बिक्री में पिछले साल की तुलना में 38 % की तेज़ी देखी गई। इस बदलाव ने रिटेल चैनलों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म दोनों में कीमतों को 12 % तक बढ़ा दिया, जो खाद्य उद्योग में नई प्रतिस्पर्धा का संकेत देता है।
पारम्परिक चन्नई की मिठाइयों की जड़ें 19वीं सदी के कर्ज़ी
बाजार तक जाती हैं, जहाँ काजू कटली को अक्सर त्यौहारों में मुख्य मिठाई के रूप में परोसा जाता था। इसी प्रकार, सीयम की चटनी और वड़ा की रेसिपी पीढ़ी‑दर‑पीढ़ी हस्तांतरित होती आई हैं। लेकिन पिछले पाँच वर्षों में, सामाजिक मीडिया और फूड ब्लॉगरों के प्रभाव से युवा उपभोक्ताओं की
पसंद में बदलाव आया, जिससे नई रचनात्मकता को जन्म मिला। इन रुझानों ने बाजार में पुरानी रेसिपी की मांग को घटाते हुए नई पेशकशों को बढ़ावा दिया।
छात्र, स्टार्ट‑अप संस्थापक और फ्रीलांस शेफ़ मिलकर एक नेटवर्क बना रहे हैं, जहाँ वे प्रयोगात्मक रेसिपी को परीक्षण और प्रमोशन के
लिए साझा करते हैं। इस नेटवर्क में प्रमुख भूमिका निभाते हैं चन्नई के प्रमुख कूलिनरी इंस्टिट्यूट के स्नातक, जिन्होंने पारम्परिक तकनीकों को आधुनिक रसायन विज्ञान से जोड़कर ‘साइंस‑बैक्ड वड़ा’ विकसित किया। इसी बीच, एक युवा उद्यमी ने काजू कटली को मूनकेक के रूप में पुनःडिज़ाइन किया, जिसमें भारतीय मसालों
को चीनी‑डिपेंडेंट फ़्लेवर्स के साथ मिलाकर नई बनावट और स्वाद प्राप्त किया।
इन नवाचारों का पहला बड़े पैमाने पर प्रदर्शन चन्नई के प्रमुख शॉपिंग मॉल के ‘फेस्टिव फूड फेयर’ में हुआ, जहाँ 2,500 से अधिक दर्शकों ने इन उत्पादों को चखा। फेयर में प्रस्तुत काजू कटली मूनकेक ने
1,200 % की बिक्री वृद्धि दर्ज की, जबकि पारम्परिक काजू कटली की मांग में 15 % गिरावट आई। इसी दौरान, चिली ऑयल सीयम को 30 % अधिक कीमत पर बेचा गया, जिससे फेयर के कुल राजस्व में लगभग 18 % की वृद्धि हुई।
उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया इस बात की ओर इशारा करती
है कि वे नई बनावट और स्वास्थ्य‑संबंधी लाभों को महत्व दे रहे हैं। कई युवा खरीदारों ने बताया कि चिली ऑयल सीयम का तीखा स्वाद और एंटीऑक्सिडेंट गुण उन्हें स्वस्थ स्नैक विकल्प प्रदान करते हैं। इसी प्रकार, वैज्ञानिक वड़ा को कम तेल में तैयार किया गया, जिससे कैलोरी में
22 % की कमी आई, और यह स्वास्थ्य‑सचेत ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हुआ। इन प्रतिक्रियाओं ने उत्पादन लागत को थोड़ा बढ़ा दिया, परंतु उपभोक्ता तैयारियां अधिक प्रीमियम कीमतें देने को तैयार हैं।
स्थानीय रेस्टोरेंट चेन ने इन रेसिपी को अपनाकर मेन्यू में जोड़ने की घोषणा की, जिससे उनके फेस्टिवल
सीजन की अनुमानित आय में 9 % की वृद्धि की उम्मीद है। इसके अलावा, ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म ने इन नई उत्पादों को विशेष प्री‑ऑर्डर सेक्शन में रखा, जिससे 48 % अधिक ट्रैफ़िक और 35 % अधिक ऑर्डर दर्ज हुए। इस आर्थिक प्रभाव ने छोटे विक्रेताओं को भी डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांडिंग में निवेश
करने के लिए प्रेरित किया, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़े।
उद्योग संघों ने इन प्रवृत्तियों को सकारात्मक बताया, यह कहते हुए कि नवाचार से पारम्परिक खाद्य उद्योग में नई ऊर्जा आ रही है। चन्नई फ़ूड प्रोसेसिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह के प्रयोग आर्थिक
रूप से लाभदायक हैं, क्योंकि वे स्थानीय कच्चे माल की मांग को बढ़ाते हैं और आयातित घटकों पर निर्भरता कम करते हैं। वहीं, राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी नवाचारित उत्पादों को नियामक मानकों के तहत परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ता सुरक्षा
बनी रहे।
विपक्षी पक्षों ने भी इस बदलाव पर प्रश्न उठाए। कुछ पुरातनवादी खाद्य विशेषज्ञों ने कहा कि अत्यधिक प्रयोग से पारम्परिक स्वाद और संस्कृति को नुकसान पहुंच सकता है, और उन्होंने पारम्परिक रेसिपी के संरक्षण की अपील की। वहीं, उपभोक्ता अधिकार समूह ने मूल्य वृद्धि पर आशंका
जताई, यह संकेत देते हुए कि प्रीमियम मूल्य निर्धारण से कम आय वाले वर्ग को बाहर रखा जा सकता है। इन चिंताओं को देखते हुए, कई रिटेलर्स ने वैकल्पिक मूल्य बिंदु प्रदान करने की योजना बनाई है।
Updated: November 5, 2026
The surge in scientifically‑styled festive foods drove a 38 % sales rise and lifted retail and online prices by up to 12 %, signaling shifting consumer preferences.
These innovations are prompting broader market competition, higher demand for local ingredients and new employment opportunities in Chennai’s food sector.
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