्तर्गत करकटगढ़ जलप्रपात का भ्रमण किया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने करकटगढ़ जलप्रपात में की गई व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि करकटगढ़ में एक तरफ जहाँ कलकल झरने की गुंज सुनाई देती है तो वहीं दूसरी तरफ जल पक्षियों का कलरव संगीत भी सुनाई देता है। यह मगरमच्छ के प्राकृतिक स्थल के रूप में अलग महत्व रखता है। यह जलप्रपात अपने स्व-संरक्षित जलाशय के कारण आसपास के गाँवों का सिंचाई का महत्वपूर्ण साधन है। करकटगढ़ जलप्रपात दृश्य के बारे में भी मुख्यमंत्री को विस्तृत जानकारी दी गयी ।
मुख्यमंत्री के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुये कहा कि करकटगढ़ रहता है और अद्भूत और मनोरम झरना है। यह एक रमणीक स्थल है। यहाँ हर समय पानी जलप्रपात एक अच्छा महसूस इसका फ्लो काफी तेज है। यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं और उन्हें यहां होता है। उन्होंने कहा कि करकटगढ़ को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करें पर्यटकों की सुविधा के लिये कँटिन की व्यवस्था हो । कँटिन चालू होने से पर्यटकों को सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि आने वाले पर्यटकों के लिये पार्किंग की सुविधा हो, इसके लिये क्षेत्र निश्चित कर पार्किंग की व्यवस्था की जाय। यहाँ गहन वृक्षारोपण की भी जरूरत है। जो वर्षापात होता है उसके लिये जल संचयन योजना को भी कार्यान्वित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि करकटगढ़ जलप्रपात की पब्लिसिटी हो जायेगी तो यहाँ बड़ी संख्या में पर्यटक आयेंगे। स्कूली बच्चों को भी इन सब जगहों को दिखाने की आवश्यकता है।
भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने मडहाउस का भी अवलोकन किया। अधिकारियों ने बताया कि मडहाउस में स्थानीय महिलाओं की कला और पेंटिंग को डिसप्ले किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने क्रोकोडाइल डिसप्ले प्वाईंट का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को यहाँ पर एक सुसज्जित फॉरेस्ट गेस्ट हाउस का भी निर्माण कराने का निर्देश दिया। इसके पूर्व मुख्यमंत्री के करकटगढ़ पहुँचने पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों एवं ने भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने सभी का अभिवादन स्वीकार किया।
जिलाधिकारी ने प्रतीक चिह्न भेंटकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। भ्रमण के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री जमा खान, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, विधान पार्षद श्री संतोष कुमार सिंह, पूर्व विधायक श्री प्रमोद सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव श्री अरविंद कुमार चौधरी, प्रधान सचिव पर्यटन श्री संतोष कुमार मल्ल, प्रबंध निदेशक बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम श्री कंवल तनुज, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, पुलिस उप महानिरीक्षक शाहाबाद प्रक्षेत्र श्री उपेन्द्र शर्मा, जिलाधिकारी श्री नवदीप शुक्ला, पुलिस अधीक्षक श्री राकेश कुमार सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
