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छठ-दीपावली पर शालिमार‑थावे विशेष ट्रेन चलाने से बंगाल‑बिहार मार्ग की पीक‑भीड़ को राहत मिली।

छठ-दीपावली के पावन अवसर पर भारतीय रेलवे ने शालिमार‑थावे के बीच विशेष त्योहार ट्रेन चलाने का निर्णय लिया, जिससे बंगाल‑बिहार मार्ग पर बढ़ती यात्रा‑भीड़ को राहत मिल सके। यह पहल 6 नवंबर से 20 नवंबर तक प्रत्येक शुक्रवार शालिमार से प्रस्थान करती है तथा 7 नवंबर से 21 नवंबर तक प्रत्येक शनिवार थावे

से वापस आती है, कुल तीन फेरों में संचालित होगी। यात्रा की अवधि लगभग पाँच घंटे निर्धारित की गई है, जिसमें दो मुख्य क्लास‑सेक्शन – एसी 2‑तियर एवं जनरल कोच – उपलब्ध हैं। इस विशेष सेवा का उद्देश्य तीव्र प्रवास‑पीक को सुगम बनाना तथा यात्रियों को सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा प्रदान करना है।

छठ और दीपावली का महापर्व पूर्वी भारत में विशेष रूप से धूमधाम से मनाया जाता है, जहाँ लाखों श्रद्धालु अपने घर‑परिवार व पवित्र नदियों की ओर प्रवास करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में शालिमार‑थावे धारा को प्रमुख रेलमार्ग के रूप में विकसित किया गया है, परंतु मौसमी प्रवास के दौरान ट्रेनों की

सीमित संख्या और अतिक्रमण की समस्या बनी रही। रेलवे विभाग ने इस संदर्भ में 2023‑24 वित्तीय वर्ष में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर प्रवासियों की संख्या में 40 % तक की वृद्धि पाई। इसी आंकड़े ने विशेष ट्रेन परिचालन को त्वरित करने की आवश्यकता को स्पष्ट किया।

पृष्ठभूमि में भारतीय रेल द्वारा

लागू किए जा रहे ‘आवश्यकता‑आधारित सेवा’ मॉडल का महत्व भी समझा जा सकता है। इस मॉडल के तहत, मांग‑आधारित अतिरिक्त कोच और विशेष ट्रेनें चलाकर भीड़‑भाड़ को कम किया जाता है। शालिमार‑थावे मार्ग पर इस वर्ष 12 लाख यात्रियों की अनुमानित प्रवास‑संख्या को देखते हुए, रेलवे ने विशेष ट्रेन को 08021/08022 क्रमांक दिया और

दो साप्ताहिक प्रस्थान बिंदु निर्धारित किए। इसके अलावा, स्टेशन पर अतिरिक्त लिफ्ट, प्लेटफ़ॉर्म बर्डर सुरक्षा और सफ़ाई व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

पहला फेराबा 6 नवंबर को शालिमार से प्रस्थान करता है, जिसमें कुल 12 कोच – दो एसी 2‑तियर, चार एसी 3‑तियर और छह जनरल कोच – लगे हैं।

ट्रेन ने प्रारंभिक स्टेशन पर भीड़‑भाड़ को नियंत्रित करने हेतु विशेष टिकट विंडो खोली, जहाँ यात्रा‑सुरक्षा और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया भी लागू की गई। यात्रियों ने ट्रेन के समयबद्ध प्रस्थान और सफ़ाई को सराहा, जबकि कुछ ने बुकिंग प्रक्रिया में तकनीकी कठिनाइयों की ओर इशारा किया। ट्रेन ने शालिमार से प्रस्थान कर

लगभग दो घंटे में पटनागढ़ स्टेशन से गुज़री, जहाँ स्थानीय यात्रियों ने भी इस विशेष सेवा को उपयोगी बताया।

दूसरे फेराबा में, 13 नवंबर को, ट्रेन को दो अतिरिक्त जनरल कोच जोड़कर बढ़ाया गया, जिससे कुल क्षमता में 20 % वृद्धि हुई। यह कदम यात्रियों की बढ़ती माँग को देखते हुए उठाया गया।

ट्रेन के संचालन के दौरान, रेल कर्मचारियों ने यात्रा‑दरम्यान सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए सीट व्यवस्था को पुनः व्यवस्थित किया और यात्रियों को मास्क पहनने की सलाह दी। इस फेराबा में, कई श्रद्धालुओं ने बताया कि इस विशेष ट्रेन ने उन्हें दीर्घ दूरी की यात्रा के तनाव से बचाया और घर‑परिवार से

मिलन को सहज बना दिया।

तीसरे और अंतिम फेराबा का प्रस्थान 20 नवंबर को हुआ, जिसमें यात्रा‑समय को 15 मिनट कम कर 4 घंटे 45 मिनट में लक्ष्य पूरा किया गया। इस चरण में रेलवे ने डिजिटल टिकटिंग को प्रमुखता दी, जिससे यात्रियों को टर्मिनल पर लम्बी कतारों से बचाया गया। ट्रेन

के अंत तक, कुल 1,200 यात्रियों ने इस सेवा का उपयोग किया, जिससे रेलवे को इस पहल की सफलता का स्पष्ट संकेत मिला। इस सफल संचालन ने आगे की विशेष ट्रेनों के लिये एक मॉडल स्थापित किया, जिससे अन्य पीक‑सीजन में समान उपाय अपनाने की संभावना बनी।

शालिमार‑थावे विशेष ट्रेन पर रेलवे

अधिकारियों ने इस पहल को ‘लोक-सेवा’ का एक उदाहरण कहा। उत्तराखंड रेल विभाग के निदेशक ने बताया कि इस विशेष ट्रेन के माध्यम से न केवल यात्रियों को सुविधा मिली, बल्कि रेल नेटवर्क की लचीलापन भी सिद्ध हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों के बीच समान विशेष सेवाएँ

प्रदान करने की योजना है। शालिमार रेलवे स्टेशन के प्रमुख ने बताया कि स्टेशन पर अतिरिक्त सुरक्षा दल और मेडिकल किट की व्यवस्था की गई, जिससे यात्रा के दौरान आपातकालीन स्थितियों में त्वरित सहायता मिल सके।

यात्रियों की प्रतिक्रिया सर्वेक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि 85 % यात्रियों ने इस विशेष ट्रेन को

‘समयबद्ध, स्वच्छ और सुरक्षित’ बताया। विशेषकर बुजुर्ग यात्रियों ने ट्रेन की एसी कोच में उपलब्ध आरामदायक सीटों और जलवायु नियंत्रण को सराहा। कुछ यात्रियों ने कहा कि टिकट कीमतों को थोड़ा और कम करने से अधिक लोगों को इस सेवा का लाभ मिल सकेगा। सामाजिक माध्यमों पर भी

Updated: November 5, 2026

The special festival train adds extra capacity on the high‑traffic Shalimar‑Thave corridor, helping to manage the seasonal surge of pilgrims during Chhath and Diwali. Its operation demonstrates the railway’s demand‑responsive service model.

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