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उज्जैन: सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हनुमान प्रतिमा हटाने के प्रयास विफल, प्रशासन के पास नई तकनीकी योजना

उज्जैन के मध्य में स्थित “खड़े हनुमान” मंदिर को सड़क चौड़ीकरण के काम में बाधा मानते हुए प्रशासन ने दो दिनों से प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया, परंतु हनुमान जी की प्रतिमा अब तक अपनी जगह पर अडिग बनी हुई है। इस दौरान मंदिर का अधिकांश ढाँचा हटा दिया गया है, फिर भी प्रतिमा को स्थानांतरित करने में तकनीकी तथा धार्मिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय जनता और प्रशासन के बीच तनाव उत्पन्न हुआ है।

उज्जैन में 2023 के अन्त में घोषित हुए ‘सड़कों का पुनर्संरचनात्मक योजना’ के तहत कई प्राचीन धरोहरों को प्रभावित किया गया, परंतु “खड़े हनुमान” मंदिर को विशेष रूप से उल्लेखित किया गया था क्योंकि यह शहर के मुख्य चौक के निकट स्थित है। 1975 में स्थापित इस मंदिर की प्रतिमा 12 फीट ऊँची और कंक्रीट मिश्रित लोहे की बनी है, जो स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक तथा ऐतिहासिक महत्व रखती है।

योजना की शुरुआत में शहरी विकास विभाग ने कहा था कि मंदिर का ढाँचा हटाने से केवल 30 मीटर की सड़क चौड़ाई बढ़ेगी, जिससे यातायात की भीड़ कम होगी। लेकिन स्थानीय इतिहासकारों ने इस बात पर इशारा किया कि हनुमान जी की प्रतिमा को हटाना न केवल धार्मिक भावना को चोट पहुँचाएगा, बल्कि शहरी विकास के लिए एक संवेदनशील सामाजिक संतुलन भी बिगाड़ेगा।

दूसरे दिन, नगर निगम की टीम ने विशेष उठाने वाले उपकरणों का प्रयोग कर प्रतिमा को स्थानांतरित करने का प्रयास किया। लेकिन कंक्रीट की जड़ें और लोहे की जड़त्व ने उपकरणों को रोक दिया, जिससे प्रयास विफल रहा। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित किया, परंतु कई स्थानीय भक्तों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रतिमा के चारों ओर रैली आयोजित की।

तीसरे दिन, प्रशासन ने पुनः विशेषज्ञ अभियंत्रियों को बुलाया और एक नई तकनीकी योजना तैयार की। इस योजना में हाइड्रोलिक जैक और फ्रीजिंग एजेंट का उपयोग करके प्रतिमा को धीरे‑धीरे ढीला करने का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि प्रतिमा को अत्यधिक बल से खींचा गया तो उसकी संरचनात्मक स्थिरता टूट सकती है, जिससे ध्वंसकारी परिणाम सामने आ सकते हैं।

चौथे दिन, नगर निगम ने दोहरी टीमों को नियुक्त किया; एक टीम ने प्रतिमा के आधार को धीरे‑धीरे काटने का काम किया, जबकि दूसरी टीम ने ध्वनि और कंपन को न्यूनतम रखने के लिए शोर निरोधक आवरण लगाया। इस दौरान स्थानीय मीडिया ने विस्तृत कवरेज किया और सार्वजनिक प्रतिक्रिया को रियल‑टाइम में दर्शाया। परिणामस्वरूप, प्रतिमा के आधार के कुछ हिस्से धीरे‑धीरे खुलने लगे, परंतु पूरी तरह हटाना अभी भी असफल रहा।

पर्यावरणीय एवं सांस्कृतिक संगठनों ने इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। उज्जैन अभ्यंतर्य संरक्षण समिति ने कहा कि प्रतिमा के हटाने से ध्वनि, वायुमंडलीय दबाव और ध्वनि कंपन के कारण ध्वनि‑केंद्रीकृत लोहा क्षतिग्रस्त हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि एक वैकल्पिक मार्ग या मोड़ तैयार किया जाए, जिससे प्रतिमा को स्थायी रूप से सुरक्षित रखा जा सके।

नागरिकों की ओर से भी विभिन्न मत सामने आए। कुछ लोग मानते हैं कि विकास के लिए सांस्कृतिक धरोहरों का त्याग आवश्यक है, जबकि अन्य लोग प्रतिमा को संरक्षित करने के लिए वैकल्पिक मार्ग की मांग कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण से व्यापारिक प्रवाह में सुधार होगा, परंतु उन्होंने यह भी कहा कि यदि धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुँचाया गया तो सामाजिक अशांति उत्पन्न हो सकती है।

राजनीतिक पक्षों ने भी इस मुद्दे को लेकर बयान जारी किए। शहर के विधायक ने कहा कि प्रशासन को विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाना चाहिए, जबकि विपक्षी नेता ने इस योजना को “धर्म‑आधारित असहिष्णुता” का आरोप लगाया। इन बयानों ने सार्वजनिक बहस को और तीव्र कर दिया, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ा।

आर्थिक दृष्टिकोण से इस परियोजना का अनुमानित बजट लगभग 150 करोड़ रुपये था, जिसमें सड़क विस्तार, पुल निर्माण और पुरानी संरचनाओं का पुनर्निर्माण शामिल है। यदि प्रतिमा को हटाने में विफलता जारी रहती है, तो अतिरिक्त खर्च और समय-सारणी में देरी का सामना करना पड़ेगा। यह देरी न केवल वित्तीय बोझ बढ़ाएगी, बल्कि स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर भी असर डालेगी।

सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में, हनुमान मंदिर के भक्तों ने इस स्थान को “आध्यात्मिक केंद्र” बताया है, जहाँ दैनिक प्रार्थना और सामुदायिक कार्यक्रम होते हैं। प्रतिमा के हटने से इन सामाजिक गतिविधियों में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है, जिससे समुदाय की एकजुटता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, धार्मिक पर्यटन के स्रोत के रूप में यह स्थल स्थानीय होटल और रेस्तरां के राजस्व में योगदान देता आया है।

विश

Updated: September 8, 2026


Ujjain administration’s attempts to remove the standing Hanuman idol for road widening have stalled due to technical failures and public unrest. The standoff has intensified political and social tensions as experts warn of structural damage while locals demand preservation of the heritage site.