करकटगढ़ जलप्रपात का भ्रमण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जगह के बारे में जब जानकारी मिली थी तो मेरी इच्छी हुई कि इस जगह को आकर देखें। वर्ष 2019 के जनवरी माह में हम यहां आये थे। यह काफी खूबसूरत और बढ़िया जगह है। टूरिज्म को बढ़ावा देने को लेकर यहां काम कराया गया है। यहां की परिस्थिति काफी बदली है। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए इसका और विकास किया जायेगा। पिछले 2 वर्ष से कोरोना को लेकर एक्टिविटी कम हो गयी थी। मेरे मन में इच्छा हुई कि एक बार फिर यहां आकर इसे देखें। करकटगढ़ जलप्रपात को और कैसे विकसित करना है इसको लेकर आज भी चर्चा हुई है। काफी संख्या में लोग यहां घूमने आते हैं, भविष्य में इनकी संख्या और बढ़ेगी। यह बहुत ही खास जगह है। गर्मी के दिनों में भी यहां जल की प्रचुरता दिखाई पड़ती है। यहां लोगों के रुकने, घूमने, बैठने और खाने-पीने के इंतजाम के साथ-साथ अन्य जरुरी सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेगी। स्कूली बच्चे भी यहां आकर घूमेंगे। यहां तक पहुंचने को लेकर आवागमन की सुविधा और बेहतर की जायेगी। रास्ता के निर्माण ठीक ढंग से होने से यहां दूरदराज से आने वाले लोगों को सहूलियत होगी। यहां घूमने में लोगों को बहुत आनंद आयेगा।
जहानाबाद जिले के घोसी थाना क्षेत्र के नारायणपुर गांव में एक गली से नवजात बच्ची बरामद हुआ है। वार्ड सदस्य देवेंद्र कुमार ने बताया कि मैं रात्रि को गली से अपने घर जा रहा था। तभी एक बच्चे की रोने की आवाज आई मैं जब पास जाकर देखा तो देखा कि गली में एक नवजात बच्ची पड़ी हुई है ।उसको उठाकर मैं अपने घर ले गया और इसकी सूचना घोसी पीएसी के प्रभारी को दिया प्रभारी द्वारा एंबुलेंस भेज कर बच्चे को घोसी पीएसी मंगाए और एन एम के देखरेख में उसे रखा गया है ।
देवेन्द्र, वार्ड मेंबर
जैसे ही इसकी सूचना आसपास के लोग को लगी कई लोग बच्ची को देखने के लिए इकट्ठे हो गए। इसके बाद बच्चों को लेने के लिए कई लोग दावेदार हो गए । घोसी पीएसी में पदस्थापित एन एम सोनी कुमारी का कहना है कि बच्ची को मैं रखना चाहता हूं ।और इसका लालन-पालन करना चाहता हूं मुझे एक बच्चा है और कई सालों से एक बच्ची की तलाश थी। इसीलिए इस बच्ची मिली है तो मैं इसको कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए । भरण पोषण करना चाहता हूं।
सोनी देवी, एएनएम
इस बच्ची को रखने के लिए कई लोग मानवता का परिचय देते हुए अपने हाथ आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन हैरत की बात तो यह है जिस मां इस बच्ची को जन्म दी है उसने गली के बीच चौराहे पर फेंक कर अपनी मानवता को शर्मसार किया है। वही दूसरी ओर इस बच्ची को अपनाने के लिए कई लोग प्रयास कर रहे हैं इससे प्रतीत होता है कि कई लोग मानवता का परिचय दे रहे हैं। वार्ड सदस्य का कहना है कि इस बच्ची को बीच गली में फेंकने का कारण नाजायज औलाद है ।इसी के कारण इस बच्ची को लोगों ने गली में फेंक दिया इस घटना के बाद पूरे गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है ।
इलाके में भी यह चर्चा हो रही है किस-ने यह कदम उठाया अपनी नन्ही सी बच्ची को गली में फेंक कर अपने को पिंड छुड़ा लिया ।अब देखना है कि प्रशासन द्वारा कानूनी प्रक्रिया अपनाकर इस बच्ची को भरण पोषण के लिए सौंपा जाता है
जहानाबाद पुलिस के लिए वार्ड नंबर एक का बभना गांव सर दर्द साबित हो रहा है। पुलिस हर हफ्ते 2 हफ्ते पर इस गांव में छापेमारी करती है और धंधेबाज फिर से शराब बनाने के काम में जुट जाते हैं।
शनिवार को एक बार फिर से डीएसपी और उत्पाद अधीक्षक के नेतृत्व में टाउन थाने की पुलिस के साथ थी एंटी लिकर टास्क फोर्स ने संयुक्त कार्रवाई की। बभना महादलित टोले के समीप छापेमारी कर गैलन और बोतलों में बंद महुआ शराब जब्त किया। छापेमारी के क्रम में एक धंधेबाज को गिरफ्तार किया गया है। किसके ऊपर उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
अश्विनी कुमार, उत्पाद अधीक्षक, जहानाबाद
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने बताया कि गांव में शराब बनाने का काम लगातार जारी है। पुलिस कार्रवाई करती है और धंधेबाज फिर से उसी काम में जुड़ जाते हैं। एसडीपीओ ने यह भी बताया कि शराब तस्करों के ऊपर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी जब तक कि यह पूरी तरह बंद ना हो जाए।
अररिया से गिरफ्तार राजस्व पदाधिकारी राहुल कुमार खुद भी थे परीक्षार्थी । सिवान में उनका था परीक्षा का सेंटर। परीक्षा के 1 घंटे पहले उनके मोबाइल पर क्वेश्चन और आंसर शीट पहुंचा था मोबाइल से ।सॉल्वर गैंग के सरगना पिंटू यादव से लगातार थे संपर्क में ।
राजश्व पदाधिकारी ने कई और लोगों को भेजा था आपने मोबाइल से क्वेश्चन और आंसर शीट।राजस्व पदाधिकारी के पिता बिहार पुलिस विभाग में है दारोगा ।आर्थिक अपराध इकाई ने किया था दावा।
पेपर लीक कांड में सरकारी कर्मियों की भूमिका का दावा जांच के दौरान दावे की हो रही पुष्टि सोमवार को इस मामले में कई और लोगों के खिलाफ वारंट लेगी आर्थिक अपराध इकाई की टीम इस मामले में कई और लोगों की होगी गिरफ्तारी–इओयू। bpsc पेपर लीक कांड के जांच का बढ़ा दायरा।
हम गांधीवादी लोग नेहरू की कुछ बातों के कटु आलोचक रहे हैं। खासकर उनकी जो औद्योगिक आर्थिक नीति थी उसे हम गांधी विरोधी बताते थे और वह आलोचना ठीक ही थी। लेकिन लोकतंत्र के प्रति उनका लगाव सर्वस्पर्शी था। जनता उन्हें जितना प्यार करती थी वह भारत की जनता को उससे ज्यादा प्यार करते थे।
उन्हें ठीक ही गांधी का राजनैतिक उत्तराधिकारी कहा जाता है। राज्य के प्रभाव की सीमाएं उनके सामने स्पष्ट थी। लोक शक्ति का महत्व वे समझते थे और इस शक्ति को सशक्त बनाने का काम कितना कठिन है यह भी जानते थे । इसलिए उनका पूरा सहयोग विनोबा और जयप्रकाश जी को मिला था।
कानून की संगठित हिंसा के बल पर चलने वाली राज्य सत्ता को कैसे अहिंसा की दिशा में ले जाएं उनकी यह एक खोज हमेशा रही। लोकतंत्र तो इसका एक बना बनाया रास्ता था ही ,परंतु इसे और चौड़ा बनाने के लिए उन्होंने अनेक जोखिम उठाए । कश्मीर की जनता को बिना मांगे अहिंसा और लोकतन्त्र की दृष्टि से जनमत संग्रह का वायदा करना, श्यामा प्रसाद मुखर्जी को हिंदूत्ववादी होने के बावजूद मंत्रिमंडल में शामिल करना आदि कुछ जोखिम भरे कदम तो थे ही लेकिन सबसे बड़ा जोखिम नेहरु जी ने चीन के संदर्भ में उठाया।
तिब्बत और चीन के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए तिब्बत पर चीन के कब्जे को उन्होंने ज्यादा महत्व नहीं दिया। बौद्ध मठों का आम तिब्बतियों के प्रति मठवादी व्यवहार और माओ की जनवादी सर्वप्रिय नेता की छवि ने भी तिब्बत की समस्या के प्रति उनके मत को प्रभावित किया होगा ।
तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद चीन भारत के लिए भी एक खतरा बन सकता है यह स्पष्ट था । उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल ने चेतावनी भी दी थी । चीन ने स्वयं भी इस ओर इशारा कर दिया था कि तिब्बत और भारत की सीमा चीन को मान्य नहीं है ।अब क्या करें ? क्या फौजी तैयारी ?
आर्थिक रूप से बर्बाद होकर सदियों की गुलामी के बाद आजाद हुए देश का उस वक्त फौजी तैयारी में लगना क्या ठीक था ? ऐसा होता तो इसके दो ही अर्थ थे। एक तो यह कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फौजी ताकत की दृष्टि से, दो गुटों में बटी दुनिया के , किसी एक गुट में शामिल हो जाना और दूसरा यह कि शस्त्रों की दौड़ में कूद पड़ना। दोनों रास्ते मूलतः एक ही थे , और गांधी के राजनैतिक उत्तराधिकारी नेहरू को स्वीकार्य नहीं थे।
गांधी से ही सीखा था एक सपना देखना कि हिंसा से अलग जो शक्तियां हैं उनकी दुनिया में कैसे चले । यही सपना व्यावहारिक भी था । शस्त्रों की दौड़ न सिर्फ बहुत सारा पैसा खा जाती है , दिमाग़ ही बदल देती है। योजनाओं की प्राथमिकता बदल जाती है।
देश के वास्तविक विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचों का बनना जरूरी था । देश की भूखी नंगी जनता की बुनियादी आवश्यकताओं का पूरा होना ज़रूरी था। आधुनिक ज़माने के नए तीर्थों का बनना ज़रूरी था। नेहरू ने युद्ध नहीं संवाद की रणनीति अपनाई। चीन को इस में बांधना चाहा ।1955 के बांडुंग सम्मेलन में ” पंचशील करार” पर चीन समेत सभी प्रमुख एशियाई देशों के हस्ताक्षर हुए।
चीन भी सामूहिक रूप से वचनबद्ध हुआ, कि सीमा विवाद युद्ध से नहीं बल्कि वार्ता से ही सुलझाया जाएगा।. दुनिया के सामने चीन ने दिए गए वायदे को तोड़ दिया . भारतीय फौज लगभग निशस्त्र थी । भारत युद्ध हार गया। नेहरू धोखा खा गए। कहते हैं इसी सदमे से उनकी मृत्यु हो गई ।
अधिकांश लोग इस प्रकरण का जिक्र आते ही चीन की फजीहत करने के बदले नेहरू की फजीहत करने में लग जाते हैं । लेकिन मेरे लिए यह नेहरू का अंतरराष्ट्रीय सत्ता और शस्त्रों की होड़ में अहिंसा को दाखिल करने का स्वर्णिम प्रयोग था। यह प्रयोग यदि सफल हो जाता तो आज दुनिया युद्ध से ही नहीं आतंकवाद से भी मुक्त हो गई होती।
आरसीपी सिंह के राज्यसभा जाने को लेकर अभी भी संशय बरकरार है आज भी नीतीश कुमार पटना से बाहर रहेंगे वैसे नीतीश कुमार अक्सर शनिवार को ही बड़े फैसले लेते रहे हैं। इस बीच नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह के बीच हुए मुलाकात को लेकर एक सूचना ये आ रही है कि नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह से पुछा है कि आपने मीडिया में जो बयान दिया है कि नीतीश जी के सहमति से मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे ये सही है क्या ऐसा क्यों बोल रहे हैं।
ललन जी बताइए इनके मंत्री बनने को लेकर मैंने सहमति दिया था क्या जिस समय मंत्रिमंडल में शामिल होने की बात हो रही थी आप थे और वशिष्ठ भाई थे मैंने ऐसा कुछ कहा था क्या, आपको इस तरह से मीडिया में नहीं बोलना चाहिए था। जानकार भी बता रहे हैं कि इसी नाराजगी की वजह नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से हटाया था ऐसा नहीं है पहले भी दो पद पर रहते हुए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर नीतीश कुमार और शरद यादव रहे हैं।
1—नीतीश कुमार आरसीपी सिंह को लेकर असहज क्यों हैं बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आरसीपी सिंह के मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद नीतीश और आरसीपी सिंह के बीच दूरी बढ़ी है ऐसा कई मौके पर देखने को मिला है वही जब से राज्यसभा सीट को लेकर चर्चा शुरू हुई है उसके बाद से नीतीश कुमार की जो गतिविधि रही है वो सारी गतिविधि आरसीपी सिंह के विरुद्ध रहा है ।
राज्यसभा सीट को लेकर उम्मीदवार के चयन का अधिकार खुद लेना फिर ऐसे विधायक जिनका आरसीपी सिंह से बहुत ही करीबी का रिश्ता रहा है उससे साफ साफ यह पूछना की आरपीसी सिंह को लेकर आपकी कोई राय तो नहीं है फिर किंग महेंद्र जिनका कार्यकाल बचा हुआ था उसके परिवार वाले चाह भी रहे थे जिस आधार पर किंग महेंद्र को राज्यसभा भेजा जाता है वो पूरा करेगा फिर भी नीतीश नहीं माने और अनिल हेगड़े को राज्यसभा भेज दिये जबकि इस सीट के सहारे बिहार के भूमिहार राजनीति को साधा जा सकता है जो आज कल नीतीश से नाराज चल रहा है ।
लेकिन नीतीश कुमार ने अनिल हेगड़े को टिकट देकर राजनीति में शुचिता का एक लकीर खींचने की कोशिश ,इसके अलावे इस बीच कई ऐसे मौके आये है जिस दौरान नीतीश आरसीपी सिंह से दूरी बना रहे हैं ऐसा देखने को मिला है ।चाहे वो नीतीश कुमार के पारिवारिक सदस्य हरेन्द्र कुमार के बेटे की शादी का मौका रहा हो चाहे बेटे हरेन्द्र सिंह के बेटे के रिसेप्शन का मौका रहा हो या फिर विजय चौधरी के बेटे की शादी का मौका रहा हो इसके अलावा भी कई ऐसी बात हुई हो जो दिखा रहा है कि नीतीश आरसीपी सिंह को लेकर सहज नहीं है।
2—आरसीपी सिंह के विभीषण बनने पर क्या नुकसान हो सकता है उसके आकलन में लगे है नीतीश एक ये भी चर्चा है कि नीतीश कुमार आरसीपी सिंह को हटाने का निर्णय लेते हैं तो क्या क्या नुकसान हो सकता है इसके मूल्यांकन की वजह से नीतीश राज्यसभा सीट पर उम्मीदवार कौन हो इसको लेकर वक्त ले रहे हैं हालांकि नीतीश कुमार उम्मीदवार चयन में जितना वक्त ले रहे हैं उसका असर यह हो रहा है कि आरसीपी सिंह के समर्थक भाषाई मर्यादा तक तोड़ दिया है ।
सोशल मीडिया पर आरसीपी सिंह के करीबी ललन सिंह को निशाने पर ले रहे हैं, नीतीश पर भी हमला बोल रहा है, सीबीआई का डर दिखाया जा रहा है ऐसे में नीतीश अंतिम क्षण में आरसीपी सिंह को टिकट देते भी हैं तो पार्टी को एकजुट रखना नीतीश के लिए मुश्लिक हो जायेगा ।
वही आरसीपी सिंह का टिकट काटना का फैसला भी नीतीश के लिए बहुत ही मुश्किल भरा निर्णय होगा क्यों कि आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के राजदार रहे हैं उन्हें नीतीश कुमार की खासियत और कमजोरी सब पता है ऐसे में नीतीश के लिए आरसीपी सिंह को बाहर का रास्ता दिखाना इतना आसान नहीं होगा क्यों कि आरसीपी सिंह बाहर होते हैं जो बीजेपी के नीतीश कुमार के घर का दूसरा ऐसा विभीषण मिल जायेंगा जिसके पास नीतीश कुमार के हर राजनीतिक दांव और ताकत की जानकारी है इसलिए आरसीपी सिंह को राज्यसभा का टिकट काटना नीतीश के लिए बहुत आसान नहीं होगा ।
वैसे आरसीपी सिंह गये तो यह तय है कि नीतीश 2024 से पहले बीजेपी के खिलाफ मैदान में उतर सकते हैं लेकिन यहां समस्या यह है कि नीतीश के इस फैसले के साथ ललन सिंह ,संजय झा और अशोक चौधरी जैसे मिडिल ऑर्डर के खिलाड़ी खड़े नहीं होंगे ये भी एक संकट है ऐसे में नीतीश कुमार के सामने विकल्प बहुत ही सीमित है लेकिन इतना तय है इस परिस्थिति में भी नीतीश अगर आरसीपी सिंह को टिकट से वंचित कर देते हैं तो यह तय है कि नीतीश कुमार 20-20 के अंदाज में राजनीतिक पारी खेल सकते हैं क्यों इनके पास खोने के लिए अब कुछ नहीं बचा है ।
सीएम नीतीश कुमार का शुक्रवार को अचानक नवादा जिला के दौरे पर पहुंचे।जहा बिहार का कश्मीर कहे जाने वाले ककोलत जलप्रपात का दौरा किया।
सीएम दौरा करने के लिए सड़क मार्ग से नवादा पहुँचे। एकतारा स्थित ककोलत जलप्रपात में मुख्यमंत्री अपने वरीय अधिकारियों के साथ पहुँचे थे। ककोलत सीढ़ी से चढ़ते हुए हुए वो मुख्य झरने तक पहुँचे। थोड़ी देर झरने के समीप समय बिताने के बाद उन्होंने अधिकारियों को जरूरी दिशानिर्देश दिया।
मीडिया से मुखातिब होने के दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में भी वो ककोलत जलप्रपात आये थे।उस वक़्त किये गए घोषणाओं पर कितना अमल हुआ, उसी कार्य का जायजा लेने के लिए आज वो ककोलत जलप्रपात पहुँचे।उन्होंने कहा कि 2018 में उनके द्वारा किये गए घोषणाओं के कार्य का प्रगति के कार्यों को देखना था इसलिए वो आज ककोलत आये है।
ककोलत में आने वाले सभी शैलानियों को सुविधा दी जाएगी।हर चीज का जगह निर्धारित होगा,खाना खाने के लिए जगह,ठहरना,चेंज रूम और साफ जल को नीचे संग्रह करने के लिए भी इंतजाम किए जाएंगे।लोगों को असुविधा न हो हर चीज नीचे ही ब्यवस्था की जाएगी।रोपवे से लेकर सीढ़ी तक कार्य किया जाएगा।हालांकि 2 साल कोरोना के कारण ककोलत का विकाश कार्य पूरी तरह रुक गया था।इसलिए अब इसका कार्य शुरू किया जाएगा और जल्द से जल्द शैलानियों को सुविधा मुहैया कराई जाएगी।सीढ़ी और रेलिंग का कार्य अच्छे तरह से किया गया है।ककोलत एक पवित्र जगह है लोग दूर दूर से यहां आते है।इसलिए लोगों को यहां जल्द से जल्द सुविधा दी जाएगी।
वही आरसीपी के भविष्य पर पूछे गए सवाल पर नीतीश कुमार ने कोई भी प्रतिकिर्या नही दी।ककोलत का भ्रमण कर वो हवाई मार्ग से पटना के लिए रवाना हो गए।
पटना । 27.05.2022 । बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है राजद के लिए भ्रष्टाचार, परिवारवाद, नैतिकता तो कोई मुद्दा ही नहीं है। राजद परिवार से बाहर निकल ही नहीं सकता है। परिवार में ही किसी दूसरी बहन को देते, परन्तु भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप जिन पर हैं उन्हें पुनः राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया।
• ए टू जेड की बात करने वाले माई समीकरण से बाहर नहीं निकल सकते • राजद के राज्यसभा में अब छह में से तीन जेल रिटर्न और एक बेल पर • ऐसी पार्टी सत्ता में आ गई तो बिहार का क्या होगा?
मोदी ने कहा कि राजद लाख ए टू जेड की बात कर ले, परंतु न तो वह माई से बाहर निकल सकता है और ना ही परिवार से। राज्यसभा में टिकट का मौका आया तो बाबा और जगता बाबू को दरकिनार कर परिवार और माई को ही तरजीह मिली।
मोदी ने कहा कि बाबा को नहीं बनाया तो समझ में आ सकता है क्योंकि लालू जी की दुर्दशा के लिए बाबा ही जिम्मेवार हैं। परंतु जगता बाबू जिन्होंने लालू जी के जेल जाने के बाद खडाऊं को ईमानदारी से संभाल कर रखा और जो पार्टी का अध्यक्ष के रूप में बेहतर काम कर रहे हैं उन को अपमानित कर राज्यसभा नहीं भेजा।
मोदी ने कहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने 144 में 76 टिकट माई समीकरण को दिया। भूमिहार को एक और कुर्मी को भी मात्र एक टिकट दिया। वही माई के एम को 18 और वाई को 58 टिकट दिया।
मोदी ने कहा कि अब लालू परिवार के 4 सदस्य संसद और विधान मंडल में है। राज्यसभा के 6 में से तीन सदस्य जेल रिटर्न (प्रेमचंद गुप्ता, अशफाक करीम, अमरेंद्र धारी सिंह) है, एक चार्जशीटेड हैं और बेल पर हैं और 4 धन पशु हैं जिनकी योग्यता केवल धन है।
मोदी ने कहा कि ऐसी पार्टी 15 साल सत्ता में थी तो लोगों ने देखा है और यदि पुनः गलती से लौट आए तो बिहार का क्या होगा?
समझें तो जाने जी है इस समय बिहार जिस राजनीति के दौर से गुजर रहा है वो किसी पजल गेम से कम नहीं है । बिहार के सामने आरसीपी सिंह राज्यसभा जायेंगे या नहींं जायेंगे यही पजल गेम है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब पजल गेम के एक से एक माहिर खिलड़ी भी दो राहे पर आकर खड़े हो जा रहे हैं और तय नहीं कर पा रहे हैं कि आरसीपी सिंह जायेंगे या नहीं जायेंगे मैं तो यह दावे के साथ कह सकता हूं कि आरसीपी सिंह जायेंगे या नहीं जायेंगे ये बात ललन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा को भी पता नहीं है ।
हां अटकल जरुर लगा सकते हैं पिछले 24 घंटे के दौरान इस पजल गेम को साँल्भ करने की दिशा में इस तीन तस्वीर की सहायता ली जा सकती है ।
1–पहली तस्वीर है आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार के बीच मुलाकात की आरसीपी सिंह पीले रंग के फाइल के अंदर लिखी गयी मजमून को पढ़ रहे हैं और नीतीश कुमार सुन रहे हैं नीतीश के चेहरे के भाव से आप कयास लगाइए क्या पढ़ रहे थे आरसीपी सिंह
2–दूसरी तस्वीर है मंंत्री विजय चौधरी के बेटे के शादी समारोह का मुख्यमंत्री सहित जदयू के अधिकांश मंत्री जब चले गये तब आरसीपी सिंह पहुंचे थे और हाल यह था कि जदयू का कार्यकर्ता भी साथ चलने से कतरा रहे थे।
3–तीसरी तस्वीर पंडित जवाहरलाल नेहरू के पूण्यतिथि पर आयोजित राजकीय समारोह का है इस कार्यक्रम में मंत्री शीला मंडल मुख्यमत्री नीतीश कुमार के बगल में बैठी हैं ,शीला मंडल आरसीपी सिंह के खासे करीब हैं उन्हें के कहने पर टिकट दिया गया था और पहली बार विधायक बनने के बाद मंत्री भी आरसीपी सिंह के ही कोटे से बनी थी। शीला पहली बार किसी राजकीय कार्यक्रम में नीतीश के साथ मंच पर देखी गयी है इस का तस्वीर मतलब निकाले पजल गेम साँल्भ करो ।
इस पजल गेम को लेकर कुछ इनपुट भी है शायद आपको साँल्फ करने में मदद करे 1–इधर राज्य सरकार के सीनियर अधिकारियों का मानना है कि आरसीपी सिंह राज्यसभा जरुर जायेंगी ज्यादा उड़ने लगे थे हैसियत बता दिया गया ।
2–आज आरसीपी सिंह चुनाव आयोग के रिटायर उप निर्वाचन पदाधिकारी बैजनाथ कुमार मिलने पहुंचे हैं कहा जा रहा है कि नॉमिनेशन फॉर्म भरने आये हैं ।
हाहहाहहाहाहा मजा आ रहा है ना आरसीपी पजलगेम को साँल्भ करने में ।वैसे इस खेल में अब बचा कुछ नहीं है बस देखना यही है कि इस गेम के निर्माता के रीढ़ में ताकत बची है की नहीं ।
आप खुद कयास लगाये आरसीपी सिंह नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पहुँचते हैं पहले से आरसीपी सिंह के ललन बाबू मौजूद थे। 45 मिनट की मुलाकात के बाद आरसीपी सिंह बाहर निकले उनके चेहरे का भाव देख कयास लगाये।
आरसीपी सिंह मीडिया को पत्र भेजे है आप पढ़ कर खुद कयास लगा ले:-
केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी हुआ है जिसमें यह कहा गया है कि हमने जदयू कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए जदयू में काम किया है । हमने जदयू में आरंभ से ही संगठन के विस्तार के लिए काम किया हर समय कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए प्रयास किए। पार्टी को कैसे बूथ स्तर तक पहुंचाया जाए इसको लेकर पूरी लगन से काम किया । अब पार्टी को फैसला करना है कि उन्होंने जदयू के लिए क्या किया है ।
जहानाबाद जिले में थाना में दिनदहाड़े चोरी की घटना सुनने में तो थोड़ा अटपटा लगता है। लेकिन सच्चाई यही है, ज्ञात हो कि रूपेश कुमार जो बंधुगंज गांव के निवासी हैं उनका ट्रैक्टर लगभग 5 दिन पहले पुलिस द्वारा अवैध बालू खनन करने के आरोप में पकड़ लिया था गुरुवार को ट्रैक्टर को छुड़ाने के लिए थाने पहुंचे हुए थे। लेकिन जैसे ही अपने ट्रैक्टर के पास पहुंचे तो देखा कि दो चोर ट्रैक्टर बैटरी एवं बाजा चोरी कर रहे थे ।
जब ट्रैक्टर मालिक ने देखा तो अवाक रह गया दोनों को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया गया ।पूछताछ के क्रम प्रकाश प्रकाश मांझी मखदुमपुर थाना क्षेत्र के कंसारा गांव निवासी बताया जाता है। वही दूसरा रामाकांत बिंद घोसी थाना क्षेत्र के सैदपुर गांव का निवासी बताया जाता है ।
लेकिन जिस तरह से दिनदहाड़े थाना में घुसकर चोरी करते हुए चोर पकड़ा गया है। इससे तो यही प्रतीत होता है कि पुलिस प्रशासन का भय चोरों के बीच नहीं है ।
आम जगह की बात तो छोड़िए जब थाना ही सुरक्षित नहीं है तो क्षेत्र की सुरक्षित की बात करना बेमानी साबित होगी । इस घटना पर पुलिस द्वारा कुछ भी बताने से इंकार कर रही है ।vलेकिन इस घटना से पुलिस विभाग पर से लोगों का विश्वास उठता जा रहा है ।
इस घटना की चर्चा पूरे इलाके में होने लगी है लोगों का कहना है । थाना सुरक्षित नहीं है। आम जनता सुरक्षित रहने की बात करना बेमानी साबित होगा ।जिस तरह से इस घटना को अंजाम चोरों द्वारा दिया जा रहा था। अगर इसके मालिक सजग नहीं होते तो ट्रैक्टर के कई सामान चोरों ने उड़ा लेते पुलिस हाथ पर हाथ धरे रह जाती।